महज 20 रुपये के लिए सैलून मालिकों ने नाबालिग बेटे के सामने कर दी पीट-पीटकर पिता की हत्या
नई दिल्लीः उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में महज 20 रुपये के लिए सैलून चलाने वाले दो भाईयों ने एक शख्स की उसके नाबालिग बेटे के सामने ही पीट-पीटकर हत्या कर दी। नाबालिग पिता को छुड़ाने के लिए आरोपियों से उलझता रहा। उसका बस नहीं चला तो वह चाचा को बुला लिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घायल रुपेश कुमार (38) को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी भाई संतोष और सरोज को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बुराड़ी थाना पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
पुलिस के मुताबिक मूलरूप से बिहार का रहने वाला रुपेश 15 साल पहले दिल्ली के संत नगर बुराड़ी में आया था। इसके परिवार में पत्नी हेमलता, बेटा रोहित (13), ओम (10), कृष्णा (8) और छह माह की बेटी लक्ष्मी व छोटा भाई मुकेश है। रुपेश इलाके में सब्जी बेचने का काम करता था। बृहस्पतिवार शाम के समय रुपेश पास में संतोष और सरोज के सैलून में बाल कटिंग के लिए गया था। बाल कटवाने के बाद संतोष ने 50 रुपये मांगे तो रुपेश ने उसे 30 रुपये देकर बाकी रुपये शुक्रवार को देने के लिए कहा। इस बात पर संतोष और सरोज नाराज हो गए। उन्होंने फौरन रुपेश से रुपये देने के लिए कहा। 20 रुपये के लिए रुपेश की दोनों भाईयों से तू-तू-मैं-मैं होने लगी। इस दौरान आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया।
पहले लात घूंसों से उसे पीटा गया। बाद में दुकान में रखे प्लास्टिक के पाइप से रुपेश को बुरी तरह पीटा गया। इस बीच वहां से गुजर रहे रुपेश के बेटे रोहित ने पिता को पिटते देखा तो वह दोनों भाईयों से अपने पिता को छुड़ाने का प्रयास करने लगा, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया। आरोपी उसे लगातार पीटते रहे। इस बीच रोहित पिता को बचाने के लिए भागकर चाचा मुकेश के पास गया। जब तक मुकेश वहां पहुंचा तब तक रुपेश अचेत हो चुका था। उसे नजदीकी बाबू जग जीवन राम अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने मुकेश के बयान पर हत्या का मामला दर्ज कर शुक्रवार को ही संतोष और सरोज को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया।
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(शुजात आलम)