लोकसभा की कार्रवाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित की गई है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने रक्षा मंत्री सेना के लिए काफी काम किया था। उन्होंने कहा था कि जब-जब सेना ने लड़ाई लड़ी, देश कभी नहीं हारा। जब देश को वार्ता की जरूरत पड़ी तो देश हारा। देश के हर नागरिक ने पहलगाम के बाद सेना और प्रधानमंत्री के साथ रहने का फैसला किया। सेना के पराक्रम को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीजफायर कराकर धता बता दिया। अगर यह एलान पीएम मोदी करते तो कोई दिक्कत नहीं थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 26 बार सीजफायर की बात कही है। सरकार की ओर से ट्रंप के दावे का जवाब नहीं दिया गया। सरकार ट्रंप के बयान की निंदा क्यों नहीं कर रही है? पहलगाम हमले के बाद से विपक्ष सरकार के साथ खड़ा था। यह युद्ध देश की सेना ने जीता है। 140 करोड़ लोगों ने जीता है। किसी को यह कहने का अधिकार नहीं है कि भारत का समझौता हमने कराया।
आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि पहलगाम में पर्यटन स्थल तक आतंकी कैसे पहुंचे? सरकार जवाब दे। सरकार यह भी बताए कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए तो संघर्ष विराम क्यों किया गया? पाकिस्तान को आईएमएफ ने ऋण दिया है, क्या सरकार ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है? क्या सरकार बताएगी कि आतंकी भारत में प्रवेश कैसे कर जाते हैं? पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी पहलगाम क्यों नहीं गए? कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया उन पर चिंता व्यक्त की जानी चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि हम अपने मुल्क के मुकद्दर का फैसला करते हैं। एक गोरा व्हाइट हाउस से संघर्ष विराम का एलान करेगा? ये बेहद अफसोस की बात है। मेरा सवाल है कि हम अमेरिका के दोस्त हैं। सरकार केवल दोस्ती निभा रही है। कई देशों ने अमेरिका को जवाब दिया है। हम अमेरिका को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। सरकार ने चीन से नहीं कहा कि पाकिस्तान को क्यों हथियार दिया? हमारे पास कई रक्षा हथियार नहीं हैं। सरकार को पाकिस्तान को एफटीएफ को ग्रे लिस्ट में लाना पड़ेगा। विदेशी नीति को राजनीति को मुद्दा मत बनाइए। क्या चीन ने हमसे संघर्ष विराम के लिए कहा था?
ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते है। आपने व्यापार बंद कर दिया है, तो आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच क्यों खेल रहे हैं? यह बेहद निंदनीय है। ऑपरेशन सिंदूर हमारी सेना ने जवाब दिया। जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की फिर भी पहलगाम हुआ?
एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पहलगाम हमले में हमारे 26 लोगों की जान चली गई, लेकिन पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेला जा रहा है।
कांग्रेस सांसद सप्तागिरि शंकर उलाका ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री विदेश दौर से बीच में वापस आए। हमें लगा था कि वे पहलगाम जाएंगे, लेकिन वे बिहार चले गए। यह निंदनीय है। प्रधानमंत्री सदन में नहीं हैं। यह दुख की बात है।
सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि आज सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होनी थी, लेकिन कांग्रेस के नेताओं में होड़ मची रही कि पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त और सबसे प्यारा कौन बनकर सामने आए। कल एक पूर्व गृह मंत्री ने जो इंटरव्यू दिया था, उसमें उन्होंने कहा था- अगर इसमें पाकिस्तान का हाथ नहीं है, तो आप कैसे कह सकते हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे? कभी वे इसे हिंदू आतंकवाद कहते हैं, कभी वे पाकिस्तान का बचाव करने आ जाते हैं। आज कांग्रेस पार्टी में पाकिस्तान के इतने बड़े पैरोकार हैं कि बाद में पाकिस्तान अपना बचाव करता है, और कांग्रेस के नेता उनका बचाव करने आ जाते हैं। पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी सरकार लश्कर-ए-राहुल के भाइयों को अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रही है।
सीपीआई एम के सांसद एस वेंकटेशन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु में चोल साम्राज्य के बारे में बात की, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात नहीं की। ऑपरेशन सिंदूर की समाप्ति की घोषणा ट्रंप ने की। अगर चोल साम्राज्य में ऐसा होता तो वे ऐसी घोषणा करने वाले की जान ही ले लेते।
सीपीआई एम के सांसद एस वेंकटेशन ने कहा कि विपक्ष अच्छी चर्चा चाहता है। हम पिछले दो महीने इसकी मांग कर रहे हैं। सरकार ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। आज रक्षा मंत्री ने पुरानी बातें कहीं। पहलगाम हमले पर कोई जानकारी नहीं दी गई। यह शर्मनाक है। पहलगाम में त्रिस्तरीय सुरक्षा नहीं थी। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रधानमंत्री के दिमाग में हमेशा चुनाव होते हैं, लेकिन हमारे मन में राष्ट्र होता है। पीएम मोदी संसद में आने से घबराते क्यों हैं? ट्रंप ने जैसे संघर्ष विराम की घोषणा की यह बेहद शर्मनाक था। आईएमएफ ने पाकिस्तान को ऋण दिया, यह गलत है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विदेश गए प्रतिनिधिमंडल किसी दल का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे। देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। सातों प्रतिनिधिमंडल में हर सांसद से दलगत राजनीति से उठकर देश की बात की। वैश्विक मंच पर किसी का साथ नहीं लेने गए थे। हम यह बताने गए थे कि आतंक के आकाओं हम को मुंह तोड़ जवाब देंगे। मुस्लिम देशों में हमने पाकिस्तान को अलग-थलग करने का काम किया। कांग्रेस ने इसमें आपत्तिजनक व्यवहार किया। कांग्रेस सरेंडर का नैरेटिव फैला रही है। कांग्रेस ने कई बार सरेंडर किया है। उन्होंने साल दर साल कांग्रेस के सरेंडर का विवरण दिया। भाजपा सांसद ने कहा कि कांग्रेस ने बहुत सरेंडर और ब्लंडर किए हैं।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस को मातृभूमि से भी दिक्कत है। कांग्रेस अब इस्लामाबाद नेशनल कांग्रेस बन गई है। 26/11 हमले के बाद कांग्रेस ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऑपरेशन सिंदूर में राहुल गांधी की सबसे ज्यादा रुचि यह जानने में थी कि भारत के कितने विमान मार गिराए गए? उन्होंने यह नहीं जानना चाहा कि पाकिस्तान में सेना कितना नुकसान किया है? आखिर वे ये जानकारी किससे साझा करना चाहते थे? ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी आदमपुर एयरबेस पर गए और सेना का मनोबल बढ़ाया। दुनिया ने एस 400 को देखा। हमने तय कर दिया है कि आतंकी घटना को एक्ट ऑफ वॉर माना जाएगा। सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया है। सिंधु नदी का पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। सिंधु डैम के गेट नहीं खुलेंगे।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत का दूसरा सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का श्रेय नरेंद्र मोदी को है। दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता पीएम मोदी हैं। भारत को झुका सके ऐसा कोई है। भारत ढाई मोर्चे पर लड़ रहा था। यह आधा मोर्चा राहुल आक्यूपाइड कांग्रेस है। इसी कांग्रेस ने आर्मी चीफ को सड़क का गुंडा कहा। राहुल गांधी को सेना से माफी मांगनी चाहिए। बाटला कांड में शहीद होने वाले को श्रद्धांजलि नहीं दी। कांग्रेस सेना के साथ नहीं, आतंकियों के लिए आंसू बहाती है। कांग्रेस ने देश की जनता का मनोबल तोड़ा है। इतिहास नरेंद्र मोदी को उनके धैर्य के लिए याद रखेगा और राहुल गांधी को धोखे के लिए धिक्कारेगा। दो बार तो वे विपक्ष के नेता बनने लायक भी नहीं रहे। वे भारत की सेना और पीएम मोदी का विरोध करते रहते हैं। वे पाकिस्तान के प्रोपैगैंडा के पोस्टर बॉय बन गए हैं।
एनसीपी सांसद सुनील तटकरे ने कहा कि विपक्ष में पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के प्रति जहर भरा हुआ है। पहले आतंकी हमलों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी, अब आतंकवादियों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाता है। अब हम स्वदेशी हथियार बना रहे हैं। यह सरकार का ऐतिहासिक कदम है। आज विपक्ष के जो लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, यह गलत है। सुप्रिया जी ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया और कहा कि भारत आत्मनिर्भर है। पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब देगा। चीन और अमेरिका के बयानों का यहां जिक्र करने की क्या जरूरत है? सीमा पार आतंकवाद का हम कड़ा जवाब देंगे। सेना आगे भी ऐसे ही काम करती रहेगी। मुझे ऐसी उम्मीद है। आज देश में विपक्ष झूठ फैला रहा है। देश की अखंडता को कमजोर किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर पूरे देश का गौरव बढ़ाने वाला कदम है। इस बारे में सोच रखते हुए सदन में चर्चा की जानी चाहिए।
कांग्रेस सांसद प्रणीति सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक तमाशा था। कोई नहीं बता पाया कि कितने आतंकी पकड़े गए। हर चुनाव के पहले आतंकी हमला होता है और उसके बाद कार्रवाई की जाती है। पीएम मोदी हमेशा चुनावी मोड में रहते हैं। मुझे सेना की बहादुरी पर संदेह नहीं है। ये सरकार जवानों को लड़ने भेजती थी। लेकिन दुश्मन को पहले ही हमले की जानकारी दे देती है। ऑपरेशन सिंदूर से भारत को क्या हासिल हुआ? मित्र देशों ने ऑपरेशन सिंदूर की निंदा नहीं की। पहलगाम के आतंकियों का कोई सुराग नहीं है। देश के सवालों का प्रधानमंत्री जवाब दें। बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका आज चीन से हाथ मिला रहे हैं। सरकार केवल प्रचार की मशीन बनकर रह गई है।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कांग्रेस ने विदेश नीति पर सवाल उठाया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऑपरेशन सिंदूर बेहद सफल रहा।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम मालदीव से अभी आए हैं। वहां पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया। सीमापार से आतंकवाद जारी है। ऑपरेशन सिंदूर नई पहल है। आतंकवादियों को प्रॉक्सी नहीं माना जाएगा। आतंकवाद को कड़ा जवाब दिया जाएगा। परमाणु हमले के नाम पर ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं करेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर टिप्पणी की गई, यह गलत है। सात प्रतिनिधिमंडलों ने देश का मान बढ़ाया। सभी ने अच्छा काम किया। उन्होंने पूरी दुनिया को बताया कि हम आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में हम बताने में सफल रहे कि देश में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता है।
विपक्ष के हंगामे पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब उनके स्पीकर बोल रहे थे, तो हम चुप थे। उनके असत्य को हम हलाहल समझकर पी रहे थे।अब उनमें सत्य सुनने की ताकत नहीं है। टोकाटोकी करना सबको आता है। अध्यक्ष को हमें संरक्षण देना चाहिए। बाद में हम भी अपने सदस्यों को समझा नहीं पाएंगे।
विदेश मंत्री ने कहा कि आईएमएफ ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान को ऋण की मंजूरी दी थी। पाकिस्तान 60 से 70 बार ऋण मांग चुका है। पाकिस्तान मोदी सरकार के दौरान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहा है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था। कुछ सदस्यों ने चीन के बारे में पूछा था। मैं बताना चाहता हूं कि चीन को बड़ा खतरा कहा जा रहा है, इस पर कांग्रेस का क्या विचार है। 2005 में चीन को मजबूत साझेदार घोषित किया गया था। मैं चीन यह बताने के लिए गया था कि आतंकवाद का कड़ा विरोध किया जाना चाहिए। मैं कोई ओलंपिक में नहीं गया था। डोकलाम की घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष ने सरकार और विदेश मंत्रालय से नहीं चीनी राजदूत से बात की। तब हमारी सेना चीनी सेना से लड़ रही थी।
विदेश मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने पूरी पढ़ाई में इतिहास नहीं पढ़ा है। मैं उनको बताना चाहूंगा कि पीओके 1950 में बनाया गया। चीन और पाकिस्तान ने 1966 में मिलकर सैन्य प्रशिक्षण शुरू हुआ। 1980 में जब राजीव गांधी चीन और पाकिस्तान गए थे तब चीन पाकिस्तान के बीच परमाणु समझौता चरम पर था। हमें चीन पाकिस्तान संबंध पर चेताया जा रहा है। जबकि यह 60 साल से चल रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज लोग कह रहे हैं कि देश 26/11 हमले के बाद से आतंकी हमलों से जूझ रहा है। सदन के उस बैठे लोगों से मैं कहूंगा कि मुंबई ट्रेन में विस्फोट हुआ था। इससे पहले तत्कालीन यूपीए सरकार ने पाकिस्तानी सरकार से बात की थी। जिन्होंने कभी कुछ नहीं किया, वे सवाल पूछ रहे हैं। यह शर्मनाक है।
विदेश मंत्री के बयान के बीच विपक्ष के हंगामे पर गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विदेश मंत्री पर नहीं पाकिस्तान पर भरोसा है। इसलिए वे उधर बैठे हैं। 20 साल तक वहीं बैठे रहेंगे।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 10 मई को हमें पता लगा कि पाकिस्तान सीजफायर के लिए तैयार है, तो हमने कहा कि ये निवेदन पाकिस्तान की ओर से किया जाएगा। इसे लेकर अमेरिका से कोई कॉल नहीं आई। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई बात नहीं हुई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कई सदस्यों ने पूछा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें क्या सहयोग मिला? मैं बताना चाहता हूं कि क्वाड ने एक सुर में भारत के आतंकवाद के खिलाफ रुख का समर्थन किया। पहलगाम हमले की निंदा की। चीन,रूस, ईरान, मिस्र ने भी पहलगाम हमले की निंदा की। मध्य एशिया ने भी सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। रूस ने इसे निंदनीय हमला कहा था। वैश्विक समुदाय ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की है। उन्होंने कहा कि तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण, टीआरएफ को आतंकी संगठन माना गया, यह भारत की सफल विदेश नीति का परिणाम है। जर्मन के विदेश मंत्री ने मुझसे कहा था कि हम भारत के साथ हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आज जहां एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर की बात है तो पूरे विश्व ने देखा है कि भारत ने पूरी जिम्मेदारी से काम किया। नौ मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने पीएम मोदी को फोन करके आतंकी हमले की जानकारी दी थी तो पीएम मोदी ने कहा था कि हम इसका मुंह तोड़ जवाब देंगे। हमारे सैनिकों ने आतंकी हमलों का करारा जवाब दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि 25 अप्रैल के बाद मेरे और पीएम मोदी के बीच 27 बार बात हुई। हमने ऑपरेशन सिंदूर की रूपरेखा तैयार की। संयुक्त राष्ट्र में शामिल 193 देशों में से केवल तीन देशों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्री ने कहा था कि हम अपने लोगों की रक्षा के लिए तत्पर हैं। हमने सटीक हमले किए। नौ स्थानों को निशाना बनाया। हमने आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। इसे यूएनएससी ने भी स्वीकार किया। बहावलपुर और मुरिदके को हमने निशाना बनाया। पाकिस्तान को हमने कड़ा संदेश दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई देशों से मुझे फोन आए। वो जानना चाहते थे कि हम क्या कर रहे हैं? हमने सबको बताया कि हम आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। हमने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच हम मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेंगे।
विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। परिषद ने कहा था कि आतंकी घटना को अंजाम देने वालों को उचित दंड दिया जाए। सुरक्षा परिषद की बात को अंतरराष्ट्रीय स्वीकार किया गया। ऑपरेशन सिंदूर के जरिये हमने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। जब 25 अप्रैल को सुरक्षा परिषद में पहलगाम हमले पर चर्चा चल रही थी तो टीआरएफ ने हमले की जिम्मेदारी ली। इसके बाद टीआरएफ को आतंकी संगठन माना गया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद हमने ठोस संदेश दिया। हमें पाकिस्तान को कड़ा जवाब देना था। 23 अप्रैल को हमने बैठक में सिंधु जल समझौता रोका। अटारी चेक पोस्ट को बंद किया गया था। पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया। पाकिस्तान के रक्षा प्रतिनिधि को पाकिस्तान के दूतावास से वापस भेजा गया। पहलगाम हमले के बाद हमने वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान के आतंकवाद के बारे में बताया। हम आतंकवाद को किसी प्रकार से स्वीकार नहीं करेंगे।
वाईएसआरसीपी अविनाश रेड्डी ने कहा कि पाकिस्तान के नेता दावा किया है कि उन्होंने आतंकियों की सहायता की है। भारत भी इसी बात को दोहराता रहा है। हमें आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को उत्तरदायी मानना पड़ेगा।
आरजेडी सांसद अभय सिन्हा ने कहा कि पहलगाम में जब आतंकी हमला हुआ तो वहां पुलिस-प्रशासन क्यों नहीं था? इसकी जांच कराई जाए। सरकार पहलगाम हमले और वहां सुरक्षा न होने पर जांच कराकर जवाब दे। पहलगाम हमले ने कश्मीर का पर्यटन उद्योग चौपट कर दिया। जैसे कुंभ मेले का प्रचार-प्रसार किया गया और भगदड़ में लोगों की जान गई। ऐसे ही सरकार ने कश्मीर के बारे में लोगों को गुमराह किया और वहां आतंकी हमले में लोग मारे गए। हमले के सूत्रधार आज भी जिंदा हैं। सरकार को पर्यटन स्थलों की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की टीम बनानी चाहिए।
पांच साल में 12 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में 30 लोग मारे गए: सरकार
सरकार ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हेलीकॉप्टरों से जुड़ी 12 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 30 लोग मारे गए हैं। जिनमें से सात उत्तराखंड में हुईं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा को बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर संचालन की अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया है। इसमें प्रवेश नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था में सुधार, स्लॉट आवंटन को विनियमित करना, पायलट प्रशिक्षण को बढ़ाना और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
एलजेपी (रामविलास) की सांसद शाम्भवी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने नया नॉर्मल स्थापित किया है। ऑपरेशन सिंदूर पर बोलने वाली मैं पहली महिला सांसद हूं। ऑपरेशन सिंदूर ने नए भारत की अवधारणा पेश की। पहलगाम में आतंकियों ने मानवता पर हमला किया। आतंकी हमले के बाद भारत मोमबत्तियां नहीं जलाता, आतंकियों की चिता जलाता है। कांग्रेस 1971 का श्रेय बिहार के नेता और तत्कालीन रक्षा मंत्री जगजीवन राम को नहीं देती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। विपक्ष के नेता और पाकिस्तान के नेता का सवाल एक ही क्यों। सरहद पर सेना लड़ रही होती है, तो सवाल नहीं पूछे जाते सम्मान किया जाता है। कांग्रेस ने कई बार विश्व के सामने भारत का सिर झुकाया है। कांग्रेस शासन में वैश्विक स्तर पर कई बार भारत को अपमान झेलना पड़ा। आज आतंकियों को पीएम मोदी ने जवाब दिया है। खरगे जी ऑपरेशन सिंदूर को छोटा-मोटा बताते हैं, यही कांग्रेस की विचारधारा है। जिन सनातन को मुगल नहीं खत्म कर पाए, उसे कांग्रेस की छोटी राजनीति क्या खत्म करेगी। जो धर्म की रक्षा करते हैं,धर्म भी उनकी रक्षा करता है। पीएम मोदी ने दुनिया को एक चुटकी सिंदूर की कीमत बताई है।
लोकसभा की कार्यवाही रात 12 बजे तक बढ़ाई गई। सदन ने इसे मंजूरी दी।
कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा ने कहा कि हमारी फौज ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया। विपक्ष ने सरकार से सर्वदलीय बैठक की मांग की, लेकिन बैठक नहीं बुलाई गई। पाकिस्तान को लेकर रणनीतिक भूल तब हुई जब विदेश मंत्री ने फोन करके पाकिस्तान को आतंकी ठिकानों पर हमला करने की जानकारी दी। विदेश मंत्री का काम दोस्त मुल्कों की संख्या बढ़ाना होता है। पाकिस्तान से टकराव की स्थिति में कितने देश हमारे साथ खड़े थे। एक देश का नाम बताएं जिसने पाकिस्तान की निंदा की।
भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सुरक्षा बलों की कभी सराहना नहीं की। जबकि दुनियाभर में सेना की तारीफ हो रही है। बैजयंत पांडा ने कहा कि शशि थरूर बहुत अच्छा बोलते हैं, लेकिन उनका पार्टी नेतृत्व उनको बोलने नहीं देता है। उनको देशहित में बोलने से कोई रोक नहीं सका।
भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने कहा कि हमने अमेरिकी दबाव में हमले नहीं रोके। हमने पाकिस्तान के घुटने टेकने के बाद हमले रोके। यह शर्म की बात है कि हमारे देश के कुछ लोग सेना और सरकार पर सवाल उठाते हैं।
लोकसभा में एनसीपी शरद के सांसद अमर शरदराव काले ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान गुर्जर और बकरवाल समुदाय ने हमें जरूरी जानकारियां दी थीं। मुझे जानना है कि क्या समुदाय ने अब हमें ऐसी जानकारी दी। 1971 में पाकिस्तान ने हमारे कई हवाई अड्डों पर अटैक किया था। 13 दिन तक युद्ध चला था। तब हमने में विजय की घोषणा की। 1971 के युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति निकसन ने संघर्ष विराम को दबाव बनाया था, लेकिन भारत ने इसे नकार दिया था। आज हम मोदी जी को वैश्विक नेता कहते हैं। देश के लोगों की उनसे कुछ अपेक्षा है। भारत पूछना चाहता है कि 2014 से अब तक मोदी ने विदेश दौरों के दौरान भेंट की तो हमारी विदेश नीति कितनी सफल हुई है। नौ बार वे अमेरिका गए हैं। उस अमेरिका के राष्ट्रपति पाकिस्तान के सेना प्रमुख को खाना खाने बुलाते हैं, इससे बड़े दुख की कोई बात नहीं है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। पाकिस्तान और चीन का संबंध लोहे सा मजबूत है, मैं विदेश मंत्री से पूछना चाहता हूं कि हमारी विदेशी नीति कैसे असफल हुई है।
शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सांवत ने कहा कि मैं ऑपरेशन सिंदूर के लिए भारत सेना के पराक्रम को नमन करता हूं। पहलगाम में 22 अप्रैल को एक भी जवान क्यों नहीं था? जांच यहां से शुरू होनी चाहिए। उस दिन सारे जवान कहां गए थे? वहां से पाकिस्तान कितना दूर है? पहलगाम से पहले भी कुछ आतंकी हमले हुए हैं। हाल ही में मुंबई हमले के आरोपियों को हाईकोर्ट को रिहा कर दिया। इससे साफ है कि हम आज तक आतंकी पकड़ नहीं पाए हैं।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस की दुष्प्रचार रणनीति है सच नहीं है। आप कहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में युद्ध बंद किया, यह सच नहीं है। भारत अपना निर्णय स्वयं करता है। भारत ऐसा करने में सक्षम है। कांग्रेस को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता दिखाई नहीं पड़ी। पूरी दुनिया और देश ने ऑपरेशन सिंदूर को सराहा। हमारे देश की विपक्षी पार्टी इस लड़ाई में सरकार के साथ नहीं रही। कांग्रेस दलगत राजनीति से ऊपर उठे।
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि भारत की सेना ने पाकिस्तान के पूरी रक्षा प्रणाली और 11 एयरबेस को ध्वस्त कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को पूरे देश ने देखा। मगर विपक्ष को यह नहीं नजर आई। यह देश का दुर्भाग्य है। प्रधानमंत्री जी बोलते नहीं हैं, वे सीधा कार्रवाई करते हैं और अपनी ताकत दिखाते हैं।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि हमारी सेना ने पाकिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमला नहीं किया। बाद में पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों, एयरबेस और नागरिक ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया। हमारे देश में निर्मित रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइलों को ध्वस्त कर दिया। हमने पाकिस्तान की मिसाइल हवा में फुलझड़ी की तरह ध्वस्त कर दीं। ऑपरेशन सिंदूर में हमारा कोई जहाज नहीं गिरा।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने समय, तारीख और कार्रवाई करने के लिए सेना को खुली छूट दी। सात मई को हमारी सेना ने आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। इसके बाद आतंकियों के आका रो रहे थे। हमने संदेश दिया कि हम आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस के गोगोई ने एक बार फिर भी पाकिस्तान की आलोचना नहीं की। कांग्रेस वोट की राजनीति करती है और पीएम मोदी देश के लिए राजनीति करते हैं।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यूपीए के किसी प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने का संकल्प नहीं लिया। ये प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प था। 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी विदेश यात्रा स्थगित करके देश वापस लौटे। 24 अप्रैल को पंचायतीराज दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मधुबनी से कहा था कि भारत इसका जवाब कल्पना से परे पाकिस्तान को देगा। उन्होंने पूरी दुनिया को संदेश दिया कि हम आतंकवाद के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
पंचायती राज मंत्री राजीव सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने आतंकवाद को पनपने दिया। यूपीए में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने का साहस नहीं था। आप खानापूर्ति करते और घड़ियाली आंसू बहाते थे। मुंबई की घटना के मुख्य सूत्रधार को आप नहीं ला सके। भाजपा उसको भारत में लाई। भारत ने पहलीबार आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का काम 2016 में शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने आतंकियों को घर में घुसकर मारने का संकल्प लिया और काम शुरू किया। उरी के बाद हमने सर्जिकल स्ट्राइक की। पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने एयर स्ट्राइक की। कांग्रेस मोदी जी को सिखा रही है। कांग्रेस ने आतंकवाद के खिलाफ कितनी लड़ाई लड़ी? कांग्रेस ने तो कभी कुछ किया ही नहीं। देश की एकता और अखंडता से मजाक मत करो।
पंचायती राज मंत्री राजीव सिंह ने कहा कि गौरव गोगोई ने एक भी काम की बात नहीं की। उन्होंने सेना की वीरता और साहस की एक बार भी प्रशंसा नहीं की। आपकी नजर में सैनिकों का कोई महत्व नहीं है। आतंकी घटना आज की नहीं है। देश में 2004 से 2014 तक आतंकवाद पनपा है। आतंक को पनाह दी गई। 2004 से 2014 तक आतंकी घटनाओं में 615 लोग मारे गए। 2006 लोग घायल हुए।
टीडीपी सांसद लवू श्री कृष्ण देवरायलु ने कहा कि पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर ने भारत ने हमला किया था। हमने दुश्मन को बताया हम जवाब देंगे। हमने ऐसा पहले भी देखा है। इसके बाद हमने अलग-अलग देशों में जाकर पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश किया। हमने तकनीक को बढ़ाया है और पाकिस्तान ने आतंक को बढ़ाया है।
रमाशंकर राजभर ने सपा की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कहा कि 'ये सरकार अगर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रख पाती तो आतंकी हमला होता ही नहीं। अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते रणनीतिक हैं, लेकिन सहयोगी की कोई भी बात बराबरी और पारदर्शिता के आधार पर ही हो। हमारी विदेश और घरेलू नीति ऐसी होनी चाहिए कि जवान की सीमा, गरीब का पेट और किसान का खेत सुरक्षित होना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने 100 आतंकवादियों को मारा, लेकिन ये नहीं बताया गया कि उन आतंकियों में वो चार आतंकी मारे गए या नहीं, जिन्होंने पहलगाम में निर्दोष लोगों को मारा।'
'क्या गृहमंत्री पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेंगे? क्या प्रधानमंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगे? भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स से ऐसा लगा कि हम पाकिस्तान पर कब्जा करके ही रहेंगे, लेकिन हम क्यों रुक गए। हम आगे क्यों नहीं बढ़े?'
गौरव गोगोई ने कहा कि 'हमले से कुछ ही दिन पहले गृह मंत्री ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की समीक्षा की थी, फिर ये हमला कैसे हुआ। इसकी जिम्मेदारी गृह मंत्री को लेनी होगी। आप एलजी के पीछे नहीं छिप सकते। देश के मुखिया हमले के वक्त सऊदी अरब में थे और वे वहां से आकर पहलगाम नहीं गए बल्कि चुनावी सभा को संबोधित करने बिहार गए।'
गौरव गोगोई ने एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि ' ऐसा कहा गया कि पहले 21 टारगेट चुने गए और फिर सिर्फ 9 पर हमला किया गया। सरकार ने ऐसा क्यों किया, टारगेट कम क्यों किया गया। जब देश पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, विपक्ष और पूरा देश पीएम मोदी के साथ था और अचानक 10 मई के दिन सूचना आई कि पाकिस्तान के साथ सीजफायर हो गया। ऐसा क्यों हुआ? अगर पाकिस्तान अपने घुटनों पर था तो आप क्यों रुके, आप किसके सामने झुके। अमेरिका के राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान में संघर्ष विराम कराया। भारत के 5-6 जेट गिरने की बात कही जा रही है। एक एक जहाज हजारों करोड़ का है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि कितने जेट गिरे। ब्रिक्स में जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले की निंदा हुई, उसमें भी पाकिस्तान की निंदा नहीं हुई। भारत के सहयोगी देशों ने भी क्यों भारत और पाकिस्तान को हाइफरनेट किया। दोनों को एक साथ क्यों लिया?'
गौरव गोगोई ने विपक्ष की तरफ से बोलते हुए कहा कि 'सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर पर जानकारी दी, लेकिन ये नहीं बताया कि पहलगाम में आतंकी कैसे घुसे? उनका क्या मकसद था? जिस जगह लोग खुशी मनाने गए, वहां वे कत्लेआम करने में कैसे सफल हुए? मुझे दुख है कि आज राजनाथ सिंह ने सैनिकों की बात तो की लेकिन उन्होंने जनता पर हमले को नकारा। हम मुश्किल के समय में एकजुट रहे और मुझे इस देश पर गर्व किया। देश ये भी जानना चाहता है कि जिन 26 परिवारों ने अपनों को खोया, उनके हत्यारों को ये सरकार पकड़ नहीं पाई? आतंकियों की मदद की गई लेकिन 100 दिन गुजर गए आप अभी तक किसी को पकड़ नहीं पाए। आपने कहा कि अनुच्छेद 370 चले जाने के बाद जम्मू कश्मीर सुरक्षित है। लेकिन बैसारण में लोगों ने देखा कि वो लोग कितने असहाय थे कि एंबुलेंस को उनके पास पहुंचने में एक घंटा लगा। सरकार को इस पर भी एक शब्द बोलना चाहिए था।'
राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऐसी ही एक और गंभीर चूक तत्कालीन सरकार से 2006 में हवाना में भी हुई थी, जब पाकिस्तान को आतंकवाद का पीड़ित माना गया और एक संयुक्त आतंकरोधी व्यवस्था बनाने पर सहमति हुई। यह सोचने वाली बात है कि जो देश आतंक को पैदा करता है, उसे पालता है, उस देश को ही आतंक से पीड़ित मान लेना, कितना बड़ा ब्लंडर था। आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई अब केवल सीमा पर नहीं, बल्कि वैचारिक मोर्चे पर भी लड़ी जा रही है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया। उसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इस समिति ने वैश्विक मंचों पर जाकर भारत की बात रखी और आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक समर्थन को मजबूत किया।'
'हमारी सरकार ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति को दुनिया के हर मंच पर एकदम स्पष्ट कर दिया है और हम उस पर कोई समझौता नहीं करेंगे। इसका परिणाम क्या हुआ? जब हमारे प्रधानमंत्री ब्रिक्स की बैठक में ब्राज़ील गए तो चीन की मौजूदगी में जो joint declaration आया उसमें जम्मू एवं कश्मीर में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई। यानि भारत की बात अंततः मानी गई। यह ब्रिक्स सम्मेलन के इतिहास में पहली बार हुआ जब जम्मू एवं कश्मीर में हुई किसी आतंकी घटना की खुल कर निंदा की गई। मैं इस सदन को याद दिलाना चाहता हूँ कि साल 2008 में मुंबई में इतनी बड़ी आतंकी घटना हुई मगर उस समय की सरकार ने प्रभावी कारवाई करना तो दूर, कई वैश्विक मंचों पर उस घटना की निंदा तक नहीं हुई। आप उस घटना के बाद हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दस्तावेज उठा कर देख लीजिये मुंबई आतंकी हमले का कहीं जिक्र भी नहीं है।'
'जब केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी तब जाकर कहीं हालात बदलने शुरू हुए। साल 2017 में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में पहली बार आतंकवाद से लश्कर और जैश जैसे आतंकवादी संगठनों को जोड़ा गया। यह परिस्थिति इसलिए बनी क्योंकि उसके ठीक एक साल पहले उरी की घटना के बाद भारत की सेनाओं ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक कीं। हमने दुनिया को बताया कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ हम सरहद के इस पार भी मारेंगे और ज़रूरत पड़ी तो आतंकियों के घर में घुस कर मारेंगे। यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में आया है। यह वही नीति है जो पहले की सरकारों को भी अपनानी चाहिए थी। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि आज का भारत अलग सोचता है और अलग तरीके से काम करता है।'
जब अटल जी प्रधानमंत्री थे तब पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए भारत की शर्त थी कि पाकिस्तान अपनी जमीन का प्रयोग भारत के खिलाफ आतंकवाद फ़ैलाने के लिए नहीं करेगा। जिसे पाकिस्तान ने भी माना था। लेकिन दुर्भाग्य से, 2009 में शर्म-अल-शेख में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक बड़ी भूल की — जब बातचीत से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को हटा दिया गया। यानि बातचीत जारी रखने के लिए पाकिस्तान द्वारा अपनी जमीन को आतंकवाद के लिए प्रयोग न करने की शर्त को ही हटा दिया गया। यह हमारी रणनीति को कमज़ोर करने वाला कदम था।
'ऑपरेशन सिंदूर हमारे सामर्थ्य का ही प्रतीक था जिसमें हमने दिखा दिया कि अगर कोई हमारे नागरिकों को मारेगा, तो भारत चुप नहीं बैठेगा। भारत की आत्मरक्षा के लिए हमारा राजनीतिक तंत्र और नेतृत्व बिना किसी दवाब के काम करेगा। हमारी मिसाइलें सीमाएं लाघेंगी और हमारे वीर सैनिक दुश्मन की कमर तोड़ेगें। आतंकवाद पाकिस्तान की सुनियोजित रणनीति है। हमारा पाकिस्तान के साथ कोई सीमा का संघर्ष नही है बल्कि यह सभ्यता बनाम बर्बरता का संघर्ष है। पाकिस्तान के हुक्मरान जानते हैं, कि उनके सैनिक युद्ध के मैदान में भारत से नहीं जीत सकते। इसलिए वे आतंक को पालते हैं, उसे प्रशिक्षण देते हैं और फिर दुनिया के सामने खुद को निर्दोष दिखाते हैं। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पूरी दुनिया को दिखा दिया है, कि हम आतंकवाद के इस गंदे खेल को अब जड़ से खत्म करने का संकल्प ले चुके हैं।'
राजनाथ सिंह ने कहा कि 'हमारे सभी नेताओँ ने ये चाहा है कि इस इलाके में शांति बनी रहे। पूरा विश्व जानता है कि पूर्व पीएम शांति का संदेश लेकर 1999 में लाहौर बस यात्रा की थी। वह शांति की प्रतीक थी। उन्होंने कहा था कि भारत पाकिस्तान के साथ स्थायी मित्रता चाहता हूं। ये हमारी शांति की पहल थी। ये हमारी हजारों साल पुरानी चेतना से निकली थी, लेकिन हमारे शांति के प्रयासों को हमारी उदारता समझ लिया गया। जब हम दोस्ती की राह पर थे तो वे साजिश रच रहे थे। जब मामला खुला तो हमारे सैनिकों ने करारा जवाब दिया। जब पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी दी तो अटल जी ने कहा कि परमाणु हमले से हमारा तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन पाकिस्तान कल का सूरज नहीं देख पाएगा।'
'2015 में पीएम मोदी ने लाहौर जाकर नवाज शरीफ से मुलाकात की तो भारत ने फिर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया क्योंकि हम शांति की राह पर चलना चाहते हैं। हमारी मूल प्रकृति बुद्ध की है युद्ध की नहीं। अब ऑपरेशन सिंदूर और ऐसे ही अन्य ऑपरेशन से शांति स्थापित करने का दूसरा रास्ता अपनाया है। अब हमने तय किया है कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद की भाषा नफरत है, संवाद की नहीं। गोलियों की आवाज में शांति की बात दब जाती है। पाकिस्तान की नीयत और नीति को लेकर कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए। पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी का आधार बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में पूरी दुनिया ने देखा का पाकिस्तान सरकार आतंकियों के लिए राजकीय अंतिम संस्कार दे रही है। मैं लोकतंत्र के मंदिर में खड़े होकर कह रहा हूं कि भारत को 1000 घाव देने का सपना देने वालों को नींद से जग जाना चाहिए।'
'हमारा इतिहास है कि हमने कभी भी किसी की एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया। शेर अगर मेंढकों को मारे तो उसका बहुत अच्छा संदेश नहीं जाता। हमारी सेना शेर है। पाकिस्तान जैसा देश जो आकार, सामर्थ्य, और ताकत में हमारे आसपास भी नहीं है तो उससे कैसा मुकाबला। उससे मुकाबला अपना स्तर कम करने जैसा है। हम अगर शांति की आशा के लिए हाथ बढ़ाना जानते हैं तो अशांति करने वालों के हाथ उखाड़ना भी जानते हैं। दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना पड़ता है। हमने भगवान कृष्ण से सीखा शिशुपाल की 100 गलतियां माफ की जा सकती हैं, लेकिन अब हमने सुदर्शन चक्र उठा लिया है। हमारी प्रवृत्ति और प्रकृति भगवान राम और कृष्ण से प्रेरित है। आज भारत पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, लेकिन अगर कोई धोखा दे तो उसकी कलाई भी मोड़ना जानता है।'
'कभी भी हमारे प्रतिपक्ष के नेता पूछते रहे हैं कि कितने विमान गिरे, लेकिन उन्होंने एक बार भी हमसे ये नहीं पूछा कि हमने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए। विपक्ष का प्रश्न ये होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकी ठिकानों को तबाह किया तो उसका उत्तर है हां। ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा? तो उसका उत्तर है हां। जब हमारे लक्ष्य बड़े हो तो छोटे मुद्दों पर ध्यान नहीं जाना चाहिए। छोटे मुद्दों पर ध्यान देने से बड़े मुद्दों से ध्यान हट सकता है। विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उचित सवाल नहीं पूछ पा रहे हैं तो मैं क्या कह सकता हूं।'
राजनाथ सिंह ने कहा कि 'एक लंबा समय हमने विपक्ष का काम किया तो हमने सरकारों से सवाल पूछे और विपक्ष की भूमिका को सकारात्मक तरीके से निभाया। विपक्ष में रहकर हमने कैसे सवाल पूछे, मैं यहां बताना चाहता हूं। 1962 में जब परिणाम आया तो हमने पूछा कि हमारी धरती पर किसी दूसरे देश का कब्जा कैसे हो गया? हमारे सैनिक बड़ी संख्या में हताहत कैसे हुए? हमने मशीनों की चिंता न करके देश के सैनिकों की चिंता की। जब हमने पाकिस्तान को सबक सिखाया तो उस वक्त हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने सदन में न सिर्फ सरकार की बल्कि पूरे नेतृत्व की तारीफ की थी। किसी भी परीक्षा के परिणाम में रिजल्ट मैटर करता है। हमें उस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि पढ़ाई के दौरान उसकी पेंसिल टूट गई थी या नहीं। आखिर में रिजल्ट मैटर करता है। हमने अपने लक्ष्यों को पूर्ण रूप से प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की।'
राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर अभी सिर्फ रोका गया है और अगर पाकिस्तान की तरफ से फिर कोई दुस्साहस किया गया तो यह ऑपरेशन फिर शुरू होगा। भारतीय सेना और वायुसेना के साथ ही नौसेना की समन्वय कार्रवाई ने पाकिस्तान को झुकने के लिए मजबूर कर दिया। 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया और भारतीय सेना से अपनी कार्रवाई रोकने की अपील की। हमारे सैनिकों का मनोबल औऱ समर्पण उसका दर्शन 140 करोड़ भारतीयों ने किया। मैंने खुद अपनी आंखों से देखा कि हमारे सैनिकों का मनोबल बुलंदी पर था। वे न केवल भारतीय सीमाओँ की रक्षा कर रहे हैं बल्कि हमारे स्वाभिमान की भी रक्षा कर रहे हैं।'
'अध्यक्ष महोदय, ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के समन्वय का शानदार उदाहरण था। हमारी सेनाओँ ने पाकिस्तान की हर हरकत का करारा जवाब दिया। भारतीय नौसेना ने भी उत्तरी सीमा पर अपनी तैनाती मजबूत कर दी। हम समुद्र से लेकर जमीन तक पाकिस्तान पर हमले में सक्षम हैं। ऑपरेशन सिंदूर से यह संदेश देना था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलेरेंस की नीति रखता है। ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा और सभी उद्देश्य पूरे होने के बाद ही इसे रोका गया। किसी भी दबाव में ऑपरेशन रोकने के दावे पूरी तरह से गलत हैं।'
'6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हुई। इसमें पीओके के मुजफ्फराबाद में सवाई नाला, कोटली में अब्बास कैंप, बहावलपुर, मुरीदके, सरजाल आदि में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें से 7 ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। पूरा ऑपरेशन सिर्फ 22 मिनट में समाप्त हो गया और हमने आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारा। सशस्त्र बल अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहे।'
'जिन मोही मारा, तिन मोही मारा की तर्ज पर आतंकियों को निशाना बनाया गया। 7-8 मई 2025 की रात हमारे सफल ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने उकसावे वाली कार्रवाई करते हुए भारतीय वायुसेना के ठिकानों पर हमला किया। हालांकि हमारी इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम ने उन हमलों को नाकाम कर दिया। एस-400, आकाश मिसाइलें बेहद प्रभावी साबित हुए। हमारी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी, न तो वे उकसावे वाले थी और न ही विस्तारवादी। पाकिस्तान के हमले 10 मई तक जारी रहे। उनके निशाने पर वायुसेना के अड्डे, थलसेना के डिपो, मिलिट्री कैंट थे। ये कहते हुए गौरव की अनुभूति हो रही है कि हमारे एयर डिफेंस ने हमले को पूरी तरह से नाकाम कर दिया और हमारे किसी भी अहम एसेट को कोई नुकसान नहीं हुआ है।'
संसद की कार्यवाही शुरू हो गई है और ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह ने बोलना शुरू कर दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि 'मैं पूरे देश की तरफ से सेना के जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। आज मैं ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कुछ अहम विषयों को रखने के लिए मैं यहां खड़ा हूं। सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। यह आतंकवाद के खिलाफ एक प्रभावी और निर्णायक प्रदर्शन था। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। इस हमले में हमारे 25 निर्दोष नागरिकों सहित एक नेपाली नागरिक की भी जान गई। उन लोगों की धर्म पूछकर जान ली गई। यह घटना भारत की सहनशक्ति की सीमा की भी परीक्षा थी।'
'पीएम मोदी ने सेनाओं को निर्णायक कार्रवाई की छूट दी। इसके बाद हमारे सैन्य नेतृत्व ने पूरी मैच्योरिटी से जवाब दिया। ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने से पहले हमारी सेनाओं ने हर विकल्प का पूरी गहराई से जवाब दिया। हमने उन विकल्पों को चुना, जिससे आतंकियों को नुकसान पहुंचे और आम नागरिकों को कोई नुकसान न होने पाए। हमारी सेनाओं ने 9 आतंकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया। इन हमलों में 100 से अधिक आतंकी, उनके हैंडलर, ट्रेनर मारे गए। इन्हीं आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना का खुला समर्थन प्राप्त है।'
विपक्ष के संसद में हंगामे पर नाराजगी जाहिर करते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से भाग रहा है। पहले समझौते पर मानने के बाद अब शर्त लगा रहा है। विपक्ष अब ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से पहले मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले पर भी चर्चा करने की गारंटी मांग रहा है।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी है। विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही अब दो बजे तक स्थगित कर दी गई है। इससे पहले भी दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित हो चुकी है।
मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर जारी हंगामे और एनडीए के विरोध प्रदर्शन पर सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि 'अगर एनडीए सांसदों ने मणिपुर के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया होता तो वो ज्यादा अच्छा होता। अच्छा था कि वे मणिपुर की महिलाओं के साथ खड़े होते। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी सेना के अधिकारियों के खिलाफ बयानबाजी की गई तो अच्छा होता कि एनडीए के सांसद उनके साथ खड़े होते।'
राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के चलते दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई है।
स्थगन के बाद संसद की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है। लोकसभा में प्रश्नकाल चल रहा है। हालांकि इस बीच विपक्षी सांसद ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग कर रहे हैं और हंगामा जारी है।
आज लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होनी है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस की तरफ से शशि थरूर बोलेंगे या नहीं? दरअसल शशि थरूर ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश दौरों पर गए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे थे और उन्होंने अपने कई बयानों में सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया था। इसे लेकर उन्हें अपनी ही पार्टी में आलोचना भी झेलनी पड़ी। यही वजह रही कि आज जैसे ही शशि थरूर संसद भवन परिसर पहुंचे तो मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनकी प्रतिक्रिया मांगी। शशि थरूर को भी इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा था तो उन्होंने कह दिया कि आज उनका मौनव्रत है और मुस्कुराकर वहां से निकल गए।
राज्यसभा की कार्यवाही भी हंगामे के चलते दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई है। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सवाल उठाए कि विपक्ष प्रश्नकाल क्यों नहीं चलाना चाहता। बिरला ने कहा कि आपने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की और आज उस पर चर्चा होनी है फिर हंगामा क्यों किया जा रहा है? लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी सांसदों से सदन की गरिमा बनाकर रखने की अपील की। हालांकि जब इसके बाद भी विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए तो लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया।
सपा सांसद डिंपल यादव पर एआईआईए अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की अपमानजनक टिप्पणी पर हंगामा हो गया है। इस मुद्दे पर एनडीए सांसदों ने आज संसद परिसर में सपा मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा, 'मैं हैरान हूं कि वह (अखिलेश यादव) चुप क्यों हैं, जिनकी पत्नी के खिलाफ यह टिप्पणी की गई है। तुष्टिकरण की राजनीति की हदें पार हो गई हैं... मौलाना के इरादे साफ़ हैं।'
संसद की कार्यवाही शुरू हो गई है। लोकसभा में प्रश्नकाल चल रहा है, लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी है।
संसद परिसर में विपक्ष बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी दलों के कई नेता इस प्रदर्शन में शामिल है।
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी भी संसद पहुंच गई हैं। आज लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होनी है।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज का विपक्ष पर हमला
संसद में बहस से पहले भाजपा लोकसभा सांसद ने एआईआईए के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की तरफ से सपा सांसद डिंपल यादव पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सवाल खड़े किया है। उन्होंने कहा कि पूरे विपक्ष ने चुप्पी क्यों साध रखी है? खुद डिंपल यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी और उनके पति अखिलेश यादव ने अब तक इस बयान की निंदा क्यों नहीं की? मौनं स्वीकृति लक्षणम् – चुप रहना ही स्वीकृति माना जाता है। उन्होंने पूछा कि क्या तुष्टिकरण की राजनीति महिला सांसद के गरिमा और सम्मान से भी अधिक अहम हो गई है?
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की विशेष चर्चा के लिए लोकसभा पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के गठबंधन- INDIA ब्लॉक के सांसदों की बैठक।
लोकसभा में चर्चा से पहले रिजिजू ने खींची 'लक्ष्मण रेखा'
आज लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, यह भारत के लोगों की इच्छा थी। प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने का फैसला किया। आज, लोकसभा में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होगी।
पाकिस्तान की भाषा न बोले विपक्ष
उन्होंने कहा, 'मैं विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस से अनुरोध करता हूं कि वे भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कुछ भी न करें और पाकिस्तान की भाषा न बोलें। हमें सावधान रहना होगा... हमें भारतीय सशस्त्र बलों की गरिमा बनाए रखनी होगी। कांग्रेस और विपक्ष को ऐसा कुछ भी नहीं बोलना चाहिए जिससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचे... वे भारत के खिलाफ जो कुछ भी बोलते हैं, उसका इस्तेमाल पाकिस्तानियों और भारत के बाहरी दुश्मनों द्वारा किया जाता है।'
आतंकी वारदातों पर UP के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पूछे तीखे सवाल
आज लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से पहले समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा, सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा कि दो अलग-अलग मुद्दे हैं। सबसे पहले, हम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहादुरी और पराक्रम दिखाने वाले सशस्त्र बलों को बधाई देते हैं। अगर उन्हें मौका मिलता, तो वे पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) वापस भी ले सकते थे।
बकौल अखिलेश, 'पहलगाम आतंकी हमले से पहले, एक और घटना हुई थी जिसके बारे में जनता को अभी तक जानकारी नहीं दी गई है। सवाल यह है कि भाजपा सरकार में बार-बार आतंकवादी वारदात क्यों हो रही है? सरकार को जवाब देना चाहिए कि आतंकवादी कहां गए? पहलगाम पर कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम के कथित बयान पर अखिलेश ने कहा, कांग्रेस अतीत में सत्तारूढ़ रही है; ऐसे में उनके पास जानकारी के कुछ स्रोत हो सकते हैं।
पहलगाम हमले पर भाजपा सांसद ने चिदंबरम को नसीहत दी
कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कथित तौर पर रहा है कि पहलगाम में हमला करने वाले आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे, इस बात के कोई सबूत नहीं हैं। इस पर भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, पूरी दुनिया जानती है कि वे कहां से आए थे। भारत से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया भर में गए और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान की पोल खोली। चिदंबरम को ऐसे बयान देने से पहले सोचना चाहिए। जब पाकिस्तान दुनिया को सबूत दे रहा है तो हमें सबूत की क्या जरूरत है।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ NDA सांसदों का प्रदर्शन
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सांसदों संसद के मानसून सत्र के छठे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। सांसद एक टेलीविजन बहस के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के खिलाफ ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईआईए) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्या चिदंबरम के बयान पर घिरी कांग्रेस?
आज लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, हम अपनी पार्टी के वक्ताओं की सूची स्पीकर के कार्यालय में देंगे। आज सरकार को सच बताना ही होगा। पार्टी के वरिष्ठ सांसद पी चिदंबरम के बयान- 'पहलगाम के आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे, इसका कोई सबूत नहीं हैं', इस पर गोगोई ने कहा, उन्हें इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। बकौल गोगोई, 'कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। मीडिया में पूर्व उपराष्ट्रपति के बारे में कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पर सरकार के रुख पर विचार-विमर्श करने की जरूरत है।
चार आतंकवादी अभी भी फरार हैं: शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पहलगाम आतंकी हमले और भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में होने वाली विस्तृत चर्चा से पहले कहा, सरकार ने आतंकवादी चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाए। इसके अलावा भी कई कदम उठाए गए। इन सबके बावजूद, पहलगाम हमले के जिम्मेदार चारों आतंकवादी अभी भी फरार हैं। उन्होंने पहलगाम हमले की वजह बनी खुफिया विफलता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि हमले से पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के भाषण के बाद कोई अलर्ट क्यों नहीं जारी किया गया।
लोकसभा में आज जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इसी साल अप्रैल में हुए आतंकी हमले और इसके बाद मई में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होने का समय तय किया गया है। 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल में सरकार से सवाल पूछे जाएंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम पर चर्चा की शुरुआत करेंगे।