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Makar Sankranti 2026 Live: शुभ योग में मकर संक्रांति आज, जानें क्या करें और क्या न करें

Wed, 14 Jan 2026 05:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Makar Sankranti 2026 Wishes Shubh Muhurat Live Updates in Hindi: मकर संक्रांति को लेकर तारीख का कन्फ्यूजन जरूर है, लेकिन असल में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन यह पर्व मनाया जा सकता है। जो लोग गुरुवार या एकादशी के नियम मानते हैं वे 14 जनवरी को तय समय के बाद पूजा-पाठ और खिचड़ी का दान-सेवन कर सकते हैं, जबकि बाकी लोग 15 जनवरी को भी पूरे विधि-विधान से संक्रांति मना सकते हैं।
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makar sankranti 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Makar Sankranti 2026 Puja Muhurat: आज 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। आज दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं और इसी के साथ उत्तरायण की शुरुआत हो रही है। इस समय से पुण्य काल शुरू माना जाता है, जिसमें स्नान, दान और सूर्य पूजा करना विशेष रूप से शुभ फल देता है। आज से शुभ कार्यों की शुरुआत का समय भी माना जाता है, इसलिए लोग नए काम और नए संकल्प लेते हैं। तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान और सेवन आज धार्मिक रूप से बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इसे सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

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Kab Manayi Jaaegi Makar Sankranti

मकर संक्रांति 2026 इस बार 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी क्षण से पुण्य काल शुरू माना जाता है, और सूर्यास्त तक का समय स्नान, दान और पूजा के लिए सबसे शुभ रहेगा।

Makar Sankranti 2026 Shubh Yog

आज मकर संक्रांति पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं, यानी जो भी अच्छा काम किया जाए, उसके सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके साथ ही ग्रहों की स्थिति भी काफी अनुकूल रहेगी। बुधादित्य योग, चतुर्ग्रही योग और त्रिग्रही योग जैसे खास संयोग बन रहे हैं, जो बुद्धि, निर्णय क्षमता, धन और प्रगति को मजबूती देते हैं। इसके अलावा सूर्य भी उत्तरायण होकर अपनी शुभ और मजबूत स्थिति में रहेंगे।

Makar Sankranti 2026 Snan Muhurat

मकर संक्रांति पुण्य काल - दोपहर 03:13 से सायं 05:45 तक 
मकर संक्रांति महा पुण्य काल - दोपहर 03:13 से सायं 04:58 तक 

14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना क्यों उचित: Why January 14 is ideal for Makar Sankranti

पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को पड़ रही है। इसी दिन दोपहर करीब 3 बजकर 07 मिनट पर सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि यह प्रवेश अनुराधा नक्षत्र में हो रहा है, जिससे ‘मंदाकिनी’ नाम का एक शुभ योग बनता है, जिसे कल्याण और सौभाग्य देने वाला माना गया है। इसी कारण इस दिन स्नान और दान का पुण्य काल ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू माना जाएगा।

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं ?: Why is Makar Sankranti celebrated?

कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए उनके घर, यानी मकर राशि, में प्रवेश करते हैं। इसी कारण इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसे सूर्य के उत्तरायण होने और जीवन में उजाला और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला पर्व भी माना जाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं तिल-गुड़:  Why do we eat til gud on Makar Sankranti?

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने की परंपरा बहुत पुरानी है। तिल को दुर्गति और दारिद्रय दूर करने वाला माना गया है, जबकि गुड़ स्वास्थ्य और ताकत बढ़ाने वाला समझा जाता है। जनवरी में ठंड होती है, इसलिए तिल-गुड़ खाने से शरीर में गर्माहट और स्फूर्ति बनी रहती है और आरोग्य भी मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन तिल-गुड़ का सेवन करने से व्यक्ति पर सूर्य और शुक्र ग्रह की कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल: मकर संक्रांति 2026 पर श्रद्धालु गंगा में स्नान के लिए गंगासागर पहुंचे।

 

 

मकर संक्रांति शुभ कामना सन्देश: Makar Sankranti 2026 Wishes

मकर संक्रांति के शुभकामना संदेश - फोटो : Amar Ujala
मंदिर की घंटी संग पूजा की थाली 
उत्तरायण में दिखी सूरज की लाली
जीवन में आए खुशियों की हरियाली 
मुबारक हो आपको मकर संक्रांति।
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं

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मकर संक्रांति के इस अवसर पर,
ईश्वर आपको अच्छा स्वास्थ्य,
और धन प्रदान करें।
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
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खिचड़ी का पर्व आया
मस्ती और उमंग
आकाश को पतंग से 
डालो रंग।
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

 

मकर संक्रांति के अन्य नाम: Makar Sankarati 2026 

मकर संक्रांति का पर्व देश के कई हिस्सों में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में इसे पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। वहीं, तमिलनाडु में यह पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है, जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। असम में इस पर्व को माघ बिहू के रूप में मनाया जाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों जाते हैं गंगा सागर?: Makar Sankranti 2026 Snan 

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव का धनु से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ गंगा में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं और तिलांजलि व दान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है।
कथा अनुसार, राजा सगर के पुत्रों को कपिल मुनि ने भस्म कर दिया था। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने माता पार्वती की कठिन तपस्या की, जिससे गंगा माता धरती पर अवतरित हुई। उनके स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। यही कारण है कि गंगासागर में मकर संक्रांति पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।

 मकर संक्रांति और एकादशी का विशेष संयोग: Shattila Ekadashi On Makar Sankranti

शास्त्रों के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति और एकादशी का संयोग 23 साल बाद बन रहा है; इससे पहले यह संयोग साल 2003 में आया था। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। इस खास अवसर पर एकादशी होने के कारण भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

तिल का उद्भव और महत्व: Importance of Til On Makar Sankranti 

पौराणिक कथा के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद पर अत्याचार किए, तो भगवान विष्णु क्रोधित हुए। उनके शरीर से निकला पसीना जब धरती पर गिरा, तभी तिल उत्पन्न हुआ। इसी कारण तिल को गंगाजल जितना पवित्र माना जाता है।
मान्यता है कि जैसे गंगाजल आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है, वैसे ही तिल पूर्वजों और भटकी आत्माओं को शांति प्रदान करता है। इसलिए पितृकर्म और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में तिल का इस्तेमाल अनिवार्य माना गया है।

मकर संक्रांति पर पतंग का महत्व: Why do we fly kite on makar Sankranti

कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा श्रीराम से शुरू हुई थी। ऐसा माना जाता है कि जब उन्होंने पहली पतंग उड़ाई थी, वह इंद्रलोक तक पहुंच गई थी। तभी से इस दिन पतंग उड़ाना शुभ और आनंद का प्रतीक बन गया और मकर संक्रांति के अवसर पर इसे आज भी धर्म और उत्सव दोनों के रूप में मनाया जाता है।

तिल के उपाय: Makar Sankranti Par Karein Til Ke Upay

मकर संक्रांति के दिन पानी में काले तिल मिलाकर स्नान करने का बहुत महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन तिल वाले पानी से स्नान करता है, उसके दुर्भाग्य दूर होते हैं और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसे दरिद्रता दूर करने के लिए रामबाण उपाय माना गया है।

मकर संक्रांति पर क्या करें : What To Do On Makar Sankranti 2026

  • सूर्योदय से पहले नदी में स्नान करें या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और काले तिल डालकर ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • तिल का सेवन और तिल के पानी से स्नान शुभ होता है, शनि दोष शांत करता है और जीवन में शुभता लाता है।
  • उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाएं और गरीबों में दान करें; खुद भी इसका सेवन करें।
  • गाय को हरा चारा और गुड़-तिल खिलाने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है।

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आर्थिक तंगी दूर करने के लिए तिल का दान: Makar Sankranti Remedies 

इस दिन तिल और गुड़ का दान बहुत शुभ माना जाता है। अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं, तो किसी जरूरतमंद या मंदिर में तिल का दान करें। ऐसा करने से शनि दोष शांत होता है और धन आने में रुकावटें दूर होती हैं।
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मकर संक्रांति पर क्या न करें: Makar Sankranti Par Kya Na Karein

  • सूर्योदय से पहले उठें, देर तक सोने से इस दिन का पुण्य कम हो सकता है।
  • मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक चीजें न लें; केवल शुद्ध और सात्विक भोजन करें।
  • किसी का अपमान न करें, झगड़ा न करें और बुरा बोलने से दूर रहें।
  • स्नान और दान के पहले कुछ भी खाना-पीना वर्जित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी उतरायण की शुभकामना

पीएम मोदी ने दी मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

 

 

Makar Sankranti 2026 Puja Mantra

  • ॐ घृणिः सूर्याय नमः।।
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः।।

Makar Sankranti par Ganga Sagar Snan: मकर संक्रांति पर गंगा सागर स्नान

मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार सुबह पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप पर हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।

Ganga Sagar mein Snan Ka Shubh Muhurat: गंगा सागर में स्नान का शुभ मुहूर्त

‘शाही स्नान’ का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर अगले 24 घंटे तक रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, अभी और भी अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है क्योंकि शुभ मुहूर्त शुरू होना बाकी है।

मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी?

मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जुड़ी मानी जाती है, जिन्होंने साधुओं को दाल-चावल और सब्ज़ियों को साथ पकाने का सरल और ऊर्जा देने वाला तरीका बताया था। धीरे-धीरे यही भोजन समाज में फैल गया और संक्रांति से जुड़ गया। ज्योतिषीय रूप से सूर्य के मकर में प्रवेश के दिन खिचड़ी का दान और सेवन शुभ माना जाता है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।

Makar Sankranti 2026 Khichdi Daan

धर्मग्रंथों के मुताबिक मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना और उसका दान करना बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित होता है। इस बार एकादशी सूर्यास्त के साथ ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए उसके बाद रात में खिचड़ी बनाकर खाना पूरी तरह मान्य रहेगा। ऐसे में 15 जनवरी को आराम से खिचड़ी का दान भी किया जा सकता है और उसे प्रसाद रूप में ग्रहण भी किया जा सकता है। 
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मकर संक्रांति पर दही चूड़ा का महत्व

उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति की सुबह दही और चूड़ा मिलाकर खाने की एक प्यारी-सी परंपरा है। इसके पीछे आस्था भी है और समझदारी भी। माना जाता है कि इसका सफेद रंग पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक होता है, जैसे जीवन का एक साफ-सुथरा नया पन्ना खुल रहा हो। लोग इसे आने वाले साल में सुख, शांति और समृद्धि का संकेत मानते हैं। 

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मकर संक्रांति पर क्या है स्नान का शुभ मुहूर्त?

महापुण्य काल
दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक
इस समय किए गए स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

ब्रह्म मुहूर्त स्नान
सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

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 मकर संक्रांति पर जरूर करें इन 6 चीजों का दान

  • काले तिल का दान – सूर्य जब शनि की राशि में प्रवेश करते हैं, तब काले तिल का दान शनि से जुड़ी बाधाओं को शांत करता है और दुर्भाग्य को हल्का करता है।
  • गुड़ का दान – गुड़ सूर्य और गुरु से जुड़ा होता है, इसलिए इसे दान करने से मान-सम्मान, करियर और आर्थिक स्थिति में मिठास आती है।
  • कंबल का दान – ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल देना शनि और राहु से जुड़े कष्टों को कम करता है और पुण्य बढ़ाता है।
  • खिचड़ी का दान – मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है; इसका दान करने से घर में धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है।
  • धन-दक्षिणा – स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धा से दिया गया दान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ अवसर बढ़ाता है।
  • गाय के घी का दान – घी का संबंध बृहस्पति और सूर्य से होता है, इसलिए इसका दान कुंडली में शुभ ग्रहों को मजबूत करता है और सौभाग्य बढ़ाता है।

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति पर काले रंग के कपड़े पहनना शुभ क्यों?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इसे सूर्य और शनि के बीच सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है, जब पिता-पुत्र के रिश्ते में मधुरता आती है। चूँकि शनिदेव का प्रिय रंग काला माना जाता है, इसलिए इस दिन काले रंग के कपड़े पहनकर उन्हें प्रसन्न करने की परंपरा बनी। यही वजह है कि खासतौर पर महाराष्ट्र जैसे राज्यों में महिलाएं काली साड़ी और पुरुष काले वस्त्र पहनते हैं, ताकि शनिदेव की कृपा प्राप्त हो और जीवन की बाधाएं दूर हों।
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मकर संक्रांति पर ज़रूर करें ये उपाय

श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

Makar Sankranti 2026: शुभ योग में मकर संक्रांति आज, सूर्यास्त से पहले अवश्य करें यह एक छोटा उपाय

देशभर में मकर संक्रांति-पोंगल की धूम, यहां देखें तस्वीरें


 

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर पोंगल समारोह में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 

मकर संक्रांति पर इस दिशा में यात्रा नहीं करें

मकर संक्रांति के दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, यानी उनकी शुभ ऊर्जा उत्तर की ओर मानी जाती है, ऐसे में दक्षिण की ओर जाना उस सकारात्मक प्रवाह के विपरीत माना जाता है। मान्यता है कि इससे कामों में बाधा और धन से जुड़ी परेशानियां आ सकती हैं, इसलिए इस दिन उत्तर या पूर्व दिशा में जाना अधिक शुभ माना जाता है।

संक्रांति क्या है?

संक्रांति का मतलब होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। शास्त्रों के अनुसार साल की सभी 12 संक्रांतियों को चार हिस्सों में बाँटा गया है। जब सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन या दक्षिणायन से उत्तरायण में जाता है, यानी मकर और कर्क राशि में प्रवेश करता है, तो उसे अयन संक्रांति कहा जाता है। मेष और तुला में सूर्य के प्रवेश को विषुव संक्रांति कहते हैं, क्योंकि इन दिनों दिन और रात बराबर होते हैं। मिथुन, कन्या, धनु और मीन की संक्रांतियां षडशीति-मुख मानी जाती हैं, जबकि वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ की संक्रांतियों को विष्णुपदी या विष्णुपद संक्रांति कहा गया है।

मकर संक्रांति पर महिलाएं जरूर करें ये काम

  • इस दिन स्नान के पानी में काले तिल मिलाकर नहाना शुभ और शुद्धि देने वाला माना जाता है।
  • पीले, नारंगी या केसरिया रंग के वस्त्र पहनने से सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • स्नान के बाद सूर्य देव की पूजा करके उन्हें जल अर्पित करना स्वास्थ्य और आत्मबल के लिए अच्छा माना जाता है।
  • गुड़ और तिल से बनी मिठाइयों का दान करने से घर में मिठास और समृद्धि आती है।
  • 14 सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करना वैवाहिक सुख और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

मकर संक्रांति पर इन राशियों को मिलेगा धनलाभ

वृषभ राशि: मकर संक्रांति वृषभ वालों के लिए धन और अवसरों का सुनहरा दरवाज़ा खोल रही है। करियर और व्यापार में जो मेहनत आपने की थी, उसका फल अब मिल सकता है।
सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए यह समय मान-सम्मान और उन्नति का संकेत दे रहा है। सरकारी कामों, प्रमोशन या बड़े लोगों से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है।
तुला राशि: तुला राशि के लिए मकर संक्रांति संतुलन और स्थिरता लेकर आ रही है। घर-परिवार में सुख बना रहेगा और किसी कानूनी या अटके मामले में राहत मिल सकती है। बचत और धन संग्रह बढ़ने के योग हैं।
मकर राशि: मकर राशि वालों के लिए यह पर्व खुद की शक्ति को पहचानने का समय है। करियर में तरक्की और वरिष्ठों से सहयोग मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं।
मीन राशि: मीन राशि के लिए यह संक्रांति सुख-सुविधा और धन के नए रास्ते खोल सकती है। करियर में कोई नया अवसर या ऑफर मिल सकता है। प्रेम जीवन में अपने साथी के साथ दिल से जुड़ने का मौका मिलेगा।

मकर संक्रांति की कथा

मकर संक्रांति की कथा सूर्य देव और उनके पुत्र शनिदेव के रिश्ते से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि सूर्य देव की दो पत्नियाँ थीं-संज्ञा और छाया। सूर्य के तेज को सहन न कर पाने के कारण संज्ञा तपस्या के लिए चली गईं और अपनी छाया को उनके पास छोड़ गईं। छाया से शनिदेव का जन्म हुआ, जबकि संज्ञा से यमराज उत्पन्न हुए। समय के साथ सूर्य देव और शनि के बीच दूरी बढ़ती चली गई, क्योंकि सूर्य को शनि का गहरा रंग पसंद नहीं था और इसी कारण वे छाया और शनि के प्रति कठोर व्यवहार करने लगे।

इस व्यवहार से दुखी होकर शनि अपनी माँ के साथ कुंभ नाम के स्थान पर रहने चले गए। एक दिन सूर्य के अपमान से क्रोधित होकर शनि ने उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया, जिससे सूर्य का तेज मंद पड़ने लगा। गुस्से में सूर्य देव ने शनि का घर जला दिया, लेकिन यमराज के समझाने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। जब सूर्य देव शनि के पास पहुँचे तो देखा कि सब कुछ जल चुका था और शनि के पास पूजा के लिए केवल काले तिल बचे थे। उन्हीं तिलों से शनि ने अपने पिता की आराधना की।

शनि की भक्ति और विनम्रता से सूर्य देव का हृदय पिघल गया और उन्होंने शनि को नया घर दिया, जिसे मकर कहा गया। तभी से शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी माने जाते हैं। सूर्य देव ने यह भी वरदान दिया कि जब वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो संसार में धन, अन्न और समृद्धि का प्रवाह बढ़ेगा। इसी मान्यता के कारण मकर संक्रांति पर तिल से स्नान, तिल का दान और सूर्य व शनि की पूजा को विशेष शुभ माना जाता है

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार  करें दान 

मेष: मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का दान करें।
वृषभ:सफेद वस्त्र या दही का दान शुभ रहेगा।
मिथुन:कंबल या चादर का दान करें।
कर्क:चावल या सफेद तिल का दान करें।

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान

  • सिंह: तिल और गुड़ किसी जरूरतमंद को दें।
  • कन्या:हरी वस्तु या खिचड़ी का दान करें।
  • तुला :शहद या सफेद वस्त्र का दान करें।
  • वृश्चिक : लाल वस्त्र या गुड़ का दान करें।

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान

धनु: पीली दाल या हल्दी का दान करें।
मकर: काले तिल या काले वस्त्र का दान करें।
कुंभ: काले तिल या कंबल का दान करें।
मीन: चावल या चने की दाल का दान करें।

मकर संक्रांति पर सुख-समृद्धि के लिए तिल-हवन

घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए संक्रांति की शाम को छोटा सा हवन करें और उसमें काले तिल की आहुति दें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते हुए आहुति देने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।

घर पर तिल के उपाय

घर की उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) में तांबे या मिट्टी के छोटे पात्र में तिल भरकर रखें और संक्रांति के अगले दिन इसे दान कर दें। यह उपाय व्यापार में वृद्धि और अटके हुए धन को वापस पाने में मदद करता है।

मकर संक्रांति और खिचड़ी का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति को कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन चावल और दाल से बनी खिचड़ी का सेवन और दान अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व नई फसल के आगमन का प्रतीक है और खिचड़ी को स्वास्थ्य, ग्रह शांति और समृद्धि के लिए प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

क्या आज खा सकते हैं खिचड़ी?

मकर संक्रांति को लेकर तारीख का कन्फ्यूजन जरूर है, लेकिन असल में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन यह पर्व मनाया जा सकता है। जो लोग गुरुवार या एकादशी के नियम मानते हैं वे 14 जनवरी को तय समय के बाद पूजा-पाठ और खिचड़ी का दान-सेवन कर सकते हैं, जबकि बाकी लोग 15 जनवरी को भी पूरे विधि-विधान से संक्रांति मना सकते हैं।

सूर्यास्त से पहले अवश्य करें यह एक छोटा उपाय

श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए

  • पवित्र स्नान करें
  • सूर्य देव की आराधना करें
  • तिल का विशेष प्रयोग करें
  • गौ सेवा करें

कब खा सकते हैं दही-चूड़ा?

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत को ध्यान में रखते हुए खिचड़ी और दही चूड़ा खाने की परंपरा 15 जनवरी को निभाई जा सकती है। इस दिन खिचड़ी और दही चूड़ा का सेवन और दान पुण्यकारी माना जाता है। 

मकर संक्रांति और उत्तरायण में है अंतर 


मकर संक्रांति का सीधा संबंध 'उत्तरायण' से है। प्राचीन काल में उत्तरायण और मकर संक्रांति एक ही दिन होते थे (21-22 दिसंबर)। लेकिन पृथ्वी की गति में आए इस बदलाव के कारण अब उत्तरायण 21 दिसंबर को होता है, जबकि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति) 14-15 जनवरी को। वैज्ञानिक आधार पर यह पर्व हमारे सौर मंडल की अद्भुत गतिशीलता का प्रतीक है। उत्तरायण और मकर संक्रांति के बीच के अंतर को समझना बहुत दिलचस्प है, क्योंकि आज के समय में हम इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि विज्ञान की दृष्टि से इनमें लगभग 24-25 दिनों का अंतर आ चुका है।
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15 जनवरी को मकर संक्रांति


ज्योतिषियों के मुताबिक, यदि आप 15 जनवरी को मकर संक्रांति मना रहे हैं, तो सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच स्नान करना सबसे उत्तम माना जा रहा है। 
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