संसद के शीतकालीन सत्र में पहले दिन की कार्यवाही के दौरान कई अहम बिंदुओं पर संक्षिप्त चर्चा और सदन के पटल पर रखे गए प्रपत्रों के बाद पीठासीन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 11 बजे तक स्थगित कर दी।
हंगामे के बाद राज्यसभा सदस्यों ने सभापति की अनुमति से प्रदूषण, राज्यों में घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवासियों को डिटेंशन सेंटर में रखने की कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए। गुजरात से निर्वाचित भाजपा सांसद बाबूभाई देसाई ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी और इसके लिए किए जाने वाले उपायों की तरफ सदन का ध्यान आकर्षित किया। कुछ सांसदों ने आत्महत्या और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
12 राज्यों में जारी चुनाव आयोग के एसआईआर पर आज संसद में खूब हंगामा हुआ। शोरगुल के बीच सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सुचारू कार्यवाही चलने देने की अपील की। हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार राज्यों में हो रही बीएलओ की मौत के बावजूद इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है। तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी कहा कि सरकार की विश्वसनीयता कटघरे में है।
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, 'वे (विपक्ष) जितना हारते जा रहे हैं, उतना ही वो बौखलाते जा रहे हैं...आज बिल्कुल भी संसद नहीं चला है...पूरा देश यह देख रहा है। वे (विपक्ष) लोगों की नजरों से गिरते जा रहे हैं और एक के बाद एक चुनाव हारते जा रहे हैं।'
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा, 'विपक्ष कभी ड्रामा नहीं करता। विपक्ष ड्रामा करने वालों को रोकता है कि आपने घोषणा पत्र में जो बाते कहीं हैं, उनको पूरा करिए...चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वो सभी का वोट बनाए और यह काम हम कर रहे हैं हैं ताकि हमारे वोट ना कटे...हम अपनी वोट बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं...उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जो दिखाई दे रहा है, वो यह है कि भाजपा की रणनीति है कि जिन बूथों पर विपक्ष जीता है, उन बूथों पर सबसे ज्यादा वोट काटे जाएं।'
विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। दरअसल विपक्ष एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा पर अड़ा है। वहीं विपक्ष के हंगामे के बीच मणिपुर जीएसटी दूसरा संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा से पारित हो गया।
लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के बीच फिर से शुरू हो गई है। मणिपुर जीएसटी दूसरा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी की।
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि आपको बुरा नहीं लगेगा कि मुझे आपके पहले वाले के राज्यसभा के चेयरमैन के ऑफिस से पूरी तरह से अचानक जाने का ज़िक्र करना पड़ रहा है... मुझे दुख हुआ कि सदन को उन्हें विदाई देने का मौका नहीं मिला। फिर भी, पूरे विपक्ष की ओर से मैं उनके स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।' खरगे के बयान पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई, जिसे लेकर सदन में हंगामा हुआ।
स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है। हालांकि एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा अभी भी जारी है। हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'मणिपुर गुड्स एंड सर्विस टैक्स' (दूसरा संशोधन) विधेयक सदन में पेश किया।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, 'पिछला सत्र आप देख लीजिए जिस तरीके से SIR का एक मुद्दा लेकर पूरा सदन वॉशआउट कर दिया। उसी तरह का असार इस सत्र में भी देखने को मिल रहा है...सरकार पूरी तरह से तैयार हैं जिस पर वो चर्चा करना चाहते हैं हम जरूर हर विषय पर चर्चा करेंगे। लेकिन विपक्ष की जिम्मेदारी बनती है कि सदन की गरिमा बनाए रखे और सत्र को चलने दें।'
शीत सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के चलते सभापति ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही का बतौर सभापति संचालन कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने सभापति की तारीफ की और कहा कि 'मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि इस सदन में बैठे सभी सदस्य, उच्च सदन की गरिमा बनाए रखते हुए, हमेशा आपकी गरिमा का भी ध्यान रखेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वे मर्यादा बनाए रखेंगे। हमारे चेयरमैन एक साधारण परिवार, एक किसान परिवार से आते हैं, और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। राजनीतिक क्षेत्र इसका एक पहलू रहा है, लेकिन मुख्यधारा समाज सेवा रही है। वे समाज के लिए समर्पित रहे हैं। वे हम सभी के लिए एक प्रेरणा और मार्गदर्शक हैं जो समाज सेवा में रुचि रखते हैं।आपमें सभापति छात्र जीवन से ही नेतृत्व भाव रहा है और आज राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में यहां विराजमान हैं, ये हम सभी के लिए गर्व का विषय है। पीएम मोदी ने कहा कि उपराष्ट्रपति हमेशा ही लोक सेवा के काम से जुड़े रहे। आप एक अच्छे संगठनकर्ता रहे हैं। आपने हमेशा सभी को जोड़ने का प्रयास किया और नए विचारों और नई पीढ़ी को अवसर देने का प्रयास किया।'
पीएम मोदी ने कहा, 'मैंने झारखंड में आदिवासी समुदायों के साथ आपका रिश्ता देखा। जिस तरह से आप छोटे-छोटे गांवों में भी गए, झारखंड के मुख्यमंत्री जब भी मुझसे मिलते थे, तो गर्व से इन बातों का ज़िक्र करते थे। आपके पास हेलीकॉप्टर हो या न हो, आप जो भी गाड़ी होती थी, उसी में घूमते थे, रात में छोटी-छोटी जगहों पर रुकते थे। हम सब आपकी सेवा की भावना और गवर्नर के तौर पर आपने इसे नई ऊंचाइयों तक कैसे पहुंचाया, यह हम जानते हैं... मैंने एक बात महसूस की है कि लोग कभी-कभी अपने पद का बोझ महसूस करते हैं, और कभी-कभी वे प्रोटोकॉल से दब जाते हैं। लेकिन मैंने देखा है कि आपका प्रोटोकॉल से कोई लेना-देना नहीं है।'
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो गई है। कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, 'शीतकालीन सत्र में सबसे बड़ा वोट का मुद्दा है, जिस तरीके से वोटों की हेरा फेरी करके सरकार बनाई जाती है, उसपर लगातार चर्चा जारी रहेगी। उसपर चुनाव आयोग जवाबदेह नहीं है, जवाब उन्हें (सरकार) देना हैं लेकिन वो जवाब हमसे मांग रहे हैं, यह दुख की बात है।'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'मेरी एक चिंता रही है लंबे समय से सदन में जो पहली बार चुनकर आए हैं, या जो युवा हैं, वैसे सभी दलों के सभी सांसद बहुत परेशान हैं, उन्हें अपने सामर्थ्य का परिचय कराने का अवसर नहीं मिल रहा है और न ही अपने क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बताने का मौका नहीं मिल रहा है। कोई भी दल हो हमें किसी को भी हमारी नई पीढ़ी के नौजवान सांसदों को, उन्हें अवसर देना चाहिए। इसलिए मेरा आग्रह रहेगा कि हम इन चीजों को गंभीरता से लें, ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है, जिसे करना है करता रहे, यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। नारे के लिए पूरा देश पड़ा है, जहां हारे वहां बोल चुके और जहां हारने जा रहे हैं, वहां भी बोल लेना। यहां नारे नहीं नीति पर बात होनी चाहिए। हो सकता है कि राजनीति में नकारात्मकता कुछ काम आती होगी लेकिन राष्ट्र निर्माण की सोच भी होनी चाहिए। नकारात्मकता को मर्यादा में रखकर राष्ट्र निर्माण पर ध्यान दें।'
'हमारे देश के मीडिया के मित्र अगर समीक्षा करेंगे तो उन्हें ध्यान में आएगा कि पिछले कुछ समय से हमारे सदन का या तो चुनाव के वार्मअप के लिए तो कभी चुनाव की बौखलाहट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये सारा गुस्सा सदन में निकालते हैं और सदन को राज्य की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की परंपरा को कुछ दलों ने जन्म दिया है। अब उन्हें चिंतन करना चाहिए कि अब वे अपनी रणनीति बदलें, मैं टिप्स देने के लिए तैयार हूं। लेकिन कम से कम सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए। अपनी निराशा और पराजय की बलि सांसदों को मत बनाइए। मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि देश नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है, धन्यवाद।'
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'साथियों शीतकालीन सत्र सिर्फ एक एक प्रथा नहीं हैं, ये राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के जो प्रयास चल रहे हैं, उसमें ऊर्जा भरने का काम ये शीतकालीन सत्र करेगा, ये मेरा विश्वास है। भारत में लोकतंत्र को जिया है, लोकतंत्र के उमंग और उत्साह को समय समय पर ऐसे प्रकट किया है कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास और मजबूत होता रहता है। बीते दिनों बिहार चुनाव में भी मतदान में जो तेजी आई है, वो लोकतंत्र की ताकत है। माता-बहनों की भागीदारी बढ़ना एक नई आशा और विश्वास पैदा कर रहा है। लोकतंत्र की मजबूती और इसके भीतर अर्थतंत्र की मजबूती को दुनिया बहुत बारीकी से देख रही है। भारत ने सिद्ध कर दिया है डेमोक्रेसी कैन डिलीवर।'
'जिस गति से आज भारत की आर्थिक स्थिति नई ऊंचाईंयों को प्राप्त कर रही है। विकसित भारत की ओर जाने की दिशा में ये नया विश्वास जगाती है। साथियों ये सत्र संसद देश के लिए क्या सोचती है, क्या करना चाहती है और क्या कर रही है, ये दिखाती है। विपक्ष भी पराजय की निराशा से बाहर निकलकर सार्थक चर्चा करे। दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पराजय भी नहीं पचा पाते। लेकिन मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए और ये विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए। बहुत ही जिम्मेदारी के साथ देश की जनता की जो हमसे अपेक्षा है, उसे संभालते हुए आगे के बारे में सोचें। जो है उसे कैसे अच्छा कैसे करें और जो बुरा है, उसके बारे में सटीक टिप्पणी कैसे करें, ये मेहनत का काम है, लेकिन देश के लिए करना चाहिए।'
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह आज संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले संसद पहुंच गए हैं। संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है और 19 दिसंबर, 2025 तक चलेगा।
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी की बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में हो रही है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने संसद के शीतकालीन सत्र पर कहा, 'अगर ये संसद सबकी है तो विपक्ष लगातार पिछले बार हर रोज SIR पर चर्चा की मांग कर रहा था तो चर्चा के लिए ही तो संसद है तो चर्चा करे, हम चर्चा न करे तो क्या हम संसद में बैठने जाते हैं या बैठकर चर्चा करने जाते हैं।'
शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में विपक्ष के सभी वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'हम विपक्षी पार्टियों की बात सुनेंगे। यह संसद का शीतकालीन सत्र है, हम उम्मीद करते हैं कि सब लोग ठंडे दिमाग से काम करेंगे और गरमागरम बहस से बचेंगे।'
सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने के लिए 9 आर्थिक विधेयक सूचीबद्ध किए हैं, जिसमें इंश्योरेंस कानूनों में संशोधन का विधेयक शामिल है। संसद सदस्यों को भेजी गई बिलों की सूची के मुताबिक सरकार नई पीढ़ी के वित्तीय सुधारों के तहत इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश सीमा को 74 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने के लिए इंश्योरेंस कानून (संशोधन) बिल 2025 पेश करेगी। अन्य आर्थिक विधेयकों में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (दूसरा संशोधन) विधेयक 2025, नेशनल हाईवे (संशोधन) विधेयक, 2025, और कॉर्पोरेट लॉ (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं।
देश के 12 राज्यों में इन दिनों मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। कई राज्यों में विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की इस कवायद का विरोध कर रही है। वहीं हाल के दिनों में कई बीएलओ के काम के दबाव में आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं। इसे लेकर भी खूब हंगामा हो रहा है। ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र में भी एसआईआर और बीएलओ की आत्महत्या के मामले को लेकर हंगामा होने के आसार हैं।
सोमवार को पहले दिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पेश करेंगी। इस विधेयक के जरिए सरकार केंद्रीय उत्पाद शुल्क कानून 1944 में कुछ बदलाव करेगी। सरकार पान मसाला, गुटखा जैसे उत्पादों पर सेस लगाने के लिए सरकार स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा विधेयक 2025 भी पेश करेगी। सिगरेट पर सेस लगाने के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क कानून में संशोधन पेश किया जाएगा।