चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल से फोन पर बातचीत की। इस मौके पर वांग यी ने कहा कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर ढहने से भीषण भूस्खलन और बाढ़ आपदा हुई, जिससे दोनों देशों को भारी जनहानि हुई और कई लोग लापता हुए हैं। यह हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आई सबसे गंभीर सीमा-पार आपदा है, और राहत कार्य की जटिलता एवं कठिनाई अभूतपूर्व है। चीन इस पर अत्यधिक गंभीरता से विचार कर रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने तुरंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जिसमें बचाव एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यों के लिए स्पष्ट आवश्यकताएं रखीं। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने आपदाग्रस्त क्षेत्र जाकर मौके पर राहत कार्यों का मार्गदर्शन किया। चीन ने आपातकालीन बचाव एवं स्व-राहत कार्य करने के साथ जल्द ही नेपाल को आपातकालीन राहत में समर्थन दिया।
नेपाल के नुवाकोट जिले की त्रिशूली नदी में आई भयानक बाढ़ के बाद, त्रिशूली के सैनिक इलाके में बचाव अभियान और राहत कैंप चल रहे हैं। नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और स्थानीय प्रशासन ने फँसे हुए लोगों को निकालने और उन्हें मिलिट्री व राहत कैंपों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमें तैनात की हैं। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग त्रिशूली और बत्तार बाजार में बने राहत केंद्रों और कैंपों में इकट्ठा हुए हैं, ताकि वे लापता लोगों की लिस्ट देख सकें और अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी का इंतजार कर सकें।
VIDEO | Nepal: Rescue operations and relief camps are active in the Sainik area of Trishuli of Nuwakot district following devastating flash floods along the Trishuli River.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
The Nepali Army, Armed Police Force, and local authorities have deployed helicopters and ground teams to… pic.twitter.com/bYrarCmdrC
नेपाल में भारत की एक खास टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर अहम हाइड्रोपावर टनल साइट्स पर ज्वाइंट सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। नेपाल में भारतीय दूतावास के आधिकारिक एक्स अकाउंट से ट्वीट किया गया, जिसमें लिखा गया- भारत की टनल रेस्क्यू टीम ने आज चिलिमे और लांगटांग इलाके में हाइड्रोपावर टनल साइट्स पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए नेपाली सेना की टीम के साथ काम किया। यह टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखेगी।
The tunnel rescue team from India worked with the Nepali Army’s team to conduct search & rescue operations at hydropower tunnel sites in Chilime and Langtang area today. The team will continue to conduct search and rescue operations in close coordination with the Nepali Army.… https://t.co/H4uQnFOtDx
— IndiaInNepal (@IndiaInNepal) August 30, 2026
नेपाल में हिमालयी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक के निवासी रविवार (30 अगस्त) को अपने तबाह हो चुके घरों में लौटे। आपदा के कुछ दिन बाद ही वे अपनी जिंदगी को फिर से बसाने की बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। त्रिशूली की रहने वाली मीना गुप्ता ने कहा, 'अब हम क्या करेंगे? कुछ भी नहीं बचा है। हम म्युनिसिपल बिल्डिंग में रह रहे हैं और वहीं सो रहे हैं। अब हम पूरी तरह से बेबस हैं। हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे'।
#WATCH | Nuwokat, Nepal: Nepal Flash Floods | Residents of one of the areas worst-hit by the Himalayan floods in Nepal returned on Sunday (August 30) to their destroyed homes as they confront the enormous task of rebuilding their lives days after the disaster.
— ANI (@ANI) August 30, 2026
"What will we do… pic.twitter.com/jOlHJP3spZ
नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे बने नुवाकोट सोलर प्रोजेक्ट की तस्वीरों में भयानक बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखा जा सकता है। सोलर प्लांट का एक बड़ा हिस्सा मलबे के नीचे दब गया है, जबकि बाकी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
#WATCH | Nepal Flash Floods | Nuwakot, Nepal: Visuals from the Nuwakot Solar Project on the banks of the Trishuli River show extensive damage caused by the devastating floods. A large portion of the solar plant has been buried under debris, while the remaining structures have… pic.twitter.com/NBsI2elD58
— ANI (@ANI) August 30, 2026
भारत की टनल रेस्क्यू टीम ने आज चिलिमे और लांगटांग इलाकों में हाइड्रोपावर टनल साइट्स पर खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए नेपाली सेना की टीम के साथ मिलकर काम किया। यह टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान जारी रखेगी।
#WATCH | The tunnel rescue team from India worked with the Nepali Army’s team to conduct search & rescue operations at hydropower tunnel sites in the Chilime and Langtang areas today. The team will continue to conduct search and rescue operations in close coordination with the… pic.twitter.com/iitk37pClk
— ANI (@ANI) August 30, 2026
नेपाल के नुवाकोट जिले में बाढ़ के कारण त्रिशूली बाजार का इलाका बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जबकि नुवाकोट के विस्थापित निवासी अपना सामान और राहत सामग्री लेकर ऊंचे इलाकों में लौट रहे हैं।
VIDEO | Nepal floods: Trishuli market area severely damaged following the floods in Nuwakot district.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/VFqzGz6ZqT
VIDEO | Nepal: Displaced residents of Nuwakot return to higher ground with their belongings and relief supplies.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
(Visuals of Trishuli market in the aftermath of the floods)
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/i6tOJD5KUR
नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ और मलबे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 2,502 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 9,435 लोगों को बचाया जा चुका है। बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में गांवों, कस्बों, सड़कों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। चीन में भी 16 लोगों की मौत हुई है और करीब 550 लोग लापता हैं। भारत के 275 से अधिक नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग नेपाल में लापता या संपर्क से बाहर हैं।
नेपाल के नुवाकोट जिले और उसके आस-पास त्रिशूली नदी की घाटी में हाल ही में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही हुई है। त्रिशूली नदी के किनारे-किनारे का पूरा इलाका मोटी कीचड़, पत्थरों और मलबे की मोटी परत से ढका हुआ है।
VIDEO | Nepal: The landscape across Nuwakot District and the surrounding Trishuli River valley reflects extensive devastation following the recent flash floods.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
Entire stretches along the Trishuli River lie heavily caked under thick mud, rocks, and debris.
(Full video available… pic.twitter.com/UXGGGTqEV0
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है।
नेपाल में भयानक अचानक आई बाढ़ के पांच दिन बाद भी, लापता लोगों की तलाश समय के साथ एक मुश्किल दौड़ बन गई है; परिवार वाले काठमांडू के अस्पतालों में अपने प्रियजनों की कोई खबर या सुराग पाने की उम्मीद में जा रहे हैं। रविवार को लापता लोगों के रिश्तेदार उनकी तलाश करते रहे, इस उम्मीद में कि शायद कोई जीवित मिल जाए या उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी मिल सके। लापता परिवार के सदस्य की तलाश कर रहे केशव कहते हैं, 'मैं यहां अपने भाई के बेटे को ढूंढने आया हूं। उसे ढूंढते हुए मुझे पांच दिन हो गए हैं'।
VIDEO | Five days after the devastating flash floods struck Nepal, the search for those still missing has become a desperate race against time, with families visiting hospitals in Kathmandu for any sign of their loved ones.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
On Sunday, relatives of the missing continued their… pic.twitter.com/sqhNUfK4YO
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि, 'आज, 30 अगस्त को शाम 5:30 बजे तक नेपाल में 149 भारतीय नागरिक बचाए गए हैं'। उन्होंने पोस्ट में सभी 149 भारतीयों के नाम भी साझा किए हैं।
Update on Indian Nationals rescued in Nepal as of 1730 hrs on 30 August, 2026
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 30, 2026
Indians rescued : 149
Please see names below ⬇️ pic.twitter.com/f5olP2chxa
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से घर, खेत और लोगों की रोजी-रोटी बह जाने के बाद, अब नुवाकोट जिले के परिवारों तक राहत पहुंच रही है। इससे उन लोगों को कुछ मदद मिल रही है जिन्होंने लगभग सब कुछ खो दिया है। बिदुर नगरपालिका के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में, स्थानीय संस्थाओं और संगठनों ने बेघर हुए परिवारों के लिए खाना, रहने की जगह, कपड़े और दूसरी जरूरी चीजें उपलब्ध कराने का काम शुरू किया है। देवीघाट का जिला आयुर्वेद अस्पताल राहत कार्यों का एक मुख्य केंद्र बन गया है, जबकि स्कूलों का इस्तेमाल भी लोगों के रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था के लिए किया जा रहा है। शिवलय कैटरिंग कंपनी के कर्मचारी कहते हैं, 'हमने आज सुबह से खाना देना शुरू किया है। कल तक हमने यह सेवा शुरू नहीं की थी। हम शिवलय कैटरिंग नाम की कंपनी से जुड़े हैं और कंपनी की तरफ से यहां कैटरिंग स्टाफ के तौर पर आए हैं। आज से हमने अपनी पहल पर खाना देना शुरू किया है। हम यहां के हालात और लोगों की जरूरतों के हिसाब से यह सेवा जारी रखेंगे'।
VIDEO | After flash floods swept away homes, farmland and livelihoods across Nepal, relief is now reaching families in Nuwakot District, offering some support to those who have lost almost everything.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
In the worst-affected areas of Bidur Municipality, local bodies and… pic.twitter.com/d0x1kFFZoP
नेपाल के त्रिशूली में विनाशकारी बाढ़ के बाद, सड़क विभाग (DoR) के कर्मचारी त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र में खुदाई का काम कर रहे हैं।
VIDEO | Trishuli, Nepal: Department of Roads (DoR) personnel carry out excavation work at Trishuli Hydropower Plant after devastating floods.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 30, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/1ED6ty9a5f
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि, 'यहां तीन मंजिला इमारत थी, एक स्कूल। उसके ठीक सामने एक मंदिर था, राम मंदिर। और यह पूरा इलाका एक बाजार था। बीच में जो खुली जगह है, वहीं वह तीन मंजिला स्कूल था। वहां 1600 छात्र पढ़ते थे। और जिस दिन यह घटना हुई, शिक्षकों ने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अब स्कूल का कोई निशान नहीं बचा है; वह पूरी तरह बह गया। और वहां एक राम मंदिर भी था... यहां कई लोगों की मौत हुई... अभी तक ठीक-ठीक संख्या की जानकारी नहीं है, लेकिन मरने वालों की संख्या ज्यादा थी। तो, यहां सब कुछ खत्म हो गया है'।
#WATCH | Trishuli: Nepal Flash Floods | A local Surendar Kumar says, "There used to be a three-story building here—a school. There was a temple right in front of it—a Ram temple. And this whole area was a market. In that open space in the middle—that’s where the three-story… pic.twitter.com/QTLLeSFDGM
— ANI (@ANI) August 30, 2026
नेपाल सरकार ने बाढ़ त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या को लेकर ताजा जानकारी साझा की है। नेपाल में अब तक 752 लोगों की मौत हो चुकी है। चीन ने अब तक 16 लोगों की मौत की जानकारी साझा की है। वहीं, लापता लोगों की संख्या 2502 बताई गई है। इसमें तिब्बत के लापता लोगों का आंकड़ा भी जोड़ लें तो यह संख्या 3000 के पार हो गई है। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान 8730 लोगों को बचा लिया गया है।
काठमांडो स्थित अमेरिकी दूतावास ने रविवार को बताया कि अमेरिका ने नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों को 36 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता प्रदान की है, जिसमें 10,000 परिवारों के लिए आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल है।
अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह नेपाल सरकार और मानवीय संगठनों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि बुधवार को हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचे, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोग लापता हो गए।
दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा से बढ़कर हमारे लिए कोई प्राथमिकता नहीं है। नेपाल और चीन में स्थित हमारे दूतावास अमेरिकियों की सहायता करने और आपदा राहत प्रयासों में सहयोग देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।"
चीन ने कहा है कि हिमालयी क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद नेपाल से सटी सीमा चौकी के तिब्बती हिस्से में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता हैं। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। नेपाल में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक 104 है, उसके बाद 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक हैं। चीनी अधिकारियों ने बताया कि बीजिंग स्थित अधिकारियों ने संबंधित विदेशी दूतावासों को सूचित कर दिया है।
23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता
नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भारत से आई फोरेंसिक टीम से मुलाकात की। यह टीम शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों का विश्लेषण करने में नेपाली अधिकारियों की सहायता करेगी।
तमिलनाडु के मंत्री राजमोहन ने बताया कि नेपाल में फंसे तमिलनाडु के 319 लोगों में से 219 को बचा लिया गया है और ये सभी 219 लोग 31 अगस्त तक तमिलनाडु पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा, “पिछले तीन दिनों से मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के निर्देशों पर हम दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और नेपाल में फंसे तमिलों को बचाने के लिए विभिन्न प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल, अनिवासी तमिल कल्याण विभाग के मंत्री थेन्नारासु दिल्ली में हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। तमिलनाडु के कुल 319 लोग विभिन्न समूहों के माध्यम से नेपाल गए थे। इनमें से 219 लोग सुरक्षित हैं। वे 31 अगस्त की रात तक चेन्नई पहुंच जाएंगे। शेष 100 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और वे फिलहाल लापता माने जा रहे हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की आपदा है। इस घटना में सभी को मिलकर काम करना होगा। हमारा एकमात्र उद्देश्य प्रभावित लोगों को बचाना है।”
नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 2498 लोग अभी भी लापता हैं।
ओडिशा सरकार ने बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद राज्य के चार लोग लापता हैं, जबकि दो अन्य सुरक्षित भारत पहुंच गए हैं। लापता लोगों की पहचान खुर्दा जिले के संदीप महापात्रा और उनकी पत्नी सिद्धार्थ कुमारी साहू, बरगढ़ जिले की गुन्नम साईं बिंदु कुमारी और उनकी बेटी गुन्नम हरेशखा के तौर पर की गई है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि महापात्रा और साहू 2018 से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि साईं बिंदु कुमारी के पति गुन्नम जय कृष्ण नेपाल में सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क करने में मदद के लिए उनकी लोकेशन विदेश मंत्रालय के साथ साझा की गई है।
उनके परिवार के अनुसार, जय कृष्ण पिछले छह वर्षों से नेपाल के अपर त्रिशूली में एंडट्रिज हाइड्रोपावर के साथ काम कर रहे हैं। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि मयूरभंज जिले के बारीपदा की कुलसुम निगार और सुंदरगढ़ ज़िले की दीपिका एक्का सुरक्षित रूप से रक्सौल पहुंच गई हैं और भारत में प्रवेश कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि एक कोच हलीम और ओडिशा के छह फ़ुटबॉल खिलाड़ी भी पोखरा में सुरक्षित हैं, जहां राज्य की टीम ने एक फ़ुटबॉल टूर्नामेंट में पहला स्थान हासिल किया था।
नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने ट्वीट किया, "भारत से राहत सामग्री से भरी चौथी उड़ान, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट सहित 11 टन सामग्री थी, काठमांडो पहुंच गई है। इस उड़ान में सुरंग खोज और बचाव अभियान के लिए अतिरिक्त तकनीकी दल और उपकरण भी लाए गए हैं।" इस राहत खेप में खोज और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों से लैस टनल टेक्निकल टीम और डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल है। इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी थी कि भारत की चौथी राहत उड़ान काठमांडो पहुंच गई है। जयशंकर ने बताया कि 230 फुट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए जरूरी उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि सात और बेली पुलों की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे, जबकि इन्हें लगाने वाली तकनीकी टीमें भी जल्द नेपाल पहुंचेंगी।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति पर देश के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने कहा, "हमें भारत से बहुत राहत सामग्री की आपूर्ति मिली है। मुझे लगता है कि राहत सामग्री लेकर तीन विमान पहले ही आ चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री ने एकजुटता व्यक्त करने और नेपाल को आवश्यक हर तरह की सहायता देने का वादा करने में बहुत सकारात्मक रुख दिखाया है। वे फंसे हुए कुछ भारतीय तीर्थयात्रियों के बारे में भी चिंतित हैं और उनका बचाव भी हमारी प्राथमिकता है।"
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने जानकारी देते हुए बताया, "कोच्चि से आए 14 सदस्यीय समूह, श्रुति शिखामणि (कक्कनाड) और रिनीत मोहन (पिरावोम) सहित 16 केरलवासी सुरक्षित घर लौट आए हैं। नेपाल और भारत के ट्रांजिट स्थानों पर 45 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है और उनकी वापसी की व्यवस्था की जा रही है। सात व्यक्तियों से संपर्क करना बाकी है (जिनमें केरल मूल के 4 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक शामिल हैं)। उनके बारे में जानकारी विदेश मंत्रालय के साथ सक्रिय रूप से जुटाई जा रही है।"
नागपुर के 102 तीर्थयात्री, जो नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण काठमांडो में फंस गए थे, रविवार सुबह महाराष्ट्र के अपने शहर सुरक्षित लौट आए। अधिकारियों ने बताया कि ये 102 तीर्थयात्री, विदर्भ इलाके के चार अन्य लोगों के साथ, 19 अगस्त को पशुपतिनाथ मंदिर और अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा के लिए नेपाल गए थे। वे 27 अगस्त तक काठमांडो में रुके; नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के एक दिन बाद तक वे वहीं थे। जहां विदर्भ के चार तीर्थयात्री शनिवार को हवाई जहाज से पहुंचे, वहीं बाकी 102 तीर्थयात्री रविवार सुबह करीब 4.30 बजे ट्रेन से नागपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे।
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद भोटेकोशी नदी का पानी और बहाव फिर बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के नदी किनारे बसे लोगों और राहत टीमों को बेहद सावधान रहने की चेतावनी दी है। नदी के बढ़ते शोर और तेज बहाव की सूचना के बाद आपात सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,418 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 287 भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग शामिल हैं। इस बीच रसुवा के जलविद्युत परियोजना में फंसे चार भारतीयों को बचा लिया गया है। अब तक 88 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
नेपाल में सैलाब के चौथे दिन मृतकों का आंकड़ा 675 पर पहुंच गया। जबकि करीब तीन हजार लोग अब भी लापता हैं। शनिवार को करीब 750 लोगों को सुरक्षित बचाया गया। ऐसे में लोगों के बचे होने की उम्मीद अब भी है। अब सबसे बड़ी चुनौती मलबे और जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की है। 5 जिलों में 27 जल विद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इन सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए भारत के 11 विशेषज्ञों की टीम त्रिशूली पहुंच गई।
भारत की यह वही टीम है, जिसने उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग में फंसे लोगों को निकाला था। इसमें डॉक्टरों, डीएनए विशेषज्ञों आैर सुरंग इंजीनियर शामिल हैं। टीम ने त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने के अभियान में जुट गई है। द गािर्जयन के अनुसार, यहां 900 से अधिक कर्मी लापता हैं। इनमें 63 भारतीय हैं। सैलाब में अब तक 3 हजार लोग लापता हैं। इस बीच, शनिवार देर रात भारत ने चौथी बार 11 टन की राहत सामग्री भेजी है।
पिछले दो दिनों में चीन से 598 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार चीन की तरफ अभी करीब 900 भारतीय नागरिक मौजूद हैं और वे सुरक्षित तथा संपर्क में हैं। भारत सरकार नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि प्रभावित भारतीयों को सुरक्षित निकालने और जरूरत पड़ने पर भारत वापस लाने की व्यवस्था की जा सके।
विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में चौबीसों घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम बनाया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। भारत ने सुरंगों की जांच और बचाव के लिए विशेष तकनीकी दल नेपाल भेजा है। यह दल प्रभावित क्षेत्र में काम शुरू कर चुका है। उसकी सिफारिश के आधार पर विशेष सुरंग बचाव दल और उपकरण भी नेपाल पहुंचने हैं। नेपाली अधिकारी बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए भारतीय फोरेंसिक टीम की मदद लेंगे।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 275 से अधिक भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। नेपाल में अब तक 108 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। इनमें से पहले संपर्क से बाहर रहे करीब 50 भारतीयों से दोबारा संपर्क भी स्थापित किया गया है। रसुवा के एक जलविद्युत परियोजना से चार भारतीयों रिपु कुमार, चनेश्वर नरजारी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिनहाजुद्दीन को बचाया गया है। इन सभी के जल्द काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। नेपाल की ओर से जारी ताजा जानकारी के मुताबिक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 675 पहुंच गई है। वहीं, भारत के 275 से अधिक नागरिक अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार के मुताबिक 108 भारतीयों को नेपाल में सुरक्षित बचाया गया है, जबकि चीन की तरफ करीब 900 भारतीय सुरक्षित और संपर्क में हैं।