अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में अमेरिका नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख जताया है। बाढ़ में कई लोगों की मौत हुई है। कई लोग लापता हैं। बड़े स्तर पर नुकसान भी हुआ है। गुटेरेस ने 'एक्स' पर लिखा कि वह बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हैं। उन्होंने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं।
गुटेरेस ने कहा कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार की अगुवाई में चल रहे राहत अभियान में मदद कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े संगठन बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान और कर्मचारियों को जुटा रहे हैं।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर कहा, कनाडा सरकार इस मुश्किल समय में बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। कार्नी ने उन लोगों के प्रति भी संवेदना जताई है, जिन्होंने अपने किसी करीबी को खो दिया है। साथ ही उन लोगों के बारे में भी चिंता जताई, जो अभी भी अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। उसने इलाके में मौजूद सभी कनाडाई नागरिकों से जल्द से जल्द आरओसीए प्रणाली में अपना पंजीकरण कराने को कहा है। सरकार ने कहा कि बचाव अभियान जारी है। कनाडा जरूरत पड़ने पर मदद देने के लिए तैयार है।
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के साथ एकजुटता जताई है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले।
इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले। pic.twitter.com/bz8jdZJc1D
— Gurudev Sri Sri Ravi Shankar (@Gurudev) August 26, 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है। रुबियो ने कहा, हम नेपाल के लोगों के साथ अपनी एकजुटता जताते हैं। इस विनाशकारी बाढ़ के बाद हम उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय नेपाल सरकार को जरूरी मानवीय मदद देने के लिए तैयार है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बचाव और तलाश का काम जारी है। अब तक सामने आई जानकारी इस तरह है-
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी महासंघ ने नेपाल के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर की आपात मदद जारी करने का एलान किया है। यह पैसा नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी को दिया जाएगा। इससे बाढ़ से प्रभावित लोगों की तत्काल मदद की जा सकेगी।
यह रकम अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी महासंघ के आपदा प्रतिक्रिया आपात कोष से दी जाएगी। इस मदद से नेपाल रेड क्रॉस लोगों की तत्काल जरूरतें पूरी करेगा। वहीं, उसकी टीमें बाढ़ से हुई तबाही का आकलन करेंगी। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि किन इलाकों और समुदायों को मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है।
नेपाली सेना रसुवा जिले से बचाए गए लोगों को लेकर चकरा देव अस्पताल में आ रही है। यह यहां का मुख्य अस्पताल है। यहां बचे लोगों ने उस खौफनाक पल को याद किया, जब मलबे का सैलाब उनकी ओर तेजी से आया। 68 साल के केशव प्रसाद बराल ने बताया, वह पानी नहीं था। कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधे हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे वह पास आ रहा था, उसकी ऊंचाई बढ़ती जा रही थी।
उन्होंने बताया, मैंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ने की कोशिश की। मैं उन्हें छत पर ले जाना चाहता था। लेकिन कीचड़ उन्हें बहाकर ले गया। मैं किसी तरह छत तक पहुंच गया। इसके अलावा कहीं जाने की जगह नहीं थी। बचने का कोई रास्ता नहीं था। ऊपर की ओर जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। बराल ने बताया कि करीब चार या पांच घंटे बाद उन्हें बचाने के लिए एक हेलिकॉप्टर आया। लेकिन तब तक वह अपनी पत्नी को खोज नहीं पाए थे। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी अब भी कहीं मलबे के नीचे है।
नेपाल के मजदूर विवेक कुमाल अपनी जान बचने को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते। वह चीन के तिब्बत से लगे नेपाल के हिमालयी इलाके में सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले से नीचे की ओर बिदुर में काम कर रहे थे। तभी उन्हें फुफकार जैसी आवाज सुनाई दी।
वह एक नए बने घर के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे। गड्ढा करीब 5 फीट यानी 1.5 मीटर गहरा था। तभी पानी, मिट्टी और पत्थरों की एक बड़ी लहर तेजी से नीचे आई। इसने विवेक और उनके आसपास की हर चीज को बहाना शुरू कर दिया। उनके चार साथी गड्ढे से करीब 5 फीट ऊपर खड़े थे। उन्होंने विवेक को गड्ढे से बाहर निकलने और भागने के लिए चिल्लाकर कहा। विवेक जब तक गड्ढे से बाहर निकले, उनके साथी वहां से भाग चुके थे।
कुमाल ने काठमांडू के राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर में अपने बिस्तर से बताया, मैं भागने लगा। तभी पानी की एक बड़ी लहर इतनी तेज आवाज के साथ आई, जैसे भूकंप आ गया हो। उस समय उनके भाई दिनेश उनके पास बैठे थे। तेज बहाव उन्हें मिट्टी और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया। उन्होंने बताया, लेकिन किस्मत से मैं एक आम के पेड़ में फंस गया।
तिब्बत से शुरू हुई भीषण अचानक बाढ़ ने बुधवार को मध्य नेपाल में भारी तबाही मचा दी। इस बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 157 हो गया है। 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों को बुरी तरह तबाह कर दिया। कई अहम पुल पानी में बह गए। करीब 12 जलविद्युत परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली। इससे आशंका है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर यानी बर्फ का बड़ा हिस्सा टूट गया होगा। इससे अचानक बहुत ज्यादा पानी निकला। इसी वजह से यह भीषण बाढ़ आई होगी।
बाढ़ से हुए नुकसान के बाद बुधवार दोपहर नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग तथा चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि सीमा के अपनी तरफ पानी का स्तर बढ़ना शुरू होते ही वह नेपाल को जानकारी देगा। नेपाल और चीन के बीच आपदा के खतरे को कम करने और आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद करने को लेकर पहले से समझौता है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि अचानक आई इस विशाल बाढ़ की वजह ल्हेंडे नदी का रास्ता हिमस्खलन से बंद होना था। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने भी कहा है कि शुरुआती जांच में नेपाल-चीन सीमा के इलाके में हिमस्खलन की बात सामने आई है।
प्राधिकरण ने प्लैनेट लैब्स से मिली उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके बाद कहा गया कि ल्हेंडे नदी में मलबे के साथ आई बाढ़ संभवत: हिमस्खलन के कारण शुरू हुई। यह हिमस्खलन तिब्बत में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ था। 25 और 26 अगस्त की उपग्रह तस्वीरों में हिमस्खलन और इसके बाद ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ दिखाई देती है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि पहले भी ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। जब चीन की तरफ से बाढ़ आती थी, तब भी ऐसी दिक्कत हुई थी। लेकिन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, हमें अभी भी पता नहीं है कि कितना खतरा बाकी है।
उन्होंने कहा कि जब तक नेपाल का विदेश मंत्रालय चीन के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था नहीं बनाता, जिससे शुरुआती चेतावनी नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तक पहुंच सके, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। पोखरेल ने कहा कि सरकार को यह सोचना होगा कि वह आपदा आने के बाद केवल राहत और बचाव तक सीमित रहेगी या पहले से ऐसी व्यवस्था बनाएगी, जिससे आपदा में लोगों की जान न जाए।
अधिकारियों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ की सही जानकारी समय पर नहीं मिलने से जान और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें तिब्बत से शुरू हुई इस बाढ़ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या नेपाल में लोगों को बाढ़ की चेतावनी तभी मिलेगी, जब पानी उनकी नदियों में पहुंच जाएगा? या फिर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में कोई घटना होते ही नेपाल को इसकी जानकारी मिल जाए? समस्या केवल नेपाल और चीन के बीच जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है। नेपाल ने अपने इलाके में जो उपकरण लगाए हैं, वे भी बाढ़ आने से पहले चेतावनी देने में नाकाम रहे।
भोटे कोशी नदी में पिछले साल भी बाढ़ आई थी। उस समय जिन इलाकों को नुकसान हुआ था, वे अभी सामान्य स्थिति में लौट भी नहीं पाए थे। पिछले साल 8 जुलाई को ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ में 11 लोगों की मौत हुई थी। इस बाढ़ ने कई जगह सड़क के हिस्सों को भी बहा दिया था। बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था।
नुवाकोट के बिदुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 के अध्यक्ष रवींद्र नेपाल ने बताया कि बाढ़ ने सोले से अक्करे बाजार तक सैकड़ों घरों को बहा दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सुरक्षित जगह पहुंचने में कामयाब रहे। लेकिन कई बुजुर्ग और बच्चे अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा, मैं सुबह से ही नगर पालिका की इमारत में फंसा हुआ हूं। घर जाने के लिए न सड़क बची है और न पुल।
बिदुर नगर पालिका-7 के डंडाथोक टुप्चे के रहने वाले गोकरण अधिकारी ने बताया कि उनके गांव में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि उनके जानने वाले ज्यादातर लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि सोले और अक्करे बाजार के बीच करमेटार में केवल कुछ घर ही खड़े हैं। उन्होंने कहा, दूर से जो घर सही दिख रहे हैं, वे भी पूरी तरह मिट्टी और मलबे से ढके हुए हैं।
भोटे कोशी नदी में बुधवार सुबह करीब 10 बजे अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचा दी। इसमें कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटक समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। निजी और सरकारी संपत्ति भी बह गई। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है।
हिमस्खलन से भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का मार्ग बंद हो गया था, जिससे यह बाढ़ आई। बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नजदीक तिमुरे को अपनी चपेट में लिया। यहां सैकड़ों लोग रहते थे। बाढ़ आने से पहले ही इस बस्ती का बड़ा हिस्सा बह गया। इसके बाद पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
इलाके में बारिश की कोई खबर नहीं थी। इसलिए लोगों को बाढ़ आने का कोई अंदाजा नहीं था। लोग रोज की तरह अपने काम में लगे थे। तभी अचानक बाढ़ आ गई। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें जमीन हिलती हुई महसूस हुई, तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है। वह बाहर भागे। तब उन्होंने पानी की एक बहुत बड़ी दीवार देखी। पानी के साथ धुएं जैसा कुछ भी दिखाई दे रहा था। यह पानी ऊपर की तरफ से तेजी से तिमुरे बाजार की ओर आ रहा था। बाढ़ स्याफ्रुबेसी की ओर बढ़ती हुई आगे के इलाकों तक पहुंच गई। नदी के रास्ते में जो कुछ भी आया, वह बह गया। इसमें लोग, जानवर, इमारतें और सरकारी ढांचे भी शामिल थे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ बैंक शाखाएं तबाह बुधवार की बाढ़ ने नौ जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इतनी ही संख्या में वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं भी तबाह हो गईं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क बह गई। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का अभी पूरा आकलन नहीं हो पाया है।
लापता लोगों की बड़ी संख्या और भारी तबाही को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाढ़ नेपाल के हाल के इतिहास की सबसे खतरनाक आपदाओं में से एक हो सकती है। यह बाढ़ 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ से भी बड़ी आपदा साबित हो सकती है। उस बाढ़ में 1,400 लोगों की मौत हुई थी। लंबे समय से इसे नेपाल की सबसे बड़ी आपदा माना जाता है।