नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 63 भारतीय नागरिकों के नाम जारी किए हैं।
त्रिशूली-1 परियोजना से बचाए गए 63 भारतीय नागरिकों के नाम
सुरेश सिंह राजपूत
सुमित कुमार खरे
मुकेश कुमार
सचिन कुमार
जश्मंत सिंह
चैनल तिवारी
देवन कुमार शाह
अमरेंद्र कुमार यादव
ओम प्रकाश यादव
संपत कुमार
नीरज कुमार ठाकुर
जय हंसदा
सुनील कुमार सिंह
उपेंद्र बरनवाल
राहुल कुमार गुप्ता
नीरज कुमार पटेल
सुवनेश्वर आलम
उपेंद्र भसीन
योगेश कुमार
एमडी अकरम आलम
एमडी इनामुल हक
अभिषेक कुमार
अभिषेक यादव
मंगल सिंह
पंकज कुमार शाह
निलेश कुमार
आशुतोष मनोहर उपाध्याय
लक्ष्मण तिवारी
गंगुली पटेल
इंद्रजीत कुमार
ज्ञान सिंह
जय कृष्णा
नागेश तल्लूर
शाहरुख
निपेंद्र मंडल
सद्दाम हुसैन
राज कुमार तिवारी
आलोक कुमार शाह
अरुण कुमार शाह
सत्येंद्र कुमार सिंह
बिट्टू कुमार
आदि अबेद बासुमतरी
केके पांडे
अभिषेक तिवारी
आकाश
प्रदीप
रंजन कुमार
पवन लोधी
अनिल
विजय प्रसाद
नारायण बहादुर
जनेश्वर सिंह
सुनील गिरी
रोशन कुमार
विश्वामर सिंह
सुशील मुस्तफा
नीलेश
प्रमोद गुप्ता
जितेंद्र राम
नितेश कुमार सिंह
निजामुद्दीन
कवि कुमार
रोहित वर्मा
नेपाल में बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। 27 अगस्त 2026 को रात आठ बजे के अपडेट के अनुसार, 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। राहत की बात यह है कि त्रिशूली-1 परियोजना के 63 भारतीय कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग सुरक्षित बचाए गए हैं। भारतीय नागरिकों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। 27 अगस्त शाम 6:45 बजे तक 285 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि त्रिशूली-1 परियोजना के 33 कर्मचारियों और तमिलनाडु के 21 लोगों को बचाया गया है। मंत्रालय ने सहायता के लिए फोन, व्हाट्सऐप और ईमेल नंबर जारी किए हैं। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू की गई है। बाढ़ में अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बृहस्पतिवार को बाढ़ प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया और जारी खोज एवं बचाव अभियान की समीक्षा की। उन्होंने बट्टार बाजार स्थित सेना प्रशिक्षण केंद्र में अधिकारियों से मौजूदा हालात की जानकारी ली। नुवाकोट के देवीघाट इलाके में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सड़कें और मकान क्षतिग्रस्त होने से कई परिवार बेघर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ लोग अब भी लापता हैं। एक निवासी जनक बहादुर नेपाली ने बताया कि उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया है और लोगों को भोजन व रहने की व्यवस्था में परेशानी हो रही है।
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। गुरुवार को काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 40 से ज्यादा निजी हेलिकॉप्टरों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए उड़ान भरी। इनमें रासुवा समेत कई प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं।
नेपाल सेना इन उड़ानों का समन्वय कर रही है। राहत सामग्री को संग्रह केंद्र से निजी हेलिकॉप्टरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सेना की 14वीं बटालियन संभाल रही है। दोपहर दो बजे तक 40 से ज्यादा उड़ानें पूरी हो चुकी थीं, जबकि 20 से अधिक हेलिकॉप्टर हवाई अड्डे पर तैयार रखे गए थे।
गृह मंत्रालय भी राहत और बचाव के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद कुछ हेलिकॉप्टरों को इस्तेमाल करने की तैयारी में है। नेपाल सेना के हेलिकॉप्टर लगातार प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, गुरुवार को 93 और शव बरामद किए गए। सुरक्षाकर्मी और स्थानीय लोग मलबा हटाकर बंद सड़कों को फिर से खोलने में जुटे हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल ने कहा है कि भीषण बाढ़ ने कुछ ही घंटों में कई कस्बों और बस्तियों को तबाह कर दिया। उन्होंने इसे हाल के समय में देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया। मंत्री के अनुसार, हजारों लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं और बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं। खानाल ने आगे ये भी कहा कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में स्थिति का पूरा आकलन अभी जारी है। उन्होंने भारत और अन्य देशों से मिली मदद के लिए आभार जताया और कहा कि तत्काल राहत के साथ लंबे समय तक पुनर्निर्माण की भी जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के ज्यादातर प्रमुख पर्यटन क्षेत्र इस आपदा से प्रभावित नहीं हुए हैं। पोखरा, काठमांडू, चितवन, लुंबिनी और एवरेस्ट क्षेत्र में पर्यटन जारी है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के खतरे से निपटने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में से 100 भारतीय नागरिक और 25 चीनी कामगार मिल गए हैं। राहत और आपदा प्रबंधन विभाग के लोगों ने भारतीयों और चीनी नागरिकों को ढूंढ निकाला है। नेपाल सरकार के हवाले से रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।
नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 177 हो गई है, जबकि 800 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल पुलिस ने मृतकों की संख्या को लेकर अपडेट दिया। बताया कि गुरुवार सुबह 10 बजे तक 177 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ये शव भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे बसे कई जिलों से बरामद किए गए, जिनमें रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर शव नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाके चितवन से बरामद किए गए।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि नेपाली सेना ने गुरुवार सुबह बचाव अभियान चलाया और बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक, टिमुरे से 95 नेपाली नागरिकों और 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, गुरुवार सुबह 11 बजे तक 826 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इनमें से 579 पर्यटक थे, हालांकि अथॉरिटी ने यह साफ नहीं किया कि वे विदेशी पर्यटक थे, घरेलू पर्यटक थे या दोनों।
इसी तरह, रसुवा और नुवाकोट जिलों से नेपाली सेना के 48 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) के 13 जवान और 162 अन्य लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इस बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि प्रधानमंत्री शाह गुरुवार सुबह नुवाकोट जिले की बाढ़ प्रभावित बिदुर नगर पालिका आपदा ग्रस्त इलाकों का जायजा लेने पहुंचे।
दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट मिनिस्टर बाढ़ से हुए भौतिक नुकसान का आकलन करेंगे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ राहत, पुनर्वास और बाधित बुनियादी ढांचा सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा करेंगे। पीएमओ ने कहा कि उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे सभी बाढ़ पीड़ित इलाकों में तेजी से राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में तेजी लाने के लिए जरूरी निर्देश जारी करेंगे।
भारत सरकार ने नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास से संपर्क के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। ये नंबर हैं-
+977 985 131 6807,
+977 970 910 7500,
+977 981 032 6117
नेपाल बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 177 हो गया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 826 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जिनमें 300 से ज्यादा भारतीय हैं।
केरल सरकार की एजेंसी NORKA रूट्स ने कहा है कि नेपाल की बाढ़ में केरल के 53 लोग फंसे हुए हैं। NORKA रूट्स, विदेश में रहने वाले केरल के लोगों के मामलों और कल्याणकारी सेवाओं का कामकाज देखती है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NORKA रूट्स के CEO राजेश माधवन ने बताया, 'इससे हमने लगभग 53 केरलवासियों की पहचान की, जिनमें परिवार के सदस्य, वयस्क और बच्चे शामिल हैं।'
माधवन ने बताया कि NORKA रूट्स के पास इन सभी 53 लोगों के संपर्क नंबर हैं, लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण अभी उनसे सीधे संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम अभी तक सीधे संपर्क नहीं कर पाए हैं, लेकिन हमें सामान्य तौर पर यह पता है कि वे सुरक्षित हैं।'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नेपाल में आई तबाही पर गहरा दुख जताया है। साथ ही संगठन ने नेपाल की हरसंभव मदद की भी पेशकश की है। संघ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर नेपाल की त्रासदी पर दुख जताया। साथ ही कहा हम पीड़ितों की मदद के लिए तैयार हैं और हरसंभव मदद करने का प्रयास करेंगे। दरअसल तिब्बत में एक ग्लेशियर ने टूटकर भोटेकोशी नदी की सहायक ल्हेंदे नदी के प्रवाह को रोक दिया। इससे एक झील बनी, जो पानी के दबाव में टूटकर नेपाल-चीन बॉर्डर पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी तबाही लाई।
तमिलनाडु के मंत्री राजमोहन ने विधानसभा को बताया कि सरकार बचाव कार्य और तमिलनाडु के मानसरोवर यात्रा तीर्थयात्रियों की स्थिति पर नजर रख रही है, और 20 तीर्थयात्रियों को वापस लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री राजमोहन ने कहा कि चेन्नई की एक टूर एजेंसी 57 लोगों के अलावा 49 तीर्थयात्रियों को भी मानसरोवर यात्रा पर ले गई थी, और उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। ऐसे में दुनिया के कई देश नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं। भारत ने बड़ी संख्या में राहत सामग्री नेपाल रवाना की है। वहीं अमेरिका ने नेपाल की आर्थिक मदद करने का एलान किया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र भी नेपाल सरकार के साथ मिलकर नेपाल में राहत और बचाव अभियान चला रहा है। यूरोपीय संघ ने भी नेपाल की मदद की पेशकश की है।
नेपाल में बुधवार को आई त्रासदी में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 175 हो गया है। नेपाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सैंकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें 28 देशों के 476 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि लापता लोगों में नेपाली सेना के 44, नेपाली पुलिस के 28 और नेपाल सशस्त्र बलों के 13 जवान भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने कहा है कि लापता लोगों में 579 पर्यटक है।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 162 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों और पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी को लेकर दुनियाभर के नेताओं ने दुख जताते हुए नेपाल और पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने त्रासदी को लेकर गहरा दुख जताते हुए यूरोप की ओर से अधिक से अधिक सहायता की बात कही।
यूरोपीय संघ की अध्यक्ष ने जताया दुख
अध्यक्ष उर्सुला वॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में लिखा, 'नेपाल और चीन में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई समुदायों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं, खासकर उन परिवारों के साथ जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है या जो अब भी उनके बारे में किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं। हम उन बहादुर राहत और बचाव कर्मियों को भी याद कर रहे हैं जो कठिन परिस्थितियों में लोगों की मदद कर रहे हैं।'
उन्होंने बताया कि नेपाल में प्रभावित इलाकों का नक्शा तैयार करने और जमीनी स्तर पर राहत कार्यों में सहायता देने के लिए कोपरनिकस प्रणाली को सक्रिय किया गया है। यूरोपीय संघ जरूरत पड़ने पर और अधिक सहायता देने के लिए भी तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बोले- राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर रहे
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 'एक्स' पोस्ट में कहा, 'नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से मुझे गहरा दुख हुआ है। इस आपदा में कई लोगों की जान गई है, कई लोग लापता हैं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति मेरी पूरी एकजुटता और सहानुभूति है।'
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े साझेदार संगठन बाढ़ प्रभावित समुदायों की मदद के लिए राहत सामग्री और कर्मियों को तेजी से जुटा रहे हैं।
नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसन ने भी इस आपदा पर गहरा दुख जताते हुए 'एक्स' पोस्ट में लिखा, 'नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति हम गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हैं। वहीं, जो लोग अपने परिवार या करीबी लोगों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें हम हिम्मत और शक्ति की कामना करते हैं। हम कठिन परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्य कर रहे नेपाली अधिकारियों और आपदा राहतकर्मियों के प्रयासों की सराहना करते हैं। हम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जिसमें प्रभावित क्षेत्र में मौजूद डच नागरिकों की स्थिति भी शामिल है।'
जापान की प्रधानमंत्री ने भी संवेदनाएं जाहिर कीं
वहीं, जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भी नेपाल बाढ़ त्रासदी पर दुख व्यक्त किया। तकाइची ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, 'नेपाल में आई व्यापक बाढ़ के मद्देनजर, मैं नेपाल सरकार और नेपाल की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पांच जापानी नागरिक लापता हैं, जो मेरे लिए गहरी चिंता का विषय है। नेपाल स्थित जापानी दूतावास ने उनसे संपर्क करने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। दूतावास ने उनकी तलाश में सहायता का अनुरोध भी किया है।'
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा में मुख्य कस्टम अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि जब वे बाहर भागे, तो उन्होंने पानी की एक दीवार देखी जो ऊपर की तरफ से तिमुरे बाजार की ओर तेजी से बढ़ रही थी और उसके पीछे धुएं का गुबार जैसा कुछ दिख रहा था। ढुंगाना ने नेपाली मीडिया को बताया, 'यह बाढ़ थी, जो लगभग 100 मीटर ऊंची लहर की तरह उठ रही थी और उसने बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही पल में बाजार खत्म हो गया।'
नेपाल में आई बाढ़ में ईशा फाउंडेशन के कई तीर्थयात्री भी फंसे हुए हैं। फाउंडेशन की समन्वयक मां गंभीरी ने बताया कि अभी तक ईशा फाउंडेशन के तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों से कुछ जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सबकुछ पता चला जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले हमारे 21 समूह हैं। कई समूह अपनी तीर्थयात्रा पूरी कर चुके हैं, जबकि अन्य रास्ते में हैं। वहीं कुछ शुरू करने वाले हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गुरुवार को जानकारी कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने सुबह से ही तटीय और प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'बुधवार को रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने आज सुबह से ही तटीय और प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज कर दिए हैं। नेपाली सेना ने बुधवार रात ही प्रभावित इलाकों में जरूरतमंद नागरिकों की मदद के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजें, टेंट और दवाइयां जैसी राहत सामग्री पहुंचा दी थी।'
पोस्ट में कहा गया, 'सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर भी बचाव और खोज अभियानों में काफी मदद और सहयोग कर रहा है। बुधवार को जैसे ही बाढ़ आई, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स की टीमों के साथ-साथ सेना और प्राइवेट सेक्टर के हेलीकॉप्टरों को लगाकर बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। सेना की टीम ने पूरी रात लगातार बचाव अभियान चलाया।'
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि गुरुवार सुबह से ही तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नदी के किनारे वाले इलाकों में नेपाली सेना और प्राइवेट सेक्टर के हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ पैदल टीमों को और अधिक सक्रिय करके फंसे हुए लोगों को बचाने और लापता लोगों की खोज का काम तेज कर दिया गया है। सरकार ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है और अपना पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्यों पर केंद्रित किया है।
नेपाल में मची इस तबाही में अब तक 162 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा में 2, नुवाकोट में 12, धादिंग में 27, चितवन में 64, गोरखा में 20, तनहुं में 9, एनपी पूर्व में 26 और एनपी पश्चिम में 2 लोगों के शव मिले हैं। अभी सैकड़ों पर्यटक, मजदूर और अन्य लोग लापता हैं। रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में सबसे अधिक तबाही हुई। बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ इलाकों में आवाजाही ठप हो गई। बताया गया कि यह पानी तिब्बत की तरफ से आया था।
नेपाल में आई बाढ़ का पानी बुधवार देर रात गंडक बैराज, वाल्मीकिनगर पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, रात करीब 8:30 बजे तक बैराज में जलश्राव में लगभग 20 हजार क्यूसेक की वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान है कि रात 11 बजे तक जलश्राव अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिसके बाद इसमें कमी आनी शुरू हो जाएगी। विभाग ने बताया कि गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव करीब दो लाख क्यूसेक रहने की संभावना है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे सामान्य रहने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद विभाग की ओर से बैराज, तटबंधों और नियंत्रण कक्षों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, इस वर्ष 14 जुलाई को गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव 2,24,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। वहीं, वर्ष 2024 में 28 सितंबर को गंडक में जलश्राव 5,62,500 क्यूसेक तक पहुंच गया था। इन आंकड़ों की तुलना में इस बार संभावित अधिकतम जलश्राव काफी कम रहने का अनुमान है।
विभाग ने कहा है कि नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है। गंडक बैराज पर अधिकारियों और कर्मियों को अलर्ट मोड में रखा गया है। तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ नियंत्रण कक्षों से भी नदी के जलस्तर और जलश्राव की लगातार जानकारी ली जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों को किसी भी परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जल संसाधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि घबराएं नहीं, सतर्क रहें।
बता दें कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति और गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका के बीच बिहार सरकार ने संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा कि नेपाल से लगातार जलप्रवाह को लेकर जानकारी मिल रही है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है।
चीन के सरकारी मीडिया ने बताया है कि तिब्बत में बाढ़ के बाद से 558 लोग लापता है। नेपाल में भी सैंकड़ों लोग लापता है। वहीं नेपाल में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 162 हो गया है।
नेपाल के भोटेकोशी बाढ़ की चपेट में आने से विभिन्न कमर्शियल बैंक की नौ शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने ये भी बताया कि रसुवा में इन शाखाओं में काम करने वाले लगभग 26 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो पाया है। एसोसिएशन का कहना है कि टेलीफोन लाइनें खराब होने और बिजली न होने के कारण संपर्क करने में दिक्कतें आ रही हैं। एसोसिएशन के अनुसार, रसुवा में माछापुछ्रे, नबिल, सनिमा, लक्ष्मी सनराइज, हिमालयन, प्रभु, ग्लोबल आईएमई, इन्वेस्टमेंट मेगा और एनएमएबी बैंक की शाखाएं थीं। कान्तिपुर टाइम्स ने बताया कि बैंकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कोइराला ने जानकारी दी कि इन शाखाओं में काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है।
बुधवार तड़के अचानक नेपाल की भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा और उसने बाढ़ का रूप ले लिया। देखते ही देखते कई पुल, प्रोजेक्ट्स और इमारतें भरभरा कर गिरने लगीं। पुलिस अलग-अलग जिलों में बाढ़ की चपेट में आने वाले घरों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है, विभिन्न एजेंसियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ज़रूरी बचाव और खोज अभियान चला रही है, और कई जगहों पर रास्ते की रुकावटें हटा रही है।
रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए काठमांडू हवाई अड्डे से 49 बचाव उड़ानें भरी गईं। काठमांडू हवाई अड्डे पर स्थित आरसीसी कार्यालय के अनुसार, बुधवार शाम 5:20 बजे तक निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों ने धुंचे, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, मैलुंग, त्रिशूली और धाडिंग इलाकों में बचाव और राहत पहुंचाने के लिए उड़ान भरी। वहीं, इस विपत्ति में भारत ने पड़ोसी देश की हर मुमकिन मदद का आश्वासन दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और कहा, 'इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।'
भारत ने नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत कार्यों के लिए 10 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सहायता संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खडका राज पौडेल को सौंपी। भारतीय दूतावास ने कहा कि यह मदद बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में काम आएगी। भारत ने दोहराया कि वह मुश्किल समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में अमेरिका नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख जताया है। बाढ़ में कई लोगों की मौत हुई है। कई लोग लापता हैं। बड़े स्तर पर नुकसान भी हुआ है। गुटेरेस ने 'एक्स' पर लिखा कि वह बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हैं। उन्होंने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं।
गुटेरेस ने कहा कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार की अगुवाई में चल रहे राहत अभियान में मदद कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े संगठन बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान और कर्मचारियों को जुटा रहे हैं।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर कहा, कनाडा सरकार इस मुश्किल समय में बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। कार्नी ने उन लोगों के प्रति भी संवेदना जताई है, जिन्होंने अपने किसी करीबी को खो दिया है। साथ ही उन लोगों के बारे में भी चिंता जताई, जो अभी भी अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। उसने इलाके में मौजूद सभी कनाडाई नागरिकों से जल्द से जल्द आरओसीए प्रणाली में अपना पंजीकरण कराने को कहा है। सरकार ने कहा कि बचाव अभियान जारी है। कनाडा जरूरत पड़ने पर मदद देने के लिए तैयार है।
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के साथ एकजुटता जताई है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले।
इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले। pic.twitter.com/bz8jdZJc1D
— Gurudev Sri Sri Ravi Shankar (@Gurudev) August 26, 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है। रुबियो ने कहा, हम नेपाल के लोगों के साथ अपनी एकजुटता जताते हैं। इस विनाशकारी बाढ़ के बाद हम उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय नेपाल सरकार को जरूरी मानवीय मदद देने के लिए तैयार है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बचाव और तलाश का काम जारी है। अब तक सामने आई जानकारी इस तरह है-
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी महासंघ ने नेपाल के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर की आपात मदद जारी करने का एलान किया है। यह पैसा नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी को दिया जाएगा। इससे बाढ़ से प्रभावित लोगों की तत्काल मदद की जा सकेगी।
यह रकम अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी महासंघ के आपदा प्रतिक्रिया आपात कोष से दी जाएगी। इस मदद से नेपाल रेड क्रॉस लोगों की तत्काल जरूरतें पूरी करेगा। वहीं, उसकी टीमें बाढ़ से हुई तबाही का आकलन करेंगी। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि किन इलाकों और समुदायों को मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है।
नेपाली सेना रसुवा जिले से बचाए गए लोगों को लेकर चकरा देव अस्पताल में आ रही है। यह यहां का मुख्य अस्पताल है। यहां बचे लोगों ने उस खौफनाक पल को याद किया, जब मलबे का सैलाब उनकी ओर तेजी से आया। 68 साल के केशव प्रसाद बराल ने बताया, वह पानी नहीं था। कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधे हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे वह पास आ रहा था, उसकी ऊंचाई बढ़ती जा रही थी।
उन्होंने बताया, मैंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ने की कोशिश की। मैं उन्हें छत पर ले जाना चाहता था। लेकिन कीचड़ उन्हें बहाकर ले गया। मैं किसी तरह छत तक पहुंच गया। इसके अलावा कहीं जाने की जगह नहीं थी। बचने का कोई रास्ता नहीं था। ऊपर की ओर जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। बराल ने बताया कि करीब चार या पांच घंटे बाद उन्हें बचाने के लिए एक हेलिकॉप्टर आया। लेकिन तब तक वह अपनी पत्नी को खोज नहीं पाए थे। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी अब भी कहीं मलबे के नीचे है।
नेपाल के मजदूर विवेक कुमाल अपनी जान बचने को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते। वह चीन के तिब्बत से लगे नेपाल के हिमालयी इलाके में सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले से नीचे की ओर बिदुर में काम कर रहे थे। तभी उन्हें फुफकार जैसी आवाज सुनाई दी।
वह एक नए बने घर के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे। गड्ढा करीब 5 फीट यानी 1.5 मीटर गहरा था। तभी पानी, मिट्टी और पत्थरों की एक बड़ी लहर तेजी से नीचे आई। इसने विवेक और उनके आसपास की हर चीज को बहाना शुरू कर दिया। उनके चार साथी गड्ढे से करीब 5 फीट ऊपर खड़े थे। उन्होंने विवेक को गड्ढे से बाहर निकलने और भागने के लिए चिल्लाकर कहा। विवेक जब तक गड्ढे से बाहर निकले, उनके साथी वहां से भाग चुके थे।
कुमाल ने काठमांडू के राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर में अपने बिस्तर से बताया, मैं भागने लगा। तभी पानी की एक बड़ी लहर इतनी तेज आवाज के साथ आई, जैसे भूकंप आ गया हो। उस समय उनके भाई दिनेश उनके पास बैठे थे। तेज बहाव उन्हें मिट्टी और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया। उन्होंने बताया, लेकिन किस्मत से मैं एक आम के पेड़ में फंस गया।
तिब्बत से शुरू हुई भीषण अचानक बाढ़ ने बुधवार को मध्य नेपाल में भारी तबाही मचा दी। इस बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 157 हो गया है। 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों को बुरी तरह तबाह कर दिया। कई अहम पुल पानी में बह गए। करीब 12 जलविद्युत परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली। इससे आशंका है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर यानी बर्फ का बड़ा हिस्सा टूट गया होगा। इससे अचानक बहुत ज्यादा पानी निकला। इसी वजह से यह भीषण बाढ़ आई होगी।
बाढ़ से हुए नुकसान के बाद बुधवार दोपहर नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग तथा चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि सीमा के अपनी तरफ पानी का स्तर बढ़ना शुरू होते ही वह नेपाल को जानकारी देगा। नेपाल और चीन के बीच आपदा के खतरे को कम करने और आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद करने को लेकर पहले से समझौता है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि अचानक आई इस विशाल बाढ़ की वजह ल्हेंडे नदी का रास्ता हिमस्खलन से बंद होना था। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने भी कहा है कि शुरुआती जांच में नेपाल-चीन सीमा के इलाके में हिमस्खलन की बात सामने आई है।
प्राधिकरण ने प्लैनेट लैब्स से मिली उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके बाद कहा गया कि ल्हेंडे नदी में मलबे के साथ आई बाढ़ संभवत: हिमस्खलन के कारण शुरू हुई। यह हिमस्खलन तिब्बत में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ था। 25 और 26 अगस्त की उपग्रह तस्वीरों में हिमस्खलन और इसके बाद ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ दिखाई देती है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि पहले भी ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। जब चीन की तरफ से बाढ़ आती थी, तब भी ऐसी दिक्कत हुई थी। लेकिन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, हमें अभी भी पता नहीं है कि कितना खतरा बाकी है।
उन्होंने कहा कि जब तक नेपाल का विदेश मंत्रालय चीन के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था नहीं बनाता, जिससे शुरुआती चेतावनी नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तक पहुंच सके, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। पोखरेल ने कहा कि सरकार को यह सोचना होगा कि वह आपदा आने के बाद केवल राहत और बचाव तक सीमित रहेगी या पहले से ऐसी व्यवस्था बनाएगी, जिससे आपदा में लोगों की जान न जाए।
अधिकारियों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ की सही जानकारी समय पर नहीं मिलने से जान और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें तिब्बत से शुरू हुई इस बाढ़ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या नेपाल में लोगों को बाढ़ की चेतावनी तभी मिलेगी, जब पानी उनकी नदियों में पहुंच जाएगा? या फिर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में कोई घटना होते ही नेपाल को इसकी जानकारी मिल जाए? समस्या केवल नेपाल और चीन के बीच जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है। नेपाल ने अपने इलाके में जो उपकरण लगाए हैं, वे भी बाढ़ आने से पहले चेतावनी देने में नाकाम रहे।
भोटे कोशी नदी में पिछले साल भी बाढ़ आई थी। उस समय जिन इलाकों को नुकसान हुआ था, वे अभी सामान्य स्थिति में लौट भी नहीं पाए थे। पिछले साल 8 जुलाई को ल्हेंडे नदी में आई बाढ़ में 11 लोगों की मौत हुई थी। इस बाढ़ ने कई जगह सड़क के हिस्सों को भी बहा दिया था। बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था।
नुवाकोट के बिदुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 के अध्यक्ष रवींद्र नेपाल ने बताया कि बाढ़ ने सोले से अक्करे बाजार तक सैकड़ों घरों को बहा दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सुरक्षित जगह पहुंचने में कामयाब रहे। लेकिन कई बुजुर्ग और बच्चे अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा, मैं सुबह से ही नगर पालिका की इमारत में फंसा हुआ हूं। घर जाने के लिए न सड़क बची है और न पुल।
बिदुर नगर पालिका-7 के डंडाथोक टुप्चे के रहने वाले गोकरण अधिकारी ने बताया कि उनके गांव में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि उनके जानने वाले ज्यादातर लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि सोले और अक्करे बाजार के बीच करमेटार में केवल कुछ घर ही खड़े हैं। उन्होंने कहा, दूर से जो घर सही दिख रहे हैं, वे भी पूरी तरह मिट्टी और मलबे से ढके हुए हैं।
भोटे कोशी नदी में बुधवार सुबह करीब 10 बजे अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचा दी। इसमें कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटक समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। निजी और सरकारी संपत्ति भी बह गई। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है।
हिमस्खलन से भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का मार्ग बंद हो गया था, जिससे यह बाढ़ आई। बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नजदीक तिमुरे को अपनी चपेट में लिया। यहां सैकड़ों लोग रहते थे। बाढ़ आने से पहले ही इस बस्ती का बड़ा हिस्सा बह गया। इसके बाद पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
इलाके में बारिश की कोई खबर नहीं थी। इसलिए लोगों को बाढ़ आने का कोई अंदाजा नहीं था। लोग रोज की तरह अपने काम में लगे थे। तभी अचानक बाढ़ आ गई। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें जमीन हिलती हुई महसूस हुई, तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है। वह बाहर भागे। तब उन्होंने पानी की एक बहुत बड़ी दीवार देखी। पानी के साथ धुएं जैसा कुछ भी दिखाई दे रहा था। यह पानी ऊपर की तरफ से तेजी से तिमुरे बाजार की ओर आ रहा था। बाढ़ स्याफ्रुबेसी की ओर बढ़ती हुई आगे के इलाकों तक पहुंच गई। नदी के रास्ते में जो कुछ भी आया, वह बह गया। इसमें लोग, जानवर, इमारतें और सरकारी ढांचे भी शामिल थे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ बैंक शाखाएं तबाह बुधवार की बाढ़ ने नौ जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इतनी ही संख्या में वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं भी तबाह हो गईं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क बह गई। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का अभी पूरा आकलन नहीं हो पाया है।
लापता लोगों की बड़ी संख्या और भारी तबाही को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाढ़ नेपाल के हाल के इतिहास की सबसे खतरनाक आपदाओं में से एक हो सकती है। यह बाढ़ 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ से भी बड़ी आपदा साबित हो सकती है। उस बाढ़ में 1,400 लोगों की मौत हुई थी। लंबे समय से इसे नेपाल की सबसे बड़ी आपदा माना जाता है।