उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामला-
अगर आरोपियों को नहीं मिली मूलभूत चीजें तो स्वयं करेंगे जेलों का निरीक्षण
नई दिल्ली।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में आरोपियों की शिकायत पर तिहाड़ जेल प्रशासन को फटकार लगाई। आरोपियों ने शिकायत में कहा कि जेल नियमों के तहत उन्हें जो बुनियादें चीजें मिलनी चाहिए, वे उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अगर चीजें ठीक नहीं हुईं तो वह जेल का खुद मुआयना करेंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर के लिए सूचिबद्ध की गई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में दिल्ली जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह मामले के संबंधित सभी 15 आरोपियों की शिकायतों को देखें और मंडोली व तिहाड़ जेलों में स्थिति का निरीक्षण करने के लिए किसी अधिकारी को निर्देश दें। दंगे के संबंध में इन सभी आरोपियों को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है।
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जेल महानिदेशक से कहा कि आरोपियों की ओर से मिल रही शिकायतों का निवारण होना चाहिए और जेल में ऐसी स्थिति समाप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही न्यायाधीश ने कहा कि यदि चीजें नहीं सुधरती हैं और उन्हें फिर से ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो वह स्वयं जेल की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि इस निरीक्षण के दौरान वकील भी उनके साथ चल सकते हैं।
मामले से जुड़े 15 में से 7 आरोपियों ने कोर्ट से कहा कि उन्हें गरम कपड़े नहीं दिए गए हैं जबकि जेल नियमों के तहत इसकी अनुमति है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जरूरत की चीजें मांगने पर जेल अधिकारियों ने उनसे कहा कि इसके लिए उन्हें अदालत के आदेश की जरूरत है। इस बारे में पता लगने पर न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी समझ में नहीं आ रहा कि आरोपियों को इस तरह की मूलभूत चीजों के लिए हर बार अदालत से संपर्क क्यों करना पड़ता है। उन्होंने जिक्र किया कि ऐसा लगता है कि आरोपियों को जेल में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अगर इन समस्याओं को जल्द समाधान नहीं किया तो कोर्ट इस मामले में कार्रवाई भी कर सकती है।
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अरुण कुमार