बयान में क्या कहा गया?
जी-7 देशों ने कहा कि ट्रांसनेशनल रेप्रेशन न सिर्फ पीड़ितों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि हमारे देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर भी सीधा हमला है। इससे लोगों में डर का माहौल बनता है।
नेताओं ने कहा कि हम अपने समाज को सुरक्षित रखने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और ऑनलाइन और ऑफलाइन अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने के लिए और सख्त कदम उठाएंगे। साथ ही हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।