03:49 PM, 05-May-2026
पश्चिम एशिया संकट का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। इस टकराव से ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे पहले से ही कमजोर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पहले से ही बढ़ती महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और तेजी से गिरती मुद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यह संकट उसके लिए केवल अस्थायी झटका नहीं बल्कि एक बड़ा संरचनात्मक आर्थिक नुकसान माना जा रहा है।
तेल की कीमतें बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने से पाकिस्तान का साप्ताहिक पेट्रोलियम आयात बिल 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, यानी इसमें 167 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और परिवहन लागत का बढ़ना बताया गया है।
इस ऊर्जा संकट का असर देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ रही है, विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है और मुद्रा का मूल्य गिर रहा है। साथ ही कराची बंदरगाह पर लॉजिस्टिक संकट भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का वार्षिक अतिरिक्त तेल बोझ लगभग 26 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो उसके पूरे निर्यात आय के करीब है। इसका मतलब है कि एक ही वस्तु (तेल) पर उसका खर्च पूरे निर्यात क्षेत्र की कमाई के बराबर हो गया है।