राज्य मानवाधिकार आयोग ने लिया प्रसंज्ञान
झालावाड़ हादसे में 7 बच्चों की मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने प्रसंज्ञान लिया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक, झालावाड़ के कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को आयोग ने नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ली हादसे की जिम्मेदारी,बोले-मैं जिम्मेदार हूं,कोई और नहीं
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर झालावाड़ पहुंचे। अस्पताल में भर्ती बच्चों को देखने के बाद बोले,'हादसे के लिए मैं स्वयं जिम्मेदार हूं। शिक्षा मंत्री मैं हूं तो ये मेरी जिम्मेदारी है। किसी और के लिए क्यों बोलूं।' शिक्षा मंत्री ने भर्ती छात्रों की कुशलक्षेम पूछी और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि सरकार दो हजार स्कूलों को ठीक कर रही है।
ग्रामीणों का प्रदर्शन,भारी पुलिस बल तैनात
झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों का आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने मनोहर थाना रोड को पूरी तरह से जाम कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं भारी पुलिस बल मौके पर लगाया गया है। ग्रामीण मुआवजे की मांग भी कर रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि सरकार पीड़ित परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दे। इसके साथ ही एक करोड़ रुपये मुआवजे दे। वसुंधरा राजे के अस्पताल पहुंचने से ठीक पहले पुलिस ने मीणा और उनके समर्थकों को वहां से हटाने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और नरेश मीणा और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया। निर्मल चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया है।
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना में शिक्षकों की प्रारंभिक लापरवाही मानी गई है। हादसे में अब तक 7 बच्चों की मौत हो गई है। 27 घायल हुए हैं। इसमें से 8 बच्चों की हालत गंभीर है।
स्कूल गिरने पर मलबे से बच्चों को निकालकर अस्पताल पहुंचाने वाले बनवारी ने बताया कि स्कूल के भवन की हालत खराब है। इसकी जानकारी सभी अधिकारियों को थी। इसके बारे में शिकायत भी की गई थी। पर स्कूल के अधिकारी पंचायत में शिकायत करने की बात करते रहे। पंचायत वाले अन्य पर टालते रहे। समय पर भवन की मरम्मत हो जाती तो ये हादसा नहीं होता।वहीं झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह राठौर का कहना है कि जर्जर भवनों की सूचि में इस स्कूल का नाम नहीं था।
गंभीर रूप से घायल पांच और बच्चों को झालावाड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। करीब 10 बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। जिनका इलाज झालावाड़ अस्पताल में चल रहा है।
गांववालों ने बताया कि स्कूल में दो क्लास चल रही थीं। यहां सात कमरे हैं। जब हादसा हुआ तब 71 बच्चे दो क्लास में मौजूद थे। वहीं स्कूल में दो शिक्षक थे। दोनों शिक्षक स्कूल से बाहर थे। इस वजह से वे हादसे का शिकार नहीं हुए। घायल बच्चों से मिलने के लिए संभागीय आयुक्त राजेंद्र सिंह शेखावत झालावाड़ अस्पताल पहुंचे।
झालावाड़ स्कूल हादसे में बच्चों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख प्रकट किया। ट्वीट के माध्यम से पीएम ने कहा, 'दुर्घटना अत्यंत दुःखद है। इस कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएं प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।' साथ ही प्रधानमंत्री ने हर संभव मदद की बात भी कही।
घटना पर दुख जताते हुए डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधा। सिस्टम की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मासूमों की जान सिर्फ लापरवाही की वजह से गई है। मां-बाप से बहुत सपने देखकर बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए स्कूल भेजा होगा लेकिन सरकारी तंत्र इतना लापरवाह हो गया कि यही संज्ञान नहीं ले सका कि ये भवन बच्चों के सुरक्षित है कि नहीं। हमें इस घटना से सीख लेकर जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए। हमें उन विद्यायल जो जर्जर हैं, बच्चों के सुरक्षित नहीं हैं, वहां से बच्चों को दूसरी जगह बच्चों को शिफ्ट करना चाहिए। जब तक वहां नया भवन न बने या मरम्मत न हो जाए तब तक बच्चों को शिक्षा कहीं और सुचारू रूप से कराई जानी चाहिए।
पीपलोदी, मनोहरथाना के स्कूल भवन में हुआ हादसा अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है। जनहानि और कई बच्चों के घायल होने का समाचार हृदयविदारक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत मासूम आत्माओं को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती हूं।
घायल बच्चे का इलाज करते डॉक्टर
बच्चों को परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया
घायल बच्ची अस्पताल में लेटी हुई
जानकारी के अनुसार मामले में बड़ी लापरवाही सामने निकल कर आ रही है। बताया गया कि स्कूल की छत काफी समय से जर्जर हालत में थी। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद छत के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ था। इसके बावजूद कोई उपाय नहीं किए गए। नतीजा बच्चों की जान चली गई। गंभीर घायल बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। मलबा हटाने में रेस्क्यू टीम के साथ ग्रामीण भी पूरी तरह से लगे हुए हैं। यह स्कूल से पीपलोद गांव में बना हुआ था। जानकारी में यह भी सामने है कि मलबे में दबे सभी बच्चे 7वीं कक्षा के थे। जिस समय हादसा हुआ उसमें बच्चे अपने कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिवंगत दिव्य आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने हादसे की जांच के निर्देश भी दिए हैं।
अशोक गहलोत ने जताया दुख
घटना पर दुख जताते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, "झालावाड़ के मनोहरथाना में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने की खबर आ रही है, जिसमें कई बच्चे और शिक्षक हताहत हुए हैं। मैं ईश्वर से कम से कम जनहानि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।"
Rajasthan School Building collapse: झालावाड़ के पिपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से 6 बच्चों की दबकर मौत हो गई। हादसे में 30 से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के समय स्कूल में प्रार्थना सभा चल रही थी। तभी अचानक से स्कूल की छत भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि स्कूल की छत काफी जर्जर थी और लगातार हो रही भारी बारिश के बाद छत के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ था।
सूचना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और मलबे में दबे हुए बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया। घटना के बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे हैं। एकजुट होकर सभी मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोग कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी से जल्दी बच्चों को निकाला जा सके।