बेला सेंटर में भारत के पर्यटन पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि क्या आप अपने पांच गैर-भारतीय दोस्तों को हिंदुस्तान देखने के लिए भेज सकते हैं, उन्हें समझाइए कि हमारे यहां तमिलनाडु में ये है, बंगाल में ये है, ओडिशा में ये है। आपको पता है कि आप कितने ताकतवर बन जाओगे। फिर ये मत कहना कि वहां डायरेक्ट फ्लाइट नहीं आई। रोना-धोना करने वालों का यह काम नहीं है। एक जमाना था, जब हवाई यात्राएं नहीं थीं। मेरा देश ऐसा था कि लोग पैदल चलकर मेरे देश आए हैं। ये काम राजदूत का नहीं है, राष्ट्रदूतों का है। राजदूत एक होता है, राष्ट्रदूत लाखों की संख्या में होते हैं।
लगभग 75 महीने पहले हमने स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम शुरू किया था। तब स्टार्ट अप इकोसिस्टम के रूप में हमारी गिनती कहीं नहीं होती थी। आज हम यूनिकॉर्न्स के मामले में दुनिया में नंबर-3 पर हैं।आज स्टार्ट अप्स के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम हिंदुस्तान है।
भारत की ताकत जब बढ़ती है तो दुनिया की ताकत बढ़ती है। फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड की भूमिका में भारत ने मुश्किल समय में पूरी दुनिया का साथ दिया है, अनेकों देशों को दवाइयां भेजी हैं ताकि हम संकट के समय मानवता के इस काम में पीछे न रह जाए और दुनिया की मदद करते रहे।
क्लाइमेट एक्शन अभी तो सफल होता नजर नहीं आ रहा है। कुछ इक्के दुक्के अपवाद कुछ कर पाते होंगे। लेकिन हम कर पा रहे हैं इसका कारण यह है कि हम क्लाइमेट एक्शन को सरकारों की मल्टीलेटरल संस्थाओं की जिम्मेदारी के तौर पर देखते रहे हैं। जब तक समाज इसे पूरी तरह से स्वीकार न कर ले। मोदी-मोदी करने से नहीं होता है। ये इसलिए हो रहा है क्योंकि हर हिंदुस्तानी संकल्पबद्ध होकर खुद से जो हो सकता है, करता है। जब हर व्यक्ति इसे अपना दायित्व मानता है तो हम लक्ष्य से दूर नहीं रहते।
बेला सेंटर में भारतीय समुदाय को संबोधित करत हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा पहनावा खान पान भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हमारी वैल्यू-कोएक्जिसटेंस एक जैसी हैं। यही हमारी ताकत है। जिनकी जड़ें किसी भी तरह से भारत मां से जुड़ी हैं, वे रूल ऑफ लॉ के प्रति सम्मान रखते ही हैं। एक भारतीय दुनिया में कहीं भी जाए, वह अपनी कर्मभूमि के लिए पूरी ईमानदारी से योगदान देता है। जब मेरी विदेशी नेताओं से मुलाकात होती है, तो वे मुझे अपने देश के भारतीयों की उपलब्धियों को शान से बताते हैं। वे भारतीयों के नेचर की सराहना करते थकते नहीं। आप लोगों के व्यवहार और संस्कार के मूल में है ये। इसलिए मुझे जो बधाइयां मिल रही हैं, वह मैं आपको समर्पित करता हूं।
बेला सेंटर में भारतीय समुदाय को संबोधित करत हुए पीएम मोदी ने कहा, आप लोगों ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री का और मेरा यहां जो भव्य स्वागत किया, उसके लिए मैं आप सभी का बहुत आभारी हूं। आज प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन का यहां होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीयों के प्रति उनके दिल में कितना प्यार और सम्मान है।
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के कारण बहुत समय तक सभी की लाइफ एक तरह से वर्चुअल मोड में ही चल रही थी। पिछले साल जैसे ही आवाजाही मुमकिन हुई तो प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन पहली हेड ऑफ गवर्नेमेंट थीं जिनका हमें भारत में स्वागत करने का अवसर मिला। ये भारत और डेनमार्क के मज़बूत होते संबंधों को दिखाता है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारी ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, उनकी वैल्यूज से प्रेरित है। आज उनके साथ मेरी जो चर्चा हुई है, उस से दोनों देशों के संबंधों को नई ताकत मिलेगी, नई ऊर्जा मिलेगी।
कोपेनहेगन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने के लिए पीएम मोदी बेला सेंटर में मंच पर पहुंच चुके हैं। वे यहां डेनमार्क में रह रहे भारतीयों को कुछ ही देर में संबोधित करेंगे। इस मौके पर मंच पर उनके साथ डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन भी मौजूद हैं।
कोपेनहेगन में भारत-डेनमार्क बिजनेस फोरम के समापन के बाद पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इस दौरान भारतीयों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। पीएम मोदी कुछ देर में कोपेनहेगन भारतीयों को संबोधित भी करेंगे।
कोपेनहेगन में भारत-डेनमार्क बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। इसमें कोल्ड चेन, शिपिंग और पोर्ट जैसी चीजें भी अवसर प्रदान करती हैं। भारत अगली पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पीएम-गति शक्ति पर काम कर रहा है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने भारत-डेनमार्क के टॉप बिजनेस लीडर्स से मुलाकात की।
कोपेनहेगन में भारत-डेनमार्क बिजनेस फोरम में पीएम मोदी के फोमो वाले बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन ने कहा कि मैंने हमेशा सोचा था कि फोमो शुक्रवार नाइट या पार्टियों के बारे में था, लेकिन मैंने जाना कि यह भारत के बारे में है।
कोपेनहेगन में भारत-डेनमार्क बिजनेस फोरम में पीएम मोदी ने कहा कि इन दिनों सोशल मीडिया पर फोमो या 'फियर ऑफ मिसिंग' शब्द का प्रचलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों और निवेश के अवसरों को देखते हुए, मैं कह सकता हूं कि जो लोग हमारे देश में निवेश नहीं करते हैं वे निश्चित रूप से चूक जाएंगे।
पीएम मोदी और डेनमार्क की पीएम मेट फ्रेडरिकसेन के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। जिसमें दोनों पक्षों ने ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप में प्रगति की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने कौशल विकास, जलवायु, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्कटिक, पी2पी संबंधों आदि के क्षेत्रों में हमारे व्यापक सहयोग पर भी चर्चा की।
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और कानून के शासन जैसे मूल्यों को तो साझा करते हैं। आज हमने इंडो पैसिफिक और यूक्रेन समेत कई वैश्विक मुद्दों पर भी बात की है। हम आशा करते हैं कि इंडिया-ईयू ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जल्द पूरी होगी। हमने रूल बेस्ड और फ्री इंडो पैसिफिक क्षेत्र बनाने पर जोर दिया है। हमने यूक्रेन पर तत्काल युद्धविराम और इस मसले का हल बातचीत के जरिए करने पर जोर दिया है। भारत ग्लासगो कॉप 56 में लिए गए संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत और डेनमार्क के संबंध और ऊंचाईं पर जाएंगे।
समझौते के बाद पीएम मोदी और डेनिश प्रधान मंत्री मेट फ्रेडरिक्सेन ने साझा प्रेस कांफ्रेंस भी की। इस दौरान डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सेन ने कहा कि डेनमार्क और भारत हमारी ग्रीन एनर्जी साझेदारी को कुछ ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत सरकार की ग्रीन एनर्जी के लिए उच्च महत्वाकांक्षाएं हैं। मुझे गर्व है कि डेनमार्क इन महत्वपूर्ण महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डेनमार्क और पूरे यूरोपीय संघ ने यूक्रेन पर रूस के गैरकानूनी और अकारण आक्रमण की कड़ी निंदा की। मेरा संदेश बहुत स्पष्ट है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को रोकें और हत्याओं को समाप्त करना है। मुझे उम्मीद है कि भारत मामले पर रूस को भी प्रभावित करेगा। हमने यूक्रेन में नागरिकों के खिलाफ किए गए भयानक अपराधों और गंभीर मानवीय संकट के परिणामों पर चर्चा की। बूचा में नागरिकों की हत्या की खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं। हमने इन हत्याओं की निंदा की है। हमने इस मामले में एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। कोपेनहेगन में डेनिश पीएम मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि मैं भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2022 में हम दोनों के बीच कल भी अपने नॉर्डिक सहयोगियों के साथ चर्चा जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।
पीएम मोदी ने इस दौरान अपने स्वागत के लिए डेनमार्क का आभार जताया। उन्होने कहा कि साथ में हमने ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप के जॉइंट प्लान पर चर्चा की। विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी, शिपिंग, पोर्ट और वॉटर मैनेजमेंट में हमने प्रगति की है। 200 से अधिक डेनिश कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं – जैसे पवन ऊर्जा, शिपिंग, कंसल्टेंसी, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग आदि। इन्हें भारत में बढ़ते ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और हमारे व्यापक आर्थिक रिफार्म का लाभ मिल रहा है। डेनिश कंपनियों के लिए भारत में निवेश के कई अवसर हैं।
भारत और डेनमार्क ने कोपेनहेगन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और डेनिश प्रधान मंत्री मेट फ्रेडरिक्सेन की उपस्थिति में आशय पत्र और समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच उर्जा और शिक्षा क्षेत्र के कई समझौतों पर सहमति बनी।डेनमार्क की पीएम ने बताया कि दोनों देशों के बीच ग्रीन एनर्जी को लेकर समझौता हुआ है। इस दौरान दोनों के बीच यूक्रेन संकट को लेकर भी चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोपेनहेगन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिकसेन के आवास का निजी दौरा किया। इस दौरान उनके साथ डेनमार्क की पीएम भी मौजूद रहीं। इस दौरान दोनों के बीच वार्ता भी हुई।इस दौरान उन्होंने अपनी पिछली भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी द्वारा उपहार में दी गई पेंटिंग भी दिखाई।