सरकारी सूत्रों के अनुसार, FCRA बिल को जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने की संभावना है। बिल को लेकर सरकार की ओर से यह कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जस्टिस यशवंत वर्मा पर जांच रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में होगी पेश
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े नकदी बरामदगी मामले में जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की जाएगी। रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखे जाने की तैयारी है। यह मामला न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से कथित तौर पर नकदी बरामद होने के आरोपों से जुड़ा है। अब इस मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट लोकसभा में रखे जाने के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
5 साल में 3 गुना बढ़ी सियासी दलों और ट्रस्टों की आयकर देनदारी, 1,043 करोड़ पहुंची
राजनीतिक दलों, धार्मिक ट्रस्टों और अन्य संस्थानों की आयकर देनदारी पांच साल में करीब तीन गुना बढ़कर 1,043 करोड़ रुपये हो गई है। राज्यसभा में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आईटीआर-7 भरने वाली संस्थाओं की कर देनदारी आकलन वर्ष 2021-22 में 356 करोड़ रुपये थी, जो आकलन वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,043 करोड़ रुपये हो गई। इसी अवधि में देनदारी 2023 में 419 करोड़, 2024 में 816 करोड़ और 2025 में 781 करोड़ रुपये रही। सरकार ने क्षेत्र परीक्षण के लिए 10 और 20 रुपये के एक अरब पॉलीमर बैंक नोट जारी करने को भी मंजूरी दी है। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का जीएनपीए 31 मार्च 2024 के 3,39,541 करोड़ रुपये से घटकर 31 मार्च 2026 को 2,45,634 करोड़ रुपये रह गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दे दी है। अब दो साल से अधिक देरी से पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी।
ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 मंगलवार को राज्यसभा से भी पारित हो गया। इस विधेयक में देश के विभिन्न ट्रिब्यूनल में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन (NTC) गठित करने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले सोमवार को लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी INDIA ब्लॉक के दलों ने दोपहर बाद सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को सभापति की ओर से बोलने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्ष ने यह कदम उठाया।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ट्रिब्यूनल तेजी से न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में ट्रिब्यूनल के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद 2021 में ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम लाया गया।
मेघवाल ने कहा कि नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन की स्थापना इस विधेयक का मुख्य आधार है। आयोग में दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य होंगे। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। मंत्री के अनुसार, आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी, स्वतंत्र और योग्यता आधारित बनाने का प्रयास किया गया है।
इंडिया ब्लॉक के दलों ने मंगलवार को राज्यसभा से वॉकआउट किया। यह वॉकआउट दोपहर बाद की कार्यवाही में हुआ, जब न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति नहीं दी।
राज्यसभा में इससे पहले भी विपक्षी दल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पिछले महीने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल पर बयान देने की मांग कर रहे थे। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा भी विपक्ष उठा रहा है। इन मुद्दों को लेकर मंगलवार को दोपहर से पहले सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई।
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे। सभापति ने सांसदों से सिर्फ विधेयक पर बोलने को कहा। उन्होंने शुरुआत में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने 'एलओपी को बोलने दो' के नारे लगाए।
हंगामे के बीच विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। विपक्षी सांसदों ने सदन की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की। साथ ही, गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आने और राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर नारे लगाए गए।
न्यायाधिकरण सुधार विधेयक के समर्थन में सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि यह विधेयक आम नागरिक के न्याय के लिए इंतजार से जुड़ा है। उन्होंने कहा, यह सिर्फ न्यायाधिकरणों के लिए विधेयक नहीं है, बल्कि देश के लोगों के भरोसे से जुड़ा विधेयक है।
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पेश किया। उन्होंने इसे विचार और पारित करने के लिए सदन के सामने रखा।
विधेयक के समर्थन में बोलते हुए एआईएडीएमके सांसद आईएस इनबादुरई ने कावेरी नदी के मुद्दे को उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि केरल के वरिष्ठ नेताओं ने इस मौके पर अपनी बात नहीं रखी।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 पर चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने को मंजूरी दिए जाने के खिलाफ कांग्रेस के विरोध पर निशाना साधा।
लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद ने विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। विपक्षी सांसद दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही।
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। उपसभापति हरिवंश ने विपक्षी सांसदों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग को लेकर लगातार नारे लगाते रहे। इसी बीच, हरियाणा से भाजपा सांसद सुभाष बराला ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक के समर्थन में सदन में अपनी बात रखी।
दोपहर दो बजे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू कर दी गई है। दोनों सदनों में हंगामे के बीच चर्चा जारी है।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि झारखंड और लखनऊ के छात्रों के मुद्दे उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र जहां भी अपनी समस्याएं उठाना चाहते हैं, चाहे इलाहाबाद हो या लखनऊ, उन सभी मुद्दों को सदन में उठाया जाना चाहिए। छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज सरकारें संवेदनहीन हो गई हैं। उन्हें लोगों की समस्याओं की परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारों को अपनी इस संवेदनहीनता का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा, झारखंड के छात्रों से बातचीत की गई है। इसमें कांग्रेस, झामुमो और राजद के मंत्री शामिल थे। उनकी 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं। सिर्फ 2 फीसदी मांगें बाकी हैं, जो सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती हैं।
उन्होंने कहा, सीजीएल का मामला अदालत में है। इस पर कई लोग काम कर रहे हैं। इसे रद्द करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। अगर इसे रद्द कर दिया गया, तो यह कई युवाओं के साथ अन्याय होगा। मुख्यमंत्री (हेमंत सोरेन) ने भी कहा है कि हम इस मामले को देखेंगे, लेकिन इसके लिए कुछ समय चाहिए। छात्र इस बात पर सहमत हो गए थे। लेकिन भाजपा छात्रों को भड़का रही थी।
विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यसभा कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
झारखंड में 'विधानसभा घेराव' के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार को संसद में सियासी घमासान तेज हो गया। एनडीए सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए झारखंड की घटना पर जवाब देने की मांग की।
भाजपा सांसद उज्ज्वल निकम ने आरोप लगाया कि पिछले दो सप्ताह से संसद की कार्यवाही बाधित है और न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में जरूरी मुद्दों पर चर्चा हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बहस लोकतंत्र के लिए जरूरी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी जिस तरह से सदन की कार्यवाही को बाधित कर रही है, वह शर्मनाक है। उज्ज्वल निकम ने कहा कि झारखंड में छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर विपक्ष चर्चा नहीं कर रहा है और राहुल गांधी को इस मामले पर जवाब देना चाहिए।
भाजपा सांसद तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर 'दोहरा रवैया' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन से भी भाग रहे हैं और झारखंड में बच्चों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर भी चुप हैं। चुघ के मुताबिक देश राहुल गांधी की इस दोहरी नीति को देख रहा है और उन्हें संसद में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी झारखंड की घटना को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में छात्रों के साथ हिंसा हो रही है और इस मामले में राहुल गांधी से सवाल किया जाना चाहिए। रनौत ने दावा किया कि राहुल गांधी चर्चा से इनकार कर रहे हैं। पहले विपक्ष की ओर से कुछ अन्य विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा की मांग की गई, लेकिन चर्चा का अवसर मिलने पर भी उसे स्वीकार नहीं किया गया। रनौत ने विपक्ष पर देश और संसद के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद अरुण सिंह ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को घेरते हुए कहा कि झारखंड में कांग्रेस की सरकार है और वहां युवाओं की बेरहमी से पिटाई हुई है। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी झारखंड क्यों नहीं जाते। सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इस मुद्दे से बच रहे हैं और उन्हें मौके पर जाकर स्थिति देखनी चाहिए।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष की मानसिकता सदन को चलने देने की नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता।
राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई। सदन के सभापति ने सभी सदस्यों से संसद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी की छात्रों के मुद्दों को लेकर चिंता बिल्कुल साफ है। वह हमेशा छात्रों के साथ खड़े होना चाहते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि रांची में छात्रों पर हुआ हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि छात्रों की मांगें मानी जानी चाहिए और बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने के लिए भाजपा और आरएसएस जिस तरह इसमें शामिल हो रहे हैं, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि 20 जुलाई के बाद छात्रों के साथ जिस तरह मारपीट की गई और दिल्ली पुलिस ने जिस तरह कार्रवाई की, वह अमानवीय थी।
उन्होंने कहा, हम इस बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं कि 20 जुलाई के बाद छात्रों पर हमला किया गया और जिस तरह उन्हें पीटा गया, वह अमानवीय था। जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन से हम चाहते थे कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में आएं और बयान दें। हम चाहते थे कि प्रधानमंत्री और अमित शाह दोनों छात्रों पर हुए हमले के लिए माफी मांगें।
उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा, चढ़ावे की चोरी भी एक बहुत अहम मुद्दा है। हम चाहते हैं कि इस पर भी चर्चा हो। अब जब संसद के पास सिर्फ दो दिन बचे हैं, तो सरकार छात्रों पर हुए हमले पर चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन वह इसके साथ कोई शर्त नहीं जोड़ सकती।
मणिकम टैगोर ने कहा, सरकार ने संसद में कई विधेयकों को जबरदस्ती पारित कराया है। इससे संसद सिर्फ रबड़ की मुहर बनकर रह गई है। लेकिन इस तरह की जबरदस्ती वाली राजनीति को भारत की जनता स्वीकार नहीं करेगी।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, कांग्रेस-झामुमो सरकार के दौरान अन्याय और अत्याचार हुआ। युवा दो हफ्ते से सड़कों पर हैं और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें बदले में क्या दिया? उन्होंने युवाओं पर लाठियां बरसाईं। कंटीले तारों की बैरिकेडिंग की। यहां तक कि अंधेरे में भी झारखंड के युवाओं का पीछा किया और उन्हें पीटा। यह राहुल गांधी और हेमंत सोरेन के निर्देश पर हुआ।
अनुराग ठाकुर ने कहा, क्या राहुल गांधी ने दिल्ली से हेमंत सोरेन से कहा था कि झारखंड के युवाओं पर लाठीचार्ज करो और उन्हें न्याय से वंचित रखो? एक तरफ वह दिल्ली में युवाओं के लिए आवाज उठाने की कोशिश करते हैं। वहीं, झारखंड में वह युवाओं को न्याय दिलाने में नाकाम रहते हैं। उन्होंने आगे कहा, जब गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं, तो कांग्रेस और विपक्ष उनकी बात सुनने को तैयार क्यों नहीं हैं? उन्होंने बार-बार अपनी मांग बदली है। आखिर वे चाहते क्या हैं? वे कभी चर्चा नहीं चाहते थे। वे सिर्फ सुर्खियों में बने रहना चाहते थे।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजद सांसद संजय यादव ने कहा, पिछले 21 दिनों से आप (गृह मंत्री अमित शाह) कहां थे? आज संसद के मानसून सत्र का दूसरा आखिरी दिन है। फिर भी आप कह रहे हैं कि चर्चा के लिए कोई तैयारी नहीं है या इस मुद्दे का सामना करने की इच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा, हम हर दिन सदन में नारे लगाते हुए आपसे आने और चर्चा में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। सत्र के पहले दिन से ही चढ़ावे की कथित चोरी और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे उठाए जा रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि सरकार इन मुद्दों पर जवाब देगी और हम बार-बार इसकी मांग करते रहे। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हम जनता के मुद्दों और उनकी चिंताओं को उठाने के लिए संसद में आते हैं।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा, विपक्ष मानसून सत्र को चलने नहीं देना चाहता। सत्र शुरू होने के बाद से ही विपक्ष लगातार अपनी मांग बदल रहा है। पहले विपक्ष ने कहा कि नीट के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। हमारी पार्टी और एनडीए ने तय किया कि इस पर चर्चा होगी। इसके बाद एक नया कानून भी बनाया गया। इसके बाद विपक्ष ने फिर अपनी मांग बदल दी। जब गृह मंत्री ने इस मुद्दे पर पूरी तैयारी और तथ्यों के साथ सदन में जवाब देने की बात कही, तो राहुल गांधी सदन से चले गए।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, हम दोनों मुद्दों (राम मंदिर चढ़ावा और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई) पर बयान चाहते हैं। लेकिन गृह मंत्री बिल्कुल नहीं चाहते कि वह सदन में आएं और बयान दें। इसकी वजह यह है कि आरटीआई के जरिये मिली जानकारी से पता चला है कि कम से कम 10 बच्चे पैलेट गन से घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा, यह सरकार के पहले किए गए उस दावे के बिल्कुल उलट है, जिसमें कहा गया था कि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया था। इससे साफ है कि सरकार झूठ बोल रही थी। इसके अलावा, सरकार ने वादा किया था कि बच्चों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। लेकिन अब 15 साल की एक लड़की के खिलाफ 'जीरो एफआईआर' दर्ज की जा रही है। इसमें उसकी उम्र गलत तरीके से 25 साल लिखी गई है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, जब शिक्षा के मुद्दे पर दो दिन तक चर्चा हुई थी, तब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अपनी बातें रखी थीं। भाजपा सरकार की ओर से भी कई बयान दिए गए थे। इनमें मंत्री जितेंद्र सिंह का बयान भी शामिल था। तब अमित शाह कहां थे? उन्होंने उस चर्चा में हिस्सा क्यों नहीं लिया?
उन्होंने पूछा, जब असली बहस हुई और दो दिन का कार्यक्रम तय था, तब शिक्षा मंत्री ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया। हम 15 दिनों से सदन में उनकी मौजूदगी की मांग कर रहे थे। तब वह कहां थे?
गोगोई ने कहा, यह किसी राजा या महाराजा की अदालत नहीं है, जहां कोई चर्चा के दौरान गैरहाजिर रह सकता है। अब सत्र के बिल्कुल आखिर में वह अचानक सामने आते हैं और बहस करना चाहते हैं? यह उनका क्लासरूम या वर्कशॉप नहीं है। यह जिम्मेदारी वाला सदन है। उन्हें जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। पैलेट गन चलाने का आदेश कहां से आया था? क्या यह उनके कार्यालय से आया था या उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी? दोनों ही स्थिति में उन्हें जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए। इसके अलावा, 'चढ़ावे की चोरी' का अहम मुद्दा भी चर्चा के लिए उठाया जाना चाहिए।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, वे (विपक्ष) इतने दिनों से हंगामा कर रहे हैं और सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं। झारखंड में छात्रों पर लाठियां चलाई गईं और आंसू गैस छोड़ी गई। छात्र सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, फिर भी राहुल गांधी इस मुद्दे पर चुप हैं। यह राहुल गांधी का दोहरा रवैया है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से पहले ही मिल चुके हैं। संसद में पुलिस कार्रवाई को लेकर एनडीए सांसदों के प्रदर्शन के बीच प्रियंका गांधी ने यह बात कही।
संसद पहुंचने के बाद प्रियंका गांधी ने मीडिया से कहा, राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मिल चुके हैं।
एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने विपक्ष पर झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हाल की कथित पुलिस कार्रवाई पर बहस से बचने और बार-बार सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन में शामिल भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को संसद में रहना चाहिए और झारखंड में छात्रों के खिलाफ हुई कथित 'बर्बरता' पर सवालों का जवाब देना चाहिए। मनोज तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा, अमित शाह जी जवाब देंगे। राहुल गांधी, भागिए मत। राहुल गांधी, आप पर शर्म आती है। झारखंड में छात्रों के खिलाफ हुई बर्बरता पर जवाब दीजिए।
एनडीए सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान हाथों में पोस्टर भी लिए हुए थे। इन पोस्टरों में राहुल गांधी से जवाब देने की मांग की गई थी। साथ ही, झारखंड में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का मुद्दा भी उठाया गया। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, जिस तरह झारखंड में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पानी की बौछारें कीं, लेकिन आज वे इस मुद्दे पर चुप हैं? यहां हंगामा हो रहा है। आज अपनी चुप्पी के जरिए वे देश के सामने बेनकाब हो रहे हैं।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा, जब झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, तब राहुल गांधी चुप हैं। उनकी चुप्पी की वजह क्या है? हम उनसे जवाब देने की अपील करते हैं।
विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से प्रदर्शन रोकने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने एनडीए और विपक्ष दोनों पक्षों के सभी सांसदों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में बार-बार हंगामा और कार्यवाही रोकना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सदन में बहस और चर्चा होनी चाहिए। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में दो अहम विधेयक पेश करेंगे। इनमें केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। अमित शाह केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी विचार और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा।
यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में आगे संशोधन करने से जुड़ा है। इसमें अलग-अलग सूचियों से संशोधन, अगर कोई हो, तो उन्हें भी पेश किया जाएगा। चार अहम विधेयक सोमवार यानी 10 अगस्त को लोकसभा में हंगामे के बीच पेश किए गए थे। इनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।