11:07 AM, 20-Jul-2024
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101 गैर जमानती वारंट के मामले में 53 दिन से जेल में बंद विधायक रफीक अंसारी की हाईकोर्ट से जमानत हो गई है लेकिन अब भड़काऊ बयान वाले मुकदमे में भी उनको जमानत लेनी होगी। इस मामले में न्यायालय में उनके खिलाफ रिमांड बन चुका है।
2022 के विधानसभा चुनाव में शहर सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रफीक अंसारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। चुनावी सभा में रफीक बोल रहे थे कि भाजपा सरकार पर टिप्पणी की थी। कहा था कि मेरठ का मुसलमान कभी डरा नहीं है, डरेगा भी नहीं। पांच साल सरकार मुसलमानों को दबाने का काम कर रही है। इस मामले में नौचंदी थाना पुलिस ने रफीक अंसारी के खिलाफ धार्मिक भावना भड़काने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की थी।
नौचंदी पुलिस ने धार्मिक भावना भड़काने वाले मामले में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद कोर्ट ने 309 सीआरपीसी में रिमांड बनाकर विधायक को जेल से बुलाया था। यानी, अब इस मामले में रफीक अंसारी पर न्यायालय में मुकदमा चलेगा। ऐसे में इस मुकदमे में भी विधायक को जमानत करानी पड़ेगी।
हिस्टीशीटर रहे हैं रफीक अंसारी
मेरठ के नौचंदी थाने के हिस्ट्रीशीटर रहे रफीक अंसारी 32 साल पहले जब बवाल हुआ तब वे पार्षद थे। सपा के टिकट पर वे लगातार तीन बार पार्षद चुने गए। 2012 में सपा के टिकट पर मेरठ सीट से विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के लक्ष्मीकांत वाजपेयी के सामने हार गए। चुनाव हारने के बाद भी रफीक को सपा सरकार में हथकरघा एवं पर्यटन विभाग में दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया।
2017 में अंसारी ने फिर से लक्ष्मीकांत वाजपेयी के सामने चुनाव लड़ा और उन्हें हराकर पहली बार विधायक बने। 2022 में कमल दत्त शर्मा को हराकर दोबारा विधायक बने। इस दौरान 101 गैर जमानती वारंट जारी हुए लेकिन रफीक अंसारी उन्हें अनदेखा करते रहे।