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तीसरे सीरो सर्वे मेंं चार फीसदी की गिरावट, 25 फीसदी में मिली एंटीबॉडी

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तीसरे सीरो सर्वे मेंं चार फीसदी की गिरावट, 25 फीसदी में मिली एंटीबॉडी  नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी में कोरोना की स्थिति का पता लगाने के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में सीरोलॉजिकल (सीरो) सर्वे के तीसरे चरण की शुरुआत की थी। सरकार ने इस सर्वे की रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंप दी है। इसके मुताबिक, 25 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी मिली है। यह अगस्त में किए गए सर्वे के मुकाबले 4 फ़ीसदी कम है। विशेषज्ञों द्वारा उम्मीद जताई जा रही थी कि इस सर्वे में  करीब 35 फ़ीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं  हुआ।  स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सर्वे मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर किया गया था।  सर्वे में 17409 लोगों के सैंपल लिए गए थे।  सभी सैंपल वार्ड स्तर पर लिए गए थे।इसमें 50 % सैंपल 18 से 50 साल की उम्र के लोगों के और बाकी 50 साल  से उम्र से ज्यादा के लोगों के थे । इसमें उन्हीं  नियमों का का पालन गया था ,जो  नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की तरफ से किए गए सर्वे में किया गया था। रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है कि इस सर्वे में  उत्तर पूर्वी, पूर्वी और मध्य जिले  के लोगों में एंटीबॉडी का स्तर पहले के मुकाबले घटा है ।वहीं, दक्षिणी पश्चिमी दिल्ली के लोगों में यह स्तर बढ़ा है। इससे पहले एक से पांच अगस्त के बीच  दूसरा सीरो सर्वे किया गया था,जिसमें राजधानी के करीब 29 प्रतिशत लोग कोविड-19 से प्रभावित मिले थे। यानी,एक चौथाई लोगों में एंटीबॉडी विकसित होने की बात सामने आई थी। इसका मतलब था कि वे संक्रमित हुए और ठीक हो गए। जिन लोगों के नमूने लिए गए थे, उनमें से अधिकतर लोगों को नहीं पता था कि वे संक्रमित थे।  -- महिलाओं में मिली अधिक एंटीबॉडी पहले किए गए दोनों सर्वे की तरह इसमें भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा एंटीबॉडी मिली है। --  कम एंटीबॉडी मिलने का यह हो सकता है सीरो सर्वे के परिणामों पर विशेषज्ञों का कहना है कि इस सर्वे में कम लोगों में एंटीबॉडी मिलने का एक कारण यह हो सकता है कि जिन लोगों के सैंपल लिए गए हैं। उनमें से कुछ लोगों में एंटीबॉडी का स्तर खत्म हो गया हो। हालांकि, एंटीबॉडी खत्म होने का यह मतलब नहीं है कि वह व्यक्ति दोबारा  संक्रमित हो जाएगा -- अभिषेक पांचाल
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