आंध्र प्रदेश के 28 तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर शुक्रवार को अपने घर लौटने वाले हैं। यात्रा आयोजित करने वाली एजेंसी के संचालक वेंकटरमण के मुताबिक, समूह 21 अगस्त को नेपाल गया था। बाढ़ प्रभावित इलाके से गुजरते समय वाहन वहां से करीब पांच मिनट पहले निकल चुका था। सभी तीर्थयात्री सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं आई। समूह नेपाल से दिल्ली पहुंचेगा, जहां से अलग-अलग उड़ानों से विशाखापत्तनम और हैदराबाद के रास्ते अपने घर जाएंगे।
कर्नाटक के 28 लोग अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में फंसे या लापता बताए गए हैं। राज्य सरकार के मुताबिक, इनमें चार लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बाकी 24 लोगों की तलाश जारी है। शुक्रवार शाम पांच बजे तक मिली जानकारी के अनुसार, 23 लोग बंगलूरू अर्बन, दो मैसूरु और एक-एक धारवाड़, उडुपी और विजयनगर जिले के हैं। ज्यादातर लोग नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे में बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ तिब्बत के दारचेन में हैं। राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के संपर्क में है और बचाव प्रयासों की निगरानी कर रही है।
चीन से निकलकर 53 भारतीय नागरिक आज दोपहर नेपाल पहुंचे। इनमें महाराष्ट्र के 37 लोग शामिल हैं। सभी भारतीय नागरिक नेपाल की राजधानी काठमांडो पहुंच गए हैं। समूह के नेपाल पहुंचने के बाद उनके सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। यह समूह चीन से नेपाल में दाखिल हुआ और इसके बाद काठमांडो पहुंचा। 53 भारतीयों के इस समूह की तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें सभी लोग एक साथ नजर आ रहे हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, समूह में महाराष्ट्र के नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। सभी 53 भारतीयों के काठमांडो पहुंचने से उनके नेपाल पहुंचने की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
भारत ने शुक्रवार को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल के लिए तीसरी खेप के रूप में 10 टन राहत सामग्री, 11 चिकित्सा और पैरामेडिकल कर्मचारियों की टीम और सुरंग में बचाव अभियान का जायजा लेने वाला एक दल भेजा।
EAM Dr S Jaishankar tweets, "A third flight carrying 10 tonnes of humanitarian assistance has departed for Kathmandu.
— ANI (@ANI) August 28, 2026
The assistance includes portable generator sets, dignity kits, food packets and water purification tablets.
An 11-member team of doctors, paramedics & Recce… pic.twitter.com/nmUY0lG3ox
नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर 579 हो गया है, जबकि 1,924 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 86 सुरक्षा कर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं। बुधवार सुबह रसुवा और नेपाल के आसपास के जिलों में अचानक आई बाढ़ के बाद से इन लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है।
नेपाल में आई फ्लैश बाढ़ के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के प्रयास जारी हैं। इसके अनुसार, आज चीन से कुल 153 भारतीय नागरिक नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। इन भारतीयों ने चीन से जमीन के रास्ते नेपाल में प्रवेश किया है। बाढ़ के कारण चीन की तरफ फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नेपाल पहुंचने के बाद इन नागरिकों की आगे की सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस बीच भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल में फंसे और संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।
नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं, जबकि 977 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान के बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर और कीचड़ बढ़ने से फिर बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने लोगों और बचाव दलों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। अब तक 1,545 लोगों को बचाया गया है, जिनमें 84 का काठमांडो के अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में भयानक भोटे कोशी बाढ़ में बह गए लोगों के शव नदी के बहाव की दिशा में काफी दूर मिल रहे हैं। इससे मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है और अधिकारियों को शवों को रखने और उनकी पहचान करने के लिए अस्थायी इंतज़ाम करने पड़ रहे हैं। 'द काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, रसुवा और नुवाकोट से बहे शव चितवन, तनहुं, नवलपरासी, गोरखा और दूसरे जिलों तक मिले हैं। कई इलाकों के मुर्दाघरों में जगह खत्म हो गई है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद तिब्बत में फंसे महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दखल के बाद शुक्रवार सुबह काठमांडू के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, ठाणे, पुणे, रायगढ़, अलीबाग और डोंबिवली के तीर्थयात्रियों का यह समूह सुबह करीब 6 बजे न्यालम चेक-पोस्ट के रास्ते तिब्बत के सागा से निकला और सुरक्षित रूप से नेपाल की राजधानी की ओर बढ़ रहा है। बयान में कहा गया है कि काठमांडू से उनकी वापसी की उड़ान 29 अगस्त को दोपहर 2 बजे तय है, इसलिए उनके लिए समय पर राजधानी पहुँचना बहुत जरूरी है।
नेपाल पहले से ही बाढ़ की तबाही से जूझ रहा है, और अब चिंताएं बढ़ गई हैं कि नई बाढ़ आ सकती है। खबर है कि शुक्रवार को छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक बड़ी झील (बैरियर लेक) टूट गई है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि नेपाली सेना ने उन्हें झील के टूटने की जानकारी दी है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में भूकंप के झटकों के बाद, नेपाल पुलिस ने बताया कि त्रिशूली इलाके के लोगों को एक बार फिर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है, क्योंकि ऊपर से पानी के तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
नेपाल में भारत के पूर्व राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा, 'हमें ऐसी रिपोर्ट मिली हैं जिनसे पता चलता है कि कई भारतीय-अमेरिकी अभी लापता हैं। फिलहाल उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसलिए वे असल में लापता हैं। उम्मीद है कि सभी सुरक्षित होंगे और स्थिति सिर्फ बातचीत में कुछ समय की रुकावट की वजह से है। बचाव और खोज अभियान के अच्छे से चलने की उम्मीद के साथ-साथ, हमें उनके समर्थन में एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।'
नेपाल का एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, 'सभी लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। हम बहुत ज्यादा कीचड़ में फंस गए थे। हमने सब कुछ खो दिया। हमारे घर, दुकानें और सामान। हमें जरा भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है। हम अपने काम में व्यस्त थे। शुरू में, हमने बस लोगों को आते-जाते देखा और सोचा कि यह सामान्य बात है। लेकिन जब हमने त्रिशूली और धोबी धाराओं से पानी को 50 फीट ऊंचा उठते देखा, तो हम भागने लगे। हम फंस गए। कई लोग बह गए। पूरा बाजार इलाका बह गया। त्रिशूली बाजार इलाके में अब एक भी व्यक्ति नहीं बचा है। हम किसी तरह बच निकले।
नेपाल का एक जेसीबी ड्राइवर ने कहा, 'हमारे सीनियर अधिकारियों ने हमें निर्देश दिया कि ऊपर की तरफ पानी का स्तर बढ़ रहा है, इसलिए हमें अपने उपकरणों के साथ सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए और इंतजार करना चाहिए। हमें बताया गया कि अभी काम शुरू न करें बल्कि सिग्नल का इंतजार करें। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री शंकर घोष ने कहा, 'हमें अभी तक नेपाल सरकार से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। हम विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं, और हमारी राज्य की टीम उन पर्यटकों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जो अभी अपने परिवारों से बात नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी भी स्रोत से कोई जानकारी मिलती है, तो हम उसे साझा करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, अभी हमारे पास लापता पर्यटकों के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है। हमारा कंट्रोल रूम इस पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है और लापता पर्यटकों के परिवारों के संपर्क में है। सरकार नेपाल के लोगों के साथ-साथ उन पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही है जो मानसरोवर जैसी जगहों पर गए थे। सभी तरफ से संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं, और हमें उम्मीद है कि आज हमें कुछ जानकारी मिलेगी। जैसे ही हमें कोई जानकारी मिलेगी, हम निश्चित रूप से उसे मीडिया के साथ साझा करेंगे।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'नेपाल में हालात बहुत दुखद हैं। कई लोग हताहत हुए हैं और कई लोगों की जान गई है। एक बड़ी प्राकृतिक आपदाआई है, जिससे गहरा दुख और सदमा पहुंचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की है। पूरी मदद दी जा रही है।'
नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर कांग्रेस नेता टी. एस. सिंह देव कहते हैं, 'एक बड़ी मानवीय त्रासदी हुई है और वहां हालात बहुत गंभीर हैं। अगर भविष्य में कुछ और होता है, तो स्थिति बेहद चिंताजनक और भयावह हो जाएगी। जलमार्गों के किनारे बसी सभी बस्तियों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना चाहिए। उन्हें ऊंचे स्थानों पर कैंप लगाने होंगे। सरकार को जो भी जरूरी इंतजाम करने हैं, वह कर रही होगी। यह स्वाभाविक है कि जहां खतरा हो, वहां बाढ़ आने से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी है। यह सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसा किया जाना चाहिए। हमें नेपाल सरकार के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाना चाहिए और भारत सरकार को नेपाल सरकार को जरूरी मदद देनी चाहिए।'
नेपाल बाढ़ पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, 'नेपाल एक हिंदू राष्ट्र है और वहां कई मंदिर हैं, जहां हमारे लोग भी जाते हैं। भारत के लोग नेपाल में फंसे हुए हैं और लापता हैं। तबाही का मंजर देखते हुए, मेरा मानना है कि भारत सरकार को नेपाल में सभी को बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए, न कि सिर्फ हमारे लोगों को इतने वर्षों से चले आ रहे हमारे आध्यात्मिक, धार्मिक और राजनीतिक रिश्तों को देखते हुए नेपाल की मदद करना हमारा फर्ज है। यह उस चीज का नतीजा है कि हम विकास के नाम पर अपनी प्रकृति को नष्ट कर रहे हैं।
नेपाल पुलिस अधिकारी पी चौधरी ने कहा, 'पानी का स्तर बढ़ने वाला है, इसलिए सभी को रोका जा रहा है। ऑपरेशन में लगी सभी गाड़ियां वापस आ रही हैं। वे सभी लौट रहे हैं। वहां से सभी को निकालकर सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। सारा काम रोक दिया गया है। अभी और भी बाढ़ ज्यादा आने की आशंका है, इसलिए सभी को अलर्ट पर रखा जा रहा है।'
नेपाल सेना के जवानों ने भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित लोगों को बचाया। बाढ़ प्रभावित इलाके में चल रहे बचाव कार्यों के दौरान नेपाल सेना का एक जवान बचाए गए बच्चे को गोद में लिए हुए दिखाई दिया।
Nepal Army personnel rescued people affected by the Bhotekoshi floods. A Nepal Army soldier was seen holding a rescued child during the ongoing rescue efforts in the flood-hit area pic.twitter.com/8wbmDdAumE
— ANI (@ANI) August 28, 2026
अचानक आई बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली इलाके के ड्रोन फुटेज सामने आए है। एक और बाढ़ के खतरे को देखते हुए इस इलाके को फिर से खाली कराया जा रहा है। त्रिशूली से रासुका तक सड़क निर्माण का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और सभी जेसीबी मशीनों को सुरक्षित जगहों पर हटा लिया गया है।
#WATCH | Nepal: Drone visuals from the flash flood-affected Trishuli area. The area is being evacuated again amid the threat of another flood. Road construction work from Trishuli to Rasuka has been temporarily halted, with all JCB machines recalled and moved to safe locations. pic.twitter.com/TgM3Ha8qMD
— ANI (@ANI) August 28, 2026
रासुवा में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में बाढ़ के कारण फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना ने सुबह से ही बचाव अभियान तेज कर दिया है। मुश्किल इलाके और खतरनाक हालात के बावजूद, सेना की बचाव टीम ने अब तक सुरंग से दो कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरंग के अंदर अभी कितने लोग फंसे हैं, इसका पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चल रहा है और उन्हें बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाए गए तमिलनाडु के 21 लोग काठमांडू पहुंच गए हैं। भारत के वापस लौटने से पहले, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने उनका हाल-चाल जाना। यह संकट 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भयानक अचानक बाढ़ के कारण पैदा हुआ। इस बाढ़ में पानी, गाद और बड़े-बड़े पत्थर तेजी से बहते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में फैल गए, जिससे भारी तबाही हुई।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत का काम जोर-शोर से चल रहा है। यूनिसेफ के के प्रतिनिधि नुवाकोट पहुंच गए हैं ताकि मानवीय स्थिति का जायजा ले सकें और विस्थापित लोगों को जरूरी मदद पहुंचा सकें। मौके पर स्थिति का जायजा लेने के दौरान, यूनिसेफ के एक सदस्य ने समाचार एजेंसी एएनआई को राहत कार्यों के बारे में बताते हुए कहा, 'हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं। हम नेपाल सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'
तेलंगाना सरकार राज्य के उन 22 लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिनके बारे में नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद से कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। 26 अगस्त को नई दिल्ली के तेलंगाना भवन में शुरू की गई हेल्पलाइन पर अब तक परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों से जानकारी और मदद के लिए 80-100 कॉल आ चुके हैं। मिली जानकारी की शुरुआती जांच और पुष्टि के बाद, आगे की कार्रवाई और तालमेल के लिए 23 लोगों से जुड़े 20 मामलों की पहचान की गई है। एक विज्ञप्ति के अनुसार, इन 23 लोगों में से छह तेलंगाना के हैं और 17 तेलंगाना मूल के एनआरआई हैं।
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान मम्दानी ने तिब्बती भाषा में लिखे एक संदेश में नेपाल-चीन सीमा पर आई भयानक बाढ़ से प्रभावित भारत के लोगों के प्रति एकजुटता जाहिर की है। मम्दानी ने एक्स पर तिब्बती भाषा में लिखी एक पोस्ट में कहा, 'आज सुबह न्यूयॉर्क शहर के कई निवासियों को अपने मूल देशों से दुखद समाचार मिला। भारत और तिब्बत के बीच सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ आई है, जिससे सैकड़ों लोगों की जान चली गई है, जो लोग अभी तक सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच पाए हैं, वे अभी भी बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।'
नेपाल पुलिस ने बताया कि नेपाल के रसुवा जिले में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई, वहीं, 1,545 लोग घायल हुए और उन्हें बचाया गया। चितवन जिले में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, जहां 178 शव बरामद किए गए। इसके बाद एनपी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28, एनपी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 मौतें दर्ज की गईं। अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को बचाया है।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, 'यह बहुत चिंताजनक स्थिति है और जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। ग्लोबल लेवल पर भी जलवायु परिवर्तन पर चर्चा हो रही है। इंसानियत को इस तरह के खतरों में धकेला जा रहा है।'
नेपाल में आई बाढ़ में अपनी पत्नी और बेटी के लापता होने पर शशिधरन श्रीधरन ने कहा, 'मेरी पत्नी और मेरी 14 साल की बेटी उन कई तीर्थयात्रियों में शामिल थीं जो माउंट कैलाश की यात्रा पर गए थे। हम बेसब्री से उनके बारे में किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं। हमारी उनसे आखिरी बार 26 अगस्त को बात हुई थी। मुझे उम्मीद है कि वे और बाकी सभी तीर्थयात्री सुरक्षित होंगे।'
नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा,'भारतीय, नेपाली और दूसरे देशों के नागरिकों समेत कई लोग लापता हैं। तबाही बहुत ज्यादा है। मैं भी भारतीय संगठनों और संस्थाओं से संपर्क करूंगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि नेपाल तक मदद पहुंचे। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने संवेदना जताई और मदद की पेशकश की। वे बहुत दयालु नेता हैं। हम नेपाल के साथ मजबूती से खड़े हैं।
चीन और नेपाल की सीमा से लगे क्षेत्र में आई भीषण अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 1400 से अधिक लोग लापता हैं।प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है, जो ट्रेकिंग, गाइडेड टूर या पवित्र हिंदू तीर्थस्थल की यात्रा के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 910 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब तक 50 विदेशी नागरिकों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है। लापता लोगों में 113 नेपाली पर्यटक, सेना और पुलिस के 85 सुरक्षाकर्मी तथा रसुवा जिले के 161 स्थानीय निवासी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर रिपोर्टिंग और बचाव कार्यों के बीच समन्वय की कमी के कारण हो सकता है।
नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों से उतरी आपदा अपने पीछे भयावह तबाही और बर्बादी का मंजर छोड़ गई है। त्रिशूली बाजार और उसके आसपास लगभग 60 घर बह गए हैं, जबकि त्रिशूली नदी पर बने दो मोटर योग्य पुल भी बह गए। पास के देवीघाट क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से परिवहन ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। इसके तहत 35 मोटर योग्य पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर वाहन बह गए या मलबे के नीचे दब गए।
नेपाल की बागमती नदी तल से 100 मीटर की ऊंचाई पर गांव में भी पानी घुस गया। यहां रहने वाले अर्जुन पौडेल के अनुसार, उनका गांव ‘सोले’ और ‘तुप्चे’ नदी के तल से लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थे। सदियों के इतिहास में नदी का पानी कभी इतनी ऊंचाई तक नहीं पहुंचा था। लेकिन 26 अगस्त को आए सैलाब ने इन सुरक्षित माने जाने वाले गांवों को कुछ ही मिनटों में मलबे के ढेर में बदल दिया।
नेपाल की आपदा में भारत के अलावा मलयेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर जैसे देशों के नागरिक भी लापता हुआ हैं। एक नजर लापता लोगों की संख्या और इन देशों के नाम पर;
| देशों के नाम | नेपाल में कितने लापता (अनुमानित संख्या) |
|---|---|
| भारत | 290 |
| चीन | 100 |
| अमेरिका | 65 |
| यूक्रेन | 53 |
| मलेशिया | 51 |
| ऑस्ट्रेलिया | 35 |
| यूनाइटेड किंगडम | 33 |
| कनाडा | 25 |
| सिंगापुर | 9 |
| रूस | 8 |
| जर्मनी | 8 |
| दक्षिण कोरिया | 8 |
| लातविया | 6 |
| दक्षिण अफ्रीका | 6 |
| जापान | 5 |
| न्यूजीलैंड | 5 |
| फ्रांस | 4 |
| पुर्तगाल | 3 |
| बेल्जियम | 3 |
| इटली | 2 |
| आयरलैंड | 2 |
| कजाकिस्तान | 2 |
| नीदरलैंड | 2 |
| फिनलैंड | 1 |
| इस्राइल | 1 |
| फिलीपींस | 1 |
| सर्बिया | 1 |
| लिथुआनिया | 1 |
| बेलारूस | 1 |
| हंगरी | 1 |
| स्वीडन | 1 |
तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने कहा, तमिल लोग भी नेपाल की आपदा में फंसे हुए हैं। सरकार आज रात और कल सुबह भी इस बारे में चर्चा करेगी। क्या वे विदेश मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात के सवाल पर आधव ने कहा, उनके साथ सहयोगी मंत्री ए. राजमोहन, कृषि मंत्री आर. विनोद और अनिवासी तमिल कल्याण मंत्री के. थेन्नारासु भी मिलने जा रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाल रहे एकनाथ शिंदे ने नेपाल घूमने गए पर्यटकों और बाढ़ के कारण वहां फंसे पीड़ितों से वीडियो फोन कॉल के माध्यम से बात की। उन्होंने हरसंभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन देते हुए पीड़ितों से हिम्मत बनाए रखने की अपील भी की।
नेपाल की बाढ़ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सहयोग जताया है। व्हाइट हाउस में मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा, हमने नेपाल से बात की है और उन्हें हर तरह की मदद की पेशकश की है। नेपाल के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं और यह भयावह घटना है... ऐसा पहले कभी किसी ने नहीं देखा होगा... मजबूत और सुव्यवस्थित इमारतें माचिस की तीलियों की तरह बह गईं। यह बहुत भयानक है। हम सहायता भेज रहे हैं। हमने सरकार से भी बात कर आश्वस्त किया है कि उन्हें जो भी चाहिए, वह मिल सकता है... वहां 50-60 अमेरिकी नागरिक भी थे। हमें अभी तक पूरी सूची नहीं मिली है, लेकिन उम्मीद है कि वे ठीक होंगे।
#WATCH | US President Donald Trump says, "...We've called Nepal, and we've offered any help that they need. We have a very good relationship with Nepal, and that was brutal... Nobody's ever seen anything quite like that... strong, well-built buildings we're wiped out like they… pic.twitter.com/eDOXZqKoJS
— ANI (@ANI) August 27, 2026
नेपाल में बाढ़ से तबाही पर अमेरिका, भारत समेत पूरी दुनिया की तरफ से संवेदनाएं व्यक्त की गई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए गुरुवार को जन समर्थन की अपील की। भीषण बाढ़ में तिब्बत के लोग भी मारे गए हैं। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 290 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बुधवार को आई भीषण बाढ़ में तिब्बत के अलावा मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को तबाह किया। कई पुल बह गए और एक दर्जन पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। VHP ने X पर एक पोस्ट में लोगों से "नेपाल बाढ़ राहत अभियान" में योगदान देने का आग्रह किया। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि संगठन बाढ़ प्रभावित लोगों को सहायता देने के लिए जन समर्थन मांग रहा है। इस सहायता में विस्थापित परिवारों के लिए भोजन, कपड़े, दवाएं और आश्रय की व्यवस्था शामिल होगी।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पड़ोसी देश में बाढ़ से कम से कम 177 लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग लापता हैं। यूपी प्रशासन ने गंडक सहित नेपाल से आने वाली अन्य नदियों की निगरानी बढ़ा दी है। यूपी सरकार ने बचाव और राहत कार्यों के लिए नेपाल में 32 सदस्यीय SDRF प्लाटून और 22 PAC कर्मियों को भेजा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि लगभग 300 भारतीय पर्यटक भी लापता लोगों में शामिल हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, राप्ती और घाघरा जैसी नदियां चेतावनी स्तर के करीब या ऊपर बह रही हैं।
#WATCH | An excavator used to rescue an elderly woman from the debris amid the ongoing operation in the Tupche area of Nepal's Nuwakot district after flash floods caused massive destruction in the country.
— ANI (@ANI) August 27, 2026
The rescued people were shifted to the Chakra Dev Hospital.
(Sources:… pic.twitter.com/wiypjxYzt7