रायबरेली। ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों की नौकरी जन सुविधा केंद्र (सीएससी) संचालकों के कारनामों पर टिकी है। जिले में 200 से अधिक पंचायत सचिवों ने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड किसी न किसी सीएससी संचालक को दे रखा है।
कर्मचारियों के विश्वास को ठेंगा दिखाकर सीएससी संचालक आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं। सलोन का मामला उजागर होने के बाद सभी ब्लॉकों में इस तरह के फर्जीवाड़े से इंकार नहीं किया जा सकता है। फर्जीवाड़े के बाद पंचायत सचिव अपनी आईडी के पासवर्ड बदलने में जुट गए हैं।
शासन से वर्ष 2020 से ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऑनलाइन जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था कर दी है। संबंधित पंचायत सचिवों को इसके लिए आईडी और पासवर्ड दिए गए हैं। पंचायत सचिवों को ही जांच कर जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी दी गई है। अमूमन काम अधिक होने के कारण पंचायत सचिव किसी ने किसी जन सुविधा केंद्र को अपनी आईडी और पासवर्ड दे रखे हैं।
ज्यादातर सीएससी संचालक पंचायत सचिवों के निर्देश पर आईडी और पासवर्ड को प्रयोग करते हैं, लेकिन सलोन का मामला उजागर होने के बाद सभी सीएससी संचालकों पर शक की सुई घूम गई है। आशंका यहां तक है कि पूरे जिले में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाए तो सलोन जैसे कई और फर्जीवाड़े उजागर हो सकते हैं।
980 गांवों में जारी प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट तलब
डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने सभी पंचायत सचिवों को 980 गांवों में जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच 15 दिन में करते रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के आदेश दिए हैं। सभी पंचायत सचिवों को अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड स्वयं यूज करने के निर्देश भी दिए हैं, क्योंकि किसी भी गड़बड़ी के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
इनसेट
सभी पंचायत सचिवों को अपने गांवों में अब तक जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। 15 दिन में सभी 980 ग्राम पंचायतों से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी।
- सौम्य शील सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी