फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basant Panchami 2023 : वसंत पंचमी पर आज करें ये उपाय, छात्रों को मिलेगा मां सरस्वती का आशीर्वाद

Thu, 26 Jan 2023 01:43 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Saraswati Puja 2023 Puja Vidhi Muhurat Timing News in Hindi: आज वसंत पंचमी का त्योहार है। वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा करने का महत्व होता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, विद्यारंभ और नया कार्य करना काफी शुभ होता है। वसंत पंचमी एक अबूझ मुहूर्त है, जिसमें किसी भी तरह के शुभ कार्य करने के लिए मुहूर्त का विचार नहीं किया जाता है।
विज्ञापन
वसंत पंचमी 2023 की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Saraswati Puja 2023 Puja Vidhi Muhurat Timing News in Hindi: आज वसंत पंचमी है। इस तिथि पर विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। वसंत पंचमी के पर्व को वागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी के नाम से जाना है। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करना बहुत ही शुभ माना जाता है। विवाह के लिए वसंत पंचमी का दिन सबसे अच्छा मुहू्र्त होता है। वसंत पचंमी पर देवी सरस्वती को पीले फूल और पीली मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन सरस्वती वंदना और मंत्रों का जाप को करना शुभ लाभदायक रहता है। वसंत पंचमी का दिन शिक्षा और कला से जुड़े लोगों बहुत ही खास होता है। वसंत पंचमी के दिन विद्यारंभ करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा मिलती है।
विज्ञापन

 

वसंत पंचमी पर क्यों की जाती है सरस्वती पूजा ?

वसंत पंचमी माघ महीने का एक खास त्योहार होता है। वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना करने की मान्यता है। इस दिन विद्यारंभ और विवाह करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्रााजी स्वर और संगीत की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। इस कारण से हर वर्ष वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की जाती है।
 

आज वसंत पंचमी पर बना ये शुभ योग

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा, विद्यारंभ, गृह प्रवेश और विवाह जैसे कई तरह के शुभ कार्य किए जाते हैं। आज वसंत पंचमी के मौके पर कई तरह के शुभ योग बन रहे हैं। इन शुभ योग में पूजा और शुभ कार्य करने में जरूर सफलता मिलती है। आज शिव योग, सिद्ध योग, सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग बन रहा है। 

पंचांग के अनुसार, 25 जनवरी को शाम 06 बजकर 15 मिनट से लेकर अगले दिन 26 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट तक शिव योग रहेगा। ऐसे में इस साल वसंत पंचमी की शुरुआत शिव योग में हो रही है।  इसके अलावा इस दिन शिव योग के समाप्त होते ही सिद्ध योग की शुरुआत हो जाएगी। 26 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट से लेकर अगले दिन 27 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 22 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा। वहीं वसंत पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 06 बजकर 57 मिनट से लेकर अगले दिन 27 जनवरी को सुबह 07 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। फिर रवि योग 26 जनवरी को शाम 06 बजकर 57 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 07 बजकर 12 तक रवि योग रहेगा। पूजा के लिए ये चारों योग बेहद शुभ माने जाते हैं। 

विद्या से सभी कुछ हासिल किया जा सकता है

Basant Panchami - फोटो : अमर उजाला
आज विद्या की देवी मां सरस्वती का प्रगट उत्सव वंसत पंचमी मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बह्रााजी के कंमडल से देवी सरस्वती प्रगट हुई थीं। मां सरस्वती से स्वरूप से व्यक्ति को विद्यावान और गुणी होने का संदेश देती है। व्यक्ति के जीवन में उसकी विद्या ही सबसे बड़ी पूंजी होती है। विद्या ही से जीवन में सफलता, मान-सम्मान और हर तरह की सुख-सुविधा मिलती है। वसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा आराधना की जाती है। ऐसे जानते हैं विद्या के कुछ कोट्स....

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
विद्या हासिल करने से सभी समस्याएं हल हो सकती हैं। विद्या के ग्रहण करने से व्यक्ति को बुद्धि, विवेक, विनम्रता और ग्रंथों का सम्मान करना आता है।

विद्या के कोट्स...

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
कभी भी ज्ञानी व्यक्ति को धन-दौलस से वश में नहीं किया जा सकता...
 

विद्या के कोट्स...

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
जिस प्रकार से सोने के आभूषण में लगा हुआ मणि सभी का अपनी तरफ ध्यान खींच लेते है उसी प्रकार विद्यावान और विनम्र व्यक्ति समाज में हर जगह मान-सम्मान को प्राप्त करता है।

विद्या से कोट्स...

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
किसी व्यक्ति के द्वारा अर्जित की गई कोई विद्या एक अनमोल रत्न है। विद्या को कोई चोरी नहीं कर सकता है। इसका कभी भी नाश नहीं होता। यह दूसरों को देने पर लगातार बढ़ती है।

आज कब है सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा करने का विशेष महत्व होता है। छात्रों और कला जगत के लोगों वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा करते है। शास्त्रों में देवी सरस्वती को ज्ञान,विद्या और कला के देवी माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल पंचमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट हुई है । पंचमी तिथि 26 जनवरी को सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। ऐसे में सरस्वती पूजा के लिए सुबह 07 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक की जा सकती है।

आज वसंत पंचमी पर ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

basant panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
- वसंत पंचमी तिथि पर विद्या की देवी मां सरसवती प्रगट हुईं थीं। ऐसे में इस दिन इनकी विशेष पूजा आराधना का महत्व है।
- आज सबसे पहले घर पर देवी सरस्वती की मूर्ति को पूजा स्थल पर रखें। इसके बाद कलश स्थापित करते हुए नवग्रहों की पूजा करते हुए पूजा का संकल्प लें।
- पूजा में पहले गंगाजल से आचमन और स्नान कराएं। 
- मां सरस्वती को पीले रंग का फूल, वस्त्र और मिठाईयां अर्पित करें।
- इसके बाद मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें।
- मां सरस्वती की पूजा के बाद अपने इष्टदेवों की आराधना करें। 

सरस्वती पूजा का महत्व

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी पर विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा सभी शिक्षण संस्थानों और छात्रों के द्वारा किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में देवी सरस्वती को विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। इस दिन छात्र पीले रंग का वस्त्र पहनकर और माथे पर पीला टीका लगाकर पुस्तक और कलम की पूजा करते हैं। इसके अलावा इस दिन कला के क्षेत्र से जुड़े हुए लोग भी अपने वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं।

वसंत पंचमी का धार्मिक महत्व 

basant panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यतयाः विद्यारंभ ,नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह-प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयकर माना गया है । महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में इसे ''सर्वप्रिये चारुतर वसंते'' कहकर अलंकृत किया है । गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ''ऋतूनां कुसुमाकराः'' अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।वृज क्षेत्र में वसंत पंचमी के दिन से होली का शुभारंभ हो जाता है।चौराहों पर होलिका दहन के लिए लकड़ी एकत्र करने के बाद गुलाल उड़ाया जाता है। जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक उमंग के साथ लगातार चलता रहता है।
 

वसंत पंचमी पर आज न करें ये काम

basant panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
  • वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी काले, लाल या अन्य रंग बिरंगे वस्त्र नहीं धारण करने चाहिए। दरअसल मान्यता है माता सरस्वती का जब अवतरण हुआ था तब ब्रह्मांड की आभा लाल,पीली और नीली थी लेकिन सबसे पहले पीली आभा के दर्शन हुए थे और माता सरस्वती को पीला रंग प्रिय है। इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।  
  • वसंत पंचमी के दिन मांस-मंदिरा से दूरी बनाकर रखें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें। 
  • वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की आराधना की जाती है इसलिए इस दिन मन में कोई भी गलत विचार न लाएं और न ही किसी व्यक्ति को अपशब्द कहें। 
  • वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए किसी भी चीज का सेवन न करें। इस दिन स्नान करके मां सरस्वती की पूजा करें इसके बाद ही कुछ ग्रहण करें। 
  • वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधों की कटाई-छटाई भी न करें, क्योंकि इस दिन से बसंत ऋतु का भी आगमन होता है। इसलिए उसका सम्मान करने के लिए वृक्षों को काटने से बचना चाहिए। 

वसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप

Basant Panchami - फोटो : अमर उजाला
"या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।"

"ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि,
 तन्नो देवी प्रचोदयात्।" 

"पद्माक्षी ॐ पद्मा क्ष्रैय नमः।" 

"विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।"

मां सरस्वती का स्वरूप

वसंत पंचमी 2023 की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
आज वसंत पंचमी का पर्व है। वसंत पचमी पर मां सरस्वती की पूजा होती है। मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी कहा जाता है। मां सरस्वती के स्वरूप से हमें कई तरह की शिक्षा मिलती है। कमल पर आसीन मां सरस्वती के एक हाथ में पुस्तक, एक में वीणा, एक में माला और एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में है व उनका वाहन हंस है। माँ के स्वरूप में जन-जन के कल्याण  लिए प्रेरणा छुपी हुई है। इस प्रेरणा को हम जीवन में उतार कर सुखी और समृद्ध जीवन जी सकते हैं। 

Happy Basant Panchami 2023 : वसंत पंचमी का यही संदेश, विद्या और ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण...

Basant Panchami 2023: वसंत पंचमी आज, सरस्वती पूजा के दौरान पढ़ें ये आरती और वंदना

Basant Panchami 2023: वसंत पंचमी पर राशि अनुसार करें ये उपाय, हर कार्य में मिलेगी सफलता

मां सरस्वती को पीला रंग बेहद की प्रिय

Basant Panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी का त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। वसंत पंचमी के बाद सर्दी कम होने लगती है। वसंत पचंमी के दिन पीले और सफेद कपड़े पहने का विशेष महत्व होता है। मां सरस्वती को पीला और सफेद रंग बेहद ही प्रिय होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग सकारात्मकता और पवित्रता का प्रतीक है जबकि सफेद रंग शांति और सुख-समृद्धि  का प्रतीक होता है।
 

सरस्वती वंदना

basant panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥

मां सरस्वती के हाथ में वीणा सुशोभित

वसंत पंचमी 2023 की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
देवी को वीणावादिनी भी कहा जाता है। वीणा का अर्थ खुश रहने और खुशी बांटने से है। जन्म के बाद माता सरस्वती ने वीणा के तार छेड़ा था, तो सारा संसार आनंद से चहक उठा था, ठीक वैसे ही, व्यक्ति को अपने मन को सदैव खुश रखना चाहिए, इतना खुश कि आपसे मिलकर दूसरे व्यक्ति का मन भी आनंद से भर जाए।

मां सरस्वती के हाथ में पुस्तक क्यों ?

vasant panchami 2023 - फोटो : अमर उजाला
ज्ञान और विद्या की देवी मां शारदा के एक हाथ में पुस्तक है। इनकी पुस्तक लोगों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करती है। शिक्षा और ज्ञान से ही सबका उत्थान संभव है, इसलिए जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए जितना संभव हो, उतना ज्ञान अर्जित करें।
 

मां सरस्वती करती हैं हंस की सवारी

मां सरस्वती का वाहन हंस जो कि सफेद होता है। दूध और पानी को अलग करने की शक्ति हंस में होती है। यह प्रतीक हमें सही और गलत में फर्क करना सिखाता है और सही मार्ग पर चलने को प्रेरित करता है।
 

बसंत पंचमी पर छात्र करें ये उपाय

पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा ध्यान और शांति की दिशा मानी गई है व सकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव भी इसी दिशा में सबसे अधिक होता है। अतः ध्यान रहे कि अध्ययन कक्ष इन्हीं दिशाओं में हो और पढ़ते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहें।
 

कैसे हुआ देवी सरस्वती का जन्म

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने जीवों खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की । अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे , उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया हुआ है । भगवान विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का , पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कम्पंन होने लगा , इसके बाद   एक चतुर्भुजी स्त्री के रूप में अदभुत शक्ति का प्राकट्य हुआ जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थीं ।  ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया । जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया , संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई । जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया व पवन चलने से सरसराहट होने लगी । तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा । सरस्वती को बागीश्वरी , भगवती , शारदा , वीणावादिनी और बाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है । ये विद्या और बुद्धि की प्रदाता हैं ,संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी कहलाती हैं ।
विज्ञापन

शास्त्रों में वसंत पंचमी का महत्व

  • महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में वसंत पचंमी को ''सर्वप्रिये चारुतर वसंते'' कहकर अलंकृत किया है।
  • गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ''ऋतूनां कुसुमाकराः'' अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूं कहकर वसंत को अपना स्वरूप बताया है ।
  • वसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था।
  • इस दिन कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है , जबकि सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानरुपी अंधकार को दूर करके  ज्ञान का प्रकाश उत्त्पन्न  करना है ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें