राज्यसभा की कार्यवाही 13 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई है।
संसद ने बुधवार को केरल का नाम बदलकर केरलम करने से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित किया। इससे पहले मंगलवार को लोकसभा ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी।
केरल विधानसभा ने 2024 में राज्य का नाम बदलकर केरलम करने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। जून 2024 में राज्य सरकार ने विधानसभा से पारित प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा था। इसके बाद राष्ट्रपति ने नाम परिवर्तन से जुड़े विधेयक को राज्य विधानसभा के विचार के लिए भेजा। राज्य विधानसभा ने बाद में विधेयक के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
विधेयक के उद्देश्य और कारणों के मुताबिक, इसका मकसद राज्य के आधिकारिक नाम में बदलाव करना है। इसके लिए संविधान के संबंधित प्रावधानों में जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे। संविधान की पहली अनुसूची में केरल के नाम को बदलकर केरलम किया जाएगा। यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किया जाएगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर कांग्रेस बुधवार सुबह 11 बजे तक चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहती है, तो सदन की कार्यवाही का समय बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि पार्टी चर्चा से क्यों पीछे हटी और क्यों डर गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कांग्रेस इतनी कमजोर हो जाएगी।
#WATCH | Delhi: When asked if the duration of the House session can be extended for the discussion, Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju says, "We are saying that if the Congress states even tomorrow morning at 11:00 AM that they are ready for the discussion, we will… pic.twitter.com/IYPNSd2luZ
— ANI (@ANI) August 12, 2026
संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (NCDC Act) में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का उद्देश्य देश के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और उसके विकास को बढ़ावा देना है। नए प्रावधानों के जरिए सहकारी संस्थाओं के विकास और उनकी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
लोकसभा ने खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। विधेयक पेश किए जाने के कुछ ही देर बाद विपक्षी सांसद भारी नारेबाजी और विरोध करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए।
इसके बाद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बिना चर्चा के ही विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्होंने विधायी कामकाज में हिस्सा नहीं लेने को लेकर विपक्षी सांसदों को फटकार भी लगाई।
हंगामे के बीच लोकसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें देश में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और विदेश से मिलने वाली रकम पर सरकार की निगरानी और सख्त करने का प्रस्ताव है।
विधेयक में एक खास प्रावधान यह है कि अगर किसी संगठन का एफसीआरए लाइसेंस खत्म हो जाता है, तो उसकी संपत्ति को संभालने और उसका निपटारा करने के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जाएगा।
प्रस्तावित कानून के तहत अगर किसी संगठन का एफसीआरए प्रमाणपत्र रद्द हो जाता है, संगठन खुद इसे वापस कर देता है या इसकी अवधि खत्म हो जाती है, तो विदेश से मिली रकम और उस रकम से बनाई गई पूरी संपत्ति सरकार की ओर से नियुक्त प्राधिकरण के नियंत्रण में चली जाएगी। इसके लिए पहले संगठन को अपनी बात रखने का मौका देना या अदालत से कोई फैसला लेना जरूरी नहीं होगा।
विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही को दिन में दूसरी बार स्थगित कर दिया गया है। सदन की कार्यवाही दोपहर तीन बजे तक स्थगित की गई है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि एफसीआरए विधेयक किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नहीं है। एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस के दौरान रिजिजू ने यह बात कही।
केंद्र सरकार की ओर से एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव रखे जाने के बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे वापस लेने की मांग की। वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष इस विधेयक को वापस लेने की मांग करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक का इस्तेमाल गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अल्पसंख्यक संगठनों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को खुश होना चाहिए कि विधेयक को जेपीसी के पास भेजा जा रहा है। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से खुद इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की मांग कर रहा था।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे निचले सदन में पेश किया।
राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है। यह विधेयक विचार और मंजूरी के लिए राज्यसभा में लाया गया है। इस विधेयक को लोकसभा ने 11 अगस्त को बिना चर्चा के पारित कर दिया था।
विपक्ष के लगातार विरोध के बीच लोकसभा ने दो विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए। इनमें केरल का नाम बदलने और सहकारी क्षेत्र से जुड़े विधेयक शामिल हैं। विपक्ष हाल में हुए छात्र प्रदर्शनों और अन्य मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर सदन में विरोध जारी है।
सदन में हंगामा जारी है। सदस्य स्थायी समितियों की रिपोर्ट पेश करने के लिए खड़े हुए। इस बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को झारखंड में जारी प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी करते हुए सुना गया। उन्होंने छात्रों की जिंदगी के साथ 'खिलवाड़' करने का आरोप लगाते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के इस्तीफे की मांग की।
राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है। भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सफाई दी। दिन की शुरुआत में सदन के पटल पर तय दस्तावेज रखे जाने के तुरंत बाद जॉन ब्रिटास ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुष्मिता देव ने उन्हें 'लुंगीवाला' कहकर निशाना बनाया।
वहीं, सुष्मिता देव ने कहा, अगर उन्हें लगता है कि मुझे उनसे मिलकर कुछ कहना चाहिए, तो मैं खुशी से ऐसा करूंगी। मुझे केरल, पूर्वोत्तर, कर्नाटक और वहां के लोगों से बहुत प्यार है। सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि संबंधित सदस्य आपस में मिलकर बात कर सकते हैं और इस 'गलतफहमी' को दूर कर सकते हैं।
विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, छात्रों के खिलाफ पेलेट गन, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि कीलों वाली लाठियों का भी इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा, सरकार ने छात्रों को न्याय दिलाने का वादा किया था, लेकिन अपना वादा पूरा नहीं किया। संसद में आकर जवाब देने वाला कौन था? आज 12 अगस्त है। वह कहां हैं? कीर्ति आजाद ने कहा, वह (केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह) संसद आते हैं, लेकिन जवाब देने के लिए सदन में नहीं आते।
विपक्ष के विरोध और हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
झारखंड से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने बुधवार को रांची में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हाल ही में हुए लाठीचार्ज के खिलाफ संसद में प्रदर्शन किया। इसी दौरान उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला।
भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी पर 'दोहरा रवैया' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं। लेकिन झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन सरकार की ओर से छात्रों के साथ किए गए 'बर्बर' व्यवहार पर चुप हैं।
इसके जवाब में विपक्षी सांसदों ने भी प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विपक्षी सांसदों ने 'अमित शाह जवाब दो' के नारे लगाए। विपक्ष का निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे। उन्होंने दिल्ली और दूसरे राज्यों में छात्रों के खिलाफ पुलिस की ओर से कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देशभर में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठी और पैलेट गन समेत कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब युवा अपने भविष्य के लिए आवाज उठाते हैं, तो उनके साथ किए गए व्यवहार के लिए जिम्मेदार कौन है। प्रियंका गांधी ने कहा, आपको क्या लगता है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? जब हजारों छात्र एक साथ आते हैं और उनकी एक मांग होती है, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं। उन पर पैलेट गन चलाई जाती हैं और बिहार में उनके खिलाफ एके-47 का इस्तेमाल किया जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे हंगामा या किसी तरह की बाधा न डालें और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें। हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं। जैसे हर क्षेत्र में अलग-अलग राय होती है, वैसे ही राजनीति में भी होती है। लेकिन देश चाहता है कि संसद की कार्यवाही चले।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अलग-अलग दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं। आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है। देशभर के युवा चाहते हैं कि उनके मुद्दों पर संसद में चर्चा हो। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। गृह मंत्री भी चर्चा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से सहमति बनाने और संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, मैं आपसे देश की जनता की इच्छा को समझने का अनुरोध करता हूं। इस तरह के नारे लगाकर सदन की गरिमा को कमजोर करना उचित नहीं है।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा ने मंगलवार को बिना बहस के केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने वाला विधेयक पारित कर दिया था। इस दौरान सरकार ने राज्य के कांग्रेस सांसदों पर निशाना साधा। सरकार ने कहा कि वे इस मुद्दे पर चर्चा में शामिल नहीं हुए।
केरल विधानसभा ने 2024 में एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के लिए कानून बनाने की मांग की गई थी। इसके बाद राष्ट्रपति ने इस विधेयक पर राज्य विधानसभा की राय जानने के लिए इसे वहां भेजा। बाद में राज्य विधानसभा ने विधेयक के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया। विधेयक पारित होने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' किया जाएगा।
आज खनिज और खनन (विकास एवं नियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी खनिज और खनन (विकास एवं नियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश करेंगे। इस विधेयक के जरिये खनिज और खनन (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन किया जाएगा।
संसद के मानसून सत्र 2026 की कार्यवाही के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट आज संसद के दोनों सदनों में पेश की जाएगी।
जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने के बाद उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। तीन सदस्यों वाली जांच समिति ने पूर्व जज पर लगाए गए आरोपों की जांच की थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 15 अगस्त 2025 को न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत इस समिति का गठन किया था। इससे पहले 146 सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रस्ताव का नोटिस दिया था।