जनसेना पार्टी के सांसद के बाद महाराष्ट्र से निर्वाचित शिवसेना सांसद धैर्यशील संभाजीराव माणे (हातकणंगले लोकसभा सीट) और बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्वाचित निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी इस चर्चा में भाग लिया। पप्पू यादव ने कहा कि वंदे मातरम की रचना के 150 साल के बाद आज हम इस पर चर्चा कर रहे हैं, ये इनका संस्कार दिखाता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज साफ हवा, पानी, आर्थिक मुद्दों और नागरिकों की खुशी जैसे मुद्दों पर बात कर रही है, लेकिन जिन लोगों ने आज तक राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं किया वे आज कमियों को छिपाने के लिए संसद में चर्चा करा रहे हैं। पप्पू ने आरोप लगाया कि ब्रिटिश हुकूमत का समर्थन करने वाले लोगों को आज इंडिगो संकट, शिक्षा से जुड़े विषयों और अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपये के अवमूल्यन जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान आंध्र प्रदेश के सांसद टी उदय श्रीनिवास (जन सेना पार्टी) ने आजादी के आंदोलन में महिलाओं के योगदान को याद किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और एकजुटता पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि युवाओं और नागरिकों का साहस दिखाता है कि कोई भी दबाव उनकी भारतीय पहचान से बड़ा नहीं हो सकता है। उन्होंने देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर देश के विकास के लिए काम करने का आह्वान किया।
बिहार की शिवहर लोकसभा सीट से निर्वाचित महिला सांसद लवली आनंद ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक पार्टी- जनता दल यूनाइटेड (JDU) का पक्ष रखते गुए आनंद ने वंदे मातरम से जुड़े इतिहास का जिक्र करते हुए देश की मजबूत जीडीपी की तरफ ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने 2047 तक देश को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है। हम इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत दुनिया में तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है।
वंदे मातरम पर लोकसभा में हो रही चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से निर्वाचित महिला सांसद ने कहा कि ये मौका है जब हम अपने भीतर झांके, ये आत्ममंथन की घड़ी है। उन्होंने कहा कि ये केवल अतीत की ललकार नहीं वर्तमान की जिम्मेदारी है। वंदे मातरम को केवल नारा नहीं, नीति और जिम्मेदारी बनाना होगा। उन्होंने उर्दू साहित्य की दिग्गज विभूति अल्लामा इकबाल की रचना का जिक्र करते हुए अपने जज्बात का इजहार किया। इकरा हसन ने सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा... नज्म की पंक्तियों के साथ अपने संबोधन का अंत किया।
भाजपा सांसद बांसुरी के बाद केरल की मल्लपुरम लोकसभा सीट से निर्वाचित IUML सांसद ईटी मोहम्मद बशीर और पंजाब की आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से निर्वाचित आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मानविंदर सिंह कांग ने भी इस चर्चा में भाग लिया।
वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने आज इसके सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अक्षय नवमी के दिन वंदे मातरम का सृजन हुआ। इसी दिन भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं समाप्त हुई थीं। उन्होंने वंदे मातरम को भारत के रस का मंत्र बताया। बांसुरी ने कहा कि भारत में राष्ट्रवाद एक राजनीतिक संरचना नहीं, आध्यात्मिक चेतना है। हमारे लिए भूमि महज धरती का टुकड़ा नहीं मां के तौर देखी जाती है। यहां भारत को भौगोलिक सीमाओं में नहीं संस्कारों में नहित देखा जाता है। भाजपा सांसद ने कहा, 7 नवंबर, 1875 के दिन जब बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने वंदे मातरम का सृजन किया तो उस दिन अक्षय नवमी तिथि थी। उन्होंने कहा, ये दिन भारतीय संस्कृति का बेहद पावन और महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं को समाप्त कर धर्म की स्थापना के लिए मथुरा प्रस्थान किया था। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगान, धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म की साक्षात प्रेरणा कर्मयोगी भगवान कृष्ण से प्राप्त करके ही संचालित करता है। पूरे देश को कश्मीर से कन्याकुमारी तक वंदे मातरम एकता के सूत्र में बांधता है।
पूर्वोत्तर भारत से आने वाले कांग्रेस सांसद डॉ अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने भी वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान अपनी बातें रखीं। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दे और अन्य अहम विषयों को छोड़कर आज हम वंदे मातरम पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मणिपुर के संकट पर 3-4 घंटे की चर्चा नहीं की गई। इसके बाद भी आप इसे देशभक्ति कहते हैं। आज भी 65 हजार लोग बेघर हैं, उनकी समस्याओं पर ध्यान न देकर हम वंदे मातरम पर चर्चा कर रहे हैं। हमें आत्म अवलोकन करने की जरूरत है कि क्या आजादी के आंदोलन में बलिदान देने वाले महापुरुषों ने ऐसे ही देश की कल्पना की थी। कांग्रेस सांसद ने दिल्ली की हवा में लगातार घुलते जहर, विमानन क्षेत्र में उपजे अभूतपूर्व संकट जैसे विषयों की गंभीरता की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए।
मणिपुर पर चर्चा करने की चुनौती
अपने वक्तव्य के अंत में कांग्रेस सांसद ने सरकार की विचारधारा पर सवाल खड़े करते हुए कहा, 'आपने दलितों और अल्पसंख्यकों को हाशिये पर धकेला है। मुस्लिम लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। ऐसे हालात में जब हम वंदे मातरम पर 10 घंटे लंबी चर्चा कर रहे हैं, तो राष्ट्रवादी भावनाओं की दुहाई देने वाले लोगों को मैं मणिपुर पर चर्चा की चुनौती देता हूं। तभी सही अर्थों में वंदे मातरम का अर्थ समझा जा सकेगा।'
आंध्र से निर्वाचित एक अन्य सांसद गुरुमूर्ति मड्डीला ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के इस सांसद ने कहा, हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो दिखाती हैं कि वंदे मातरम में जिन आदर्शों का जिक्र किया गया है, उसकी अनदेखी हो रही है। उन्होंने आंध्र प्रदेश में निजीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। उनके वक्तव्य के दौरान कई सांसदों ने टोका कि वे मुद्दे से भटक कर वंदे मातरम पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। हालांकि, वे अपनी बात पूरी करने में सफल रहे।
इसके बाद आंध्र प्रदेश के ओंगोले सीट से निर्वाचित तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने तेलुगू भाषा में अपने वक्तव्य के दौरान क्रांतिकारियों के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के परवाने वंदे मातरम के उद्घोष के साथ फांसी के फंदे पर झूल गए। आंध्र प्रदेश के बलिदानियों को नमन करते हुए रेड्डी ने कहा कि वंदे मातरम एक मौका है कि बलिदानियों के योगदान से युवाओं को भी परिचित कराया जाए। अपने भाषण के अंत में उन्होंने वंदे मातरम, आई लव माई इंडिया और जय आंध्रा जैसे नारे भी लगाए।
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान तमिलनाडु की मदुरै लोकसभा सीट से निर्वाचित सीपीआईएम सांसद एस वेंकटेशन ने भी लोकसभा में वंदे मातरम पर हो रही चर्चा में भाग लिया। उन्होंने तमिल भाषा में पूरा वक्तव्य पढ़ा।
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने भी वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर लोकसभा में हो रही चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि भारत के संघर्ष और बलिदान के 200 साल के इतिहास को समेटे इस पंक्ति के माध्यम से हजारों-लाखों शहीदों के बलिदान को श्रद्धांजलि दी जाती है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा बोले- वंदे मातरम को महज साहित्य और राष्ट्रगीत के दायरे में नहीं बांध सकते। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया। देश के आध्यात्मिक इतिहास में इसका योगदान अद्वितीय है। हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से निर्वाचित कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान कहा कि पंडित नेहरू के कार्यकाल में बने आईआईटी और एम्स जैसी संस्थाओं से निकले इंजीनियर और डॉक्टर आज पूरी दुनिया में अपना योगदान दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर लोकसभा सीट से निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस की महिला सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली की प्रदूषित हवा और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज हम सब वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर इस राष्ट्रीय गीत पर चर्चा कर रहे हैं। इसी समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा में जहर घुला है। उन्होंने कहा कि आज देश में जिस तरह की घृणा फैलाई जा रही है, ऐसे माहौल में वंदे मातरम पर चर्चा करना दिखाता है कि हम कितने गंभीर हैं।
बंगाल में वंदे मातरम का कार्ड चल गया तो 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा...
उन्होंने कहा कि बीते हफ्ते संसदीय बुलेटिन में कहा गया कि सदन में 'वंदे मातरम' और 'जय हिंद' जैसे नारे पर पाबंदी लगाई गई है। लेकिन अब अचानक इस पर 10 घंटे लंबी चर्चा हो रही है। इसका केवल एक ही मतलब है कि शायद किसी अल्पबुद्धि आईटी सेल सदस्य ने आपको ये सुझाव दिया है कि अगर बंगाल में वंदे मातरम का कार्ड चल गया तो 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा इस चर्चा का कोई और कारण नहीं है।
भाजपा से जुड़े लोग वंदे मातरम नहीं पढ़ सके
महुआ मोइत्रा ने कहा, वंदे मातरम पर चर्चा के पीछे मंशा चाहे जो भी हो, हम इस बात से खुश हैं कि हमें आपको सबक सिखाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, वंदे मातरम पर ये चर्चा दिखाती है कि आप बंगाल की सोच और आत्मा से जुड़ने में सफल नहीं हुए हैं। हमारी मां आपके सियासी लक्ष्यों की बंधक कभी नहीं बनेगी। उन्होंने वंदे मातरम के प्रकाशन और इसके गायन से जुड़े इतिहास का जिक्र करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित किया। उन्होंने एक भाजपा प्रवक्ता, यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री समेत कुछ अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा, उन्हें कई ऐसी घटनाएं याद हैं, जहां भाजपा से जुड़े लोग वंदे मातरम नहीं पढ़ सके।
आजादी के आंदोलन में भाजपा-RSS का कितना योगदान
तृणमूल सांसद ने कहा, सरकार को बताना चाहिए कि बंगाल के लिए इन लोगों ने आज तक किया क्या है? जो आज दावा कर रहे हैं कि बंगाल के लोगों के साथ-साथ पूरे देश को वंदे मातरम सिखाएंगे। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कौन लोग हैं जो साबित कर सकते हैं कि आजादी के आंदोलन में उनका योगदान रहा है। सत्ताधारी खेमे से मुखातिब महुआ ने कहा, आज आपको लगता है कि आप वंदे मातरम के प्रहरी बन चुके हैं।
बंगाल के 68 फीसदी कैदियों को काला पानी की सजा, पंजाब दूसरे नंबर पर
अंडमान की सेल्युलर जेल में बंद किए गए 585 कैदियों का जिक्र करते हुए महुआ ने कहा, साल 1909 से 1938 के बीच सजा पाने वाले इन कैदियों में 68 फीसदी यानी 398 लोग बंगाल के थे। पंजाब के 95 कैदियों को यहां रखा गया। बंगाल के क्रांतिकारियों का नाम लेकर महुआ ने सरकार से पूछा, इन लोगों को बताना चाहिए कि जिस कालकोठरी में देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को काला पानी की सजा-यातना दी गईं, आज तक उस सेल्युलर जेल का नाम क्यों नहीं बदला गया?
उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट से निर्वाचित समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित विस्तृत चर्चा में भाग लिया। उन्होंने 25 नवंबर को अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, हमें आज तक समझ नहीं आया कि उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का पास क्यों नहीं दिया गया, मेरी अनदेखी क्यों की गई? अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये घटना दिखाती है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के लोगों का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का संदेश भी इस घटना के कारण अधूरा लगता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस चर्चा की शुरुआत की है, इसमें शामिल होकर अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इंसानों को पेशाब पिलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, ये धरती किसी दूसरे की नहीं है।
कम्युनिस्ट विचारधारा से जन्मे वामपंथी चरमपंथ के कारण न जाने कितनी पीढ़ियां बर्बाद हो गईं। देश के कई हिस्से विकास में पीछे रह गए। पहले की सरकारें नक्सलवाद या वामपंथी उग्रवाद की इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ सकीं। पीएम मोदी ने इसका समाधान खोजा और आज उनके नेतृत्व में वामपंथी चरमपंथ अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा, ये कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस कम्युनिस्ट विचारधारा ने कई देशों में सत्ता पाने की हिंसा का रास्ता चुना, उसे खतरा न मानकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना में विश्वास रखने वाली विचारधारा को खतरा माना गया। ये कोई मामूली सोच नहीं, बल्कि ऐसा पूर्वाग्रह था, जिससे तुष्टीकरण की राजनीति को जन्म मिला और कुछ पड़ोसी देशों से आए अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों को दशकों तक अपने अधिकारियों से वंचित रखा गया। इसी के कारण मुस्लिम महिलाओं से समान अधिकार छीने गए। इसी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण देश का विभाजन हुआ और आज पश्चिम बंगाल के अनेक परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण के दौरान पंडित नेहरू से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने एक किताब के हवाले से इतिहास की घटना का जिक्र करते हुए कहा, पंडित नेहरू की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में कॉमनवेल्थ सेक्रेट्री वाईडी गुंडेविया ने उनसे पूछा कि अगर कल को कम्युनिस्ट केंद्र की सत्ता में आ जाएं तो सरकारी तंत्र का क्या होगा? नेहरू जी ने झुंझलाकर जवाब दिया। कम्युनिस्ट-कम्युनिस्ट भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म नहीं है। खतरा हिंदू दक्षिणपंथी कम्युनलिज्म है।
राजनाथ सिंह ने दावा किया कि अगर किसी को प्रमाण चाहिए तो वे इस किताब का ब्योरा और प्रमाण देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से नेहरू जी ये देखने के लिए जीवित नहीं रहे कि उसी दक्षिणपंथी लोगों ने संविधान के मूल्यों के अनुरूप काम किया है। हमने संविधान के मूल्यों की अवहेलना कभी नहीं की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के राष्ट्रगीत- वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान इस रचना को देश की आत्मा का गीत बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम और आनंदमठ कभी भी इस्लाम विरोधी नहीं रहे। आनंदमठ के प्रसंगों को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ये देश के इतिहास और वर्तमान दोनों से जुड़ा है। उन्होंने बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की रचना का मूल्यांकन करने की बात कहते हुए कहा, वंदे मातरम की मूल रचना में भारत की विशेषताओं को दिखाया गया है। उन्होंने कहा, वंदे मातरम से जिन पंक्तियों को हटाया गया उन्हें केवल जिन्ना के नजरिए से देखने पर ही सांप्रदायिक और राजनीतिक कहा जा सकता है।
राजनाथ सिंह ने बंगाल की संस्कृति का जिक्र करते हुए वंदे मातरम की पंक्तियों की व्याख्या भी की। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की इस रचना में कहीं भी मूर्ति पूजा पर जोर नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को तुष्टीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया। राजनाथ सिंह ने वर्तमान सरकार के नारे- सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का जिक्र करते हुए कहा, हमने इसी भावना से काम किया है। हालांकि, आजादी के आंदोलन के दौरान कांग्रेस के कुछ तथाकथित सेक्युलर लोगों की बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और महान सभ्यता से जुड़ी बातें उन्हें सांप्रदायिक दिखती थीं। वंदे मातरम भी इसी का शिकार बन गया।
बिहार की औरंगाबाद लोकसभा सीट से निर्वाचित राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती पर आज भी स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कनों को महसूस किया जा सकता है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रियंका गांधी के भाषण के अंशों पर सवाल किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस सांसद को ये सिद्ध करना चाहिए कि 'बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में वंदे मातरम के केवल दो स्टैंजा लिखे और सात साल के बाद 1882 में बाकी पांच स्टैंजा लिखे' ये तथ्य इन्होंने कहां से लिए हैं।
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ध्यान भटकाना चाहती है। सत्ताधारी पक्ष के बताना चाहिए कि वे इतने अहंकारी क्यों हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा दिखावे की राजनीति करती है। चुनाव से चुनाव तक सियासत करने वाली ये पार्टी बेरोजगारी, युवाओं के मुद्दे और महंगाई जैसे विषयों पर चर्चा क्यों नहीं करनी चाहती। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि खुद को महापुरुषों से बड़ा बताना क्या उनका अपमान नहीं है? प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता है।
विज्ञान, इसरो, डीआरडीओ और एम्स जैसी संस्थाओं के योगदान का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर इन्होंने ये नहीं बनाया होता तो भारत विकसित कैसे बनता। उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के योगदान को रेखांकित करते हुए सरकार को सलाह भी दी। प्रियंका ने कहा, नेहरू जी को जितनी भी गालियां देनी हैं, जितने अपमान करने हैं उसकी एक सूची बना लेनी चाहिए।
सत्ताधारी खेमे की तरफ से बीते दिनों जारी की गई एक सूची का जिक्र करते हुए प्रियंका ने कहा स्पीकर की अनुमति से जितने भी घंटे की चर्चा जरूरी हो, हम बहस कर लेंगे। एक बार चर्चा के बाद इस अध्याय को बंद कर देना चाहिए। फिर बेरोजगारी और ऐसे तमाम जरूरी मुद्दों पर संसद में चर्चा की जाएगी।
प्रियंका ने सत्ताधारी दल और स्पीकर ओम बिरला की तरफ से टोके जाने पर कहा कि बिना तथ्यों के हम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में इस बात पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है कि महिलाओं की परिस्थितियों को सुधारने के लिए ठोस कदम कैसे उठाए जाएंगे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रदूषण, पेपरलीक जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता। हिम्मत है तो भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करें। अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में प्रियंका ने कहा कि भाजपा इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति करती है।
प्रियंका गांधी ने वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास घटने लगा है। प्रियंका ने पीएम मोदी के उद्धरण पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्होंने इस सदन के सामने गलत जानकारी सामने रखी है। सत्ताधारी खेमे की तरफ से टोके जाने पर प्रियंका ने उन पर कटाक्ष किया। प्रियंका ने कहा, 'हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं।' कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी के अधूरे उद्धरण का जिक्र करते हुए कहा, चुनिंदा पंक्तियों का उल्लेख करना ठीक नहीं है।
केरल की वायनाड सीट से चुनकर लोकसभा पहुंचीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि संसद में इस समय ये चर्चा इसलिए कराई गई, क्योंकि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। प्रियंका ने कहा, ये गीत देश की आत्मा का हिस्सा बन चुका है। 150 साल से देशवासियों के दिलों में बस चुके इस गीत पर चर्चा की टाइमिंग पर सवाल खड़े करते हुए प्रियंका ने कहा, देश की आजादी के 75 वर्षों बाद भी हमें सोचना चाहिए कि सदन में चुनावी सुधार के बदले राष्ट्रगीत पर ऐसी चर्चा की जरूरत क्यों पड़ी।
बिहार के खगड़िया से निर्वाचित लोजपा सांसद राजेश यादव ने भी चर्चा में भाग लिया। उन्होंने काव्य के अंदाज में वंदे मातरम की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस चर्चा के लिए वे सरकार का धन्यवाद करना चाहते हैं। सरकार गौरवशाली अतीत को युवाओं के सामने लाने का काम कर रही है।
महाराष्ट्र से निर्वाचित एक अन्य सांसद श्रीरंग अप्पा बरने ने भी इस चर्चा में भाग लिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के सांसद बरने ने बालासाहेब ठाकरे के बयान से अपने वक्तव्य की शुरुआत की। बकौल बरने, 'बालासाहेब कहते थे, अगर इस देश में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा... बाला साहेब ठाकरे गर्व से कहते थे हम हिंदू हैं, इस पर भी हमें गर्व है।'
ठाकरे को उद्धृत करने के बाद बरने ने कहा, लोगों ने दूसरी जगहों पर जाकर मिलावट की है। वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए स्वराज्य और आजादी के आंदोलन में बलिदान देने वाले सपूतों को याद करते हुए वंदे मातरम को मातृभूमि और संस्कृति को सशक्त करने वाली रचना बताया। उन्होंने कहा कि ये महज गीत नहीं भारत माता की ताकत है।
महाराष्ट्र से निर्वाचित एक अन्य सांसद भास्कर मुरलीधर भागारे ने भी इस चर्चा में भाग लिया। डिंडोरी लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद मुरलीधर एनसीपी (शरद पवार) गुट के सांसद हैं। उन्होंने मराठी भाषा में अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि आजादी के आंदोलन में इसका योगदान कभी न भूलने वाला है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशवासियों को एकजुट करने में इसने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले, साहूजी महाराज जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए कहा कि असंख्य बलिदानियों ने इस राष्ट्रगीत से प्रेरणा लेकर अपना सर्वस्व मातृभूमि पर न्योछावर कर दिया।
महाराष्ट्र के शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने भी चर्चा में भाग लिया। वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर हो रही इस चर्चा के दौरान सावंत ने भी इतिहास के तथ्यों का उल्लेख किया। सावंत ने अपने बचपन की स्मृतियों का उल्लेख कर कहा, राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाते हुए स्कूलों में प्रभात फेरियां निकाली जाती थीं। उन्होंने सत्ताधारी खेमे पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कई दशकों तक जिस पक्ष ने तिरंगा फहराने से परहेज किया, विडंबना है कि आज वही दल वंदे मातरम पर चर्चा करा रहा है। इस पर एतराज जताते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सावंत की इन बातों को सुनकर आज शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे को दुख होता होगा।
अपने वक्तव्य के दूसरे हिस्से में सावंत ने एक मराठी काव्यांश का उद्धरण भी दिया। देश में वंदे मातरम की भूमिका और भारत के निर्माण में संघर्ष करने वाले हुतात्माओं का जिक्र करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले बलिदानी सपूतों को भी याद किया।
टीडीपी सांसद के बाद इस चर्चा में बिहार के सीतामढ़ी से निर्वाचित लोकसभा सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भाग लिया। जदयू सांसद देवेश ठाकुर ने मातृभूमि के लिए बलिदान देने वाले सपूतों को याद करते हुए कहा, भारत पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन वंदे मातरम जैसी राष्ट्रीय चेतना के उद्घोष से हर आक्रमण विफल हुए। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में आजादी के दीवानों ने इस गीत से प्रेरणा लेकर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज जरूरत इस बात की है कि आने वाली पीढ़ियां भी इससे प्रेरणा ले। उन्होंने इस गीत की भावनाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान भी किया।
तमिलनाडु के सांसद डी राजा के बाद इस चर्चा में आंध्र प्रदेश से निर्वाचित तेलुगू देशम पार्टी (TDP) की सांसद डी शबरी ने भाग लिया। उन्होंने पार्टी वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए पार्टी सुप्रीमो सह मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, लिंग और भाषा से परे जाकर वंदे भारत देश को एकजुट करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्र गीत में देश के पर्वतों, बागान और नदियों का उल्लेख है, लेकिन 1937 में कांग्रेस ने इसके कुछ अंशों को हटा दिया। इस चर्चा के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका की गैरहाजिरी पर सवाल खड़े करते हुए टीडीपी सांसद ने डीएनए से जुड़ी टिप्पणी भी की। इसके अलावा अपने वक्तव्य के अंतिम भाग में डी शबरी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, संगीत जगत के दिग्गज ए आर रहमान ने वंदे मातरम को सम्मान दिया। हमें इन लोगों से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
तमिलनाडु की नीलगिरि लोकसभा सीट से निर्वाचित डीएमके सांसद ए राजा ने भी इस चर्चा में भाग लिया। राजा ने देश की विविधता, बहुभाषी होने की ताकत का जिक्र कर एंथम और सॉन्ग यानी राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसी विभूतियों के योगदानों का जिक्र करते हुए कहा, दशकों पहले उन्होंने बालिका शिक्षा, महिलाओं के बहुविवाह, विधवा पुनर्विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध करते हुए तत्कालीन गवर्नर जनरल को 2000 लोगों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपा। इसके जवाब में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने 28 हजार हस्ताक्षरों के साथ पत्र लिखा और बदलाव को हिंदू रीति-रिवाजों के खिलाफ बताया।
बंकिम चंद्र पर आलोचनात्मक टिप्पणी का भी जिक्र
डीएमके सांसद ने कहा, वंदे मातरम को लेकर जिन लोगों ने अपनी राय सार्वजनिक मंचों पर रखी, उनमें आरसी मजूमदार का नाम भी शामिल है। मजूमदार का जिक्र करते हुए डीएमके सांसद ने उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियों को भी रेखांकित किया। डीएमके सांसद ने कहा, 'बंकिम चंद्र देशभक्ति को धर्म और धर्म को देशभक्ति में बदल दिया। ('Bankim Chandra Converted Patriotism into religion and religion in patriotism') जैसी टिप्पणी दिखाती है कि तत्कालीन समाज में वैमनस्य की भावना पनपने की आशंका थी।
अपने आधे घंटे से अधिक समय के वक्तव्य में डीएमके सांसद राजा ने पीएम मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने चंद पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा;
अखिलेश यादव के बाद पश्चिम बंगाल की बारासात लोकसभा सीट से निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने बांग्ला भाषा में कई कथनों और ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विभाजन की सोच रखने वाले लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं के अधिकार का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। अपने संबोधन के अंत में जय बांग्ला का नारा भी लगाया।
कांग्रेस सांसद गोगोई के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने इस चर्चा में भाग लिया। उन्होंने भाजपा नीत सत्तारुढ़ खेमे पर आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल हर चीज की मिल्कियत चाहता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने लाखों लोगों को एकजुट करने का काम किया है। प्रतिबंधों के बावजूद ये राष्ट्रीय गीत लोगों के दिलों में रहा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी आजादी के आंदोलन में भाग ही नहीं लिया, वे वंदे मातरम की अहमियत क्या जानेंगे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, अंग्रेजों ने खौफ के कारण प्रतिबंध लगानए। आज जहां विवाद करना हो, तो दरारवादी (सत्ताधारी दल) लोग वंदे मातरम की आड़ में देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये गीत झूठे राष्ट्रवादियों के लिए नहीं है।
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान राष्ट्रभक्ति की भावना और देशहित में काम करने का आह्वान करते हुए कांग्रेस सांसद गोगोई ने विमानन क्षेत्र में उपजे इंडिगो संकट का भी जिक्र किया।
ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए गोगोई ने कहा, वंदे मातरम की यात्रा का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने पीएम मोदी के एक घंटे के भाषण का जिक्र करते हुए कहा, उन्होंने इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने रवैये को लेकर गोगोई ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के समय भी संसद में भाषण के दौरान पीएम मोदी ने 14 बार पंडित नेहरू का नाम लिया। उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री के भाषणों के रिकॉर्ड्स का जिक्र करते हुए गिनाया कि कितनी बार पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और कांग्रेस का जिक्र कर चुके हैं।
वंदे मातरम पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद विपक्षी खेमे की तरफ से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने बंगाल की धरती से आने वाले सपूतों को नमन करते हुए चर्चा की शुरुआत की। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और सत्ताधारी दल के विचारों पर सवाल खड़े करते हुए गोगोई ने कहा कि आज वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत से अलग एक राजनीतिक नारे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ग्रामोफोन का जिक्र किया, लेकिन आजादी से पहले पंपलेट और प्रिंट होकर प्रकाशित दस्तावेजों की मदद से भी वंदे मातरम का प्रसार हुआ।
आपातकाल का जिक्र कर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश ने हर बार दमन को पीछे छोड़ते हुए अपना सफर तय किया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को चेतना का प्रवाह बताते हुए कहा कि हमारा देश आपातकाल को भी परास्त कर आगे बढ़ा है। ऐसे में उन्हें विश्वास है कि संसद के दोनों सदनों में चर्चा का सकारात्मक असर होगा।
नेताजी सुभाष चंद्रबोस को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस को लिखा कि गीत के बैकग्राउंड से मुस्लिम समुदाय के लोगों के भड़कने की आशंका है। उन्होंने कांग्रेस के फैसले का जिक्र करते हुए कोलकाता अधिवेशन का भी जिक्र किया। वंदे मातरम के टुकड़े करने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी ने कहा, अक्तूबर में वंदे मातरम के टुकड़े किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।
आज भी विवाद कर रही है कांग्रेस
प्रधानमंत्री ने कहा कि, अक्तूबर में कोलकाता में हुए फैसले के बाद कांग्रेस पहले वंदे मातरम पर समझौता करने के लिए झुकी इसके बाद देश को बंटवारे का दंश भी झेलना पड़ा। वही कांग्रेस आज भी वंदे मातरम को लेकर विवाद कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजिक सद्भाव की आड़ में किए गए फैसले के आधार पर कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया। जिन्ना के विचारों का समर्थन किया गया।
नेहरू ने 20 अक्तूबर, 1937 को लिखा पत्र
प्रधानमंत्री ने कहा- मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ में 15 अक्तूबर 1937 को वंदे मातरम नारे का विरोध किया था। फिर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। नेहरू जी ने मुस्लिम लीग के बयानों को करारा जवाब नहीं दिया, न ही उनकी निंदा की, बल्कि इसके ठीक उलट किया। उन्होंने वंदे मातरम की ही पड़ताल कर दी। जिन्ना के विरोध के पांच दिन बाद ही 20 अक्तूबर को नेहरू जी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखी और जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम की आनंदमठ वाली पृष्ठभूमि मुस्लिमों को चिढ़ा सकती है। नेहरू जी ने आगे लिखा कि मैंने वंदे मातरम गीत की पृष्ठभूमि पढ़ी है, मुझे लगता है कि इससे मुस्लिम भड़केंगे।
कांग्रेस और तुष्टीकरण की राजनीति
प्रधानमंत्री ने कहा- ...इसके बाद कांग्रेस की तरफ से बयान आया कि 26 अक्तूबर से कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कलकत्ता में होगी और जिसमें वंदे मातरम के उपयोग की चर्चा होगी। कांग्रेस ने वंदे मातरम पर समझौता कर लिया। वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए गए। उसके लिए नकाब पहना गया। इतिहास इस बात का गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेके और यह सब मुस्लिम लीग के दबाव में किया। कांग्रेस का तुष्टीकरण की राजनीति को साधने का यह एक तरीका था। इसी राजनीति की वजह से कांग्रेस को भारत के बंटवारे के लिए मुस्लिम लीग के सामने झुकना पड़ा
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के इतिहास में कहीं भी वंदे मातरम जैसा भाव गीत नहीं रहा। उन्होंने इस वक्तव्य के साथ ये सवाल भी किया कि वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि बापू की पवित्र भावनाओं को भी विवादों में घसीटा गया। इसे दुर्भाग्य बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे होने के इस मौके पर मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति जैसे पहलुओं पर भी चर्चा करनी जरूरी है। उन्होंने इतिहास की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। बकौल पीएम मोदी, नेहरू ने वंदे मातरम के प्रति अपनी और कांग्रेस पार्टी की निष्ठा को प्रकट नहीं किया, मुखरता से मुस्लिम लीग की निंदा नहीं की गई। उन्होंने वंदे मातरम की पड़ताल शुरू कर दी।
प्रधानमंत्री ने कहा, वंदे मातरम ने करोड़ों देशवासियों को एहसास कराया कि यह लड़ाई किसी जमीन के टुकड़े के लिए नहीं थी। यह सत्ता के सिंहासन को कब्जा करने के लिए नहीं थी। यह गुलामी की बेड़ियों को मुक्त कर हजारों वर्षों की महान संस्कृति और गौरवपूर्ण इतिहास के पुनर्जन्म के संकल्प की लड़ाई थी।
वंदे मातरम रण स्वीकार करने का यह पावन पर्व
हम सभी सांसदों के लिए, हम सभी जनप्रतिनिधियों के लिए वंदे मातरम रण स्वीकार करने का यह पावन पर्व है। इससे हम प्रेरणा लेकर के वंदे मातरम की जिस भावना ने देश की आजादी की जंग लड़ी, उत्तर, पश्चिम, पूरब, दक्षिण पूरा देश एक स्वर से वंदे मातरम बोलकर आगे बढ़ा। फिर से एक बार अवसर है कि हम सब मिलकर चलें। देश को साथ लेकर के चलें। आजादी के दीवानों ने जो सपने देखे थे। उन सपनों को पूरा करने के लिए वंदे मातरम हम सबके लिए प्रेरणा बने।
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश हुकूमत के शासनकाल में गुलामी के दौर का जिक्र करते हुए कहा, अंग्रेजों के उस दौर में भारत को कमजोर, निकम्मा, आलसी बताना एक फैशन बन गया था। हमारे यहां भी कुछ लोग वही भाषा बोलने लगे थे। तब बंकिम दा ने झकझोरने के लिए और सामर्थ्य का परिचय कराने के लिए वंदे मातरम के जरिए लिखा था-
वेदों में भी कहा गया है, "माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्याः"। यानी पृथ्वी मेरी माता है और मैं इस माता का पुत्र हूं। भगवान श्रीराम ने भी लंका के वैभव को छोड़ते हुए कहा था- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
वंदे मातरम की यात्रा की शुरुआत बंकिमचंद्र जी ने 1875 में की थी। यह गीत ऐसे समय लिखा गया था, जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी। भारत के लोगों पर भांति-भांति के दबाव डाले गए। भारत के लोगों को मजबूर किया जा रहा था। उस समय उनका राष्ट्रगीत था- गॉड सेव द क्वीन। इसे भारत में घर-घर पहुंचाने का षड्यंत्र चल रहा था। ऐसे में समय बंकिम दा ने चुनौती ली। ईंट का जवाब पत्थर से दिया और वंदे मातरम का जन्म हुआ। 1882 में जब उन्होंने आनंदमठ लिखा तो इस गीत का उसमें समावेश किया।
हमने इस महत्वपूर्ण विषय पर सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है। जिस जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा, प्रेरणा दी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया, उस पर हम चर्चा करेंगे। हम सभी का यह सौभाग्य है। हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बन रहे हैं। यह एक ऐसा कालखंड था, जो हमारे सामने इतिहास की अनगिनत घटनाओं को सामने लेकर आता है। यह एक ऐसा कालखंड है, जब इतिहास के कई प्रेरक अध्याय हम सभी के सामने उजागर हुए हैं। अभी हमने संविधान के 75 वर्ष गौरवपूर्वक पूरे किए हैं। देश ने सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई है। अभी-अभी गुरु तेगबहादुर के बलिदान के 350 वर्ष भी पूरे हुए हैं।
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वंदे मातरम प्रेरणा बन सकती है, बशर्ते हम सब मिलकर इसका सदुपयोग करें। पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम के इस मंत्र ने आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी। उन्होंने कहा कि हम इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वंदे मातरम के 50 साल पूरे हुए उस समय देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ ता। जब इसके 100 साल पूरे हुए थे, तब देश आपातकाल की जंजीरों में था, इस समय संविधान का गला घोंटा गया। इस कालखंड में देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। दुर्भाग्य से एक काला कालखंड भी हमारे इतिहास के सामने उजागर हुआ। उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि आज लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा से देश को एकजुट होकर चलने की प्रेरणा मिलेगी।
पश्चिम बंगाल की जयनगर लोकसभा सीट से निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस सांसद प्रतिमा मंडल ने सवाल किया कि स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजना जैसी योजनाओं से पश्चिम बंगाल के गंगा सागर को क्यों बाहर रखा गया है? गंगा सागर के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए तृणमूल सांसद ने पर्यटन मंत्री से कहा, क्या भारत सरकार बंगाल की धार्मिक महत्व वाली जगहों- बेलूर मठ और गंगा सागर आदि को प्रसाद योजना या किसी अन्य केंद्रीय योजनाओं में शामिल करने पर विचार करेगी?
इस सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि गंगा सागर की महत्ता भारत की संस्कृति में बहुत स्पष्ट है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार की ऐसी योजनाओं से जुड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने राज्य सरकार को तटीय इलाकों के लिए 68 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है। बेलूर मठ के लिए प्रसाद योजना के तहत 31 करोड़ रुपये दिए गए थे।
बकौल शेखावत, इसके बाद स्वदेश दर्शन-2, प्रसाद स्कीम और राज्य सरकार की विशेष मदद के लिए बनाई गई योजनाओं से जुड़ने में राज्य सरकार ने कोई रुचि नहीं दिखाई। राज्य की तरफ से प्रस्ताव नहीं आने पर केंद्र विचार नहीं कर सकती। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने तृणमूल सांसद से गंगा सागर जैसी अहम जगहों को लेकर सियासत न करने की अपील करते हुए कहा, भारत सरकार खुले मन से सभी विचारों पर ध्यान देती है। परियोजनाओं पर प्राथमिकता के आधार पर राज्य सरकारों को काम करना है। इसलिए प्रस्ताव भेजने की पहल राज्य को ही करनी होगी।
तमिलनाडु की कुड्डालोर लोकसभा सीट से निर्वाचित कांग्रेस सांसद एमके विष्णु प्रसाद ने रेलवे टूरिज्म और त्योहारी सीजन में पर्यटकों के लिए किए जाने वाले विशेष उपायों को लेकर सवाल किया। इस पर पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रयागराज के महाकुंभ की मिसाल देते हुए कहा, सरकार देश के हर कोने में जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त इंतजाम करती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के किसी खास धार्मिक और पर्यटक स्थलों से जुड़े प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। रेल मंत्रालय के साथ मिलकर पर्यटन मंत्रालय समुचित बंदोबस्त करने के लिए तैयार है।
छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट से निर्वाचित भाजपा सांसद रूप कुमारी चौधरी ने अपने संसदीय क्षेत्र और राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या को देखते हुए किए जाने वाले उपायों से जुड़ा सवाल पूछा। छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक स्थल सिरपुर और राजीम के कायाकल्प से जुड़े इस सवाल पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से आने वाले प्रस्तावों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव आया नहीं है।
गुजरात की अहमदाबाद पश्चिम लोकसभा सीट से निर्वाचित भाजपा सांसद दिनेश मकवाना ने प्रसाद योजना के तहत धार्मिक स्थलों के विकास से जुड़ा सवाल पूछा। इसके जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में साल 2014-15 से इस योजना की शुरुआत की गई। इसका मकसद पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतरीन अनुभव मुहैया करना था। देश की 54 जगहों पर की गई पहल और परियोजनाओं के कारण पर्यटकों का अनुभव बेहतर हुआ है। क्या सरकार योजना के तहत स्थानीय निकायों की मदद लेने का विचार रखती है? इस पर पर्यटन मंत्री ने कहा, ऑपरेशन एंड मेंटेनेस के लिए कुछ फंड एक साल के लिए सुरक्षित रखा जाता है। प्रसाद योजना के तहत तय नियम और दिशानिर्देश के तहत राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ही ऐसी जगहों का प्रबंधन करते हैं।
NYC स्कीम पर केरल से निर्वाचित सांसद ईटी मोहम्मद बशीर के सवाल का जवाब केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने दिया। मल्लपुरम लोकसभा सीट से निर्वाचित आईयूएमएल सांसद बशीर ने राष्ट्रीय युवा कोर योजना (NYC) को बेहतरीन बताते हुए सरकार से आंकड़े पेश करने को कहा। इसके जवाब में मांडविया ने कहा, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत का संकल्प देश के सामने रखा है। बकौल मांडविया पीएम मोदी ने गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले एक लाख यूथ लीडर तैयार करने का आह्वान किया है। इस दिशा में सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। माय भारत प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए मांडविया ने कहा कि इसके अधीन राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), स्काउट गाइड्स, एनसीसी जैसे प्रकल्प काम कर रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म पर दो करोड़ से युवाओं ने स्वेच्छा से पंजीकरण कराया है। ये तमाम लोग यूथ क्लब के माध्यम से सामाजिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। मांडविया ने कहा कि सरकार के प्रयासों का सकारात्मक नतीजा भी दिख रहा है। माय भारत प्लेटफॉर्म पर होने वाली तीन दिवसीय स्पर्धा में 50 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया है। अलग-अलग चरणों से गुजरने के बाद इनमें से तीन हजार युवाओं को प्रधानमंत्री के सामने अपना प्रेजेंटेशन देने का अवसर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ की बस्तर लोकसभा सीट से चुने गए भाजपा सांसद महेश कश्यप ने राष्ट्रीय युवा कोर योजना से जुड़ा सवाल पूछा। उनके सवाल पर केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खड़से ने जवाब दिया। खड़से ने बताया केंद्र सरकार युवाओं के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। राज्य और जिला प्रशासन के साथ मिलकर पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़े एक सवाल पर खड़से ने बताया कि देशभर के कॉलेजों में एनएसएस के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
आठवें दिन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा में प्रश्नकाल की शुरुआत हुई। स्पीकर ओम बिरला की अनुमति के बाद प्रश्नकाल की शुरुआत में खपत आधारित विकास के आर्थिक प्रभाव पर सवाल पूछे गए। इसके बाद तमिलनाडु की पेरंबेलुर लोकसभा सीट से निर्वाचित डीएमके सांसद अरुण नेहरू के सवाल का जवाब केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दिया। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य बाजार पर आधारित होता है। सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। विशेष परिस्थितियों में आरबीआई डॉलर की सप्लाई पर निगरानी रखती है।
राज्यसभा में 8वें दिन की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल के निधन पर शोक संदेश पढ़ा। देश के पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति, राज्यसभा सांसद और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल रहे स्वराज कौशल को पूरे सदन की तरफ से मौन श्रद्धांजलि दी गई। स्वराज कौशल को श्रद्धांजलि देने के बाद सभापति की अनुमति से अलग-अलग विभागों से जुड़ी रिपोर्ट्स सदन के पटल पर रखी गईं।
कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका ने लोकसभा में स्थगन नोटिस दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति (जो शिक्षा मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है) में ओड़िशा की बी.एड. की प्रथम वर्ष की अनुसूचित जाति की छात्रा के साथ हुए कथित 'यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल और धमकी' के मामले पर चर्चा की मांग की है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में चर्चा होगी और प्रधानमंत्री का संबोधन भी सुनने को मिलेगा, जिसे लेकर देश उत्साहित है। आज का युवा भी उसी तरह की ऊर्जा और प्रेरणा पाएगा जैसे स्वतंत्रता संग्राम के समय मिली थी। तब लड़ाई राजनीतिक आजादी की थी, आज सामाजिक और सांस्कृतिक आजादी की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी पार्टी दलगत राजनीति और कट्टरपंथी सोच से ऊपर उठकर इस अवसर पर अपने विचार रखें और राष्ट्रीय एकता व विकास की भावना को और मजबूत करें।
लोकसभा में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा होने वाली है। इस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने कहा, देखते हैं चर्चा कैसे चलती है, क्योंकि भाजपा-आरएसएस हर मुद्दे का इस्तेमाल अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए करती है। वह खुद को राष्ट्रवादी समझते हैं, दूसरों को नहीं। आजादी की लड़ाई में आरएसएस ने क्या भूमिका निभाई? क्या उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया? नहीं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा-आरएसएस की मंशा और मकसद पर सीधा सवाल उठाएगी।
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने नियम 267 (नियमों को निलंबित करने का नोटिस) के तहत एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने दिल्ली में 'सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल, राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते अपराध और बुलडोजर कार्रवाई से पैदा हुए मानवीय संकट' पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की।
आज संसद के शीतकालीन सत्र आठवां दिन है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के डेढ़ सौ साल पूरे होने पर लोकसभा में विशेष चर्चा होगी।