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Diwali 2024 Puja Muhurat: दिवाली कुछ जगहों पर कल भी मनाई जाएगी, जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

Thu, 31 Oct 2024 08:58 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Diwali Puja Shubh Muhurat Wishes and Quotes in Hindi: दीपावली का त्योहार हिंदू धर्म का एक बहुत ही प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे देशभर में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को भगवान राम 14 साल के वनवास काटने के बाद और रावण का वध करके वापस अयोध्या आए थे, जिसकी खुशी में अयोध्या वासियों ने पूरे नगर को दीपक जलाकर खुशियां मनाई थी।
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दिवाली 2024 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दीपोत्सव का पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। कल यानी 31 अक्तूबर को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान राम के लंका पर विजय प्राप्ति के बाद अयोध्या आगमन के रूप में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिवाली पर शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष रूप से पूजा की जाती है। प्रकाश के पर्व की शाम को लोग दीए और मोमबत्तियों जलाकर मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां करते हैं। आइए जानते हैं इस बार दिवाली किन शुभ योग में मनाई जा रही है। 

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दिवाली 2024 तिथि
पंचांग की गणना के मुताबिक दिवाली का पर्व हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाने का विधान होता है। इस वर्ष 31 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी और समापन 01 नवंबर को शाम 5 बजकर 13 मिनट होगा। ऐसे में अमावस्या की तिथि के आधार पर कुछ विद्वान पंडित दिवाली 31 अक्तूबर को मनाने की सलाह दे रहे हैं तो वहीं कुछ 01 नवंबर दिवाली मनाए जाने की बात कह रहे हैं।

दिवाली 2024 लक्ष्मी पूजन कब ? ( Diwali 2024 Laxmi Puja Muhurat)
दिवाली पर लक्ष्मी- गणेश पूजन प्रदोष काल, अमावस्या तिथि और स्थिर लग्न में करने की धार्मिक मान्यता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त हो जाता है और यह लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार पर तय होता है, लेकिन दिवाली पर माता महालक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि को रात्रि में होती है। 31 अक्तूबर को पूरी रात अमावस्या तिथि रहेगी। पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तबूर को 3 बजकर 52 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और इसका समापन 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा। 31 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी पूजा होगी। 
 

दीपावली पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की संयुक्त तस्वीर को अत्यंत शुभ माना जाता है। - फोटो : adobe
कैसी हो गणेश-लक्ष्मी जी की तस्वीर?
दीपावली पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की संयुक्त तस्वीर को अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है, जबकि माता लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं। दोनों की संयुक्त तस्वीर घर में लगाने से सभी प्रकार की विघ्न-बाधाओं का नाश होता है और साथ ही धन-संपत्ति का आगमन होता है। यह तस्वीर घर के मुख्य हॉल या पूजा स्थल में लगानी चाहिए, ताकि पूरे परिवार को इसका शुभ प्रभाव प्राप्त हो सके।

दिवाली पर करें काले तिल का उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के दिन काले तिल का उपाय करने से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं। इस दिन सुबह स्नान के पानी में काले तिल डालकर स्नान करें और भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करें। इसके अलावा शाम के समय तिल के तेल का दीपक जलाकर घर के बाहर रखें। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में धन का प्रवाह बढ़ता है।

Diwali 2024 Tithi: दिवाली अमावस्या तिथि कब से कब तक
हर वर्ष दीपावली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि दो दिन रहेगी। पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्तूबर, गुरुवार को दोपहर बाद 3 बजकर 52 मिनट पर होगी और समापन 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा। इसके बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। 

Chhoti Diwali 2024: छोटी दिवाली पर किसकी पूजा होती है?
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और धन की देवी लक्ष्मी जी की भी पूजा का विधान है। मान्यता के अनुसार रूप चौदस के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और लगभग 16,000 स्त्रियों को कैद से मुक्त किया था। 
 

Chhoti Diwali 2024: दिवाली से पहले क्यों मनाते हैं छोटी दिवाली?
धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक अमावस्या से पहले कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था। यही वजह है कि इस दिन दीप जलाकर खुशियां मनाई जाती है, इसलिए इसे छोटी दिवाली कहा जाता है। इस दिन को नरक चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
 

Narak Chaturdashi 2024 Tithi: नरक चतुर्दशी 2024 तिथि
कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 30 अक्तूबर को दोपहर 1:15 मिनट पर होगी
जिसका समापन 31 अक्तूबर दोपहर 3:52 मिनट पर होगा।

Happy Chhoti Diwali 2024 Wishes - फोटो : Amar Ujala
Chhoti Diwali 2024: छोटी दिवाली 2024 शुभकामनाएं
दीयों की जगमगाती रोशनी से भरी पूजा की थाली है,
चारों ओर छाई खुशहाली है,
आइए सब मिलकर मनाएं ये पावन पर्व
आज छोटी दिवाली है
छोटी दिवाली की शुभकामनाएं

पूजा से भरी थाली है,
चारों ओर खुशहाली है,
आओ मिलके मनाएं ये दिन,
आज छोटी दिवाली है।
आपको और आपके परिवार को
छोटी दिवाली की शुभकामनाएं

चांद को चांदनी मुबारक,
सूरज को रोशनी मुबारक,
आपको और आपके पूरे परिवार को
छोटी दिवाली की शुभकामनाएं

Narak Chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी शुभ मुहूर्त 
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आरम्भ :  30अक्तूबर, दोपहर 01:16 मिनट पर 
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्त: 31 अक्तूबर ,दोपहर 03: 52 मिनट पर 
अमृत काल: 30 अक्तूबर:  दोपहर 02: 56 मिनट से सायं  04: 45 मिनट तक है

भद्रावास योग
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भद्रावास योग का निर्माण 30 अक्तूबर दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से हो रहा है। वहीं, इस योग का समापन 31 अक्टूबर को देर रात 02 बजकर 35 मिनट पर होगा।  इस समय तक भद्रा पाताल लोक में रहेंगी। भद्रा के पाताल लोक में रहने के दौरान पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों का कल्याण होता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग
नरक चतुर्दशी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण 30 अक्तूबर को प्रातः काल 06 बजकर 32 मिनट से रात 09:43 मिनट तक है। इस योग में भगवान कृष्ण की पूजा करने से साधक को सभी शुभ कार्यों में सिद्धि प्राप्त होगी। इस समय में छोटी दीवाली भी मना सकते हैं।

नक्षत्र योग
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर हस्त नक्षत्र का संयोग बन रहा है जिसका समापन 31 अक्तूबर की रात्रि को 09 बजकर 43 मिनट पर होगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र का संयोग है। ज्योतिष शास्त्र में  हस्त नक्षत्र को शुभ माना जाता है। 

Chhoti Diwali 2024 Puja Vidhi: छोटी दिवाली पूजा विधि
  • माना जाता है कि इस दिन सुबह तिल का तेल लगाकर स्नान करने से भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से रूप और सौन्दर्य की प्राप्ति होती है। 
  • इस दिन भगवान कृष्ण और यमदेव के साथ-साथ हनुमानजी की भी पूजा की जाती है।
  • इस दिन स्नान के बाद धूप-दीप जलाकर हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन लोग हनुमान चालीसा और हनुमान जी की आरती करते हैं और फिर हनुमान जी को भोग लगाते हैं। 
  • इस दिन शाम को घर के प्रवेश द्वार पर चार दिशाओं वाला आटे का दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपक कहा जाता है। 
  • यह दीपक दक्षिण मुखी सामने वाले दरवाजे पर रखना चाहिए। 

Narak Chaturdashi 2024 Upay: नरक चतुर्दशी पर करें ये उपाय 
  • इस दिन घर के मुख्य द्वार के सामने यमराज के नाम का दीपक जलाएं। इस दीपक का मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए और इसे तेल से ही दलाना चाहिए। 
  • नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय सभी देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद तेल का दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों ओर, घर के बाहर और कार्यस्थल के प्रवेश द्वार पर रखें। इस उपाय को करने से घर में सदैव देवी लक्ष्मी का वास रहता है।
  • नरक चतुर्दशी के दिन को रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है। सुंदरता पाने के लिए इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। इस तरह आप सुंदरता हासिल करते हैं।
  • नरक चतुर्दशी के दिन सबसे पहले लाल चंदन, गुलाब की पंखुड़ियां और रोली के पैकेट की पूजा की जाती है। इसके बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखेंगे तो इससे समृद्धि आएगी। साथ ही आपको स्थिर धन मिलता है।

क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा?
माना जाता है कि नरक चतुर्दशी या काली चौदस की रात नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं। इसलिए बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान जी की शरण ली जाती है। हनुमान जी को संकट मोचन के रूप में भी  जाना जाता है। बजरंगबली की पूजा करने से  सभी तरह के संकटों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति में शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूती आती है।  

Narak Chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी पर जरूर करें ये काम 
  • इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके माथे पर तिलक लगाना चाहिए।
  • नरक चतुर्दशी के दिन यम के नाम का दीपक जलाना, जो इस दिन यम की पूजा करता है, उसे शुभ माना जाता है और अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है।
  • इस दिन से स्नान से पूर्व अपने पूरे शरीर पर तेल से मालिश करें। ऐसा कहा जाता है कि चतुर्दशी को  तेल में देवी लक्ष्मी का वास होता है और देवी की कृपा प्राप्त होती है।
  • इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना शुभ माना जाता है और इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
  • इस दिन घर के अलग-अलग हिस्सों में 14 दीपक जलाकर रखे जाते हैं।

Narak Chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी इन काम को करने से बचें 
  • नरक चतुर्दशी के दिन भगवान यमराज की पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन किसी भी जीव की हत्या न करें।
  • इस दिन घर की दक्षिण दिशा को गंदा नम रखें। 
  • इस दिन तेल का दान नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
  • इस दिन आम तौर पर मांसाहार खाने से बचना चाहिए।
  • इस दिन देर तक नहीं सोना चाहिए, नहीं तो मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। देर तक सोने से घर में दरिद्रता आती है।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व 
दिवाली पर धन और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश, कुबेर देवता और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने का विधान होता है। दीपावली पर मां लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के तीन मुहर्त में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली की रात माता लक्ष्मी बैकुंठ धाम से पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने आती हैं और घर-घर जाकर यह देखती हैं कि किन घरों में साफ-सफाई, अच्छी सजावट और विधि-विधान के साथ पूजा हो रही है। जिन घरों में पूजा-पाठ और साफ-सफाई होती है वहीं पर मां लक्ष्मी विराजमान हो जाती हैं। मां लक्ष्मी हर तरह की मनोकामनाओं का पूरा करती हैं। 

लक्ष्मी पूजा संपूर्ण पूजा विधि
  • दिवाली के दिन शाम के समय लक्ष्मी जी की पूजा के लिए सबसे पहले पूर्व दिशा या ईशान कोण में एक चौकी रखें, फिर इस चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति को विराजित करें और दाहिन तरफ मां लक्ष्मी की मूर्ति को रखें। साथ ही जल से भरा कलश भी रखें। 
  • सभी पूजन सामग्री को साथ में लेकर आसान पर बैठें और चारो तरफ गंगाजल का छिड़काव करते हुए पूजा आरंभ कर दें। 
  • सबसे पहले गणेश स्तुति और वंदना करते हुए गणेश की पुष्य, अक्षत, गंध, फल और भोग अर्पित हुए तिलक लगाएं। 
  • भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हुए मां लक्ष्मी को सिंदूर अर्पित करते हुए सभी तरह की पूजन सामग्री भेंट करें।
  • फिर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान के साथ कुबेर देव और मां सरस्वती की पूजा करें।
  • इसके बाद परिवार सभी लोग महालक्ष्मी की आरती, मंत्रों का जाप और स्तुति पाठ करें। 
  • दीपक जलाएं और घर के हर एक हिस्से में रखें महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी और बहीखाते की पूजा करें।
  • इसके अलावा दिवाली पर पूर्वजों को याद करते हुए उनकी पूजा-अर्चना, धूप और भोग अर्पित करें। 

Diwali 2024: प्रीति योग
इस साल दीवाली पर प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण प्रातः काल 09:52 बजे से हो रहा है। वहीं इसका समापन 1 नवंबर को 10:41 बजे होगा। प्रीति योग को बेहद शुभ माना जाता है। इस योग में मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मनोरथ सिद्ध हों जाते हैं। 

शिववास योग
दीवाली के शुभ अवसर पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस योग में मां लक्ष्मी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस समय भगवान शिव कैलाश पर मां गौरी के साथ रहेंगे। ऐसे में आप भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। इस साल दीवाली पर चित्रा नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है।

दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त 


दिवाली 2024- अमावस्या तिथि 

  • कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ- 31 अक्तूबर को दोपहर 03:52 मिनट से।
  • कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त- 01 नवंबर को शाम 06:16 मिनट तक।

दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त   (31 अक्तूबर 2024)

  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 06:45 से 08:30 तक
  • अवधि - 01 घण्टे 45 मिनट
  • प्रदोष काल - 05:48 से 08:21
  • वृषभ काल - 06:35 से 08:33

गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:36 से 06:02 तक
संध्या पूजा- शाम 05:36 से 06:54 तक
निशिथ काल पूजा- रात्रि 11: 39 से 12: 31 तक

दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त  (01 नवंबर, 2024)

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:36 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 41 मिनट
प्रदोष काल - 05:36 से 08:11 
वृषभ काल - 06:20 से 08:15 

दिवाली लक्ष्मी पूजा शुभ चौघड़िया मुहूर्त 2024
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 06:33 से 10:42 तक
अपराह्न मुहूर्त (चर) - 04:13 से 05:36 तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 12:04 से 01:27 तक

Diwali 2024 Laxmi Puja Time:लक्ष्मी पूजा का पहला मुहूर्त शाम 5 बजे से... 

आज शुभ दीपोत्सव का पर्व दीपावली है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। आज लक्ष्मी पूजा का पहला मुहूर्त शाम करीब 5 बजे से शुरू होगा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल के बाद किया जाता है। 
 

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:32 से 08:51 तक

प्रदोष काल - 05:48 से 08:21
वृषभ काल - 06:35 से 08:33
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:36 से 06:02 तक
संध्या पूजा- शाम 05:36 से 06:54 तक
निशिथ काल पूजा- रात्रि 11: 39 से 12: 31 तक

इस वर्ष दिवाली की तारीख को लेकर मतभेद क्यों?
इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन पड़ने के कारण दिवाली के त्योहार को लेकर कुछ कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि दिवाली 31 अक्तूबर को मनाई जाय या फिर 01 नवंबर को। दरअसल शास्त्रों में दिवाली पर महालक्ष्मी का पूजन अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न में सबसे सर्वोत्तम माना गया है। प्रदोष काल के अलाव महानिशीथ काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी का प्राकट्य अमावस्या तिथि के संध्याकाल में हुआ था इस कारण से दिवाली का पर्व और लक्ष्मी पूजन प्रदोषकाल और रात्रिकाल निशीथ काल में होती है।  

दिवाली 2024 लक्ष्मी पूजा तिथि

पंचांग के मुताबिक 31 अक्तूबर, गुरुवार के दिन पूरी रात्रि अमावस्या तिथि के साथ प्रदोष काल और निशीथ मूहूर्त काल भी है। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार 31 अक्टूबर के दिन दीवाली का पर्व और लक्ष्मी पूजन करना सबसे अधिक फलदाई होगा, क्योंकि दिवाली का पर्व तभी मनाना उत्तम रहता है जब प्रदोष से लेकर निशिथा काल तक अमावस्या तिथि रहे। 
 

Happy Diwali 2024: दिवाली के शुभ अवसर पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को इन संदेशों से दें शुभकामनाएं

दिवाली के शुभकामना संदेश

      

 

दिवाली 2024- प्रदोषकाल मुहूर्त

दिवाली पर देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) और स्थिर लग्न में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल का समय हर दिन सूर्यास्त होने से 2 घड़ी यानी 48 मिनट तक रहता है। दिल्ली के समय अनुसार 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 36 मिनट पर सूर्यास्त होगा। 31 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से अमावस्या प्रारंभ हो चुकी होगी और प्रदोष काल अमावस्या तिथि पर रहेगी। ऐसे में 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 36 मिनट के बाद दिवाली लक्ष्मी पूजन आरंभ कर सकते हैं।

दिवाली 2024- निशिथ काल मुहूर्त 

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त जहां प्रदोष व्यापिनी अमावस्या तिथि और स्थिर लग्न को माना जाता है तो वहीं दिवाली के मध्य रात्रि के समय आने वाला मुहूर्त महानिशीथ काल पर मां काली की पूजा का विधान होता है। महानिशीथ काल में पूजा तांत्रिक,पंडित और साधकों के लिए सबसे सर्वोत्तम मानी जाती है। 

दिवाली 2024- उदया काल तिथि और मुहूर्त 

हिंदू धर्म में ज्यादातर पर्व और त्योहार की तिथियों की गणना उदया तिथि के आधार पर की जाती है। उदया तिथि उसे कहते हैं जब सूर्योदय के समय जो तिथि व्याप्त होती है। यानी कोई तिथि सूर्योदय के समय के बाद 3 प्रहर तक रहती है तो उसे उदया तिथि कहते हैं। कार्तिक अमावस्या की उदया तिथि 01 नवंबर को सूर्योदय के बाद 3 प्रहर तक रहेगी। यानी 01 नवंबर को अमावस्या तिथि में प्रदोष काल भी रहेगा। यानी 01 नवंबर को लक्ष्मी पूजन करना कुछ विद्वान उचित मान रहे हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि 01 नवंबर को दिवाली चतुर्दशी से युक्त अमावस्या से ज्यादा अच्छा प्रतिपदा से युक्त अमावस्या होती है। इसलिए 01 नवंबर को दीपावली मनाई जानी चाहिए।  
 

Diwali 2024 Laxmi Puja Time: दिवाली पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन, जानें आपके शहर में पूजा का समय

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2024

दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त   (01 नवंबर, 2024)
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:36 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 41 मिनट
प्रदोष काल - 05:36 से 08:11 
वृषभ काल - 06:20 से 08:15 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली निशिता काल पूजा मुहूर्त ( 01 नवंबर, 2024)

महानिशीथ काल : 23:38 से 24:30 तक (02 नवंबर)
सिंह काल : 24:52 से 27:10 तक (02 नवंबर)
(अमावस्या तिथि निशिता मुहूर्त के साथ व्याप्त नहीं है।)
 

Diwali 2024: दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी-गणेश पूजा, जानिए संपूर्ण पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- नई दिल्ली 
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:36 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 41 मिनट
प्रदोष काल - 05:36 से 08:11 
वृषभ काल - 06:20 से 08:15 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- नोएडा
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:35 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 41 मिनट
प्रदोष काल - 05:35 से 08:11 
वृषभ काल - 06:19 से 08:15 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- लखनऊ
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:23  से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 53 मिनट
प्रदोष काल - 05:23 से 07:58 
वृषभ काल - 06:08 से 08:04 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- चंडीगढ़
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:35 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 42 मिनट
प्रदोष काल - 05:35 से 08:11 
वृषभ काल - 06:17 से 08:12

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- जयपुर
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:44 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 33 मिनट
प्रदोष काल - 05:44 से 08:18 
वृषभ काल - 06:28 से 08:25 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- कोलकाता
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:45 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 31 मिनट
प्रदोष काल - 04:59 से 07:31 
वृषभ काल - 05:45 से 07:44 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- हैदराबाद
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:45 से 06:16 
अवधि - 00 घण्टे 32 मिनट
प्रदोष काल - 05:45 से 08:15 
वृषभ काल - 06:33 से 08:34 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- पटना
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 05:08 से 06:16 
अवधि - 01 घण्टा 08 मिनट
प्रदोष काल - 05:08 से 07:42 
वृषभ काल - 05:53 से 07:50 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- मुंबई
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 06:57 से 08:36 
अवधि - 01 घण्टा 39 मिनट
प्रदोष काल - 06:05 से 08:36 
वृषभ काल - 06:57 से 08:56 

Diwali Laxmi Puja Muhurat 2024 - फोटो : अमर उजाला
दिवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त- बेंगलुरु
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 06:47 से 08:21 
अवधि - 01 घण्टा 34 मिनट
प्रदोष काल - 05:53 से 08:21 
वृषभ काल - 06:47 से 08:49 

Diwali 2024 Laxmi Pujan Vidhi: आज माता लक्ष्मी को चढ़ाएं खीर का भोग

खीर लक्ष्मी जी का अत्यंत प्रिय भोग माना जाता है। इसे गाय के दूध, चावल और चीनी से बनाया जाता है। खीर अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता आती है। मान्यता है कि लक्ष्मी जी इसे प्रसन्न होकर ग्रहण करती हैं और परिवार के सभी सदस्यों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं।

Diwali 2024 Laxmi Pujan Vidhi: भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को लगाएं लड्डू का भोग

लड्डू विशेष रूप से बेसन और मोतीचूर के लड्डू माता लक्ष्मी को प्रिय हैं। दीपावली की रात इन्हें भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। ऐसा माना जाता है कि लड्डू अर्पित करने से जीवन में सौभाग्य और शुभ फल की प्राप्ति होती है। यह भी कहा जाता है कि लड्डू समर्पित करने से गृहस्थी में शांति और सुख की वृद्धि होती है।

Diwali 2024 Laxmi Pujan Vidhi: मां लक्ष्मी को हलवा और माखन-मिश्री का भोग

हलवा
हलवा, विशेष रूप से सूजी या आटे का हलवा, लक्ष्मी जी को समर्पित किया जाता है। हलवा बनाते समय उसमें घी का विशेष महत्व होता है, क्योंकि घी का सेवन स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है। इसे भोग लगाने से घर में उन्नति और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है।

माखन-मिश्री
माखन-मिश्री का भोग भी लक्ष्मी जी को समर्पित किया जा सकता है। यह भोग शुद्धता और सरलता का प्रतीक माना जाता है, और इसके माध्यम से घर में शांति और समृद्धि का संचार होता है। इस भोग को अर्पित करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और जीवन में सुख-शांति और धन का वरदान देती हैं।

Today Laxmi Puja Time: दिवाली लक्ष्मी पूजा के लिए आज का शुभ मुहूर्त

कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम मुहूर्त माना गया है। प्रदोष काल का समय शाम 05 बजकर 48 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त - 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 33 मिनट से 08 बजकर 51 मिनट तक।

निशिता काल मुहूर्त - 31 अक्तूबर की रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 01 नवंबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक।

प्रदोष काल - शाम 05 बजकर 48 मिनट से 08 बजकर 21 मिनट तक।
वृषभ काल - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट तक।

Diwali 2024 Laxmi Pujan Vidhi: पान और मेवा का भोग

पान का पत्ता और विभिन्न मेवा जैसे कि बादाम, काजू, किशमिश आदि लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय हैं। दीपावली की रात में पूजा के समय इन्हें अर्पित करना शुभ माना जाता है। पान और मेवा अर्पित करने से व्यवसाय और करियर में प्रगति होती है। मान्यता है कि यह भोग धन की वृद्धि में सहायक होता है।
 

Laxmi ji Ki Aarti: माता लक्ष्मी जी की आरती 

Diwali 2024 - फोटो : अमर उजाला
मां लक्ष्मी की आरती 

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

Diwali 2024 Laxmi Pujan Time Puja Vidhi: लक्ष्मी पूजन की संपूर्ण विधि

Diwali 2024 Laxmi Pujan Time Puja Vidhi - फोटो : अमर उजाला

अब से थोड़ी देर बाद दिवाली लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो जाएगा। शास्त्रों में अमावस्या तिथि की प्रदोषव्यापिनी मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। दिवाली की शाम को लक्ष्मी पूजन करने पर घर में सुख, शांति और धन-दौलत की कोई कमी नहीं होती है। दिवाली पर कैसे करनी चाहिए लक्ष्मीजी की पूजा ज्यादा जानकारी के लिए यह पढ़ें-

Diwali 2024: दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी-गणेश पूजा, जानिए संपूर्ण पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

Laxmi Puja Time Today: लक्ष्मी पूजा का सबसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 

दिवाली के दिन प्रदोष वेला में लक्ष्मी पूजन को सबसे शुभ माना गया है। वहीं स्थिर लग्न में और चौघड़िया मुहूर्त का विचार करते हुए लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त 31 अक्तूबर को शाम 06 बजकर 25 मिनट लेकर 07 बजकर 13 मिनट के बीच का है। 



 

Diwali 2024 Laxmi Puja Muhurat Time : लक्ष्मी पूजा, प्रदोष काल और निशिता काल पूजा का शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त - 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 33 मिनट से 08 बजकर 51 मिनट तक।

निशिता काल मुहूर्त - 31 अक्तूबर की रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 01 नवंबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक।

प्रदोष काल - शाम 05 बजकर 48 मिनट से 08 बजकर 21 मिनट तक।

वृषभ काल - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट तक।

Ganesh JI Ki Aarti: भगवान गणेश की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
 

laxmi puja time: लक्ष्मी पूजा के लिए इतना है समय 

देभभर के मंदिरों और घरों में इस समय दिवाली पर लक्ष्मी पूजन जारी है। आज रात 08 बजकर 51 मिनट तक गृहस्थ लोग लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं।  
 
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दिवाली 2024 का शुभ मुहूर्त- 01 नवंबर 

Diwali Laxmi Pujan Shubh Muhurat: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व - फोटो : amar ujala

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :17:35 से18:18 तक
अवधि :0 घंटे 43 मिनट
प्रदोष काल :17:35 से 20 तक
वृषभ काल :18:21 से 20:17 तक

दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त-  01 नवंबर 
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त : कोई नहीं
अवधि :0 घंटे 0 मिनट
महानिशीथ काल: 23:38 से 24:30 तक
सिंह काल : 24:52 से 27:10 तक

दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातःकाल मुहूर्त्त (चल, लाभ, अमृत): 06:33 से 10:41 तक
अपराह्न मुहूर्त्त (शुभ): 12:04 से 13:27 तक
सायंकाल मुहूर्त्त (चल): 16:12 से 17:35 तक
 
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