अवध किशोर श्रीवास्तव
फरीदाबाद। कोरोना वैश्विक महामारी के कारण जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे सबसे अधिक परेशानी जूनियर, सब जूनियर और सिनियर आयुवर्ग में प्रवेश करने वाले खिलाड़ियों को हो गई है। कोरोना काल में कुछ खिलाड़ी सब जूनियर वर्ग से जूनियर वर्ग और जूनियर वर्ग के सिनियर आयुवर्ग में चले गए है। इससे उन्हें अपने से अधिक आयुवर्ग के साथ प्रतियोगिताओं में बेहतर रिजल्ट देना किसी चुनौती से कम नहीं है। वहीं, कोरोना काल के दौरान इन खिलाड़ियों का अभ्यास भी पूरी तरह ठप हो गया है। प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं होने से उन्हें खेल में बेहतर प्रदर्शन करने का पत्र भी नहीं मिल पाया है। कोरोना काल में खेल प्रतिविधियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। मालूम हो कि सब जूनियर आयुवर्ग में 14 वर्ष तक के खिलाड़ी खेलते है। जबकि जूनियर वर्ग में 15 से 17 आयुवर्ग के और वरिष्ठ आयुवर्ग में 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के खिलाड़ियों का ग्रुप होता है। खेल विभाग में तैनात एक कोच का कहना है कि लॉक डाउन के दौरान कुछ युवा खिलाड़ियों को बगैर अभ्यास के अपने से अधिक आयुवर्ग के खिलाड़ियों से बेहतर प्रर्दशन करना किसी चुनौती से कम नहीं है। लॉक डाउन के दौरान खिलाड़ियों की आयु तो बढ़ गई है। इससे कुछ खिलाड़ी सब जूनियर वर्ग से जूनियर वर्ग में चले गए।
खेल इंडिया में 18 वर्ष तक के खिलाड़ी ले सकते है हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष खेलो इंडिया का आयोजन कराया जाता है, इसमें अधिक्तम 18 आयुवर्ग तक के ही खिलाड़ी हिस्सा ले सकते है। बताया जा रहा है कि जिले से कई ऐसे खिलाड़ी है जिनका खेलों इंडिया के टीम में चयन हुआ है। बताया जा रहा है कि कोरोना के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है। प्रतियोगिता के लिए जब नई तारीख की घोषणा होगी, उस समय कई खिलाड़ियों की आयु 18 वर्ष से ऊपर हो सकती है। इसे लेकर कुछ खिलाड़ी चिंतित है।
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खेल परिसर में अभ्यास पर पूरी तरह प्रतिबंध है। ऐसे में जो बेहतरीन खिलाड़ी है, उन्हें अपने प्रदर्शन का रिकार्ड मेंटेन करने में थोड़ा दिक्कत होती है। उनका भी मानना है कि खेल प्रतियोगिताओं के प्रतिबंध से कुछ खिलाड़ियों के आयुवर्ग को लेकर दिक्कत हो रही है। जगवीर सिंह, जिला खेल अधिकारी
------------क्या कहते है खिलाड़ी
कोरोना के कारण खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में है। खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पा रहें है। वहीं कुछ खिलाड़ी जूनियर आयुवर्ग से सिनियर आयुवर्ग में चले गए है। पिछले दो वर्षों से एक भी प्रतियोगिताएं नहीं हुई है। ऐसे में उन्हें आगे होने वाली प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सुमित कुमार, खिलाड़ी
किसी भी प्रतियोगिता के प्रमाण पत्र का महत्व सिर्फ दो वर्ष तक रहता है। पिछले दो वर्ष से कोई भी प्रतियोगिताएं नहीं हुई है। ऐसे में कोई भी बेहतरीन खिलाड़ी न तो कॉलेज में दाखिले और नहीं नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। इसके साथ ही कुछ खिलाड़ियों का आयु बढ़ जाने से वह न तो सब जूनियर वर्ग में रहा और न ही जूनियर। भूषण कुमार, खिलाड़ी -------
अवध
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