अवध किशोर श्रीवास्तव
फरीदाबाद।
तन से वे जरूर दिव्यांग हैं लेकिन मन मजबूत और दृढ़ संकल्पित। अपनी हिम्मत, हौसले और जुनून के बूते आज वे अपना परिवार और शहर का नाम देश-दुनिया में रोशन कर रहे हैं। जो ठान लिया, उसके करके ही माने। उसके लिए सिर्फ दिल से कड़ी मेहनत करने की जरुरत है, आपको एक ना एक दिन सफलता जरूर मिल जाएगी। बस आपको लगातार कड़ी मेहनत करनी है और अपने हौंसले को बरकरार रखना है। यह कहना है ग्रीन फिल्ड के 26 वर्षीय प्रणव सूरमा का।
वर्ष 2011 में एक हादसे में दोनों हाथ और पैर से दिव्यांग हो गए। इसके बावजूद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमकॉम की पढ़ाई खत्म करने के बाद एथलेटिक (डिस्कस थ्रो और क्लब थ्रो) को अपने करियर के रुप में चुना। वर्ष 2018 में पहली बार नाहर सिंह स्टेडियम के एथलेटिक मैदान में व्हील चेयर के माध्यम से अभ्यास शुरू किया। हौसले इतने बुलंद थे कि पहले ही वर्ष (2018) उन्होंने डिस्कस थ्रो के राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कास्य पदक झटक लिया। इसके बाद वर्ष 2019 में चीन में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक में रजत पदक झटका। वर्ष 2020 में कोविड के कारण कोई प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हुई। वर्ष 2021 में बेंगलूरु में राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें भी उन्होंने रजत पदक झटका। बताते है कि कोविड के संक्रमण से बचने के लिए वह मैदान में अभ्यास के लिए सेक्टर 12 खेल परिसर में नहीं जा रहें है। लेकिन घर के पास ही स्थित पार्क में अभ्यास करते रहते है। जिससे की शरीरिक रुप से अपने को फीट रखा जा सकें।
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मिल चुका है मिस्टर व्हील चेयर इंडिया का खिताब व्हील चेयर के माध्यम से उन्होंने मॉडलिंग का भी शौक पूरा कर चुके है। उन्होंने वर्ष 2017 में मिस्ट व्हील चेयर इंडिया का खिताब जीत चुके है। इसमें देश विदेश से करीब सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से उन्हें बेहतर चुना गया था। बताते है कि घर पर ही जिम का सभी समान रखे हुए। रोजाना सुबह शाम जिम में समय व्यायाम करते है।
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परिवार का मिला सहयोग
बताते है कि अभ्यास के दौरान अपने परिजनों के साथ सेक्टर 12 खेल परिसर जाता हूं। इस दौरान मेंरे परिजन गोदी में उठाकर मुझे गाड़ी और व्हील चेयर पर बैठाते है। उनका कहना है कि मैं मोटर वाला व्हील चेयर प्रयोग नहीं करता क्यूकि हाथ वाले व्हील चेयर चलाने से मेरे हाथ का भी थोड़ा बहुत व्याम होते रहता है।
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लॉक डाउन के कारण प्रणव को अभ्यास में थोड़ी दिक्कत आ रही है। अगर सबकुछ ठीक रहता तो वह अपने दिव्यांग्ता के श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन करता। अभीतक उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुका है।
गिरीराज, खेल विभाग के उपनिदेशक
अवध