नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बैंकों के शुल्क लेने की निंदा व्यापारिक संगठनों की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ( सीटीआई) ने इसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में एक जनवरी के बाद से जो भी डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए हैं और उनमें जो भी शुल्क लगाए गए उसे वापस करने की मांग की गई है।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया की कोरोना के बाद नकदी लेनदेन से संक्रमण की आशंका बढ़ गई थी। क्योंकि नोट कई हाथों से गुजरते हैं और इसी कारण से लाखों लोगों ने डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन शुरू किया था।
अब यह देखा जा रहा है कि बैंक लोगों से अपने अपने हिसाब से शुल्क वसूल रहे हैं। आईटी एक्ट की धारा 269 एसयू के हिसाब से भी इस तरह का शुल्क नहीं वसूला जा सकता, पूरे देश में नोटबंदी के बाद से ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की डिमांड बढ़ी है, नोटबंदी के बाद से कई कंपनियों ने मोबाइल ऐप तक लांच किए हैं क्योंकि यह आसान और सुरक्षित होता है।
सीटीआई अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि कई बैंक यूपीआई के तहत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में शुल्क वसूल रहे हैं। जो भी बैंक ऐसा करें उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि इस मोड से व्यापारी काफी भुगतान कर रहे है। रोजाना की ट्रांजेक्शन लिमिट भी बढ़ाई की मांग की।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टेक्सेस (सीबीडीटी) की तरफ से एक सर्कुलर भी जारी हुआ है जिसमें किसी भी बैंक में डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट ( एमडीआर) को वापस करने की बात कही गई है। सीबीडीटी ने यह भी कहा है कि बैंक भविष्य में होने वाले इस तरह के किसी ट्रांजैक्शन पर भी शुल्क नहीं वसूलें।