ब्रिटेन सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में यहूदी समुदाय से जुड़े ठिकानों पर आगजनी और तोड़फोड़ के कई हमले ईरान समर्थित एक समूह ने किए थे। ब्रिटेन सरकार ने इस्लामिक मूवमेंट ऑफ द कंपैनियंस ऑफ द राइट यानी आईएमसीआर, जिसे हरकत अशाब अल-यमीन अल-इस्लामिया के नाम से भी जाना जाता है, पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके अलावा ईरान के शक्तिशाली अर्धसैनिक संगठन रिवोल्यूशनरी गार्ड पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
सुरक्षा मंत्री एंजेला ईगल ने एक बयान में कहा कि आईएमसीआर ने ब्रिटेन में सात हमलों की जिम्मेदारी ली है। इस समूह ने ऑनलाइन दावा किया था कि वह हाल के महीनों में लंदन में यहूदी ठिकानों पर आगजनी की कई घटनाओं के पीछे है। इनमें यहूदी धार्मिक स्थलों, यहूदी चैरिटी की एंबुलेंस और ईरान सरकार की आलोचना करने वाले फारसी भाषा के एक मीडिया संगठन को निशाना बनाया गया था। इन आगजनी की घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, आईएमसीआर के पीछे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स के सदस्य थे, जिन्होंने लगभग निश्चित रूप से पूरे यूरोप में आईएमसीआर के हमलों को निर्देशित किया। कुद्स यानी यरुशलम फोर्स, रिवोल्यूशनरी गार्ड की विदेशों में अभियान चलाने वाली इकाई है।
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब के हमलों में सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया है। ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने सोमवार को टेलीग्राम पर कहा कि सऊदी अरब ने हवाई हमले किए हैं। उन्होंने इसे तनाव कम करने के दौर का अंत बताया।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस आक्रामकता का जवाब जरूर दिया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी। हवाई अड्डे और इसके आसपास के इलाकों को खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यमन के दक्षिणी हिस्से में कई वर्षों से सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन सक्रिय है। यह गठबंधन उत्तर यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहा है।
ईरान के बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के पास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित बंदर अब्बास शहर और केश्म द्वीप के आसपास कई और विस्फोट हुए हैं।
अमेरिका की ओर से बढ़ते सैन्य हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जवाबी कार्रवाई की। आईआरजीसी ने बहरीन, ओमान और कुवैत में हमले किए हैं। इन हमलों का निशाना उन ठिकानों को बनाया गया, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी या उससे जुड़े प्रतिष्ठान हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जवाबी हमलों के बावजूद कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश सीधे हमलों के साथ-साथ मध्यस्थों, बैक-चैनल बातचीत और सैन्य कार्रवाई के जरिए एक-दूसरे की 'रेड लाइन' यानी सीमा और मंशा को समझने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपनाता दिख रहा है, जबकि अमेरिका ने पहले की तरह शासन परिवर्तन (रेजीम चेंज) की बात करना लगभग छोड़ दिया है। वहीं, तेहरान से अरब की खाड़ी में क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्षों के बदलते रणनीतिक लक्ष्य भविष्य में बातचीत की राह को और कठिन बना सकते हैं, हालांकि तनाव के बीच भी कूटनीति की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी तनाव का असर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के तेल और गैस निर्यात पर पड़ रहा है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस निर्यात पर निर्भर है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित या बंद होने से इन देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। वैश्विक स्तर पर भी करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से यूरोप, एशिया और अफ्रीका तक पहुंचती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे कतर और ओमान भी तनाव की चपेट में आ गए हैं। ईरानी हमलों के बाद ओमान ने विरोध दर्ज कराने के लिए ईरानी राजदूत को तलब किया है, जबकि कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे हमले और बढ़ता तनाव मध्यस्थता के प्रयासों में मददगार नहीं हैं।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने जवाबी अभियान के पांचवें चरण का ब्योरा जारी करते हुए दावा किया कि उसने बहरीन के जुफैर में अमेरिकी सेना के ठिकानों और ओमान में लंबी दूरी के FPS हवाई रडार तथा पोतों का पता लगाने वाले रडार पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। IRGC ने दावा किया कि ओमान के दोनों रडार पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं। संगठन ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका यह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपना सैन्य हस्तक्षेप समाप्त करे और तटीय देशों की संप्रभुता का सम्मान करे। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि यह हस्तक्षेप जारी रहा तो वैश्विक तेल और गैस क्षेत्र में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई चार मिसाइलों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद इंटरसेप्ट कर मार गिराया। इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा था कि उसने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को निशाना बनाया, जहां कई ईंधन डिपो और गोला-बारूद भंडारण सुविधाओं में आग लग गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और दोनों देशों के बीच हमलों के आदान-प्रदान के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को 4 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई। सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 03:00 GMT तक 79.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 22 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
ईरान की सेना ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर उसके ड्रोन हमले लगातार जारी हैं। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना ने कुवैत में अमेरिकी बलों के ठिकानों पर 'विनाशकारी ड्रोन' से हमला किया, जिसमें रक्षा और मिसाइल प्रणालियां, बंकर और सहायता शेल्टर निशाने पर रहे। सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों, नागरिक बुनियादी ढांचे और आम नागरिकों पर अमेरिका के बार-बार किए गए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का "स्पष्ट उल्लंघन" बताया। सेना ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करेंगी और किसी भी आगे की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देंगी। इससे पहले ईरान की IRGC भी कुवैत के अली अल-सलेम और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर हमले का दावा कर चुकी है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने सोमवार को कहा कि उसने ईरान में कई स्थानों पर 'दर्जनों सैन्य ठिकानों' को सटीक हथियारों से निशाना बनाया है। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर हमलों को जारी रखने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था। हमलों में ईरान के सैन्य वायु रक्षा तंत्र, तटीय रडार साइटें, मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं तथा छोटी सैन्य नौकाएं शामिल थीं। सेंटकॉम ने यह भी बताया कि इस अभियान में अमेरिकी लड़ाकू विमान, नौसैनिक युद्धपोत, वन-वे अटैक एरियल ड्रोन और पहली बार वन-वे अटैक सी ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।
बहरीन के गृह मंत्रालय ने जानकारी दी है कि देश में एयर रेड सायरन सक्रिय कर दिए गए हैं। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही मुख्य सड़कों का इस्तेमाल करें और किसी भी स्थिति में यातायात में बाधा न डालें। साथ ही कहा गया है कि लोगों की सुरक्षा के लिए आगे भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
तीन हफ्ते पहले हुए युद्धविराम (सीजफायर) समझौते के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर पांचवें दौर के भीषण हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अल जजीरा ने ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि, अमेरिकी सेना ने इस बार होर्मोजगान प्रांत में स्थित सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद बंदर अब्बास और केशम द्वीप में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
अमेरिकी हमलों पर क्या बोला ईरान?
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इन हमलों ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के हालिया प्रयासों को कमजोर किया है। विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अगर कोई देश अपनी जमीन या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए करने की अनुमति देता है, तो ऐसे हमलों के स्रोत को ईरानी सशस्त्र बल आत्मरक्षा के तहत "वैध सैन्य लक्ष्य" मान सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से युद्ध को तुरंत रोकने की अपील की है। महासचिव के कार्यालय द्वारा जारी एक कड़े बयान में चेतावनी दी गई है कि इस ताजा सैन्य टकराव और लगातार बढ़ते हमलों से पश्चिम एशिया में अस्थिरता का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जो पूरे क्षेत्र को एक बड़े संकट में धकेल सकता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और आम नाविकों पर हमला करने की ईरानी क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है। अमेरिकी कमांडर-इन-चीफ के सीधे निर्देश पर की गई इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य मकसद नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरानी सेना को इन हमलों के लिए जवाबदेह ठहराना है।
At 5 p.m. ET today, U.S. Central Command forces began launching more strikes against Iran to continue degrading their ability to attack civilian mariners and commercial ships freely transiting the Strait of Hormuz. The Commander in Chief has directed the strikes to hold Iranian…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 12, 2026
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विवाद गहरा जाता रहा है। वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों के बाद जहां ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को अपने नियंत्रण में बताते हुए बंद करने का दावा किया है, वहीं अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए जलमार्ग को खुला घोषित किया है और जहाजों की सुरक्षा व नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अपनी सेना तैनात कर दी है।
ईरान की सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में ड्रोन हमलों के जरिए अमेरिकी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) मिसाइल लॉन्चरों और उनके गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया है। यह दावा कुवैत के रक्षा प्रवक्ता द्वारा एक आपराधिक हमले की रिपोर्ट दिए जाने के कुछ घंटों बाद आया है, जिसमें कुवैती प्रवक्ता ने बताया था कि इस हमले में तीन सीमा केंद्रों और एक अपतटीय तेल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा है तथा एक कर्मचारी घायल हुआ है। हालांकि, कुवैत की ओर से ईरानी मीडिया द्वारा दावा किए गए सैन्य लक्ष्यों (HIMARS) की आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है।