ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यूरोपीय संघ पर दोहरेपन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान को लेकर मानवाधिकारों की जो चिंताएं ईयू जताता है, वे देश पर होने वाले सैन्य हमलों के लिए ईयू के समर्थन (जैसा कि उन्होंने बताया) के साथ मेल नहीं खातीं। बघाई ने एक्स पर एक पोस्ट में ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास की उन टिप्पणियों का जवाब दिया, जिनमें उन्होंने ईरान को लेकर ईयू की मानवाधिकार चिंताओं का जिक्र किया था।
.@Kajakallas speaks of the European Union’s “human rights concerns” regarding Iran. How can a professed commitment to human rights be so easily reconciled with providing logistical and technical support for lethal aggressions against the Iranian people — aggressions that…
— Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) July 25, 2026
सऊदी सेना ने घोषणा की है कि उन्होंने यमन में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। यमन के अंसार अल्लाह समूह, जिसे आमतौर पर हूती कहा जाता है, के अनुसार सऊदी अरब ने कमरान द्वीप और टेलीकम्युनिकेशन सेंटरों की सुविधाओं को निशाना बनाया; ये सभी घटनाएं होदेइदाह प्रांत में हुईं। कमरान द्वीप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है और जहां सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया है। इसी कारण से, होदेइदाह प्रांत में - जहां यह द्वीप स्थित है - किसी भी तनाव का समुद्री यातायात पर असर पड़ता है। सऊदी अरब ने पहले भी होदेइदाह प्रांत में हमले किए हैं, हालांकि उसका कहना है कि बंदरगाह को निशाना नहीं बनाया गया है और वह खुला और पूरी तरह से चालू है।
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के टायर जिले के मशा अल-मंसूरी इलाके में एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज टायर शहर और आसपास के गांवों तक सुनाई दी। एएनए ने बताया कि यह धमाका इस्राइली सेना द्वारा किया गया था। एक अन्य घटना में, एनएनए ने बताया कि इस्राइली सेना ने मजदेल जौन गांव में लेबनानी सेना की चौकी के पास स्वचालित हथियारों से तलाशी अभियान चलाया।
हाल ही में ईरान की समुद्री सीमा में घुसते समय मोजाम्बिक के झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ, जिसमें 28 भारतीय नागरिक सवार थे। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने बताया, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की समुद्री सीमा में प्रवेश करते समय जहाज पर दुश्मन ने हमला किया। घटना के तुरंत बाद, जहाज ने ईरानी कोस्ट गार्ड को मदद के लिए संदेश भेजा। इसके जवाब में, ईरान के संबंधित समुद्री और बचाव अधिकारियों को बिना किसी देरी के घटनास्थल पर भेजा गया और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। ईरानी अधिकारियों की तेज, समन्वित और बेहद पेशेवर कार्रवाई के कारण, जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्यों - जिनमें 28 भारतीय नागरिक भी शामिल थे - को सुरक्षित बचा लिया गया और वे सभी स्वस्थ हैं। यह ऑपरेशन एक बार फिर दिखाता है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान सभी नाविकों की जान और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता को बार-बार दोहराया है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग, आपसी विश्वास, साझा जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर बनाए रखी जानी चाहिए। अनुभव ने बार-बार दिखाया है कि क्षेत्र के बाहर की सैन्य ताकतों की मौजूदगी और दखल से क्षेत्र में सुरक्षा नहीं बढ़ी है; बल्कि, इससे तनाव और अस्थिरता बढ़ी है। ईरान इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में व्यावसायिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी पेशेवर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहेगा'।
वेस्ट बैंक के कई इलाकों में इस्राइली सेना की छापेमारी और सेटलर्स की हिंसा का नया दौर चला। इसमें बेथलहम और नाब्लस में गोलीबारी से एक फलस्तीनी किशोर और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति घायल हो गए। इस्राइली सेना ने जेरिको के दक्षिण में अकबत जाबर कैंप, कालकिल्या शहर, रामल्ला जिले के कोबार गांव और यरूशलेम के उत्तर में काफ्र अकब कस्बे में छापेमारी की। सैनिकों ने जेनिन गवर्नरेट में जबाबदेह और बुरकिन गांवों के साथ-साथ याबाद कस्बे में भी धावा बोला, जबकि एक और छापेमारी तुलकारम के दक्षिण में फारौन गांव को निशाना बनाकर की गई।
नाब्लस में, सेना की टुकड़ियां ताल और कर्यूत गांवों के साथ-साथ बेत फुरिक कस्बे में भी दाखिल हुईं। उन्होंने ताल में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने का अभियान चलाया और बेत फुरिक में कई घरों की तलाशी ली। इन छापों के दौरान, सैनिकों ने कर्यूत में फलस्तीनी घरों पर आंसू गैस के गोले दागे, जबकि सेटलर्स ने नाब्लस के दक्षिण में उरीफ गांव के घरों पर हमला किया।
सऊदी सिविल डिफेंस निदेशालय ने यानबू प्रांत में संभावित खतरे के बारे में एक और अलर्ट जारी किया था, निदेशालय ने लोगों को शांत रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। इसके बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक नए पोस्ट में कहा है कि यानबू प्रांत में अब खतरा टल गया है। यह आज रात तीसरी बार था जब निदेशालय ने यानबू के लिए संक्षिप्त चेतावनी जारी की।
Alert: The danger has passed in Yanbu Governorate. For your safety, continue following #CivilDefense instructions and avoid gathering and filming. In case of emergency, call (911). pic.twitter.com/3V9sAG3Fyn
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) July 25, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार है, लेकिन साथ ही जोर दिया कि उनका प्रशासन बातचीत में भी लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देता है, तो कूटनीति ही उनकी पसंद का विकल्प बनी रहेगी। व्हाइट हाउस में नागरिक परमाणु ऊर्जा पर आयोजित एक कार्यक्रम में, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सैन्य अभियानों को तेज करने के लिए तैयार है, साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान किसी समझौते पर पहुंचने को लेकर ज्यादा गंभीर हो रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि दो संभावित रास्ते हैं। उन्होंने कहा, 'एक सैन्य रास्ता है जिसमें हम वैसे ही आगे बढ़ते रहें जैसे अभी कर रहे हैं, और हम इसे और भी सख्त बना सकते हैं'। या फिर एक बेहतर रणनीति है कि आप कोई समझौता करें और वे भी समझौता करना चाहें। मुझे बस नहीं लगता कि वे अभी इसके लिए तैयार हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ बैठक के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा हालात के लिए अमेरिका के 'वादा तोड़ने और अपराधों' को जिम्मेदार ठहराया। मंत्रियों ने शुक्रवार को किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान बातचीत की। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इस्राइल की 'सैन्य आक्रामकता की कड़ी निंदा करने वाले रूस के सैद्धांतिक रुख' का स्वागत किया।
एजेंसी ने कहा कि अराघची ने 'कूटनीति के क्षेत्र में ईरान की गंभीरता' और 'अपने हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने तथा अमेरिका को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के मकसद से होर्मुज जलडमरूमध्य का गलत इस्तेमाल करने से रोकने के पक्के इरादे' पर जोर दिया। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि लावरोव ने 'क्षेत्रीय देशों पर आधारित सुरक्षा तंत्र' बनाने में 'किसी भी तरह की मदद देने के लिए रूस की तत्परता' जाहिर की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरानी पक्ष अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है और वह उनकी बात सुनने को तैयार हैं। वॉशिंगटन डीसी में सालाना 'कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर' के दौरान ट्रंप ने कहा, 'वे अभी हमसे बात कर रहे हैं; वे डील करना चाहते हैं। मुझे नहीं लगता कि वे इसके लिए तैयार हैं। मुझे नहीं लगता कि अभी सही समय है, लेकिन मैं उनकी बात सुनने को तैयार हूं, हालांकि उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते'।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरानी सेना को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। उन्होंने दावा किया, 'हमने वहां ईरान पर जबरदस्त प्रहार किया है'। उन्होंने कहा कि 'उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है' और 'उनकी वायु सेना भी खत्म हो गई है'। उन्होंने खास तौर पर जिक्र किया कि 'अब 250 जेट नहीं रहे' और '159 नावें' समुद्र की तलहटी में समा चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'उनके पास कोई रडार नहीं है, उनके पास बहुत कम ड्रोन बचे हैं। भले ही कभी-कभार आपको कुछ चीजें दिखें या वे कुछ चीजें तैयार करने की कोशिश करें, लेकिन असल में उनके पास ज्यादा कुछ नहीं बचा है'। उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, 'असल बात यह है कि हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे'। साथ ही ट्रंप चेतावनी दी कि 'वे इसका इस्तेमाल करेंगे। अगर उनके पास यह हथियार होता, तो वे निश्चित रूप से इसका इस्तेमाल करते'।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के सामने न झुकने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने अमेरिका के साथ अक्सर मतभेद रखने वाली दो वैश्विक शक्तियों - चीन और रूस - के साथ चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, ईरान अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, इस्लामी गणराज्य 'न तो धमकियों से डरता है और न ही दबाव के आगे झुकेगा।'
अमेरिकी सेना की तरफ से लगातार 13वें दिन हुई बमबारी का जवाब देते हुए ईरान की सेना ने भी पलटवार किया। ईरान ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी के आसपास अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस इलाके में ईरान के हमलों से तिलमिलाए क्षेत्रीय मुल्क भी आक्राम रुख दिखा रहे हैं। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर होदेइदाह पर हमला किया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने स्थिति को और बिगाड़ने की धमकी दी है।
ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से 3,434 लोग मारे गए हैं। इनमें से 55 लोग हालिया (टकराव) के दौरान मारे गए। नवीनतम अमेरिकी हमलों से ईरान में परिवहन और संचार अस्थायी रूप से बाधित हुए। हजारों लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले जल बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसके हालिया हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को खतरा देने की ईरान की क्षमता को कम करने के लिए थे। लेकिन ईरान पीछे नहीं हटा है। उसने जलडमरूमध्य में जहाजों और अमेरिकी ठिकानों वाले खाड़ी देशों पर हमले तेज किए हैं। इन हमलों में कम से कम चार अमेरिकी सैनिक मारे गए और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इस्राइल को इस नवीनतम दौर की लड़ाई में अब तक निशाना नहीं बनाया गया है। उसने अमेरिका के साथ हमलों में भाग भी नहीं लिया है।