व्हाइट हाउस में अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन में बढ़ते तनाव और रूस की आक्रमता पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबंधों की रूपरेखा मीडिया के सामने रखी। संबोधन का संक्षिप्त विवरण:-
•अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन के साथ बढ़े तनाव में रूस स्पष्ट रूप से हमलावर है।
• बाइडन ने पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देने के पुतिन के फैसले की निंदा की, इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
• दो वित्तीय संस्थान वीईबी और रूस के सैन्य बैंक अब प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। रूसी अभिजात वर्ग और उनके परिवारों के खिलाफ और प्रतिबंधों लगाए जाने की संभावना है।
•अमेरिका यूक्रेन को और अधिक रक्षात्मक सहायता भेज रहा है और बाल्टिक सहयोगियों के साथ अमेरिकी सेना तैनात कर रहा है, जो नाटो के सदस्य हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रपति ने किसी प्रश्न का जवाब नहीं दिया, उम्मीद है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी आज की ब्रीफिंग में इस पर प्रकाश डाला जाएगा।
बाइडन ने दो बैंकों के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। इसे उन्होंने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की "पहली किश्त" बताया। बाइडन ने दो बड़े बैंकों- वीईबी (VEB) और रूसी सैन्य बैंक से जुड़े व्यापार को अवरुद्ध करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों से रूसी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों को काटने की घोषणा की। बाइडन ने कहा कि ये कदम पिछले उपायों से "बहुत आगे" हैं और रूसी सरकार को अपने संप्रभु ऋण के लिए पश्चिमी वित्तपोषण से दूर कर देंगे।
बाइडन ने कहा कि उनका रूस से लड़ने का कोई इरादा नहीं है- लेकिन नाटो क्षेत्र के हर इंच की रक्षा करने का संकल्प लिया है। बाइडन ने उन रिपोर्टों का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि रूस यूक्रेन के साथ लगती सीमा के पास ब्लड की आपूर्ति को स्टॉक कर रहा है, इसी के साथ बाइडन ने कहा कि जब तक आप युद्ध शुरू करने का इरादा नहीं रखते तब तक आपको ब्लड की आवश्यकता नहीं है। यानी पुति के इरादों से साफ पता चलता है कि रूस युद्ध की तैयारी कर रहा है।
बाइडन ने कहा कि मैं रूस के खिलाफ पहले शुरुआती प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा हूं। उन्होंने संप्रभु ऋण से जुड़े प्रतिबंधों की घोषणा की। बाइडन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का आशय रूसी सरकार को पश्चिम से आर्थिक तौर पर अलग-थलग करना है। उन्होंने कहा कि रूस अब पश्चिम से धन नहीं जुटा सकता है। रूस अड़ा रहा तो अमेरिका प्रतिबंधों को बढ़ाना जारी रखेगा।
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि उन्होंने पूर्वी यूरोप में सहयोगियों के लिए अमेरिकी सेना की अतिरिक्त आवाजाही को अधिकृत कर दिया है। अपने भाषण में, बाइडन ने कहा कि बल और उपकरण - जो पहले से ही यूरोप में हैं - को एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के बाल्टिक देशों में भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि "मैं स्पष्ट कर दूं, ये हमारी ओर से रक्षात्मक कदम हैं।" "रूस से लड़ने का हमारा कोई इरादा नहीं है।" बाइडन ने कहा कि यह तैनाती, अमेरिकी सहयोगियों को एक संदेश भेजने के लिए है कि वह नाटो क्षेत्र की रक्षा करेगा और अपनी संधि प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।
बाइडन ने कहा कि नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन प्रोजेक्ट आगे न बढ़े इसके लिए वह जर्मनी के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूस आक्रामकता जारी रखता है तो उसे और भी कड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसमें और भी कड़े प्रतिबंध शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" कर रहा है। जो बाइडन ने पूछा कि पुतिन को अपने पड़ोसियों के क्षेत्र में नए तथाकथित देशों को घोषित करने का अधिकार कौन देता है?" अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह "अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन" है।
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि उनका मानना है कि "पुतिन बहुत आगे जाने और बल द्वारा अधिक यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा करे के लिए "एक तर्क" स्थापित कर रहे हैं। यह यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की शुरुआत है।" उन्होंने सोमवार को पुतिन के भाषण और डोनबास में सैनिकों को भेजने के लिए ड्यूमा प्राधिकरण का हवाला देते हुए यह बात कही।
व्हाइट हाउस में देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि पुतिन ने डोन्त्सक और लुहांस्क के बार में "विचित्र रूप से" दावा किया कि उन्होंने दो क्षेत्रों को स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता दे दी है, जो अब यूक्रेन का हिस्सा नहीं हैं। रूस यूक्रेन के कुछ हिस्सों को अलग कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये क्षेत्र और भी अधिक गहरे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अपने संबोधन की शुरुआत कर रहे हैं, जहां उनके रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा करने की उम्मीद है।
पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी-नियंत्रित क्षेत्रों को मान्यता देने के निर्णय के बाद रूस पर यूरोपीय संघ की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की जानकारी देते हुए यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख, जोसेप बोरेल ने पेरिस में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि "प्रतिबंध रूस को नुकसान ही नहीं पहुंचाएंगे- बल्कि बहुत नुकसान पहुंचाएंगे।" बोरेल ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के साथ मजबूत समन्वय में यूरोपीय संघ के मंत्रियों ने सर्वसम्मति से प्रतिबंधों पर सहमति व्यक्त की है।
रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ की ओर से उठाए गए कदम के बारे में बात करते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रूस द्वारा पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी-नियंत्रित क्षेत्रों को मान्यता देने के निर्णय से जुड़े रूसी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की गई है। इनमें मास्को के संसद के निचले सदन के सांसदों को साधने के उपाय शामिल हैं, जिन्होंने मान्यता के लिए मतदान किया था। वे रूसी बैंकों और यूरोपीय संघ के वित्तीय बाजारों तक पहुंचने के लिए रूसी राज्य की क्षमता को भी लक्षित करेंगे। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह उपाय व्यापक और कठिन होंगे। उन्होंने कहा कि "हम क्रेमलिन के लिए अपने आक्रामक कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जितना संभव हो उतना कठिन बना देंगे।"
रूस ने यूक्रेन से अपने राजनयिक कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि "हमारी पहली प्राथमिकता रूसी राजनयिकों और दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के कर्मचारियों की देखभाल करना है।"
नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने मंगलवार को कहा कि गठबंधन का मानना है कि रूस अभी भी यूक्रेन पर एक बड़े हमले की योजना बना रहा है। मास्को ने पूर्व सोवियत गणराज्य के दो अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता दी है। उन्होंने कहा "यह संकेत है कि रूस पूर्ण पैमाने पर यूक्रेन में हमले की योजना बना रहा है।" स्टोलटेनबर्ग ने ब्रुसेल्स में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा। "हम रूस से पीछे हटने का आह्वान करना जारी रखते हैं ... अभी इतनी देर नहीं हुई है, हमले को रोका जा सकता है।"
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रीमिया को रूस के हिस्से के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सदस्यता लेने की यूक्रेन की कोशिश को रोकने और वहां हथियारों की खेप भेजे जाने पर रोक लगाने का मंगलवार को आह्वान किया। पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप पर 2014 में रूस के कब्जे को स्थानीय लोगों की इच्छा के वैध प्रतिबिंब के तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जानी चाहिए और इसकी तुलना कोसोवो स्वतंत्रता के लिए किए गए वोट से की जानी चाहिए। पश्चिमी देश क्रीमिया पर कब्जे की व्यापक स्तर पर आलोचना करते रहे हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को यूक्रेन संकट को लेकर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के पास अब सबसे अच्छा फैसला यही बचा है कि वह नाटो का सदस्य बनने की कोशिश और सोच को पूरी तरह छोड़ दे और अपने सभी हथियारों को त्याग कर पूरी तरह हथियार मुक्त हो जाए। यहां क्लिक कर पढ़ें पुतिन का पूरा बयान...
यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को लेकर निकलने वाली एयर इंडिया की विशेष फ्लाइट रात 11.30 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचेगी। इसमें 241 यात्री सवार हैं। बताया गया है कि पहले इस फ्लाइट को रात 10.15 बजे ही भारत पहुंचना था, लेकिन कुछ कारणों से विमान को यूक्रेन से ही उड़ान भरने में देर हो गई।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को पश्चिमी देशों को यूक्रेन पर आखिरी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि संसद की तरफ से सेना को बाहर कार्रवाई की मंजूरी मिल जाने के बाद हमारे पास सभी रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा कि डोनेत्स्क और लुहांस्क में उनकी सेना अलगाववादियों से समझौते के तहत तैनात होगी। पुतिन ने कहा कि अब भी अगर यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की बात न हो तो पूरे मसले का हल निकल सकता है।
रूस की संसद के उच्च सदन ने राष्ट्रपति पुतिन के उस प्रस्ताव पर एकमत से मुहर लगा दी, जिसमें सैन्य बलों को यूक्रेन भेजने की बात कही गई थी। इसके बाद अब रूस यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में अपनी सैन्य टुकड़ी को भेज सकता है। गौरतलब है कि रूस अपने इस कदम को डोनेत्स्क और लुहांस्क में शांति कायम करने से जुड़ा बताता रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन यूक्रेन को लेकर उठाए गए रूस के कदमों का जवाब देने के लिए भारतीय समयानुसार रात 12.30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। बाइडन इसमें रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य कदम उठाने के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
बोरिस जॉनसन ने रूस के पांच बैंकों पर प्रतिबंध लगाने का एलान कर दिया। इनमें रोसिया, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रोमस्याज बैंक और द ब्लैक सी बैंक शामिल हैं।
यूरोप में युद्ध की आहट के बीच यूक्रेन के अलगाववादी नियंत्रित क्षेत्रों में सैनिक तैनात करने के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश से दुनियाभर के नेता स्तब्ध हैं और अब वे इस बात गौर कर रहे हैं कि कैसे इसपर अपनी प्रतिक्रिया को ज्यादा से ज्यादा प्रभावशाली बनाएं। जर्मनी ने पहला बड़ा कदम उठाया और रूस से ‘नॉर्ड स्ट्रीम 2’ गैस पाइपलाइन के प्रमाणन की प्रक्रिया को रोकने की कार्रवाई शुरू कर दी। यह मॉस्को के लिए एक आकर्षक सौदा था और रूसी ऊर्जा आपूर्ति पर यूरोप की निर्भरता बढ़ने की अमेरिका ने आलोचना की थी। पश्चिमी देशों का कहना है कि यूक्रेन में पुतिन के कदमों ने अनगिनत अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन किया है और चूंकि कूटनीति के शब्द विफल हो गए, इसलिए कार्रवाई की ओर बढ़ने का समय आ गया है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश आर्थिक प्रतिबंधों की पहली बमबारी करके रूस को निशाना बनाएगा। उन्होंने आगाह किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के खिलाफ पूर्ण युद्ध शुरू करने को लेकर अड़े हुए हैं। जॉनसन ने कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून को तार-तार कर दिया है इसलिए वह तुरंत आर्थिक प्रतिबंध लगाएंगे।
ब्रिटेन की तरफ से रूस पर सख्त प्रतिबंधों का एलान शुरू कर दिया गया है। इसके तहत ब्रिटेन ने सबसे पहले रूस के पांच बैंकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा तीन ऊंची नेटवर्थ वाले लोगों पर भी प्रतिबंधों का एलान हुआ है।
रूस-यूक्रेन विवाद पर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, "आज सुबह हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बयान में कहा है कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि तनाव कम होना चाहिए। दुनिया एक और संघर्ष नहीं चाहती। कूटनीति से ऐसा सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का एकमात्र तरीका है जो सभी को स्वीकार्य हो।"
ईंधन की कीमतों में वृद्धि और यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका के कारण यूरोपीय देशों के नेता ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि वे प्राकृतिक गैस के लिए दशकों तक मॉस्को पर निर्भर रहे हैं। किफायती दरों पर सीमापार गैस और बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2015 में “ऊर्जा संघ” बनाने की बात कही गई थी लेकिन अभी तक उस पर बहुत कम प्रगति हुई है। सौर तथा वायु ऊर्जा जैसे नवीकरणीय माध्यमों पर मंद गति से काम चल रहा है और अन्य जीवाश्म ईंधन खत्म होते जा रहे हैं इसलिए यूरोप को प्राकृतिक गैस की जरूरत है और इसके लिए वह रूस पर निर्भर है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी यूक्रेन को संकट लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा, "भारत यूक्रेन के मामले पर यही चाहता है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि वे रूस के राष्ट्रपति के साथ बात करेंगे। अगर इन दोनों की बातचीत होगी तो निश्चित तौर पर समाधान निकलेगा। जहां तक भारत की बात है भारत शांति चाहता है।"
रूस-यूक्रेन विवाद पर केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का भी बयान आया है। उन्होंने यूक्रेन में फंसे भारतीयों को लेकर कहा कि किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। भारतीय नागरिक हमारे दूतावास के संपर्क में रहें।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडाइमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वे रूस के साथ रिश्ते तोड़ने पर विचार कर रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देशों से रूस और जर्मनी के बीच शुरू होने वाली नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। गौरतलब है कि रूस के लिए नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन आर्थिक तौर पर काफी अहम है। यहां जानें क्या है नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन और कैसे रूस पर पड़ेगा प्रतिबंधों का फर्क...
यूक्रेन पर रूस के हालिया कदम के बाद यूरोपीय संघ भी प्रतिबंधों को लागू करने की तैयारी कर रहा है। विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बॉरेल ने कहा कि यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री रूस द्वारा दो शहरों को मान्यता दिए जाने और यूक्रेन के क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती के खिलाफ रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं।
यूक्रेन में जारी उच्च स्तरीय तनाव को देखते हुए भारत ने अतिरिक्त उड़ानों को संचालित करने का फैसला किया है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास के मुताबिक, कीव से दिल्ली के लिए चार उड़ानें 25 फरवरी, 27 फरवरी और 6 मार्च, 2022 को संचालित होंगी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में अमेरिका ने रूस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए रूस जिम्मेदार है। अमेरिका कल तक और कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि, यूक्रेन हमारा सहयोगी देश है। उस पर हमले की त्वरित प्रतिक्रिया दी जाएगी। इस समय कोई भी किनारे पर खड़ा नहीं हो सकता।