चीन ने ईरान और अमेरिका से शांति वार्ता की रफ्तार बनाए रखने और सकारात्मक नतीजों की दिशा में काम करने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग को उम्मीद है कि दोनों देश बातचीत जारी रखेंगे और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। गुओ ने ईरान-अमेरिका वार्ता में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान, कतर और अन्य पक्षों के प्रयासों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चीन सभी संबंधित पक्षों की मध्यस्थता की कोशिशों का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का पहला दौर पूरा हुआ है।
ईरान ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू होने से पहले उसकी प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया था कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद 1, 10 और 11 को लागू किए बिना तकनीकी वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। अब सभी पक्षों के तकनीकी बातचीत जारी रखने पर सहमत होने के बाद प्रगति के संकेत मिले हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट दी गई है और नाकेबंदी हटा ली गई है। इसके अलावा ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियां भी जारी कर दी गई हैं और देश के पुनर्निर्माण एवं विकास के लिए नई योजना शुरू की गई है।
लेबनान के नबातियेह शहर और आसपास के इलाकों में भीषण हिंसा के बाद अब सतर्क शांति लौटती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में इजरायली सेना ने अली ताहेर पहाड़ियों पर कब्जा करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। हिज्बुल्ला ने दावा किया कि उसने इजरायली सैनिकों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें चार सैनिक मारे गए। इसके बाद इजरायल ने नबातियेह और आसपास के क्षेत्रों पर सैकड़ों हवाई हमले किए। स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, यह युद्ध के सबसे हिंसक दिनों में से एक था। अब संघर्षविराम लागू होता दिख रहा है, लेकिन हालिया हिंसा ने इलाके में भारी तबाही छोड़ी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने से जुड़े मुद्दों पर तकनीकी टीमें आगे की बातचीत करेंगी। बगाई ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि तकनीकी विशेषज्ञ आवश्यक विषयों पर काम जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वार्ताकारों का औपचारिक काम समाप्त हो गया है, लेकिन तकनीकी स्तर पर बातचीत अगले दिन भी जारी रहेगी। यह कदम संभावित समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से लेबनान युद्ध समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में अराघची ने कहा कि तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट दी गई है, नाकेबंदी हटाई गई है और कुछ जमे हुए वित्तीय संसाधन भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए एक बड़ी योजना शुरू की गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस समझ की वास्तविक परीक्षा 'लेबनान डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' होगी, जिससे यह तय होगा कि संघर्षविराम और समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है या नहीं।
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने अमेरिकी वार्ताकार जेडी वेंस और जेरेड कुशनर के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "लूसर्न से लाइव, काम जारी है।" यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता का दौर जारी है। कतर इस वार्ता में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शेख मोहम्मद की पोस्ट से संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे बातचीत और कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि अमेरिकी सैन्य बल पूरे मध्य पूर्व में आसमान, जमीन और समुद्र में सक्रिय रूप से मौजूद हैं। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर दो लड़ाकू विमानों की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि ये नियमित गश्त का हिस्सा हैं। इससे पहले कमांड ने अरब सागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर मौजूद सैनिकों की तस्वीरें भी जारी की थीं। अमेरिकी सेना का यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति के जरिए सहयोगियों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान और कतर ने कहा है कि स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी स्तर की बातचीत सप्ताह के बाकी दिनों तक जारी रहेगी। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सभी मुद्दों पर तकनीकी चर्चा जारी रहेगी। मध्यस्थ देशों ने अमेरिका और ईरान की कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। पाकिस्तान और कतर ने कहा कि वे वार्ता को सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे, ताकि अंततः किसी व्यापक और अंतिम समझौते तक पहुंचा जा सके।
ब्रिटेन के सांसद सोमवार को देश की राजनीति में इस्राइल समर्थक समूहों के प्रभाव पर चर्चा करेंगे। साथ ही इस मुद्दे पर सार्वजनिक जांच शुरू करने की मांग पर भी बहस होगी। इस संबंध में एक अभियान को 1.18 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है।
इस मांग का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि गाजा में युद्ध और वेस्ट बैंक में हिंसा पर ब्रिटेन सरकार ने सख्त रुख नहीं अपनाया। इसलिए यह जांच होनी चाहिए कि इस्राइल समर्थक समूहों का ब्रिटेन की राजनीति और सरकारी फैसलों पर कितना असर है। हालांकि, ब्रिटेन सरकार ने अप्रैल में कहा था कि वह इस मामले में कोई सार्वजनिक जांच जरूरी नहीं मानती।
कुवैत के विमानन प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन से एक ईंधन टैंक को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहां आग लग गई। कुवैत न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-राजही ने शुरुआती जानकारी में कहा कि सिर्फ संपत्ति को नुकसान हुआ है और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद आपातकालीन व्यवस्था शुरू कर दी गई और दमकल तथा दूसरी टीमें आग बुझाने में लगी हुई हैं।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल ने ईरान में शासन बदलने के लिए जरूरी परिस्थितियां तैयार करने में सफलता हासिल की है। वह यरूशलम में आयोजित जेएनएसइंटरनेशनल पॉलिसी समिट को संबोधित कर रहे थे। टाइम्स ऑफ इस्राइल ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी-इस्राइली अभियान की शुरुआत में ही यह लक्ष्य तय किया गया था कि ईरानी शासन के पतन के लिए 'परिस्थितियां बनाई' जाएंगी। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी कि यह लक्ष्य कितना सफल रहा है। युद्ध के दौरान ईरानी शासन सत्ता में बना रहा और जनता ने भी सरकार के खिलाफ कोई सफल विद्रोह नहीं किया, जबकि पहले विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई की गई थी।
नेतन्याहू ने इस अभियान की सफलताओं को गिनाते हुए कहा कि हमने आतंकी शासन के नेतृत्व को खत्म किया, उनके मिसाइल उद्योग को नष्ट किया, नौसेना और वायुसेना को कमजोर किया, सैन्य उद्योगों और पुलों पर भी हमला किया। उन्होंने आगे कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है, जो 'सैकड़ों अरब डॉलर' में आंका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान को इस नुकसान से उबरने में लंबा समय लगेगा। संभव है कि वह कभी पूरी तरह उबर ही न पाए, क्योंकि शासन और जनता के बीच खाई बहुत गहरी हो चुकी है।
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अंतिम परिणाम ईरानी जनता पर निर्भर करेगा। असली जीत तभी होगी, जब ईरान के लोग खुद अपने भविष्य का फैसला करते हुए इस 'क्रूर शासन' को हटा देंगे, जो न सिर्फ अपने नागरिकों बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ पश्चिम एशिया में जंग को स्थायी रूप से समाप्त करने के मकसद जारी वार्ता स्थल से बाहर निकल गया। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर हमले की धमकी के बाद उठाया गया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल मध्यस्थ पक्षों में से एक कतर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उस इमारत से बाहर निकल गया, जहां वार्ता चल रही थी।
आईआरएनए ने आगे बताया कि जैसे ही स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू हुई, उसी समय डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर एक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ अपनी धमकियों और सख्त टिप्पणियों को दोहराया। हालांकि, बातचीत की जानकारी रखने वाले एक राजनयिक ने कहा कि ईरान अभी भी वार्ता में शामिल है। उस राजनयिक ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी बातचीत में भाग ले रहा है और उसने बाहर जाने का कोई इरादा मध्यस्थों को नहीं बताया है। इस विरोधाभास का कारण अभी तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका है।