आज विश्व गेहूं की कमी का सामना कर रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देश खाद्य सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। उस दौरान भारत का किसान दुनिया का पेट भरने के लिए आगे आ रहा है। जब भी मानवता के सामने कोई संकट आता है, तो भारत हल के साथ सामने आता है। जो संकट लेकर आते हैं उन्हें संकट मुबारक, जो सॉल्यूशन लेकर आते हैं, उनका जयकारा। यही नए भारत का नारा है।
आज भारत में गवर्नेंस में टेक्नॉलॉजी का जिस तरह समावेश किया जा रहा है, वो नए भारत की नई पॉलिटिकल विल भी दिखाता है और डेमोक्रेसी की डिलीवरी क्षमता का भी प्रमाण है।
देश आगे बढ़ता है जब देश के लोग उसके विकास का नेतृत्व करें, देश आगे बढ़ता है, जब देश के लोग उसकी दिशा तय करें। अब आज के भारत में सरकार नहीं बल्कि देश के कोटि-कोटि जन ही ड्राइविंग फोर्स है।
पीएम ने कहा, अब जिस तरह तकनीक काम कर रही है उससे भारत की इच्छाशक्ति का पता चलता है। अब किसी प्रधानमंत्री को नहीं कहना पड़ेगा कि मैं एक रुपये दिल्ली से भेजता हूं, लेकिन सिर्फ 15 पैसे ही लोगों के हाथ में पहुंचते हैं। वो कौन सा पंजा था जो 85 पैसा घिस लेता था। बीते 7-8 साल में भारत सरकार ने डीबीटी के माध्यम से लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाया है।
पीएम ने कहा- पहले जहां जाओ लिखा होता था वर्क इन प्रोग्रेस। पहले हमारे यहां कहीं सड़क बनती है, फिर बिजली के लिए सड़क खोदी जाती है, फिर पानी के लिए खोद दी जाती है। फिर किसी और काम के लिए। ये इसलिए होता है क्योंकि सरकारी विभागों का न तो तालमेल होता है न साझेदारी। सबके पास रिपोर्ट कार्ड है, लेकिन परिणाम- वर्क इन प्रोग्रेस। इसे तोड़ने के लिए हमने पीएम गतिशक्ति मास्टरप्लान बनाया है। हम हर प्रोजेक्ट के लिए स्टेकहोल्डर्स को एक प्लेटफॉर्म पर लेकर आए हैं।
आज का आकांक्षी भारत, आज का युवा भारत, देश का तेज विकास चाहता है। वो जानता है कि इसके लिए राजनीतिक स्थिरता और प्रबल इच्छाशक्ति कितनी आवश्यक है। इसलिए भारत के लोगों ने तीन दशकों से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के वातावरण को एक बटन दबाकर खत्म कर दिया।
21वीं सदी का ये समय हमारे नौजवानों के लिए बहुत अहम है। आज भारत मन बना चुका है। और भारत ने वो मन बना लिया है। भारत आज संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। आज भारत को पता है कि कहां जाना है, कैसे जाना है, कब तक जाना है। जब किसी देश का मन बन जाता है, तो वह देश नए रास्तों पर भी चलता है, और मनचाही मंजिलों को प्राप्त कर के भी दिखाता है।
पीएम ने कहा, जर्मनी में काफी ठंड है, लेकिन कई बच्चे सुबह चार बजे से आ गए थे। मैं जर्मनी पहले भी आया हूं। मैं देख रहा हूं कि हमारी जो नई पीढ़ी है वो काफी बड़ी तादाद में नजर आ रही है। आपने यहां आने के लिए समय निकाला, मैं हृदय से आपका बहुत आभारी हूं। अभी हमारे राजदूत बता रहे थे कि संख्या के हिसाब से जर्मनी में भारतीय कम हैं। लेकिन आपके स्नेह में कोई कमी नहीं है।
न मैं आज आपसे मेरी बात करने आया हूं, न मोदी सरकार की बात करने आया हूं। लेकिन आज मन करता है कि जी भर के आप लोगों से करोड़ों भारतीय लोगों का गौरव गान करूं। मैं जब भारतीयों की बात करता हूं तो इसका ये मतलब नहीं कि वे लोग जो वहां रहते हैं, बल्कि वो भी जो यहां रहते हैं। मैं दुनिया के हर कोने में बसने वाले मां भारती के सपूतों की बात करना चाहता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बर्लिन में भारतीय समुदाय के सदस्यों के बीच पहुंचे। पीएम ने कहा, मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे जर्मनी में 'मां भारती' के बच्चों से मिलने का अवसर मिला। आप सभी से मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। आप में से कई लोग यहां बर्लिन आए हैं, जर्मनी के विभिन्न शहरों से आए हैं।
दोनों पक्षों के भाग लेने वाले मंत्रियों और अधिकारियों ने आईजीसी के विभिन्न पहलुओं संबंधी अपनी बैठकों पर संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें विदेशी, सुरक्षा, आर्थिक, वित्तीय नीति, वैज्ञानिक और सामाजिक विनिमय, जलवायु, पर्यावरण, सतत विकास और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अनुराग जैन ने भारत की ओर से प्रस्तुतियां दीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जर्मनी दौरे पर जर्मन और भारतीय कंपनियों के अधिकारियों से भी मुलाकात की। पीएम की चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर कई सरकारी अफसर भी शामिल रहे।
बर्लिन में जर्मन चांसलर ओलाफ़ शोल्ज ने मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर हमला कर रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। मैं व्लादिमीर पुतिन से अपनी अपील दोहराता हूं कि इसे खत्म करो और यूक्रेन से अपने सैनिकों को हटाओ।
पीएम मोदी ने कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि भारत और जर्मनी ने हरित हाइड्रोजन कार्यबल स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी के साथ भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता वार्ता में त्वरित प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।
पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमारी पिछली आईजीसी 2019 में हुई थी, तब से विश्व में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। कोविड-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव डाला है। हाल की जियो पॉलेटिकल घटनाओं ने भी दिखाया कि विश्व की शांति और स्थिरता कितनी नाजुक स्थिति में है और सभी देश कितने इंटरकनेक्टेड हैं।" उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक देशों के तौर पर भारत और जर्मनी कई कॉमन मूल्यों को साझा करते हैं। इन साझा मूल्यों और साझा हितों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।"
द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें पीएम मोदी ने कहा कि 2022 में यह मेरा पहला विदेश दौरा है। इससे समझा जा सकता है कि भारत यूरोप को कितनी प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा, "यूक्रेन के संकट के आरंभ से ही हमने तुरंत युद्धविराम का आह्वान किया और इस बात प जोर दिया कि विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत ही एकमात्र उपाय है। इस युद्ध में कोई विजय पार्टी नहीं होगी। सभी को नुकसान होगा। इसलिए हम शांति के पक्ष में हैं। यूक्रेन संकट में उथल-पुथल के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। दुनिया में फर्टिलाइजर की कमी हो रही है। इससे विकासशील और गरीब देशों पर बुरा असर होगा। इस संघर्ष के मानवीय प्रभाव से भारत बहुत चिंतित है। हमने अपनी तरफ से यूक्रेन को मानवीय सहायता भेजी है।"
दोनों नेताओं ने कारोबार को गति देने, सांस्कृतिक सम्पर्कों सहित द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘‘ भारत-जर्मनी सहयोग का विस्तार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर ओलाफ शोल्ज ने बर्लिन में मुलाकात की। ’’ प्रधानमंत्री मोदी की जर्मनी चांसलर शॉल्ज से यह पहली मुलाकात है जिन्होंने दिसंबर 2021 में पदभार ग्रहण किया है। पीएमओ ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर ओलाफ शोल्ज के बीच बर्लिन में वार्ता जारी। दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की जिसमें कारोबार को गति देने, सांस्कृतिक सम्पर्क आदि शामिल है। ’’
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को जर्मनी की अपनी समकक्ष एनालीना बेयरबॉक से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा की । जयशंकर यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आए शिष्टमंडल का हिस्सा हैं । उन्होंने कहा कि जर्मनी की विदेश मंत्री बेयरबॉक के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई है। जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ विदेश मंत्री बेयरबॉक के साथ अच्छी बातचीत हुई । हमने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की । यूक्रेन संघर्ष तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र के विषय पर चर्चा की । दोनों विदेश कार्यालयों के बीच सीधे विशिष्ट रूप में सम्पर्क को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए । ’’ विदेश मंत्री ने कहा कि अंतर सरकारी विचार विमर्श (आईजीसी) के पूर्ण सत्र में हिस्सा लेंगे ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज के बीच डेलिगेशन स्तर की वार्ता शुरू होने से पहले दोनों देशों के मंत्रियों ने फेडरल चांसलरी में साथ में फोटो खिंचाईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ़ स्कोल्ज़ ने बर्लिन में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज के बीच सोमवार को अहम मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई। दोनों के बीच बैठक बर्लिन की फेडरल चांसलरी में हुई। दोनों ही नेताओं के बीच रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर चर्चा की उम्मीद जताई गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बर्लिन में जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज से मिलने पहुंचे। यहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बर्लिन में संघीय चांसलर के लिए रवाना हुए, इस दौरान भारतीय प्रवासियों ने उनका अभिवादन किया।