West Asia Crisis Live Updates: पश्चिम एशिया में करीब दो महीने से अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति के बाद वार्ता की जो विफल रही। अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े तमाम पल-पल अपडेट्स...
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका की ओर से लगाए गए समुद्री नाकाबंदी (ब्लॉकेड) की कड़ी आलोचना की है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक गैरकानूनी युद्ध को दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर जीता जा सकता है? उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या खुद को नुकसान पहुंचाकर किसी और को सबक सिखाना सही है?
फलस्तीन समर्थक हैकर समूह हंदाला ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) संरचनाओं पर बड़े साइबर हमले शुरू किए हैं। समूह का कहना है कि यह हमला एक तरह की चेतावनी और रोकथाम के तौर पर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य सऊदी अरब की महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रणालियों को निशाना बनाना है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर नेवल ब्लॉकेड (समुद्री नाकाबंदी) के फैसले का समर्थन करता है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान ने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए ट्रंप ने यह सख्त कदम उठाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल इस फैसले के साथ पूरी तरह खड़ा है और इस मामले में अमेरिका के साथ लगातार संपर्क और समन्वय में है।
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस्राइल भविष्य में तुर्किये को नया दुश्मन घोषित कर सकता है। उनका कहना है कि इस्राइल अपनी राजनीति को बनाए रखने के लिए हमेशा किसी न किसी दुश्मन की तलाश में रहता है। फिदान ने यह भी बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई बातचीत में भले ही कोई समझौता नहीं हो पाया, लेकिन दोनों पक्ष युद्धविराम को लेकर ईमानदार नजर आते हैं। यह बातचीत पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई थी।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर परमाणु मुद्दे पर सब कुछ या कुछ नहीं जैसी स्थिति बनती है, खासकर यूरेनियम संवर्धन को लेकर, तो आगे गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस्राइल और तुर्किये के रिश्ते बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
ईरान में पिछले 45 दिनों से इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप बनी हुई हैं। साइबर निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, सरकार ने देश की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी को 1,056 घंटे से ज्यादा समय से सीमित कर रखा है। इसका मतलब यह है कि लोग न तो ठीक से सोशल मीडिया चला पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से संपर्क कर पा रहे हैं। इस लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट का असर आम नागरिकों, कारोबार और छात्रों पर साफ दिखाई दे रहा है। ऑनलाइन काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनका काम पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर है। वहीं, परिवारों को भी विदेश में रह रहे अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने में दिक्कत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का लंबा इंटरनेट प्रतिबंध किसी देश की अर्थव्यवस्था और सूचना प्रवाह पर बड़ा असर डाल सकता है। हालांकि ईरानी सरकार ने इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। लेकिन यह स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि इतनी लंबी अवधि तक इंटरनेट बंद रहना बेहद असामान्य माना जाता है।
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने जानकारी दी है कि राजधानी तेहरान में हुए अमेरिकी-इस्राइली हवाई हमलों के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है। अब तक करीब 960 लोगों को मलबे के नीचे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। सरकारी एजेंसी आईआरएनएके अनुसार, इन हमलों में देशभर में 1.25 लाख से ज्यादा नागरिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है। इनमें लगभग 1 लाख घर और करीब 24 हजार व्यापारिक इमारतें शामिल हैं। राहत टीमों का कहना है कि कई जगहों पर अभी भी लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए अभियान जारी है। इस घटना ने इलाके में भारी तबाही और मानवीय संकट की स्थिति पैदा कर दी है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि उनका देश ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि चाहे कितना भी दबाव क्यों न हो, ब्रिटेन युद्ध में शामिल नहीं होगा। स्टार्मर ने जोर देकर कहा कि इस अहम जलमार्ग को खुला रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और व्यापार जुड़ा है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन लगातार कूटनीतिक कोशिश कर रहा है ताकि तनाव कम हो और हालात बिगड़ने से रोका जा सके। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से नाकेबंदी की चर्चा तेज है।
जर्मनी की सरकार ने आम लोगों और कारोबारियों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। देश के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने घोषणा की है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला टैक्स अगले दो महीनों के लिए कम किया जाएगा। इस फैसले के तहत ईंधन की कीमत में करीब 17 यूरो सेंट (लगभग 17-18 रुपये) प्रति लीटर की कमी आएगी। सरकार का कहना है कि युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई है, जिससे लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। ऐसे में यह कदम राहत देने के लिए उठाया गया है। इस फैसले से ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और आम जनता को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह राहत केवल अस्थायी है और आगे हालात के अनुसार नए फैसले लिए जा सकते हैं।
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की धमकी पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है। चीन का कहना है कि यह जलमार्ग पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित रखना सबकी जिम्मेदारी है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने साफ कर दिया कि उनका देश इस नाकेबंदी का समर्थन नहीं करेगा और युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य इस रास्ते को पूरी तरह खुला रखना है ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
जापान ने साफ किया है कि उसने अभी तक होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन हटाने के लिए अपनी सेल्फ-डिफेंस फोर्स भेजने पर कोई फैसला नहीं लिया है। सरकार के प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने कहा कि सबसे जरूरी चीज तनाव कम करना और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। जापान लगातार दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में युद्ध की स्थिति के कारण तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर खतरा बढ़ गया है।
तीन प्रमुख मानवाधिकार संगठनों, अल-हक, अल मेजान और फलस्तीनी केंद्र, ने ऑस्ट्रेलिया की अदालत में याचिका दाखिल की है। इनका आरोप है कि सरकार ने इस्राइल को हथियार निर्यात के मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती। संगठन चाहते हैं कि रक्षा मंत्री उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करें जिनसे यह पता चल सके कि क्या निर्यात किए गए हथियारों का इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन में हो सकता है। उनका कहना है कि अगर सही तरीके से जोखिम का आकलन नहीं किया गया, तो यह कानूनी गलती मानी जाएगी और निर्यात रोकने की मांग उठ सकती है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है क्योंकि इसमें मानवाधिकार और युद्ध से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान ने साफ कहा है कि पर्शियन गल्फ और ओमान सागर के बंदरगाह या तो सभी देशों के लिए होंगे या किसी के लिए नहीं। सरकारी मीडिया आईआरआईबी के मुताबिक, ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हुआ तो पूरे क्षेत्र के पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेंगे। ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने दिया जाएगा जो उनके नियमों का पालन करेंगे, जबकि दुश्मन से जुड़े जहाजों को रोक दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय जल में दखल देने का आरोप लगाते हुए इसे गैरकानूनी और समुद्री डकैती बताया है। साथ ही, उसने यह भी संकेत दिया कि युद्ध के बाद भी वह इस जलमार्ग पर स्थायी नियंत्रण तंत्र लागू करेगा।
आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दुश्मन की किसी भी गलत हरकत के गंभीर और जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। आईआरजीसी की नौसेना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस अहम समुद्री रास्ते पर हर गतिविधि पर उनकी पूरी नजर है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सेना पूरी तरह नियंत्रण में है और अगर कोई भी देश या जहाज गलत कदम उठाता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस बीच सेंटकाम ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत इस क्षेत्र से गुजरे और खदान हटाने का काम शुरू किया। लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी जहाजों को उनकी नौसेना ने पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ा है। हालांकि दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू हुआ था और पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का कारण बन रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के विदेश मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे स्थायी समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक कदम बताया है। एक संयुक्त बयान में, 10 सदस्यीय समूह के विदेश मंत्रियों ने ऊर्जा प्रवाह और व्यापार मार्गों के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। 'हम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों और विमानों के सुरक्षित, निर्बाध और निरंतर पारगमन मार्ग की बहाली का आह्वान करते हैं… साथ ही सभी पक्षों से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सम्मेलन के अनुसार नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आह्वान करते हैं।'
मंत्रियों ने वाशिंगटन और तेहरान से संघर्ष के स्थायी अंत की ओर ले जाने वाली वार्ता जारी रखने का आग्रह किया और पाकिस्तान और सभी संबंधित पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आगे कहा, 'हम क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने, अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करने और गंभीर संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हैं।' हालांकि दक्षिणपूर्व एशिया में जीवाश्म ईंधन के पर्याप्त भंडार हैं, फिर भी यह क्षेत्र आयातित तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भर है, जिसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से परिवहन किया जाता है।
चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स (एएसएक्स), जो मुख्य बेंचमार्क इंडेक्स है, वहां आधे प्रतिशत से भी कम गिरा है। लेकिन हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया में बड़ी गिरावट देखी जा रही है, सभी में एक प्रतिशत से थोड़ा कम या थोड़ा अधिक की गिरावट आई है।
इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से हर सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट और फिर, आमतौर पर पूरे सप्ताह के दौरान, इसमें सुधार होता है और कुछ हद तक वृद्धि होती है। इसके दो कारण हैं। एक तो बाजारों में यह धारणा है कि जब हमें सप्ताहांत में अमेरिका से ये बड़े फैसले मिलेंगे - अक्सर डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट - तो हम बाजार में गिरावट देखेंगे, जिसके बाद यह उम्मीद रहेगी कि पूरे सप्ताह के दौरान किसी तरह का उलटफेर होगा, शायद ट्रंप प्रशासन की ओर से जीत की घोषणा होगी, और बाजार फिर से ऊपर चढ़ेंगे।
दूसरी वजह एशिया के अधिकांश देशों, विशेषकर दक्षिण कोरिया की सरकारों द्वारा वर्तमान में अपनाई जा रही नीतियों में बड़ा बदलाव है। सरकार ओमान, सऊदी अरब, विशेष रूप से कजाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे अन्य देशों के साथ तेल और गैस की वैकल्पिक आपूर्ति के लिए बातचीत कर रही है, ताकि उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से न गुजरना पड़े।
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, बाज़ूरियेह कस्बे पर इस्राइली हमलों की एक श्रृंखला में एक व्यक्ति की मौत हो गई। इन हमलों में कम से कम नौ लोग घायल हुए और कई घरों और एक स्कूल की इमारत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। एनएनए के अनुसार, नबातीयेह अल फाउका और सिर अल घरबियेह में भी दो-दो लोग मारे गए, जबकि चौकिन कस्बे में दो अन्य लोग मारे गए।
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, तेहरान और तब्रीज व तब्रीज और मशहद के बीच क्षतिग्रस्त रेल पटरियों की मरम्मत कर दी गई है, जिससे चार-पांच दिनों के निलंबन के बाद ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू हो गया है। आईआरएनए ने आगे बताया कि मरम्मत की गई पटरी पर तेहरान-तब्रीज-वान ट्रेन तेहरान से तुर्की के वान के लिए रात भर में रवाना हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान गठबंधन ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूरोप की सुरक्षा पर भारी खर्च किया, लेकिन जरूरत के समय सहयोग नहीं मिला। ट्रंप ने नाटो को पेपर टाइगर तक कह दिया और इसे गठबंधन के लिए स्थायी दाग बताया। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के लिए नाटो से बाहर निकलना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप यूरोप में तैनात करीब 84,000 अमेरिकी सैनिकों को हटाने पर विचार कर सकते हैं। यह कदम ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों को और कमजोर कर सकता है। इस पूरे विवाद को अमेरिका और यूरोप के रिश्तों की बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सुरक्षा हालात तेजी से बदल रहे हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 7% से ज्यादा बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी तेजी से बढ़ा है। इस उछाल की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। अमेरिका की नौसेना द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों को रोकने की तैयारी से सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब फिर से युद्ध जैसे हालात को ध्यान में रखकर प्रतिक्रिया दे रहा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य में किसी भी गलत कदम का गंभीर परिणाम होगा, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में 77 ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है। ईरान की सरकारी एजेंसी के अनुसार, इन इमारतों में महल, संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत नुकसान मामूली है, जबकि 10 प्रतिशत इमारतों को गंभीर क्षति हुई है। इनमें से 38 इमारतें राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्ज हैं, जबकि बाकी भी सांस्कृतिक और वास्तुकला के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
प्रभावित स्थलों में फर्रुखाबाद पैलेस, इशरताबाद पैलेस, कजर काल की इमारतें और रफी निया सिनेगॉग हाउस जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ईरान पहले से ही युद्ध और आर्थिक दबाव झेल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सांस्कृतिक विरासत को नुकसान किसी भी देश की पहचान पर सीधा असर डालता है और इसकी भरपाई करना आसान नहीं होता।
जापान में प्रकाशित उत्तर कोरिया समर्थक अखबार ने अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे देशों के राष्ट्रीय हित खतरे में पड़ सकते हैं। अखबार ने अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ का हवाला देते हुए कहा कि जो देश अमेरिका पर ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें आर्थिक और रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि युद्धविराम के बाद हालात कैसे बदलेंगे, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन देशों को अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए। उत्तर कोरिया लंबे समय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता रहा है और अमेरिकी प्रभाव का विरोध करता है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना नहीं की है। वहीं, दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी का कहना है कि उत्तर कोरिया फिलहाल ईरान से दूरी बनाकर अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना खुली रखना चाहता है।
एक स्थानीय न्यूज चैनल के अनुसार, ड्रोन की घुसपैठ से मेटुला और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। चैनल ने बताया कि ड्रोन को रोक लिया गया है और अब निवासियों के लिए अपने आश्रयों से बाहर निकलना सुरक्षित है।
भारतीय मूल की रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका का ईरान के साथ बातचीत से पीछे हटना सही था। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ब्लॉकेड प्लान' का समर्थन किया और चेतावनी दी कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई, दोनों पक्षों के बीच वार्ता बहुत अलग-अलग थी। निक्की हेली ने सीएनएन को एक इंटरव्यू में बताया, 'अमेरिका के पास 15 प्वाइंट का प्लान था। ईरान के पास 10 प्वाइंट का प्लान था। वे सच में मीलों दूर थे। ईरानी अपना न्यूक्लियर प्रोडक्शन और होर्मुज पर अपना कंट्रोल छोड़ने को तैयार नहीं थे।'
उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बातचीत खत्म करने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, 'हम बातचीत जारी नहीं रखेंगे। यह हमारे समय के लायक नहीं है। ट्रंप सरकार अब निश्चित तौर पर आगे बढ़ रहा है। हम ईरान पर वहीं हमला करेंगे जहां उसे चोट पहुंचेगी।' हेली ने इस ब्लॉकेड को ईरान को कमजोर करने की एक बड़ी आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'ईरान को असल में घुटनों पर लाने के लिए उस पर आर्थिक रूप से हमला करना होगा। होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना वैश्विक व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।' उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अमेरिका और उसके साथियों पर दबाव बढ़ाने के लिए अपनी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, 'ईरान जीत को ट्रंप और खाड़ी के साथियों पर जितना हो सके उतना राजनीतिक और आर्थिक दबाव डालने के तौर पर देखता है। यह एक मुश्किल काम है।'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पहले के दावे को दोहराया है कि अमेरिका पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे (24:00 जीएमटी) से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर देगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा: 'संयुक्त राज्य अमेरिका 13 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे पूर्वी समय पर ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगा।'
लेबनानी सेना ने एक सैनिक की मृत्यु की घोषणा की है, जिसकी रविवार को पूर्वी बालबेक के शमश्तर कस्बे में 8 अप्रैल को हुए इस्राइली हमले में लगी चोटों के कारण मृत्यु हो गई। सेना ने एक बयान में कहा कि 41 वर्षीय अब्बास हसन कासिम को 'सेना कमांडर द्वारा कई पदक और प्रशस्तियां प्राप्त हुई थीं, जिन्होंने उन्हें कई अवसरों पर बधाई दी थी।' बयान में आगे कहा गया है कि कासिम विवाहित थे और उनके तीन बच्चे थे।
अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत किसी भी समझौते पर पहुंचने में विफल रही, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई। पाकिस्तान में हुई बातचीत का कोई नतीजा न निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी शुरू करेगी। इस घोषणा ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया और कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया। ब्रेंट क्रूड में लगभग 7.3% की उछाल देखी गई, जो $102 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद निवेशकों के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कारोबार के दौरान, निफ्टी 50 में 1.78% की गिरावट के साथ 23,620 अंक पर और सेंसेक्स में 1.83% की गिरावट के साथ 76,139.90 अंक पर कारोबार कर रहा था। यह गिरावट पिछले सप्ताह की उस तेजी के विपरीत थी, जब निवेशकों को अमेरिकी-ईरान संघर्ष में एक नाजुक युद्धविराम से राहत मिली थी और दोनों बेंचमार्क लगभग 6% बढ़े थे, जो पांच साल में उनका सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन था।
समुद्री खुफिया एजेंसी लॉयड्स लिस्ट का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नाकाबंदी की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से कम गति से चल रहा यातायात तुरंत रुक गया, और कुछ जहाज वापस लौट गए। इस एजेंसी ने बताया कि नाकाबंदी की घोषणा से पहले रविवार को जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन जारी था, हालांकि गति कम थी। एजेंसी के अनुसार, 'शनिवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में थोड़ी वृद्धि हुई थी क्योंकि शिपिंग कंपनियां मध्य पूर्व खाड़ी से कुछ जहाजों को निकालने के लिए अस्थायी युद्धविराम समझौते को जोखिम में डालने की तैयारी कर रही थीं।' हालांकि, ट्रंप की नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा के बाद, ऐसा लगता है कि सारा यातायात रुक गया है और कम से कम दो जहाज जो जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की ओर बढ़ रहे थे, वे वापस लौट गए हैं।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि 2 मार्च को इस्राइली हमले की शुरुआत के बाद से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,055 हो गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि कम से कम 6,588 लोग घायल हुए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी के लिए खोलने की मांग की और कहा कि अमेरिका ने इसे अवरुद्ध करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से कोई मदद नहीं मांगी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद, अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले जहाजों की नाकाबंदी तुरंत शुरू कर देगी।
अल्बानीज ने सोमवार को नाइन नेटवर्क टेलीविजन को बताया, 'हमें कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है, और उन्होंने यह घोषणा रातोंरात की है और उन्होंने यह एकतरफा तरीके से किया है। और हमें इसमें भाग लेने के लिए नहीं कहा गया है।' अल्बानीज ने आगे कहा, 'हम चाहते हैं कि वार्ता जारी रहे और फिर से शुरू हो। हम इस संघर्ष का अंत देखना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुल जाए। हम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता भी देखना चाहते हैं।'
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार (स्थानीय समय) को दक्षिणी लेबनान का दौरा किया और कहा कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस्राइल के दुश्मन अब 'अपने अस्तित्व की लड़ाई' लड़ रहे हैं। इस्राइली प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस दौरे में उनके साथ रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज, इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयल जमीर और उत्तरी कमान के प्रमुख मेजर जनरल राफी मिलो मौजूद थे। दौरे के बाद नेतन्याहू ने आईडीएफ के एक पोस्ट का भी निरीक्षण किया, जहां गैलिली डिवीजन कमांडर ब्रिगेडियर जनरल युवाल गेज ने उन्हें सैन्य गतिविधियों की जानकारी दी।
नेतन्याहू ने कहा, युद्ध जारी है। हमारे दुश्मन अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वहां मौजूद हैं और सैनिकों में लड़ने का शानदार जोश है। उन्होंने कहा कि लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र के अंदर भी लड़ाई जारी है, जहां वे कुछ समय पहले गए थे।
इस्राइल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्राइल ने सुरक्षा क्षेत्र बनाकर लेबनान से संभावित घुसपैठ को रोक दिया है। उन्होंने कहा कि इससे टैंक और रॉकेट के हमलों का खतरा कम हुआ है। लेकिन अभी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि इस्राइल ने पश्चिम एशिया की स्थिति बदल दी है।उन्होंने कहा कि ईरान और 'दुश्मन गठबंधन' अब सिर्फ अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने इज़राइली सेना और आरक्षित सैनिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह इस्राइल के लिए बड़ी उपलब्धि है।