अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक घेराबंदी के तहत अब तक 28 जहाजों को ईरानी बंदरगाहों से वापस लौटने या अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया गया है। अमेरिका की इस सख्त कार्रवाई ने तेहरान के आर्थिक हितों पर भारी चोट पहुंचाई है, जिसके विरोध में ईरान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली अगली शांति वार्ता में शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है। जहां एक ओर ईरान इस घेराबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बता रहा है, वहीं अमेरिका का कहना है कि यह दबाव ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी है। वहीं, मौजूदा युद्धविराम की अवधि समाप्त होने जा रही है, जिससे क्षेत्र में दोबारा संघर्ष शुरू होने की आशंका बढ़ गई है।
यमन के हुती विद्रोही नेता अब्दुल मलिक अल-हुती ने क्षेत्र में बड़े संघर्ष की चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ वर्तमान संघर्षविराम बेहद कमजोर है। हुती प्रमुख ने स्पष्ट किया कि दुश्मन के साथ निरंतर चल रहे संघर्ष में यह केवल एक अल्पकालिक संघर्षविराम है और आने वाले दिनों में लड़ाई के और भयानक दौर देखने को मिल सकते हैं। पिछले महीने इस्राइल पर हुए मिसाइल हमलों और लाल सागर के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को फिर से बाधित करने की धमकी के बाद, इस बयान ने वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं और अधिक बढ़ा दी हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के हवाले से सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने स्पष्ट किया है कि बैठक में शामिल होने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। दोनों देशों की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं, जिससे तनाव चरम पर है। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ लहजे में कहा कि उन्हें शांति की बजाय बमबारी की उम्मीद है। दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान के तरकश में अभी कई तीर बाकी हैं।
इस्राइल और लेबनान के बीच छह हफ्तों से जारी भीषण जंग में अब तक 2,454 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में 7,658 लोग घायल हुए हैं। 2 मार्च से शुरू हुए इस संघर्ष के बीच फिलहाल 10 दिनों का नाजुक संघर्षविराम जारी है। इस शांति के दौरान बचाव दल मलबे से शवों को निकालने और उनकी पहचान करने में जुटे हैं। भारी बमबारी वाले इलाकों में अब भी राहत कार्य तेजी से चल रहा है।
आपदा प्रबंधन इकाई युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय है। रेस्क्यू टीमें मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। शिनाख्त की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अस्पताल घायलों के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस अस्थाई शांति पर टिकी हैं। फिलहाल पूरे देश में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच खबर आई कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी मालवाहक जहाज को घेराबंदी कर जब्त कर लिया। अमेरिका का आरोप है कि इस जहाज में मिसाइलें बनाने के लिए खतरनाक रासायनिक सामग्री ले जाई जा रही थी। कार्रवाई के दौरान जब जहाज ने रुकने के आदेश को अनसुना किया, तो अमेरिकी युद्धपोत ने उस पर फायरिंग भी की। इसके बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने डेक पर उतरकर जहाज को अपने नियंत्रण में ले लिया।
ईरान ने इस कार्रवाई को 'समुद्री डकैती' बताते हुए चेतावनी दी है कि कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस बीच पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली के उन दावों को चीन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि यह जहाज चीन से ईरान की मदद के लिए जा रहा था। चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे महज 'दुष्प्रचार' बताया है। इस तनाव का सीधा असर शांति प्रयासों पर पड़ा है।
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी मालवाहक जहाज तूसका को जब्त किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से जारी फुटेज में नौसैनिकों को हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर उतरते और इंजन रूम को निष्क्रिय करते दिखाया गया है। अब ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने इसे 'समुद्री डकैती' बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान किसी भी वादाखिलाफी का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने चालक दल और उनके परिवारों की तत्काल रिहाई की मांग की है। यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का सीजफायर 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि इस उकसावे वाली कार्रवाई से उत्पन्न होने वाले किसी भी परिणाम की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी।
हंगरी के नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हंगरी की यात्रा पर आते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री माग्यार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के नियमों के तहत होगी, क्योंकि नेतन्याहू के खिलाफ पहले से गिरफ्तारी वारंट जारी है।
स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मैग्यार ने कहा कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ ICC का वारंट मौजूद है, यदि वे हंगरी की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जाएगा।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हंगरी अंतरराष्ट्रीय अदालत का सदस्य बना रहेगा और पिछली सरकार द्वारा ICC से बाहर निकलने के फैसले को भी वापस लिया जाएगा।
अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी की नेता और भारतीय मूल की निक्की हेली ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा जब्त किए गए ईरानी जहाज में चीन से भेजी गई मिसाइलों से जुड़ी केमिकल सामग्री मौजूद थी। हेली के अनुसार, यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और बार-बार रुकने के आदेश के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि चीन की भूमिका अब छिपी नहीं रह गई है और वह ईरान को परोक्ष रूप से समर्थन दे रहा है।
गाजा पट्टी एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गई है, जहां उत्तरी तट के पास इस्राइली नौसेना की गोलीबारी में एक फलस्तीनी महिला की मौत हो गई। अल जजीरा अरबी की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब इस्राइली युद्धपोतों ने समुद्री क्षेत्र में मौजूद लोगों को निशाना बनाया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि सोमवार को हुए अलग-अलग इस्राइली हमलों में कुल पांच फलस्तीनियों की जान चली गई, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। बातचीत में प्रमुख विवाद बिंदु लगातार बाधा बने हुए हैं:-
पिछले कुछ घंटों में कूटनीतिक स्तर पर तेज गतिविधियां देखी गई हैं, खासकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री की ओर से। वह ईरानी अधिकारियों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि ईरान ने आधिकारिक रूप से बातचीत से इनकार नहीं किया है। अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
संकेत यह भी मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह किसी कमजोर स्थिति में बातचीत नहीं करना चाहता। इस बीच, ईरान ने होर्मुज में अमेरिकी हमलों के जवाब में बदला लेने की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि वह इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। हालांकि, अभी तक किसी तरह की जवाबी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
ईरानी सेना का कहना है कि कई जहाजों पर परिवार और आम नागरिक मौजूद हैं, इसलिए सावधानी बरती जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरान और अमेरिका दोनों के बीच सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बना हुआ है।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस्राइल और लेबनान के बीच गुरुवार को वॉशिंगटन डीसी में दूसरे दौर की बातचीत होगी। इस्राइल सरकार इस प्रक्रिया पर ज्यादा कुछ नहीं कह रही है, क्योंकि यह बातचीत उसकी अपनी पसंद से शुरू नहीं हुई है।
इस्राइल में यह माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया वास्तव में अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से थोपी गई है, ठीक उसी तरह जैसे युद्धविराम की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। इस्राइल की मांगें बहुत सख्त और अधिकतम हैं। वह अभी भी लेबनान के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा बनाए हुए है।
उसने एक तथाकथित 'यलो लाइन' घोषित की है, ठीक वैसे ही जैसे गाजा में किया गया था, जहां वह धीरे-धीरे कई लेबनानी गांवों को नष्ट कर रहा है। यह 'येलो लाइन' लेबनान के एक तेल और गैस क्षेत्र तक भी फैली हुई है। इस्राइल इसे भविष्य की किसी भी बातचीत में एक दबाव या सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
पिछले बयानों के अनुसार, इस्राइल लेबनान सरकार को कमजोर मानता है, लेकिन उस पर हिजबुल्ला को हथियार छोड़ने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहा है। इस्राइल की यही मुख्य मांग है। इस्राइल का रुख यह है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कब्जा और कार्रवाई जारी रहेगी और गांवों को निशाना बनाना भी जारी रहेगा।
ईरान की संसद के अध्यक्ष और वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि देश धमकियों के दबाव में किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर वार्ता विफल होती है तो ईरान ने नई सैन्य क्षमताओं की तैयारी भी कर ली है।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ट्रंप घेराबंदी करके और युद्धविराम का उल्लंघन करके अपनी कल्पना में इस बातचीत की मेज को समर्पण की मेज बनाना चाहते हैं या फिर नए युद्ध को उचित ठहराना चाहते हैं।उन्होंने आगे कहा, हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते। पिछले दो हफ्तों में हमने जंग के मैदान में नए कदम और नई क्षमताओं को सामने लाने की तैयारी की है।
इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के नबातिएह जिले में स्थित काकाऐत अल-जिस्र कस्बे को निशाना बनाया है। इस्राइली हवाई हमले में छह लोग घायल हो गए हैं। अल जजीरा ने देश की सरकारी समाचार एजेंसी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला उस समय हुआ है, जब स्थानीय इस्राइल शुक्रवार से लागू युद्धविराम के बावजूद लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है।