शारदीय नवरात्रि महत्व
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसकी धूम दशहरे तक बनी रहती हैं। यह अवधि देवी मां दुर्गा को समर्पित है, जिसमें उनके नौ दिव्य स्वरूपों की विधि पूर्वक आराधना की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक शारदीय नवरात्रि में देवी का आगमन पृथ्वी पर होता है और वह भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाती है। नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा, भक्ति, भजन-कीर्तन और देवी के प्रति भावनाएं व्यक्त करने का शानदार अवसर है। कहते हैं कि यदि नवरात्रि के नौ दिनों में सच्चे भाव से माता के नाम का स्मरण किया जाए, तो व्यक्ति के कष्टों का निवारण शीघ्र ही होता है। चूंकि नवरात्रि हिंदू धर्म के बड़े तीज-त्योहारों में से एक है, इसलिए घरों से लेकर पूजा-पंडाल सहित मंदिरों में पूजा-पाठ का भव्य आयोजन किया जाता है।
शारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय त्योहार आज से शुरू होने पर भक्त छतरपुर के श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 9 मिनट से प्रारंभ हो चुका है। यह मुहूर्त सुबह 8 बजकर 6 मिनट तक बना रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा दूसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर के 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : Amar Ujala
पूजा विधि
- पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।
- देवी को चुन्नी और वस्त्र सहित अन्य श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
- इसके बाद रोली और अक्षत से देवी को टीका लगाएं और देवी के समक्ष धूप-दीपक जलाएं।
- फिर आप फूल की माला देवी को पहनाएं। इसके बाद साफ जल भरकर कलश स्थापित करें और उस पर नारियल रखें।
- इसके बाद जौ भी बो दें। अब आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।अंत में माता की आरती करते हुए गलतियों की माफी मांगे
जौ बोने की विधि
नवरात्रि में जौ बोने का विशेष महत्व है। इसके लिए एक चौड़े मुंह वाला मिट्टी का पात्र लें। उसमें मिट्टी की एक परत बिछाकर जौ के बीज फैला दें। फिर उसके ऊपर मिट्टी की एक और हल्की परत डालें और बहुत थोड़ा जल छिड़कें। मान्यता है कि ये जवारे जितने हरे-भरे उगते हैं, आने वाला वर्ष उतना ही सुख-समृद्धि और संपन्नता से भरा होता है।
माता की सवारी
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का आरंभ जिस वार को होता है, उसके आधार पर देवी का वाहन तय होता है। इस वर्ष नवरात्रि सोमवार से प्रारंभ हो रही है, इसलिए मां दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है। हाथी पर माता का आगमन अत्यंत शुभ माना जाता है। यह अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि और राष्ट्र में उन्नति का सूचक है। इससे देश में अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं और खुशहाली आती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। भक्ति, साहस, संयम और संकल्प से परिपूर्ण यह पावन पर्व सभी के जीवन में नई शक्ति और नया विश्वास लेकर आए। जय माता दी!"
शारदीय नवरात्रि का पहला दिन
आदिशक्ति की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि 22 सितंबर से आरंभ होने जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा का विधान है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की साधना भक्तों को शक्ति और आत्मबल प्रदान करती हैं।
शैलपुत्री की उपासना से प्राप्त होते हैं दिव्य फल
मां शैलपुत्री की आराधना करने से सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
प्रथम दिन शैलपुत्री की पूजाविधि
स्नान-ध्यान कर शुभ मुहूर्त में पूजा प्रारंभ करें। कलश स्थापना के बाद एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर अक्षत रखें और उस पर मां शैलपुत्री का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से उनका अभिषेक करें। लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल चंदन और लाल फल अर्पित करना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। अंत में माता की आरती कर प्रसन्न करें।
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
माता शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना गया है। पूर्व जन्म में वे राजा दक्ष की कन्या सती थीं, जिन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान देख सती ने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ ध्वस्त कर दिया और सती के शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 अंग विभक्त किए, जो शक्तिपीठ कहलाए। इसके उपरांत सती ने हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया।
मां शैलपुत्री की आराधना का मंत्र
पूजन के दौरान इस मंत्र का जाप करने से मां शैलपुत्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।
नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिन की होगी
इस साल शारदीय नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिन की होगी। नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होगी। तृतीया तिथि का व्रत 24 और 25 सितंबर को रखा जाएगा। इस बार तृतीया तिथि दो दिन रहेगी, जिससे शारदीय नवरात्रि में एक दिन की वृद्धि होगी। नवरात्रि में बढ़ती तिथि को शुभ माना जाता है, जबकि घटती तिथि को अशुभ, नवरात्रि में बढ़ती तिथि शक्ति, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
पूजा सामग्री
- मिट्टी, मिट्टी का घड़ा, मिट्टी का ढक्कन, कलावा, जटा वाला नारियल,
- जल, गंगाजल, लाल रंग का कपड़ा, एक मिट्टी का दीपक,
- बंदनवार, पान, सुपारी,
- बताशा, लाल रंग का कपड़ा,
- फूल, घी, फूल माला, आम के पत्ते, पंचमेवा
- पूजा की थाली, दीपक,
- हल्दी, मौली, रोली, कमलगट्टा,
- शहद, शक्कर, नैवेध,
- नारियल जटा वाला, सूखा नारियल,
- दूध, वस्त्र, दही, लौंग, मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर
अखंड ज्योति का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस ज्योति के प्रकाश से परिवार के सदस्यों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह परिवार की सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोषों को भी समाप्त करती है।
यदि ज्योति बुझ जाए तो क्या करें?
अगर पूरी सावधानी के बावजूद ज्योति बुझ जाए, तो घबराएं नहीं। तुरंत देवी से क्षमा-प्रार्थना करते हुए और उनके मंत्रों का जाप करते हुए ज्योति को दोबारा जला दें। याद रखें कि इस साधना में आपकी श्रद्धा और भावना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सच्ची निष्ठा से की गई पूजा को देवी अवश्य स्वीकार करती हैं।
नवरात्रि में इन कार्यों को करने से बचें
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में कुछ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इस अवधि में बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना अशुभ होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी रुष्ट हो जाती हैं। यदि आपने घर में कलश स्थापना की है या अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी भी सूना नहीं छोड़ना चाहिए। किसी न किसी सदस्य का घर में रहना अनिवार्य होता है। इन दिनों में चमड़े से बनी वस्तुओं जैसे बेल्ट, जूते या बैग का उपयोग करने से भी बचना चाहिए।
मां शैलपुत्री आरती Maa Shailputri Aarti in Hindi
शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
देवी को अर्पित करें ये चीजें
- श्रृंगार सामग्री
- शीशा, लाल चुनरी, नथ, गजरा, बिंदी, काजल,
- मेहंदी, महावर, शीशा, बिछिया, इत्र,
- चोटी, पायल, मांग टीका, चूड़ियां, सिंदूर
- लिपस्टिक, रबर बैंड,कान की बाली, कंघी,
अखंड ज्योति जलाने के नियम Akhand Jyoti Jalane Ke niyam
अखंड ज्योति को जलाने से पहले मन में नौ दिनों तक इसे प्रज्ज्वलित रखने का संकल्प लें। ज्योति के लिए पीतल या मिट्टी का दीया इस्तेमाल करें और इसे सीधे जमीन पर न रखकर एक चौकी या पाटे पर स्थापित करें। ज्योति जलाने के लिए गाय के शुद्ध घी का उपयोग करना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो आप तिल या सरसों के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं।
दुर्गा चालीसा पाठ (Durga Chalisa Path In Hindi)
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥
राशियों के अनुसार नवरात्रि में करने देवी की पूजा
मेष राशि
मेष राशि वालों को मां शैलपुत्री की आराधना करनी चाहिए। पूजा में देवी को लाल फूल और लाल चंदन अर्पित करें तथा “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जाप करें। इस उपाय से आत्मबल बढ़ेगा, रुके हुए कार्य पूरे होंगे और करियर में सफलता मिलेगी।
वृषभ राशि
इस राशि के लोग मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करें। पूजा में माता को सफेद पुष्प और दही का भोग लगाएं। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सामंजस्य और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होगी।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातक मां चंद्रघंटा की आराधना करें। पूजा में पीत वस्त्र धारण कर देवी को घंटा या घंघरू अर्पित करें। इस उपाय को करने से शत्रु नाश होगा और समाज व कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ेगा।
राशियों के अनुसार नवरात्रि में करने देवी की पूजा
कर्क राशि
कर्क राशि के लोग मां कूष्मांडा की उपासना करें। इस दिन कुम्हड़ा (भोपला) या शहद का भोग चढ़ाएं। ऐसा करने से सेहत में सुधार होगा और परिवारिक वातावरण शांतिपूर्ण रहेगा।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातक मां स्कंदमाता की साधना करें। पूजा में तांबे या सोने के दीपक में घी जलाएं। इससे संतान सुख मिलेगा और शिक्षा व करियर में उन्नति होगी।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों को मां कात्यायनी की उपासना करनी चाहिए। उन्हें हरी चूड़ियां चढ़ाएं और कन्या पूजन करें। इस उपाय को करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी और रिश्तों में मधुरता आएगी।
राशियों के अनुसार नवरात्रि में करने देवी की पूजा
तुला राशि
तुला राशि के लोगों को मां कालरात्रि की साधना करनी चाहिए। आप गुड़ और नीम के पत्तों का भोग लगा सकते हैं। इस उपाय से नकारात्मक शक्तियां दूर होंगी और अचानक आर्थिक लाभ होगा।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातक मां महागौरी की आराधना करें। साथ ही चांदी का आभूषण या सफेद वस्त्र दान करें। इस उपाय को करने से जीवन में शांति, सुख और वैवाहिक आनंद मिलेगा।
धनु राशि
धनु राशि के जातक मां सिद्धिदात्री की उपासना करें और पीले वस्त्र धारण कर चंपा के पुष्प अर्पित करें। इस उपाय से शिक्षा, ज्ञान, उच्च अध्ययन और विदेश यात्रा के अवसर मिलेंगे।
मकर राशि
मकर राशि के लोग मां शैलपुत्री की आराधना करें। साथ ही काले तिल और उड़द का दान करें। इससे करियर में स्थिरता आएगी और कर्ज-मुक्ति का योग बनेगा।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातक मां ब्रह्मचारिणी की साधना करें। पूजा में चावल और मिश्री का भोग चढ़ाएं। ऐसा करने से मानसिक शांति और अप्रत्याशित धन लाभ मिलेगा।
मीन राशि
मीन राशि के लोग मां कात्यायनी की उपासना करें। साथ ही केले और पीले फूल अर्पित करें। इस उपाय को करने से विवाह के योग मजबूत होंगे और रुके हुए कार्य पूरे होंगे।
शारदीय नवरात्रि 2025 कैलेंडर
- 22 सितंबर 2025 – प्रतिपदा (शैलपुत्री पूजा)
- 23 सितंबर 2025 – द्वितीया (ब्रह्मचारिणी पूजा)
- 24 सितंबर 2025 – तृतीया (चन्द्रघण्टा पूजा)
- 26 सितंबर 2025 – चतुर्थी (कूष्माण्डा पूजा)
- 27 सितंबर 2025 – पञ्चमी (स्कन्दमाता पूजा)
- 28 सितंबर 2025 – महाषष्ठी (कात्यायनी पूजा)
- 29 सितंबर 2025 – महासप्तमी (कालरात्रि पूजा)
- 30 सितंबर 2025 – महाअष्टमी (महागौरी पूजा)
- 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी (सिद्धिदात्री पूजा)
- 2 अक्टूबर 2025 – विजयादशमी
नवरात्रि व्रत के महत्वपूर्ण नियम
नवरात्रि का व्रत केवल निराहार रहना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन है। इन दिनों में सात्विक भोजन (फलाहार, सेंधा नमक) ही ग्रहण करें। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा से पूरी तरह दूर रहें। व्रत के दौरान क्रोध, असत्य, और निंदा से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और अपनी ऊर्जा को भक्ति में लगाएं। प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की आरती और मंत्रों का जाप अवश्य करें। इन नियमों का पालन करने से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
क्यों 10 दिनों की होगी नवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि में किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है, बल्कि वृद्धि हो रही है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व नौ की बजाय पूरे दस दिनों का है, जो एक दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है। ज्योतिष पंचांग के अनुसार, ऐसा 'वृद्धि तिथि' के कारण हो रहा है। इस बार तृतीया तिथि का व्रत 24 और 25 सितंबर को रखा जाएगा। दरअसल तृतीया तिथि दो दिन रहेगी, जिससे शारदीय नवरात्रि में एक दिन की वृद्धि होगी। देवी की उपासना के लिए एक अतिरिक्त दिन का मिलना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है, जिससे भक्तों को साधना के लिए अधिक समय प्राप्त होगा।
नवरात्रि में जरूर करें ये सरल उपाय
अखंड ज्योत
यदि संभव हो तो नौ दिनों के लिए घर में अखंड ज्योत जलाएं। यह देवी के प्रति आपकी अटूट आस्था का प्रतीक है और घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सुख-शांति लाता है।
लाल पुष्प और श्रृंगार
प्रतिदिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल या कोई अन्य लाल पुष्प अर्पित करें। साथ ही, नवरात्रि में किसी एक दिन मां को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें। इससे देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।
Shardiya Navratri 2025
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नवरात्रि के प्रथम दिन मंगल तुला, शुक्र सिंह, सूर्य कन्या और शनि मीन राशि में विराजमान होंगे। इसके अलावा 24 सितंबर को चंद्रमा तुला राशि में गोचर करते हुए मंगल के साथ मिलकर महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण भी करेंगे। ऐसे में ग्रहों की विशेष स्थिति और देवी की असीम कृपा से इस बार शारदीय नवरात्रि कुछ राशियों के लिए भाग्यशाली सिद्ध होगी।
तुला राशि
आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ आपके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होने के योग है। करियर को लेकर निर्णय लेने में आप स्वयं को सफल महसूस करेंगे।
मकर राशि
मकर राशि वालों को प्रेम जीवन में कई सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। कार्यस्थल पर आपकी जमकर प्रशंसा होगी और पदोन्नति की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। आर्थिक लाभ होने के साथ-साथ नए आय के स्रोत प्राप्त होंगे।
कुंभ राशि
आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। प्रेम संबंधों में आपके गहराई आएगी। नए व्यापार के प्रारंभ होने से आपका मन प्रसन्न रहेगा और स्वास्थ्य में सुधार भी महसूस होगा।
पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा को समर्पित
मां शैलपुत्री बीज मंत्र
ह्रीं शिवायै नम:
प्रार्थना मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित
मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
प्रार्थना मंत्र
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित
मां चंद्रघंटा बीज मंत्र
ऐं श्रीं शक्तयै नम:
प्रार्थना मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा को समर्पित
मां कूष्मांडा बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:
प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित
मां स्कंदमाता बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
प्रार्थना मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
छठा माता मां कात्यायनी की पूजा को समर्पित
मां कात्यायनी बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
प्रार्थना मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सांतवा दिन मां कालरात्रि को समर्पित
मां कालरात्रि बीज मंत्र
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
प्रार्थना मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आंठवा दिन मां महागौरी की पूजा को समर्पित
मां महागौरी बीज मंत्र
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
प्रार्थना मंत्र
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री की पूजा को समर्पित
मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
प्रार्थना मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
माता दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की कथा बहुत रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष ने एक बार अपने राज महल में यज्ञ का आयोजन करवाया था। राजा दक्ष का अपने दामाद भगवान शिव से बहुत ज्यादा मतभेद था जिसके कारण वह भगवान शिव से गुस्सा रहते थे। राजा दक्ष ने सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव जी का अपनान करने के लिए उनको यज्ञ में नहीं बुलाया। जब यह बात माता पार्तती को पता चली तो वह अपने पिता के द्वारा करवाए गए यज्ञ में शामिल होना चाहती थी। शिवजी के कई बार मना करने के बाद भी माता पार्वती नहीं मानी और अकेले अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं। वहां पर अपने पति का का पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान देख सती ने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ को तहस नहस कर दिया और सती के शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 अंग विभक्त किए, जो शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद सती ने हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया।
शारदीय नवरात्रि 2025
- फोटो : अमर उजाला
दिव्य है मां की आंखों का नूर,
संकटों को मां करती हैं दूर,
मां की ये छवि निराली
नवरात्रि में आपके घर लाए खुशहाली।।
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
नवरात्रि में भोजन के नियम
- व्रत रखने वाले भक्तों को अनाज, नमक और तैलीय पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इसके स्थान पर फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक का सेवन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- दिनभर फलाहार कर रात में एक बार भोजन करने का विधान है। कई श्रद्धालु अष्टमी या नवमी तक निर्जल उपवास भी करते हैं, लेकिन यह तभी उचित है जब स्वास्थ्य इसकी अनुमति दे।
- व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध, आलस्य, नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
- इस समय तामसिक भोजन, मादक पदार्थ और मांसाहार से पूर्णत: बचना चाहिए।
- व्रत के दौरान घर में शुद्ध और सात्त्विक वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
सरल और संपूर्ण पूजाविधि Navratri 2025 Puja Vidhi
सबसे पहले प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें और उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत व आम के पत्ते डालें। अंत में एक नारियल पर चुनरी लपेटकर उसे कलश के ऊपर रख दें।
इन मंत्रों का करें जाप
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करने से वे जल्दी प्रसन्न होती हैं और जीवन में स्थिरता व दृढ़ता का आशीर्वाद देती हैं।
बीज मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों के साथ अपनी पूजा संपन्न कर देवी से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
नवरात्रि के पहले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
कलश स्थापना में लापरवाही न करें
पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। कई बार लोग जल्दबाज़ी में बिना दिशा और नियम का ध्यान रखे कलश स्थापित कर देते हैं। कलश को उत्तर-पूर्व दिशा में और साफ जगह पर ही रखें।
लहसुन-प्याज का सेवन भूलकर भी न करें
नवरात्रि के दौरान सात्विकता का पालन जरूरी है। पहले दिन ही लहसुन, प्याज, मांसाहार या मदिरा का सेवन अशुभ माना जाता है। इससे व्रत की पवित्रता भंग हो जाती है और साधक को माता की पूर्ण कृपा नहीं मिलती।
नवरात्रि के पहले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
घर को गंदा न रखें
मां दुर्गा को स्वच्छता बेहद प्रिय है। पहले दिन ही यदि घर में गंदगी रहती है तो इसे अपवित्र माना जाता है। घर में धूप-दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें। साथ ही शरीर और मन को भी स्वच्छ रखें। नवरात्रि में स्नान जरूर करें।
व्रत के दौरान गुस्सा और कटु वचन न बोलें
नवरात्रि में साधक को आचरण से भी सात्विकता दिखानी चाहिए। गुस्सा करना, झगड़ा करना या अपशब्द बोलना व्रत की पवित्रता को कम कर देता है। पहले दिन से ही संयम और शांति का पालन करें।