रायबरेली। जिले से निकल रहे गंगा एक्सप्रेस-वे की जद में आने के बाद बेघर हुए 159 लोगों को सरकार से बड़ी राहत मिल गई है। आबादी, बंजर, तालाब व अन्य सरकारी जमीन पर घर बनवाकर गुजर-बसर करने वाले लोगों की आशियाने का संकट दूर हो गया है। तमाम लोग एक्सप्रेसवे से प्रभावित हुए हैं, जिनके पास घर बनवाने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं हैं। लेकिन अब मंडलायुक्त की संस्तुति के बाद बेघर लोगों को 11.43 करोड़ रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। संस्तुति के बाद संबंधित चारों तहसीलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मेरठ से प्रयागराज के बीच 596 किलोमीटर सफर को सुहाना करने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे का काम चल रहा है। किसानों से करीब 3300 बीघे जमीन खरीद कर जिला प्रशासन ने यूपीडा को उपलब्ध करा दिया है। एक्सप्रेस-वे की जद में तमाम ऐसे लोगों के आशियाने भी आ गए, जो सरकारी जमीन पर बने हैं। ऐसे लोगों को जमीन का मुआवजा नहीं मिल सकता है। मुआवजा न मिलने से लालगंज, डलमऊ, ऊंचाहार और सलोन तहसील क्षेत्र के 159 लोगों के सामने आशियाने का संकट आ गया था। जगतपुर ब्लॉक का पूरे जुगराज गांव पूरी तरह से एक्सप्रेसवे की जद में आ गया।
डीएम माला श्रीवास्तव ने बेघर हो रहे लोगों को आशियाने की व्यवस्था के लिए शासन ने अनुरोध किया। शासन स्तर पर प्रस्ताव को पास कर दिया गया। मंडलायुक्त के स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद बेघर हुए 159 लोगों को 11.43 करोड़ रुपये भुगतान के आदेश दिए गए हैं। बेघर लोगों को जमीन का मुआवजा नहीं मिलेगा, जबकि जमीन पर कराए गए निर्माण के संबंध में उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। मंडलायुक्त की संस्तुति के बाद संबंधित लोगों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चारों तहसीलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
अमर उजाला ने बीती 29 मई को बेघर लोगों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए पूरा गांव बेघर, मुआवजा मिला न आशियाना शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद ऊंचाहार सहित अन्य तहसीलों के साथ ही जिला प्रशासन भी मामले में गंभीर हो गया। जगतपुर क्षेत्र के ओम नगर, पूरे जुगराज, पूरे कुर्मिन, रामगढ़ टिकरिया, चिचौली, बेहीखोर, तेरुखा, सुल्तानपुर जनौली सहित करीब 40 गांवों के बेघर लोगों को आशियाना बनाने के लिए मुआवजा मिलेगा।