देश आदिवासी समाज के बलिदानों का ऋणी है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम आदिवासी समाज के बलिदानों के ऋणी हैं। प्रकृति से लेकर पर्यावरण तक, संस्कृति से लेकर परंपराओं तक को सहेजा है। आज समय है कि देश इस ऋण के लिए, इस योगदान के लिए, आदिवासी समाज की सेवा कर उनका धन्यवाद करें। बीते आठ वर्षों से यही भावना हमारे प्रयासों को ऊर्जा देती रहती है। कुछ ही दिनों बाद 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। आज देशभर में विशेष म्युजियम बनाए जा रहे हैं। जिस भव्य विरासत से हमारी पीढ़ियां वंचित थी, वह अब उनकी सोच का हिस्सा बनेगी। आदिवासी समाज का विस्तार और भूमिका इतनी बड़ी है कि हमें उसके लिए समर्पित भाव से काम करने की जरूरत है। राजस्थान और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर और ओडिशा तक विविधता से भरे आदिवासी समाज के लिए देश स्पष्ट विचार के साथ काम कर रहा है।
मोदी ने कहा कि कल शाम ही मुझे अहमदाबाद से उदयपुर ब्रॉड गेज पर चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का मौका मिला है। इस परिवर्तन से राजस्थान और गुजरात के आदिवासी क्षेत्र जुड़ जाएंगे। राजस्थान के टूरिज्म को लाभ मिलेगा। मानगढ़ धाम के भव्य विस्तार की प्रबल इच्छा हम सभी में है। राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को मिलकर काम करना होगा। चारों राज्य विस्तृत चर्चा करें। रोडमैप तैयार करें। ताकि गोविंद गुरु का स्थल भी पूरी दुनिया में नई पहचान बनें। मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि जितना जल्दी, जितना ज्यादा क्षेत्र निर्धारित करेंगे, सब मिलकर और भारत सरकार के नेतृत्व में हम इस क्षेत्र को और विकास कर सकते हैं। भारत सरकार और इन चार राज्यों के आदिवासी समाज का सीधा संबंध है।
मानगढ़ धाम को पहचान जालियांवाला बाग की तरह पहचान मिले: गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मानगढ़ धाम पर प्रधानमंत्री पधारे, मैं प्रदेश वासियों की तरफ से उनका स्वागत करता हूं। मेवाड़ की धरती का अपना इतिहास रहा है। मानगढ़ धाम का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है। आदिवासियों का इतिहास महान इतिहास है। जितना खोज की जाए, उतनी ही नई कहानियां मिलेंगी। जहां-जहां आदिवासी रहते हैं, चाहे बिरसा मुंडा की बात करें, हर जगह आजादी की जंग में आदिवासियों का बड़ा योगदान था। महाराणा प्रताप का शौर्य मेवाड़ की पहचान है। जिस तरह देश जालियांवाला बाग हत्याकांड को जानता है, वैसे ही मानगढ़ धाम की पहचान बनें। जंग लड़ने में आदिवासी पीछे नहीं थे, यह इससे साबित होता है। गांधी का देश होने की वजह से मोदी को दुनिया में मिलता है सम्मान। जहां लोकतंत्र की गहरी जड़ें हैं, उस देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का सम्मान होता है। मामा बालेश्वर जी का योगदान मोदीजी को पता है। उन्होंने जागृति का काम किया।
भूपेंद्र पटेल ने जताया मोदी का आभार
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मोरबी के पुल हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि से भाषण शुरू किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया, जो मदद और सहयोग के लिए तत्पर रहे। बचाव और राहत कार्यों में मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने हमें अमृत काल में पांच मंत्र दिए हैं। इसमें अमर सेनानियों का गौरव-सत्कार करना प्रमुख है। मैं उन सभी आदिवासी भाई-बहनों को याद करना चाहूंगा जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1500 से अधिक आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में जान दे दी।
शहीदों के पूजन की परंपरा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाषण की शुरुआत ही मानगढ़ के बलिदानियों के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि हमारे देश को आजादी चांदी की तश्तरी पर रखकर पेश नहीं की। कई लोगों ने मानगढ़ और भारत भूमि को खून से रंगा था। तब जाकर देश आजाद हुआ। आजादी के बाद सही इतिहास अच्छे से पढ़ाया नहीं गया। कई शहीदों को नजरअंदाज किया गया। गोविंद गुरु ने अंग्रेजों की चुनौती को स्वीकार किया और 1500 से अधिक आदिवासियों ने शहादत दी। शहीदों के पूजन की परंपरा को प्रधानमंत्री जी ने शुरू की है। मानगढ़ की अमर गाथा को हम आगे ला रहे हैं। मैं इस पवित्र धरती को मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ लोगों की तरफ से प्रणाम करता हूं। मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आए हैं। वे यहां से मिट्टी लेकर लौटे। जनजातीय भाई-बहन सच्चे देशभक्त हैं। जनजातीय गौरव दिवस 15 नवंबर को पूरे देश में मनाने का फैसला भी मोदी जी ने किया। पिछले साल धूमधाम से मनाया गया। मध्यप्रदेश में इसी तारीख को पेसा एक्ट लागू कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंच चुके हैं। उनके साथ राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं। ्कार्यक्रम की शुरुआत गुजराती भाषा में मंच संचालन के साथ हुई। केंद्रीय मंत्री ्अर्जुराम मेघवाल ने स्वागत भाषण पढ़ा। इसके बाद झाबुआ (मध्यप्रदेश) से शिवगंगा अभियान के महेश शर्मा ने मानगढ़ के महत्व और प्रधानमंत्री की उसमें आस्था के सम्मान का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) पहुंचकर शहीदों को नमन किया। उन्होंने धूणी पर पहुंचकर पूजन किया। आरती भी उतारी। इस दौरान राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के मुख्यमंत्री उनके साथ थे। उन्होंने गोविंद गुरु का नमन किया। तीनों ही राज्यों के भील आदिवासियों के लिए यह स्थान महत्वपूर्ण है और इस वजह से तीनों ही राज्यों से आदिवासी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।