रक्षा मंत्री ने शुभांशु को आशीर्वाद दिया- शंभू दयाल शुक्ला
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, 'हम शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित लैंडिंग के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं... रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुभांशु शुक्ला को आशीर्वाद दिया और हमें शुभकामनाएं दीं'।
रक्षा मंत्री ने शुभांशु शुक्ला के पिता से बातचीत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला से बात की। शुभांशु 18 दिन बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी पर लौटे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनकी वापसी पर खुशी जताई और उनके पिता से कहा कि पूरे देश को उन पर गर्व है। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक एक्सिओम-4 मिशन से सफल वापसी हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने न केवल अंतरिक्ष को छुआ है, बल्कि भारत की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक उनकी यात्रा और वापसी केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए एक गौरवपूर्ण कदम है। मैं उनके भविष्य के प्रयासों में उन्हें अपार सफलता की कामना करता हूं।'
यह पूरे देश के लिए बहुत गौरव का क्षण- शुचि मिश्रा
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की बहन शुचि मिश्रा ने कहा, 'वो वापस आ गए हैं। यह पूरे देश के लिए बहुत गौरव का क्षण है...हम बहुत उत्साहित हैं'।
भगवान ही उसे अंतरिक्ष और वापस यहां सुरक्षित ले आए- आशा शुक्ला
वहीं भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला ने कहा, 'मैं इस चीज को शब्दों में बयान नहीं कर सकती हूं। जब लैंड हो रहा था तब बस थोड़ा डर लगा था लेकिन सब अच्छे से हो गया है ईश्वर साथ में हैं, उन्होंने उसे वहां पहुंचाया था और उन्होंने ही उसे सुरक्षित लैंड कराया है'।
भारत ने अंतरिक्ष में स्थायी स्थान प्राप्त किया- जितेंद्र सिंह
वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, 'भारत ने आज अंतरिक्ष की दुनिया में सचमुच एक स्थायी स्थान प्राप्त कर लिया है। यह भारत के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि हमारा एक यशस्वी पुत्र सफल यात्रा पूरी करके वापस लौट रहा है'।
ड्रैगन कैप्सूल से बाहर आए शुभांशु शुक्ला
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ड्रैगन कैप्सूल से बाहर आ गए हैं। इसके साथ ही उनकी 18 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी हो गई है।
पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला के सकुशल धरती पर लौट आने पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें पीएम मोदी ने लिखा 'मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।'
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के सकुशल धरती पर लौटने पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'भारत ने आज अंतरिक्ष की दुनिया में एक चिरस्थायी मुकाम हासिल कर लिया है। यह भारत के लिए गर्व का पल है कि हमारा बेटा सकुशल धरती पर लौट आया है।'
धरती पर सकुशल उतरा शुभांशु शुक्ला का यान। प्रशांत महासागर में यान सफल स्प्लैशडाउन हुआ। यान के समुद्र में उतरते ही पूरा देश खुशी से झूम उठा। इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया। जैसे ही शुभांशु शुक्ला औऱ क्रू के अन्य सदस्यों को लेकर यान समुद्र में उतरा, देश में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। शुभांशु के माता-पिता भावुक और गौरवान्वित होते हुए इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
शुभांशु शुक्ला के यान के पैराशूट खुल गए हैं और अब कुछ ही मिनटों में यान समुद्र में उतरेगा। यान फिलहाल धरती से 800 मीटर की दूरी पर है।
मिशन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है कि ड्रैगन स्पेसयान का नासा के केंद्र के साथ संचार स्थापित हो गया है और अब यान धरती की तरफ बढ़ रहा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने हरिद्वार में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित धरती पर वापसी के लिए विशेष पूजा की।
एक्सिओम-4 मिशन का संचालन करने वाली कंपनी एक्सिओम स्पेस ने बताया है कि अभी तक पूरी प्रक्रिया तय तरीके से चल रही है और सबकुछ सामान्य है। अब से कुछ ही मिनटों बाद शुभांशु शुक्ला और क्रू के अन्य सदस्य धरती पर समुद्र में स्प्लैशडाउन करेंगे।
शुभांशु शुक्ला के स्प्लैशडाउन को लाइव देखने के लिए शुभांशु शुक्ला के माता-पिता उनके स्कूल सिटी मॉन्टेसरी पहुंचे हैं। दोनों ने कहा कि वे इस पल का साक्षी बनने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने डी-ऑर्बिट बर्न प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके जरिए यान धरती के वायुमंडल में दाखिल होगा। जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी की परिक्रमा करने के बाद उसे धरती पर उतारा जाएगा तो उसकी गति को कम किया जाएगा। इसके लिए यान गति को कम करने के लिए अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर्स (छोटे इंजन) को एक निश्चित समय और दिशा में दागा जाता है। इस प्रक्रिया को ही ‘डी-ऑर्बिट बर्न’ कहते हैं। यह प्रक्रिया करीब 18 मिनट चलेगी।
शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित घर वापसी के लिए आज उनके लखनऊ स्थित घर में सुंदरकांड का पाठ किया जा रहा है। शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला ने बताया कि 'हम शुभांशु की वापसी को लेकर बेहद उत्साहित हैं और हमें अपने बेटे की वापसी का इंतजार है। हम उनके लिए प्रार्थनाएं कर रहे हैं। हम सुबह मंदिर गए और भगवान हनुमान के दर्शन किए। हमने सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। हमें गर्व है कि हमारा बेटे का नाम इतिहास में दर्ज हुआ।'
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की आज धरती पर वापसी को लेकर उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला बेहद उत्साहित और खुश हैं। उन्होंने कहा कि इस स्प्लैशडाउन को इतिहास में याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 'हमारा बेटा आज मिशन पूरा कर धरती पर वापस लौट रहा है, इसे लेकर हम बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने हमें बेहद गौरवान्वित किया है। यह इतिहास में दर्ज होगा। हम उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए दुआ कर रहे हैं। यह पूरे देश के लिए खुशी का दिन है। मैं देशवासियों की दुआओं के लिए उनका धन्यवाद देता हूं। वह हमारा बेटा है, लेकिन साथ ही वह पूरे देश का भी है।'
शुभांशु शुक्ला और क्रू के अन्य सदस्यों के धरती पर सुरक्षित उतरने के बाद उन्हें सात दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। दरअसल 18 दिन शून्य गुरुत्वाकर्षण में बिताने के बाद अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में सामंजस्य बिठाने में कुछ दिन का वक्त लग जाता है। इस दौरान उनकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा निगरानी की जाएगी। भारत लौटने से पहले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक जांच से गुजरना होगा।
शुभांशु शुक्ला के गृहनगर लखनऊ में गजब उत्साह है। शहर भर में जगह-जगह ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पोस्टर लगे हुए हैं, जिनमें उन्हें शुभकामनाएं दी गई हैं। पूरा लखनऊ शहर अपने बेटे की वापसी का इंतजार कर रहा है और शहर के लोग दुआएं कर रहे हैं। शुभांशु शुक्ला के घर को रोशनी से सजाया गया है और घर पर उत्सव जैसा माहौल है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए। इस दौरान उन्होंने 60 प्रयोगों को अंजाम दिया, जिनमें से सात प्रयोग इसरो के थे। शुभांशु अपने साथ 263 किलो वैज्ञानिक सामान लेकर धरती पर लौट रहे हैं, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष कार्यक्रमों को बड़ी मदद मिल सकती है। साल 2027 में इसरो अपना पहला मानव मिशन गगनयान लॉन्च करेगा। ऐसे में शुभांशु शुक्ला का यह मिशन इसरो के लिए बेहद अहम है। शुभांशु शुक्ला को एक्सिओम-4 मिशन पर भेजने के लिए भारत ने 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे हीट शील्ड को तैयार किया गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इसके बाद करीब ढाई बजे हीट शील्ड पृथ्वी के वायुमंडल में तेजी से आगे बढ़ेगी, जिसके चलते हीट शील्ड का तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा और यही चरण सबसे चुनौतीपूर्ण होगा। दरअसल जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी की परिक्रमा करने के बाद उसे धरती पर उतारा जाएगा तो उसकी गति को कम किया जाएगा। इसके लिए यान गति को कम करने के लिए अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर्स (छोटे इंजन) को एक निश्चित समय और दिशा में दागा जाता है। इस प्रक्रिया को ही ‘डी-ऑर्बिट बर्न’ कहते हैं।
धरती के वायुमंडल में सफलतापूर्वक दाखिल होने के बाद धरती की सतह से करीब 5.7 किलोमीटर ऊपर कैप्सूल का पहला पैराशूट खुलेगा और जब कैप्सूल धरती से दो किलोमीटर ऊपर रह जाएगा, तब दूसरा पैराशूट खुलेगा। इसके बाद कैप्सूल दोपहर करीब तीन बजे कैलिफोर्निया के समुद्र में लैंड होगा। नासा के विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी एक प्राकृतिक कुशन की तरह काम करता है, जो कठोर जमीनी लैंडिंग की तुलना में अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ने वाले प्रभाव बल को कम करता है। यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग के लिए जमीन के बजाय समुद्र का चुनाव किया जाता है। इसे स्प्लैशडाउन कहा जाता है।
शुभांशु शुक्ला की 8 चरण में धरती पर वापसी होगी। पहले चरण में सोमवार शाम 4.45 बजे शुभांशु शुक्ला और एक्सिओम-4 मिशन के क्रू के अन्य सदस्यों को लेकर ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट आईएसएस से अलग हुआ। शाम 5.11 बजे कैप्सूल का इंजन बर्न ऑन किया गया।
शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत 25 जून को तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पहुंचने वाले शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय हैं। शुभांशु ने आईएसएस पर 18 दिन बिताए और इस दौरान वहां कई रिसर्च कार्य किए।