पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा दिल्ली में तांगों पर प्रतिबंध के नियम का सख्ती से हो रहा पालन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
घोड़ों, खच्चरों और गधों में ग्लैंडर बीमारी की संभावना और तांगों में जानवरों पर हत्याचार को लेकर पेटा की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। पुलिस ने पीठ को बताया कि दिल्ली में तांगे कभी कभी किसी इलाके में दिखाई दते हैं और जहां तांगों से यातायात प्रभावित होता है तो पुलिस उनपर तभी कार्रवाई करती है। पीठ इस याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी 2021 को करेगी।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की पीठ के समक्ष दिल्ली पुलिस ने हलफनामा दायर करके कहा कि राजधानी दिल्ली की सड़कों पर घोड़ा तांगे पर वर्ष 2010 में लगाए प्रतिबंध के आदेश का पालन किया जा रहा है। दिल्ली में अब शायद ही किसी क्षेत्र में घोड़ा तांगे चलते दिखते हैं। अगर किसी क्षेत्र में घोड़ा तांगे चलने की वजह से यातायात प्रभावित होता दिखता है तो तांगे के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और उसे नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता है।
पुलिस ने कहा कि इस संबंध में निगमों की तरफ से मिलने वाली शिकायतों के आधार पर भी घोड़ा तांगो पर कार्रवाई के लिए पुलिस का पूरा सहयोग दिया जाता है। इस मामले में साउथ दिल्ली नगर निगम ने भी हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करके बताया कि अवैध तरीके से चलने वाले तांगों के खिलाफ वेटनरी विभाग नियमित रूप से कार्रवाई करता है। एसडीएमसी ने कहा कि उसकी ओर से मात्र 135 बग्गियों को चलाने के लिए लाइसेंस दिया गया है और इन्हें में शादी में प्रयोग होने वाली बग्गियां भी शामिल हैं।
यह याचिका पीपल फोर दी एथिकल ट्ीटमेंट आॅफ एनिमल्स (पेटा) की ओर से दायर की गई है। याचिका में पेटा का दावा है कि दिल्ली में घोड़ों, खच्चरों, गधों और टट्टूओं में ग्लैंडर्स बीमारी के संक्रमण को रोकने और उसके नियंत्रण के लिए बने एनिमल एक्ट 2009 और राष्ट्ीस नियंत्रण एवं उन्मूलन की कार्य योजना का पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि इस संबंध में दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जांए कि सरकार दिल्ली में पाले जा रहे सभी घोड़ों, खच्चरों, गधों और टट्टूओं में ग्लैंडर्स की जांच करे। याचिका में कहा गया कि यह बीमारी इन जानवरों से इंसानों में भी फैल सकती है। इसके साथ ही याचिका में कहा गया था कि दिल्ली में तांगा प्रतिबंध लागू के बावजूद इस नियम का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है।
-------
अरुण कुमार