दंगा आरोपी को जज ने शायराना अंदाज में दी जमानत
नई दिल्ली।
उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में न्यायाधीश ने शायराना अंदाज आरोपी को जमानत प्रदान की। न्यायाधीश ने जमानत देते हुए कहा, जिस ंिपंजरो हो तुम बंद उससे आजादी ले लो, ट्रायल समाप्त होने तक राज्य का शासन रहने दो।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे जुड़े गोली मारने के एक मामले के गिरफ्तार आरोपी बाबू को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत देने पर राहत प्रदान की। आरोपी को जमानत देते हुए न्यायाधीश ने शायराना अंदाज में कुछ पंक्तियां बोलीं और अभियोजन की दलीलों को दरकिनार कर दिया।
कोर्ट ने कहा गोली लगने से घायल पीड़ित ने अपनी मेडिकल लीगल रिकाॅर्ड में अपना पता गलत दर्ज करवाया और इससे पहले कि पुलिस उसका बयान लेती वह फरार हो गया था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी बाबू का पुराना अपराधिक रिकाॅर्ड है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वहीं रिकाॅर्ड आखिर तक रहेगा। बाबू को 24 फरवरी को मौजपुर-जाफराबाद इलाके में दंगे के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में चश्मदीद दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल सतीश है, जो उस वक्त मौजपुर रेड लाइट पर तैनात था। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों पर संशय जताते हुए यह निर्णय लिया।
कोर्ट ने शायराना आदेश देते हुए कहा, बाबू प्लीडिंग फोर हिज बेल, स्टेट ओपोसिंग टूथ एंड नेल। समर्स बायगोन, विंटर हैव अराइव्ड, बट क्राइम यू डिड एंड राहुल क्राइड। आई एम नाॅट वन, आई एम नाॅट वन, टू ग्रेव दी चार्ज, डोंट प्रटेंड। हूम डिड आई अटैक, व्हेयर इज ही, ओह! दैड वी नो, इन दी ट्रायल वी सी। इसके अलावा भी न्यायधीश ने कुछ अन्य पंक्तियां बोलते हुए पूरा आॅर्डर शायराना अंदाज में लिखा।
इस बीच आरोपी के वकील ने यह भी दलील दी थी कि मामले में बाबू का सह आरोपी इमरान को भी पहले ही जमानत मिल चुकी है। वकील ने दावा कि उनके मुवक्किल को झूठे आरोप में फंसाया जा रहा है।
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अरुण कुमार