02:30 PM, 01-Oct-2026
राहुल गांधी ने बालाघाट आने से पहले एक्स पर लिखा
मैं आज बालाघाट आ रहा हूं। उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है। उनके साथ वक्त बिताकर उन्हें बताना चाहता हूं कि इस दुख में वो अकेले नहीं हैं - मैं उनके साथ हूं। कुछ दिनों पहले केन-बेतवा आंदोलन के आदिवासी भाई-बहनों से भी मिला था। परियोजना के कारण आज उनके गांव डूब रहे हैं, मगर सरकार से उन्हें न पुनर्वास मिला न मुआवज़ा - मिला है तो प्रताड़ना, सरकारी दमन और हिंसा। इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ के दौरान भी आदिवासी छात्रों ने बताया - स्कूल नहीं हैं, कॉलेज बदहाल हैं, हॉस्टल और खाना नर्क जैसा, परीक्षाओं में धांधली और उनके आरक्षण के अधिकार से खिलवाड़ हो रहा है। मध्यप्रदेश के आदिवासियों की ये तकलीफें BJP-RSS की उस सोच का हिस्सा हैं जो उन्हें भारत के पहले मालिक नहीं, वनवासी मानती है। जल, जंगल, जमीन के साथ शिक्षा, रोजगार और सम्मान भी छीन लेना चाहती है और अहंकार में वो कुछ सुनना नहीं चाहती। आदिवासी भाई-बहनों को आश्वस्त करता हूं कि मैं आपके साथ हर संघर्ष में खड़ा हूं - आपकी आवाज़ बुलंद करना मेरी ज़िम्मेदारी है और मैं इस बहरी सरकार को वो पूरी शक्ति के साथ सुनाऊंगा।