ऊंचाहार (रायबरेली)। लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर 23 गोवंशों से लदा एक डीसीएम मिला। डीसीएम दो दिनों से सड़क किनारे तिरपाल से ढका खड़ा था। दम घुटने से 21 गाेवंशों की मौत हो गई। राहगीरों ने वाहन के नीचे खून बहता देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मृत गोवंशों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर दफन करा दिया है।
मंगलवार सुबह हाईवे पर सवैया हसन गांव के पास सड़क किनारे एक डीसीएम खड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो डीसीएम दो दिन से खड़ा था। डीसीएम तिरपाल से ढका था। सोमवार सुबह जब उससे खून बहा तो लोगों को शक हुआ। सूचना पुलिस को दी गई। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और तिरपाल खोलकर देखा तो उसमें दो गोवंश जिंदा व 21 मृत मिले। पुलिस ने जिंदा दो गोवंशों को पूरे ननकू मजरे पट्टी रहस कैथवल गांव स्थित कान्हा गौशाला भेज दिया। शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद गड्ढे में दफन करा दिया है।
सीओ अरुण कुमार नौहवार ने बताया कि सुबह लावारिस डीसीएम खड़े होने व उससे दुर्गंध आने की सूचना मिली थी। जिंदा व मृत गोवंश मिले हैं। मामले में डीसीएम चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
गोवंशों की हो रही तस्करी
स्थानीय पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो दिन से डीसीएम लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ी रही। लेकिन किसी ने डीसीएम की छानबीन करना जरूरी नहीं समझा। प्रतिदिन गोवंशों से लदे वाहन राजमार्ग से निकलते हैं, लेकिन पुलिस को भनक नहीं लगती है। स्थानीय लोगों की माने तो पुलिस की सरपरस्ती में क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गोवंशों की तस्करी की जा रही है।
दम घुटने से हुई मौत
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय बरनवाल ने बताया कि डीसीएम में 10 गाए व 13 बछड़े थे। पशुओं को डीसीएम में निर्दयतापूर्वक लादा गया था। दम घुटने से गोवंशों की मौत हुई है। शवों को नियमानुसार दफना दिया गया है।