अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा गुप्त समझौता होने जा रहा है, जिसके तहत अमेरिका विदेशों में फ्रीज यानी जब्त किए गए 25 अरब डॉलर के ईरानी फंड को सीधे कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइनों के जरिए जारी करने पर सहमत हो गया है। रॉयटर्स के अनुसार, इस ऐतिहासिक त्रिपक्षीय मसौदे में ईरान को बड़ी राहत देते हुए अमेरिकी तेल प्रतिबंधों में एक निश्चित अवधि के लिए अस्थायी छूट देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जिससे तेहरान को फिर से कच्चे तेल का निर्यात शुरू करने और उससे होने वाली कमाई का उपयोग करने की अनुमति मिल जाएगी।
टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी इस्राइल के एक सैन्य क्षेत्र पर आज तीसरी बार हिजबुल्लाह के ड्रोन ने हमला किया। इस्राइली सेना (आईडीएफ) के अनुसार, यह संदिग्ध ड्रोन लेबनान की सीमा के पास स्थित सैन्य इलाके में गिरा। राहत की बात यह है कि आज हुई इस तीसरी घटना में भी कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ है। इस्राइली सेना ने कहा है कि इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
लेबनान सीमा के पास दो संदिग्ध हवाई हमलों के बाद उत्तरी इस्राइल में हवाई हमले के सायरन बजने लगे। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइली सेना ने उत्तरी इस्राइल के कुछ हिस्सों में सायरन बजने की पुष्टि की है, जिसे उसने शत्रु विमान की घुसपैठ बताया है।
सेना ने कहा कि इस्राइल-लेबनान सीमा के पास इस्राइली क्षेत्र को निशाना बनाकर दो संदिग्ध हवाई हमले किए गए थे। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
ईरान के मशहद शहर में दर्जनों लोगों ने अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची को घुसपैठिया बताते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की। कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि यह समझौता ईरान के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण कमजोर होगा और वार्ताकारों ने बहुत अधिक रियायतें दी हैं। अराघची ने कहा था कि समझौते के तहत अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से समुद्री नाकेबंदी हटा लेगा। उन्होंने यह भी माना कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रशासन अब पहले जैसा नहीं रहेगा। तेहरान में भी ऐसे ही प्रदर्शनों की खबरें आई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए रविवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर बताया कि इस समझौते के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुल जाएगा। पाकिस्तान ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। रविवार को एक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित हो सकता है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस समयसीमा पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान और पूरे पश्चिम एशिया के साथ भविष्य में काम करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया जल्दी और आसानी से पूरी हो जाएगी। साथ ही, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर यह समझौता सफल नहीं होता है, तो अमेरिका के पास एक 'अंतिम विकल्प' भी मौजूद है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच जल्द होने वाले समझौते की खबरों ने इस्रायल की चिंता बढ़ा दी है। इस्रायली मीडिया और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से ईरान का प्रभाव और बढ़ेगा। इस्रायली अखबार 'मारिव' के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैन्य मोर्चे पर तो जीत हासिल की, लेकिन राजनीतिक लड़ाई में वह ईरान से हार गए। अखबार ने लिखा कि इस्रायल इस समझौते की शर्तों को बदलने में नाकाम रहा है। यह इस्रायल के राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी विफलता है। 'वाईनेट' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्रायली अधिकारी इस बात से परेशान हैं कि बातचीत में उनकी कोई भूमिका नहीं रही। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे बुरा समझौता करार दिया है। वहीं, 'हारेत्ज' अखबार का कहना है कि ईरान ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत के दम पर अमेरिका को झुकने पर मजबूर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान अब केवल खुद को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि वह एक बड़ी क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है। अमेरिका के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है और वह केवल काम चलाऊ रास्ता अपना रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक समझौता करने जा रहे हैं। इस समझौते की मुख्य शर्त यह है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी टैक्स या टोल के खोलना होगा। जैसे ही ईरान इसे खोलेगा, अमेरिका अपनी समुद्री पाबंदियां हटा लेगा। इसके बाद समुद्र से बारूदी सुरंगें हटाने का काम शुरू होगा। इस काम में ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश भी मदद करेंगे।
इस बीच पश्चिम एशिया से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं में इस्राइल की कोई भागीदारी नहीं है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका देश इस समझौता वार्ता का हिस्सा नहीं बनेगा और किसी भी प्रस्तावित डील में शामिल नहीं होगा।
ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार को बताया कि ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें दफनाने के साथ संपन्न होगा। फरवरी में ईरान पर इस्राइली और अमेरिकी हमलों में खामनेई मारे गए थे। उनकी मौत के साथ ही उनके तीन दशक लंबे कार्यकाल का अंत हो गया।
इस्राइली हमले के कारण अमेरिका-ईरान शांति समझौते में कुछ घंटों की देरी: डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हुए इस्राइली हमलों के कारण अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते में कुछ घंटों की देरी हो गई है। ट्रंप ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस हमले से वह हैरान रह गए थे। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता रविवार को ही इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन होना था, जो अब कुछ घंटे बाद होगा, जबकि अगले हफ्ते यूरोप में दोनों देश आमने-सामने बैठकर इस पर हस्ताक्षर करेंगे। फिलहाल, ट्रंप ईरान के संपर्क में भी हैं ताकि उसे इस इस्राइली हमले का जवाब देने से रोका जा सके।
पिछले 24 घंटे में ईरान से जुड़े कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें अमेरिका के साथ संभावित समझौते से लेकर रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण तक के मुद्दे शामिल हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
1. समझौते की शर्तों पर अटकलों से बचने की अपील
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों पक्ष पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं। उन्होंने मीडिया और विश्लेषकों से अपील की कि वे समझौते की शर्तों को लेकर किसी भी तरह की अटकलें न लगाएं।
2. जिनेवा डील साइन की खबरें खारिज
तेहरान ने स्पष्ट किया है कि 14 जून को जिनेवा में किसी समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। ईरान ने कहा कि फिलहाल प्रक्रिया जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
3. भारतीय जहाजों पर हमलों को लेकर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने एक बार फिर अमेरिकी राजनयिक को तलब कर उन घटनाओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिनमें भारतीय नाविकों से जुड़े जहाजों पर हमले की बात सामने आई है। भारत ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
4. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का सख्त रुख
ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश का पूरा नियंत्रण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जहाज को ईरान की अनुमति के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर अभी कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरानी बातचीत टीम के अगले कुछ दिनों में जिनेवा या इस्लामाबाद जाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अभी समझौते के हस्ताक्षर की सही तारीख का इंतजार करना होगा। बघाई ने यह भी साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि समझौता अगले कुछ दिनों में संभव है, लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार हो रहे इस समझौते का उद्देश्य युद्ध को रोकना है, लेकिन इसमें फिलहाल परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है।