साथियो, 2025 में 'मन की बात' का ये आखिरी एपिसोड है, अब हम साल 2026 में ऐसे ही उमंग और उत्साह के साथ, अपनेपन के साथ अपने 'मन की बातों' को करने के लिए 'मन की बात' के कार्यक्रम में जरूर जुड़ेंगे। लोगों से मिलने वाले सुझाव और इस दिशा में उनके प्रयासों को देखकर ये विश्वास और मजबूत होता है और जब ये सब बातें मेरे तक पहुँचती हैं, तो 'विकसित भारत' का संकल्प जरूर सिद्ध होगा | ये विश्वास दिनों दिन मजबूत होता जाता है ।
साल 2026 इस संकल्प सिद्धि की यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो, आपका और आपके परिवार का जीवन खुशहाल हो, इसी कामना के साथ इस episode में विदाई लेने से पहले मैं जरूर कहूँगा, 'Fit India Movement' आप को भी फिट रहना है | ठंडी का ये मौसम व्यायाम के लिए बहुत उपयुक्त होता है, व्यायाम जरूर करें | आप सभी को 2026 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
मणिपुर के चुराचांदपुर में मारग्रेट रामथरसेम जी के प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहाँ के हैंडीक्राफ्ट को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े विजन के साथ देखा और इसी विजन के कारण, वो एक हैंडीक्रफ्ट से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं। आज मारग्रेट जी की यूनिट उसमें 50 से ज्यादा कलाकार काम कर रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में, अपने उत्पादों का एक बाजार भी विकसित किया है। मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है | उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है | क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया | उन्होंने फूलों की खेती को अपना जुनून बनाया |
इन दिनों कच्छ के रण में उत्सव चल रहा है | इस साल कच्छ रणोत्सव का ये आयोजन 23 नवंबर से शुरु हुआ है, जो 20 फरवरी तक चलेगा | यहां कच्छ की लोक संस्कृति, लोक संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की विविधता दिखाई देती है। कच्छ के सफेद रण की भव्यता देखना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। रात के समय जब सफेद रण के ऊपर चाँदनी फैलती है, वहां का दृश्य अपने आप में मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। रण उत्सव का टेंट सिटी बहुत लोकप्रिय है | मुझे जानकारी मिली है कि पिछले एक महीने में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग रणोत्सव का हिस्सा बन चुके हैं और देश के कोने-कोने से आए हैं, विदेश से भी लोग आए हैं।
मेरे प्यारे देशवासियो, हमारी पारंपरिक कलाएं समाज को सशक्त करने के साथ ही लोगों की आर्थिक प्रगति का भी बड़ा माध्यम बन रही हैं। आंध्र प्रदेश के नारसापुरम जिले की Lace Craft (लेस क्राफ्ट) की चर्चा अब पूरे देश में बढ़ रही है | ये लेस क्राफ्ट कई पीढ़ियों से महिलाओं के हाथों में रही है | बहुत धैर्य और बारीकी के साथ देश की नारी-शक्ति ने इसका संरक्षण किया है। आज इस परंपरा को एक नए रंग रूप के साथ आगे ले जाया जा रहा है | आंध्र प्रदेश सरकार और नाबार्ड मिलकर कारीगरों को नए डिजाइन सिखा रहे हैं, बेहतर स्किल ट्रेनिंग दे रहे हैं और नए बाजार से जोड़ रहे हैं। नारसापुरम लेस को GI Tag भी मिला है | आज इससे 500 से ज्यादा उत्पाद बन रहे हैं और ढ़ाई-सौ से ज्यादा गांवों में करीब-करीब 1 लाख महिलाओं को इससे काम मिल रहा है।
मणिपुर के चुराचांदपुर में मारग्रेट रामथरसेम जी के प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहाँ के हैंडीक्राफ्ट को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े विजन के साथ देखा और इसी विजन के कारण, वो एक हैंडीक्रफ्ट से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं। आज मारग्रेट जी की यूनिट उसमें 50 से ज्यादा कलाकार काम कर रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में, अपने उत्पादों का एक बाजार भी विकसित किया है। मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है | उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है | क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया | उन्होंने फूलों की खेती को अपना जुनून बनाया |
आज मैं एक ऐसे मुद्दे पर बात करना चाहता हूं, जो हम सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है | ICMR यानि Indian Council of Medical Research ने हाल ही में एक जारी रिपोर्ट जारी की है | इसमें बताया गया है कि निमोनिया और यूटीआई जैसी कई बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। हम सभी के लिए यह बहुत ही चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है । एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं नहीं हैं, जिन्हें यूं ही ले लिया जाए | इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए | आजकल लोग ये मानने लगे हैं कि बस एक गोली ले लो, हर तकलीफ दूर हो जाएगी | यही वजह है कि बीमारियाँ और संक्रमण इन एंटीबायोटिक दवाओं पर भारी पड़ रहे
साथियो, ये हमारा दायित्व है कि हम अपनी विरासत को ना भूलें। हम आजादी दिलाने वाले नायक-नायिकाओं की महान गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं | आपको याद होगा जब हमारी आजादी के 75 वर्ष हुए थे, तब सरकार ने एक विशेष website तैयार की थी | इसमें एक विभाग 'Unsung Heroes' को समर्पित किया गया था | आज भी आप इस website पर visit करके उन महान विभूतियों के बारे में जान सकते हैं जिनकी देश को आजादी दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका रही है।
साथियो, अगले महीने हम देश का 77वाँ गणतंत्र दिवस मनाएंगे। जब भी ऐसे अवसर आते हैं, तो हमारा मन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता के भाव से भर जाता है | हमारे देश ने आजादी पाने के लिए लंबा संघर्ष किया है | आजादी के आंदोलन में देश के हर हिस्से के लोगों ने अपना योगदान दिया है | लेकिन, दुर्भाग्य से आजादी के अनेकों नायक-नायिकाओं को वो सम्मान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए था |
ऐसी ही एक स्वतंत्रता सेनानी हैं - ओडिशा की पार्वती गिरि जी | जनवरी 2026 में उनकी जन्म-शताब्दी मनाई जाएगी | उन्होंने 16 वर्ष की आयु में 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया था | साथियो, आजादी के आंदोलन के बाद पार्वती गिरि जी ने अपना जीवन समाज सेवा और जनजातीय कल्याण को समर्पित कर दिया था। उन्होंने कई अनाथालयों की स्थापना की | उनका प्रेरक जीवन हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा।
फिजी में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक सराहनीय पहल हो रही है। वहां की पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए स्कूल में तमिल दिवस मनाया गया। वहां बच्चों ने तमिल में कविताएं सुनाईं और प्रस्तुतियां दीं। हमारे देश में तमिल भाषा के प्रचार के लिए लगातार काम हो रहा है। हाल ही में काशी में चौथा काशी तमिल संगमम का आयोजन हुआ। इस साल काशी तमिल संगमम में तमिल भाषा सीखने पर खासा जोर दिया गया। इस दौरान काशी के 50 से ज्यादा स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाया गया। मुझे खुशी है कि आज देश के दूसरे हिस्सों में भी बच्चों और युवाओं के बीच तमिल भाषा को लेकर नया आकर्षण दिख रहा है - यही भाषा की ताकत है, यही भारत की एकता है ।
पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर के बारामूला में जेहानपोरा में पुरात्वविदों ने यहां के छोटे टीलों पर ध्यान दिया। इसके बाद इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया। ड्रोन और जमीन की मैपिंग की गई। पता चला कि ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि किसी पुरानी इमारत के अवशेष हैं। इसके बाद फ्रांस के एक म्यूजियम के आर्काइव में धुंधला सा चित्र मिला, जिनमें बौद्ध धर्म के स्तूप नजर आ रहे थे। कश्मीर के जेहानपोरा का यह परिसर हमें याद दिलाता है कि कश्मीर का अतीत क्या था और उसकी पहचान कितनी समृद्ध थी।
साथियों आज का जीवन तकनीक से संचालित हो रहा है और जो बदलाव सदियों में आते थे वे अब कुछ वर्षों में हो जाते हैं। कई बार चिंता जताई जाती है कि रोबोट कहीं इंसानों की जगह न ले लें। मुझे खुशी होती है कि अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह से सहेज रही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ने कुछ वर्षों पहले वहां के छात्रों ने संगीत की जरूरत महसूस हुई। जहां से छोटी म्यूजिक क्लास शुरू हुई। न बड़ा मंच न बड़ा बजट। धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज हम इसे गीतांजलि आईआईएस के नाम से जानते हैं। यहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएं हैं। छात्र यहां साथ बैठक रियाज करते हैं और छात्रों के परिवार और प्रोफेसर भी यहां जुड़े हैं। जो विदेश चले गए वे भी ऑनलाइन इससे जुड़े हैं। दुनिया के अलग-अलग कोनों से जुड़े भारतीय भी अपनी परंपरा को संभाल रहे हैं। दुबई में भी एक कन्नड़ पाठशाला का जन्म हुआ, जहां बच्चों को कन्नड़ पढ़ना और लिखना सिखाया जाता है। आज इससे एक हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। वाकई कन्नड़ की भाषा हमारा गर्व है।
आज देश के भीतर युवाओँ को प्रतिभा दिखाने के नए नए अवसर मिल रहे हैं। ऐसे कई प्लेटफॉर्म विकसित हो रहे हैं, जहां युवा अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। ऐसा ही एक मंच है स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन। ये ऐसा मंच है, जहां आइडिया एक्शन में बदलते हैं। इस हैकाथॉन के दौरान 80 से अधिक विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर छात्रों ने काम किया। छात्रों ने ऐसे सुझाव दिए, जो रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े थे। ऐसे ही छात्रों ने ट्रैफिक से जुड़े रोचक सुझाव दिए। गांवों में डिजिटल बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी पर सुझाव दिए। कई युवाओं ने कृषि की चुनौतियों पर सुझाव दिए। युवाओ ने कई सटीक सुझाव दिए हैं और इस तरह से हैकाथॉन का समय-समय पर आयोजन होता रहता है। मेरी अपील है कि युवा इन हैकाथॉन में हिस्सा लें।
मेरे प्यारे देशवासियों, आज दुनिया भारत को नई आशा के साथ देख रही है और भारत की उम्मीदों की वजह इसकी युवा शक्ति, विज्ञान और तकनीक में हमारी उपलब्धि। भारत के युवाओं में कुछ नया करने का जुनून है और वे उतने ही जागरूक भी है। युवा मुझसे पूछते हैं कि वे कैसे देश के विकास में कैसे योगदान दे सकते हैं। हमारे युवा साथियों की जिज्ञासा का समाधान यंग लीडर डायलॉग है। पिछले दिनों उसका पहला संस्करण हुआ था और अब जल्द ही उसका दूसरा संस्करण आएगा। मैं भी इसमें जरूर शामिल होऊंगा। इसमें हमारे युवा इनोवेशन, फिटनेस, कृषि जैसे अहम विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। मुझे ये देखकर अच्छा लगा, इसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। कुछ दिन पहले एक क्विज प्रतियोगिता में लाखों युवा शामिल हुए।
साथियों 2025 खेल के लिहाज से भी एक यादगार साल रहा हमारी पुरुष टीम आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती। भारत की बेटियों ने वर्ल्ड कप जीता। पैरा एथलीटों ने विश्व चैंपियनशिप में कई पद जीतकर साबित किया कि कोई बाधा देश के कदमों को नहीं रोक सकती। विज्ञान और अंतरिक्ष में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई और शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो आईएसएस पर पहुंचे। भारत में चीतों की संख्या भी बढ़ रही है। आस्था, संस्कृति की विरासत एक साथ दिखाई दी। इस साल प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन ने पूरी दुनिया को चकित किया। स्वदेशी को लेकर भी लोगों का उत्साह खूब दिखाई दिया। लोग वहीं सामान खरीद रहे हैं, जिसमें भारतीय का पसीना लगा हो। हम गर्व से कह सकते हैं कि 2025 ने देश को नया आत्मविश्वास दिया है। अब 2026 में देश नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मन की बात में आपका फिर से स्वागत है। कुछ ही दिनों में साल 2026 दस्तक देने वाला है और इस दौरान पूरे एक साल की यादें मन में घूम रही हैं। 2025 ने ऐसे कई पल दिए, जिस पर हर भारतीय को गर्व हुआ। भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी। इस साल ऑपरेशन सिंदूर हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। दुनिया ने देखा आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने भाव व्यक्त किए। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर भी यही जज्बा देखने को मिला।
मन की बात को 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा 11 विदेशी भाषाओं में भी प्रसारित किया जाता है। इनमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तो, फारसी, दारी और स्वाहिली शामिल हैं। मन की बात की ब्रॉडकास्टिंग आकाशवाणी के 500 से अधिक ब्रॉडकास्टिंग सेंटर से होती है। 30 मिनट के इस रेडियो कार्यक्रम में पीएम मोदी देश-विदेश के समसामयिक मुद्दों और पर्यावरण के विषयों पर बात करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी आज देश की साल 2025 की उपब्लियों, संघर्षों की चर्चा कर सकते हैं। साथ ही नए साल 2026 की चुनौतियों, संभावनाओं और विकास पर भी चर्चा कर सकते हैं। पिछले मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने इसमें भारत में खेलों की प्रगति, विंटर टूरिज्म, वोकल फॉर लोकल के साथ ही वाराणसी में होने वाले काशी-तमिल संगमम का जिक्र किया था।