बाइडन ने कहा- हमने अफगानिस्तान में अल-कायदा को खत्म किया, हमने ओसामा बिन लादेन की तलाश कभी खत्म नहीं की और उसे आखिरकार पकड़ ही लिया।
अफगानिस्तान संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का संबोधन- मेरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और मैंने अफगानिस्तान के हालात को करीब से देखा है। इसके मद्देजनर हमने अपनी योजना को अमलीजामा पहनाते हुए कदम उठाए हैं। हम 20 साल पहले स्पष्ट लक्ष्य के साथ अफगानिस्तान गए थे कि जिन्होंने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हमला किया उन्हें सबक सिखाना है। साथ ही ये निश्चित करना था कि अल-कायदा दोबारा अमेरिका पर हमला करने के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल न कर पाए और हमने ऐसा किया।
यूएनएससी सदस्यों ने अफगानिस्तान में सख्ती से आतंकवाद रोकने की जरूरत पर जोर दिया। कहा कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी देश को धमकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। तालिबान या किसी अन्य संगठन को आतंकवाद को मदद नहीं देनी चाहिए।
अमेरिका ने कहा- अभी हम हामिद करजई एयरपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेना के जवान नागरिक व सैन्य विमानों से रवाना हो सकें।
अमेरिका ने बयान जारी कर कहा- अफगानी और अंतर्राषट्रीय नागरिकों को देश छोड़ने की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके लिए सड़क, एयरपोर्ट और सीमाएं खोली जाएं और शांति बरकरार रखी जाए। अफगानिस्तान के लोग शांतिपूर्ण तरीके से रहना चाहते हैं। हम उनकी मदद के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का कहना है कि तालिबान के अफगान राजधानी में प्रवेश करने के साथ ही अमेरिका काबुल में अपने दूतावास के शेष कर्मचारियों को व्यवस्थित तरीके से निकाल रहा है। हालांकि उन्होंने जल्दीबाजी में अमेरिका के वहां से निकलने के आरोपों को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि यह वियतनाम की पुनरावृत्ति नहीं है।
तालिबान के दूसरे नंबर के नेता मुल्ला बारादर का बयान, उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी हमें जीत हासिल हो जाएगी। बारादर ने कहा कि सभी लोगों के जान-माल की रक्षा की जाएगी। अगले कुछ दिनों में सब नियंत्रित कर लिया जाएगा। हमने सोचा नहीं था कि इतनी आसान और इतनी जल्दी जीत मिलेगी। अगले कुछ दिनों में सभी चीजें सामान्य हो जाएंगी।
अब अफगानिस्तान में सत्ता हस्तांतरण का काम शुरू होगा। तालिबान ने कहा है कि वह देश में इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान को दोबारा स्थापित करेगा। पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, अब्दुल्ला अब्दुल्ला और पूर्व तालिबान नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार ने एक कमेटी का गठन किया है जो शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को अंजाम देगा।
काबुल एयरपोर्ट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क खचाखच भरी हुई है। लोग जल्द से जल्द अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं। अमेरिकी सुरक्षा बल इनकी सुरक्षा में तैनात हैं।
अफगानिस्तान पर तालिबान का पूरी तरह कब्जा हो गया है। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग चुके हैं। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि देश को खून-खराबे से बचाने के लिए उन्होंने देश छोड़ा है। उन्होंने कहा कि मेरे पास इसके सिवाय और कोई रास्ता नहीं था। बताया जा रहा है कि वो ताजिकिस्तान भागे हैं।
काबुल में शांति बनी हुई है, हालांकि अभी भी बीच-बीच में गोलीबारी और धमाके की आवाज आ रही है। इस बीच अमेरिका समेत तमाम देश अपने दूतावास से कर्मचारियों को निकाल रहे हैं। अफगानिस्तान के ताजा हालात पर आपको दे रहे हैं लगातार अपडेट-