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Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर क्या करना शुभ, जानिए उपाय और दान-स्नान का महत्व

Mon, 15 Jan 2024 04:14 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Makar Sankranti Puja Shubh Muhurat in Hindi: आज देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष में जब सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर गंगास्नान और दान का विशेष महत्व होता है।
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makar sankranti 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Makar Sankranti 2024 Date Puja Vidhi Daan Muhurat: आज,15 जनवरी 2024 को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर्व को देशभर के कई हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का विशेष स्थान होता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। सूर्य हर एक महीने में राशि बदलते हैं, यानी सूर्य एक वर्ष में 12 राशियों का भ्रमण करते हैं। सूर्य जब धनु राशि की यात्रा को पूरा करके मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते है। मकर संक्रांति से सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व और पूजा विधि।
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मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा

मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य की पूजा-पाठ और उपासना का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर पुण्यकाल में  गंगा स्नान करने के बाद तांबे के बर्तन में जल, सिंदूर, लाल फूल और काला तिल डाल कर उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। फिर इसके बाद नदी में खड़े होकर अपने अंजुली से जल लेकर भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए और ऊं सूर्याय नम: का मंत्र बोलते हुए जल अर्पित करें। सूर्यदेव की महिमा और पूजा-उपासना का महत्व सभी वेद-पुराण एवं योग शास्त्रों में वर्णित हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य उपासना सर्वथा फलदायी है,जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते हैं उनके सभी रोग दूर हो जाते हैं। शारीरिक कमजोरी या जोड़ों में दर्द जैसे परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग मुक्ति मिलने की संभावना बनती है ।
 

मकर संक्रांति स्नान-दान मुहूर्त

आज देशभर में धूमधाम के साथ मकर संक्रांति का त्योहार मनाई जा रही है। मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। मकर सक्रांति पर पुण्यकाल में स्नान किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार आज पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 15 मिट तक रहेगा, वहीं महापुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

Makar Sankranti 2024 Wishes: मकर संक्रांति शुभकामना संदेश

मीठे गुड़ में मिल गए तिल, 
उड़ी पतंग और खिल गए दिल,
हर पल सुख और हर दिन शांति,
आप सबके लिए लाए मकर संक्रांति।
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं।

तन में मस्ती, मन में उमंग,
देखकर सबका अपनापन,
गुड़ में जैसे मीठापन,
होकर साथ हम उड़ाएंगे पतंग,
और भर लें आकाश में अपने रंग।
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं


त्योहार में नहीं होता अपना-पराया
त्योहार है वही जिसे सबने मनाया
मिला कर गुड़ में तिल
मीठे लड्डू संग मिलने दो दिल।

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं


मंदिर की घंटी संग पूजा की थाली
उत्तरायण में दिखी सूरज की लाली
जीवन में आए खुशियों की हरियाली
मुबारक हो आपको मकर संक्रांति।

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

मकर संक्रांति शुभ तिथि 2024

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। आज सुबह तड़के सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्यदेव एक महीने तक मकर राशि में रहेंगे। सूर्य के मकर राशि में आने से पिछले एक महीने से चला आ रहा खरमास अब खत्म हो गया है। खरमास के खत्म होते ही सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य अब फिर से शुरू होंगे।

क्या है मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व 

आज देशभर में मकर संक्रांति के त्योहार को बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। दरअसल मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं। महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी आदि खाकर मनाया जाता है जबकि गुजरात में यह पर्व पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाई जाती है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसी कारण उत्तर भारत में इस पर्व को 'खिचड़ी 'के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है।मकर संक्रांति पर दान का बहुत महत्व है। विशेषकर इस दिन तिल, खिचड़ी, गुड़ एवं कंबल दान करने का महत्व है। 

मकर संक्रांति पर वारियान और रवि योग का संयोग

इस बार मकर संक्रांति पर बहुत ही अच्छा शुभ संयोग बना हुआ है। वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक आज मकर संक्रांति पर रवि और वारियान योग बना हुआ है। इस योग में गंगा स्नान और दान करने पर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

मकर संक्राति पर दान का महत्व 

मकर संक्रांति पर सुबह गंगा स्नान, फिर सूर्यदेव को अर्घ्य देना और फिर इसके बाद गरीबों को कंबल, गुड़, तिल,चावल और खिचड़ी का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। 

मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का काफी महत्व होता है। वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने के लिए स्वयं उनके घर जाते हैं। आपको बता दें कि सूर्यदेव हर एक माह में राशि बदलते हैं। सूर्य के राशि बदलने को ही संक्रांति कहते हैं। मकर राशि के स्वामी शनिदेव होते हैं। इस कारण से इसे मकर संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य और शनिदेव की आराधना करने से पर जीवन से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। 
 

Makar Sankranti Daan Importance: मकर संक्रांति पर तिल के दान का महत्व

मकर संक्रांति के त्योहार के अवसर पर तिल के दान का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति पर तिल का दान करने से कुंडली में शनि मजबूत होते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति पर तिल से बनी चीजों का सेवन करने और तीर्थ स्थानों व मंदिरों में दान करना चाहिए।
 

Makar Sankranti 2024 Significance:मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति पर सूर्यदेव धनु राशि की यात्रा का विराम देते हुए मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ सूर्य देव की उत्तरायण यात्रा भी आरंभ हो जाती है। उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है। सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ खरमास खत्म हो जाता है और सभी तरह के शुभ-मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान और सूर्य आराधना का विशेष महत्व होता है। देशभर में मकर संक्रांति के त्योहार को अलग-अलग नामों से जाना और मनाया जाता है। 

पंजाब में मकर संक्रांति को माघी संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, पश्चिम बंगाल में गंगासागर में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। मान्यता है कि इस दिन ही यशोदा जी ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए व्रत रखा था। साथ ही इसी दिन मां गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जाकर मिली थीं। केरल में मकर विलक्कू नाम से मनाया जाता है। गुजरात में उत्तराणय पर्व और उत्तर भारत में खिचड़ी के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। 

Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर कंबल दान का महत्व

मकर संक्रांति पर तिल के दान के अलावा कंबल के दान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन गरीबों को कंबल का दान करना चाहिए। मान्यता है कि कंबल का दान करने से व्यक्ति कि कुंडली से राहु का अशुभ प्रभाव दूर हो जाता है।

मकर संक्रांति पर घी दान का महत्व 

मकर संक्रांति पर घी का दान करना बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में घी का संबंध सूर्य और गुरु ग्रह से होता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा के बाद घी का दान अवश्य करना चाहिए इससे कुंडली में सूर्य और गुरु दोनों ही ग्रह मजबूत होंगे। सूर्य-गुरु के मजबूत होने पर जीवन में हर एक तरह की सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
 

मकर संक्रांति पर करें खिचड़ी का दान

मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से उत्तर भारत के कुछ हिस्सो में मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और खिचड़ी की सामग्री को दान करने का विशेष महत्व होता है। खिचड़ी के दान करने से कुंडली में जो भी ग्रह कमजोर होता है वह मजबूत हो जाता है। जो लोग मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करते हैं उनके घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती है।

मकर संक्रांति पर दान का महत्व 

मकर संक्रांति दान का विशेष महत्व बताया गया है। मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव के घर आते हैं। ज्योतिष मान्यता के अनुसार भी संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना होकर वापस मिलता है साथ ही इससे ग्रहदशा भी सुधरती है। संक्रांति के दिन काले तिल, गुड़, कंबल, घी और खिचड़ी का दान जरूर करना चाहिए, इससे आपके जीवन में खुशहाली आती है।

Makar Sankranti 2024 Ganga Snan Significance: मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व 

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन सभी पवित्र नदियों और तीर्थस्थल पर भारी भीड़ होती है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाता है फिर गरीबों को दान करने की परंपरा होती है। अगर किसी कारण आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान नहीं कर पाते हैं तो इस दिन सुबह स्नान करते समय पानी में काला तिल और गंगाजल की कुछ बूंदे जरूर डालें।
 

मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं और सभी तरह के शुभ कार्य दोबारा से आरंभ हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर स्नान करने और दान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर अपने घर के पास स्थित किसी पवित्र नदी में स्नान करें। वहीं अगर पवित्र नदी में स्नान करना संभव न होता तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे और काला तिल डालकर स्नान कर लें। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, अक्षत, गंगाजल की कुछ बूंदे, सिंदूर और लाल फूल डालकर भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। फिर इसके बाद सूर्य चालीसा और आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करें।

मकर संक्रांति के साथ आज उत्तरायण पर्व भी

आज यानी 15 जनवरी को पूरे देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं जोकि शनिदेव की राशि है। सूर्य के मकर राशि में आने से दक्षिणायन खत्म होता है और उत्तरायण आरंभ हो जाता है, इसलिए इसे उत्तराणय पर्व भी कहते हैं। सूर्य 6 महीने दक्षिणायन और 6 महीने उत्तरायण रहते हैं। शास्त्रों में सूर्य के उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात माना जाता है। उत्तरायण से रातें छोटी होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने पर सभी तरह के मांगलिक काम फिर से शुरू हो जाते हैं।

मकर संक्रांति पर क्या करना शुभ

  • मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करना चाहिए।
  • मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को जल जरूर अर्पित करें।
  • मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ से बनी चीजों को दान और इसका सेवन करें।
  • इस दिन खिचड़ी जरूर खानी चाहिए।
  • मकर संक्रांति पर भगवान सूर्यदेव के साथ वेद-पुराण का पाठ करना शुभ।
  • गायों को चारा खिलाएं।

मकर संक्रांति पर्व के पीछे कई मान्यताएं...

पहली मान्यता
सालभर में कुल 12 संक्रांति होती है। जब सूर्यदेव गुरु की राशि धनु से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य शनिदेव की पिता हैं, लेकिन शनिदेव अपने पिता सूर्य देव से शत्रुता का भाव रखते हैं। जब मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने और एक महीने तक उनके घर में निवास करते हैं तो पिता-पुत्र के बीच मतभेद दूर हो जाते हैं। इस कारण से मकर संक्राति मनाई जाती है।  

मकर संक्रांति पर्व के पीछे की मान्यताएं...

दूसरी मान्यता
मकर संक्रांति मनाने के पीछे राजा भागीरथ से जुड़ी एक कथा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा भागीरथ के पुरखों को मोक्ष नहीं प्राप्त था। मोक्ष न प्राप्त होने की वजह से राजा भागीरथ के पूर्वजों की आत्माओं का शांति नहीं मिली थी। ऐसे में अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से राजा भागीरथ को देवी गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने के लिए कठोर तप करना पड़ा था। राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी गंगा मकर संक्रांति पर धरती पर प्रगट हुईं और राजा भागीरथ के पूर्वजों की अस्थियों को गंगाजल से स्पर्श करते हुए उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस कारण से मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने का महत्व होता है।   

मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होते हैं उत्तरायण

तीसरी मान्यता
मकर संक्रांति को उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। दरअसल मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण को देवताओं का दिन माना जाता है। सूर्य देव 6 माह उत्तरायण और 6 माह दक्षिणायन रहते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने पर और मृत्यु को प्राप्त करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण में अपने प्राण त्यागे थे। 

Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर राशि के अनुसार करें दान

मेष- मकर संक्रांति पर पानी में पीले पुष्प, हल्दी और तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। तिल-गुड़ का दान करें।
वृष- आज मकर संक्रांति के दिन जल में सफेद चंदन, दूध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। खिचड़ी का दान करें।
मिथुन- जल में तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान करें।
कर्क- जल में दूध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। संकटों से मुक्ति मिलेगी। गुड़, तिल दान करें।

मकर संक्रांति पर सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक राशि के लोग इन चीजों का करें दान

सिंह- जल में कुमकुम और लाल पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ और तिल दान करें।
कन्या- जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी बनाकर दान करें। गाय को चारा दें।
तुला- सफेद चंदन, दूध, चावल का दान दें। सफेद चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
वृश्चिक- जल में कुमकुम, रक्तपुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान दें।
 

धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले आज इन चीजों का करें दान

धनु- जल में हल्दी, केसर और पीले पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान करें।
मकर- पानी में नीला फूल और तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। इसके अलावा काले तिल और उड़द की दाल की खिचड़ी दान करें।
कुंभ- मकर संक्रांति पर नीला फूल और तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। इसके अलावा उड़द और तिल का दान करें।
मीन- हल्दी, केसर, पीले फूल के साथ तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। तिल और गुड़ का दान करें।
 

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व

मकर संक्रांति पर दान और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति पर शनिदोष खत्म करने के लिए करें यह उपाय

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पानी में काला तिल मिलाकर स्नान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और कुंडली में मौजूद शनिदोष खत्म होता है।
 

गुजरात में कैसे मनाई जाती है मकर संक्रांति

गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण पर्व कहा जाता है। उत्तरायण के दिन बहुत बड़ा पर्व मनाया जाता है जो 2 दिनों तक चलता है। यहां बड़े उल्लास से पतंग उड़ा कर त्योहार मनाया जाता है और उंधियू और चिक्की इस दिन विशेष त्योहार व्यंजन हैं।

राजस्थान में मकर संक्रांति 

राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व सुहागन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही इस दिन महिलाओं द्वारा किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन व संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देने की भी प्रथा है।

पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति

पश्चिम बंगाल में इस पर्व पर गंगासागर पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर इस पर्व के दिन स्नान करने के बाद तिल दान करने की प्रथा है। इस दिन मां गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जाकर मिली थीं।

उत्तरायण का महत्व

शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायण देवताओं की रात होती है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायण को पितृयान कहा जाता था। 

 

मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा के मंत्र

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत शुभ होता है। इस दिन तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प, अक्षत आदि डालें और फिर 'ॐ सूर्याय नम:' और ऊं घृणि: सूर्याय नम:  मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें।

मकर संक्रांति होते हैं शुभ काम

मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तब खरमास का समय खत्म होता है और सभी तरह के शुभ-मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। मकर संक्रांति के बाद से विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार आदि कार्य शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति पर काले तिल, गुड़ और अनाज का दान करना शुभ होता है।

मकर संक्रांति पर करें इन 5 चीजों का दान

सूर्यदेव जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान करने से सूर्यदेव और शनिदेव की विशेष कृपा मिलती है। मकर संक्रांति पर इन 5 चीजों का दान जरूर करना चाहिए।
- तिल का दान
- घी का दान
- गुड़ का दान
- खिचड़ी का दान
- कंबल का दान

 

मकर संक्रांति पर लोगों ने लगाई संगम में डुबकी

मकर संक्रांति पर लाखों लोगों ने संगम में डुबकी की लगाई। सूर्य के तड़के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही संगम में डुबकी लगाने का सिलसिल शुरू हो गया। मकर संक्रांति के साथ संगम की रेती पर कल्पवास शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगमतट 'त्रिवेणी' पर साठ हजार तीर्थ और साठ करोड़ नदियाँ, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि तीर्थराज प्रयाग' में एकत्रित होकर गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान, जप-तप, और दान-पुण्य कर अपना जीवन धन्य करते हैं।

आज से चार दिनों का पोंगल पर्व आरंभ

मकर संक्रांति के साथ दक्षिण भारत में चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की शुरूआत हो चुकी है। पोंगल पर्व के पहले दिन इंद्रदेव की पूजा होगी। इस पूजा को भोगी पोंगल के नाम से जाना जात है। दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है।
 

मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी और दही-चूड़ा

  • मकर संक्रांति पर खिचड़ी और दही-चूड़ा खाने को लेकर मान्यता है कि इसे खाने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • इस समय ही धान की कटाई होती है जिससे चावल तैयार होता है। फिर उस चावल से खिचड़ी तैयार कर भगवान सूर्यदेव को भोग के रूप में लगाया जाता है।
  • मकर संक्रांति पर सूर्य देवता को दही चूड़ा का भोग लगाकर उनको प्रसन्न किया जाता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा का सेवन करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन सूर्य देवता को दही-चूड़ा का भोग लगाने से कुंडली में स्थित ग्रह दोष से भी छुटकारा मिल सकता है। 
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हर राज्य में अलग नाम से जानी जाती है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति का पर्व भारत के लगभग हर राज्य में सेअलग अलग नामों से जाना जाता है ।
  • उत्तर भारत और बिहार में खिचड़ी,
  • गुजरात में उत्तरायण,
  • पंजाब-हरियाणा में माघी-लोहड़ी,
  • केरल में विलक्कू,
  • कर्नाटक में एलु-बिरोधु
  • तमिलनाडु में पोंगल 
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