ब्रिटेन की सेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक दूसरे जहाज पर हमला हुआ है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में एक जहाज को निशाना बनाया गया था। फिलहाल हमले के कारण, नुकसान और किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
ओमान के कुमजार से 15 किलोमीटर दूर होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर किसी चीज के टकराने के बाद आग लग गई। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने बताया कि चालक दल के सदस्यों ने सुरक्षित रूप से जहाज छोड़ दिया। उन्हें एक टग बोट की मदद से बचा लिया गया है। जहाज में लगी आग अभी बुझी नहीं है और वह पानी में बह रहा है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। UKMTO ने अन्य जहाजों को सावधानी से गुजरने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की सलाह दी है।
कुवैत ने सोमवार को कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की तरफ से आ रहे हमलों को रोकने के लिए काम कर रही है। इस्लामिक रिपब्लिक पर अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान बार-बार कुवैत को निशाना बना रहा है। ईरान ने कुवैत में पावर प्लांट और डिसेलिनेशन स्टेशनों (खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट) को निशाना बनाया है। ये ऐसे देश के लिए बहुत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हैं जो अपने पीने के पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा डिसेलिनेशन से ही हासिल करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए ईरान और अमेरिका के बीच पिछले नौ दिनों से हमले जारी हैं।
अमेरिकी हवाई हमलों के बाद सोमवार सुबह बहरीन में मिसाइल अलर्ट सायरन बजने लगे। यह सायरन ईरान की ओर से होने वाले संभावित जवाबी हमले की चेतावनी के तौर पर बजाए गए हैं, क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने इस्लामिक गणराज्य (ईरान) को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। फारस की खाड़ी में स्थित यह छोटा सा द्वीपीय देश, जहां US नेवी का 5वां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, ईरान के लगातार हमलों का शिकार रहा है, क्योंकि युद्ध खत्म करने के लिए हुई अंतरिम डील टूट चुकी है।
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत के अली अल सालेम एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। IRGC के अनुसार, इस ड्रोन हमले में अमेरिका का अर्ली-वार्निंग रडार सिस्टम तबाह हो गया। साथ ही विमानन उपकरण गोदाम और अमेरिकी MQ-9 ड्रोन के हैंगर पर भी सटीक हमले कर कई विमानों में आग लगा दी गई।
कुवैती सेना ने बयान जारी कर कहा है कि वह देश पर हुए ईरानी ड्रोन हमलों का जवाब दे रही है। सेना के मुताबिक, पूरे देश में सुनाई दे रही तेज आवाजें दरअसल सुरक्षा बलों द्वारा ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने (इंटरसेप्शन) के कारण हो रही हैं।
इस्राइल की सेना ने कहा कि जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलें सीमा पार कर सकती हैं। इस्राइली लोगों को सुरक्षा के लिहाज से बीते कई हफ्तों में पहली बार हवाई हमले के सायरन बजने के संबंध में सतर्क किया गया। यह पहलू भी अहम है कि ईरान ने इस्राइल के बजाय अमेरिका के सहयोगी अरब देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। इस्राइली सेना प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर ने कहा, हम तुरंत युद्ध फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।
जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने कई ईरानी मिसाइलों को मार गिराया। यह इस इलाके में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों में एक है। सेना के अनुसार, मिसाइलों से कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ। इस्राइल ने चेतावनी दी है कि पड़ोसी देश जॉर्डन की ओर दागी गई मिसाइलें इस्राइली क्षेत्र में भी जंग की आग फैला सकती हैं।
बहरीन, जॉर्डन और कुवैत ने ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से बचाव के लिए वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है। सोमवार सुबह, बहरीन में अमेरिकी दूतावास ने एक चेतावनी जारी की। अमेरिका के मुताबिक राजधानी मनामा के मध्य में ईरान कई ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। कुवैत ने कहा कि उसके एक बिजली और जल संयंत्र पर दो दिनों में दूसरी बार हमला किया गया, जिससे आग लग गई। इस देश के बिजली, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल बिजली ग्रिड की हालत स्थिर है। बता दें कि कुवैत में, लगभग 90 फीसदी पीने का पानी विलवणीकरण से आता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बदस्तूर जारी बमबारी से उपजी चिंता को लेकर ब्रिटिश सेना ने कहा, सोमवार सुबह ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज में आग लग गई। हालांकि, ओमान के पास आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। दरअसल, यह ऐसा मार्ग है जिससे अमेरिकी सेना ने जहाजों को यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। अमेरिका के मुताबिक इस रास्ते का इस्तेमाल ईरान के नियंत्रण से बचने के लिए किया जा रहा है।
अमेरिका से टकराव के बीच ईरान ने जॉर्डन की तरफ भी मिसाइलें दागीं, इससे पड़ोसी देश इस्राइल में संघर्ष फैलने का जोखिम बढ़ गया है। टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हमने आज रात फिर से बहुत तगड़ा प्रहार किया है। अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई बलिदानी सैनिकों के सम्मान में की।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में जारी सैन्य कार्रवाई के संबंध में कहा, सेंटकॉम (CENTCOM) ने आज शाम 7 बजे (पूर्वी समय) ईरान के खिलाफ हमलों की नया चरण शुरू किया। लगातार नौवीं रात हुए इन हमलों का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नाविकों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।
U.S. Central Command tweets, "CENTCOM began conducting a new wave of strikes against Iran at 7 p.m. ET today for the ninth consecutive night. The strikes will continue degrading Iranian military capabilities used to attack commercial vessels and civilian mariners transiting the… pic.twitter.com/oXJaWrsudD
— ANI (@ANI) July 19, 2026
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग विकराल होती जा रही है। दोनों पक्षों के सैनिक लाखों लोगों के इस्तेमाल में आने वाले बुनियादी ढांचों को लगातार निशाना बना रहे हैं। तनाव बढ़ने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा हो गया है।
ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा, अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है, इसलिए ईरान ने भी शांति समझौते को लेकर साइन किए गए एमओयू के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने से फिलहाल इनकार कर दिया है। सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी पर प्रसारित इंटरव्यू में गरीबाबादी ने कहा, अमेरिका ने एमओयू के तहत अपनी लगभग सभी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है या उन्हें निलंबित कर दिया है। ऐसे में फिलहाल, ईरान का पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा पर है और फिलहाल किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है। इस समय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरे मजबूती के साथ अपने देश की रक्षा करना है। इस बार भी अमेरिका को जवाब मिल चुका है कि इस तरह की आक्रामक कार्रवाई से उसे कोई फायदा नहीं होगा। अगर वे समझदारी से काम लें, तो उन्हें दूसरा रास्ता चुनना चाहिए। गरीबाबादी से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के आक्रामक तेवरों को देखते हुए साफ है कि फिलहाल तनाव घटने के आसार नहीं हैं।
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के टकराव से उपजे तनाव के बीच कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की। अमीर के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने सभी पक्षों से बातचीत का रास्ता अपनाने और इस्लामाबाद समझौते (मैक्रों की मौजूदगी में हुए 14 सूत्री एमओयू) के तहत बनी सहमतियों को लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही की आजादी बनी रहनी चाहिए और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने जून में जिस एमओयू पर साइन किया था। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके अंतिम समझौते तक पहुंचने की कोशिश करनी थी। हालांकि, हाल के दिनों में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। दोनों देशों के बीच मध्य पूर्व में कई दौर के हमले हुए हैं।
ईरान में बढ़ती अस्थिरता और संघर्ष के बीच भारतीय दूतावास ने रविवार, 20 जुलाई को भारतीय नागरिकों के लिए संशोधित परामर्श जारी किया। परामर्श में भारतीयों से ईरान यात्रा स्थगित करने और मौजूदा लोगों को अस्थायी रूप से देश छोड़ने को कहा गया है। ईरान में रहने वाले नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, अभी तक जिन नागरिकों ने पंजीकरण नहीं कराया है, ऐसे तमाम भारतीयों से तुरंत विवरण दर्ज कराने को कहा गया है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से भड़कने के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है। दोनों देशों की सेना एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं।
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