एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा को अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों की ओर से धन की हेराफेरी को रोकने के लिए 'सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' को स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से 7.6 लाख से अधिक साइबर अपराध मामलों में 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में बताया कि इस वर्ष 16 जुलाई तक सहारा समूह की सहकारी समितियों के 4.2 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को 362.91 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। शाह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि यह वितरण सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से सुगम बनाया गया है, जिसे 29 मार्च, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थापित किया गया था। वर्तमान में, आधार से जुड़े बैंक खाते के माध्यम से सत्यापित दावों के खिलाफ प्रत्येक वास्तविक जमाकर्ता को केवल 10,000 रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करने वाले संस्थानों की कार्य प्रणाली विश्वसनीय नहीं है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थानों ने बहुत कम उदाहरणों का इस्तेमाल कर भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन किया है। वैष्णव के अनुसार, मूल्यांकन से साफ पता चलता है कि ऐसे संस्थानों को भारत के लोकतंत्र की समझ नहीं है। ऐसे संस्थानों की कार्य प्रणाली भरोसा करने लायक नहीं है। आपको बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत को 180 देशों में 159वें स्थान पर रखा है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत सरकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने बजट को जुमलों का संग्रह करार दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सदस्यों नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को भले ही इस समयबजट से एक बड़ा हिस्सा मिला है लेकिन, बदलाव में अधिक समय नहीं लगेगा। संसद की कार्यवाही के दौरान कुमारी सैलजा ने सवाल पूछा कि यह बजट किसके लिए है? उन्होंने कहा, ‘यह बजट सिर्फ दो राज्यों के लिए था या पूरे देश पर के बारे में भी कुछ सोचा गया था? ऐसा लगता है कि बजट में भाजपा शासित दो राज्यो के बारे में ही सोचा गया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, ‘नीति आयोग संघीय ढांचे की महत्वपूर्ण संस्था है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी पार्टियां नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करने के बारे में सोच रही हैं। विपक्षी पार्टियां यह बताना चाहती हैं कि उनकी व्यक्तिगत सोच और राजनीति देश से ऊपर है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया के सदस्यों को बेबुनियाद कारणों से बहिष्कार करने की आदत पड़ गई है। वे आरोप लगा रहे हैं कि कुछ राज्यों को बजट में पैसा नहीं मिला है। मुझे लगता है कि या तो उन्हें बजट पढ़ना नहीं आता या फिर वे इसे पढ़ना नहीं चाहते।’
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल के 100 दिनों के कामों और आवास योजना के लिए धनराशि कब और कितनी दी? उन्होंने कहा, ‘अगर भाजपा 10 पैसे का भी प्रमाण देती है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैं हजारों बार कह चुका हूं कि भाजपा को एक श्वेत पत्र में इस बात की जानकारी देनी चाहिए कि उन्होंने बीते तीन वित्त वर्षों में बंगाल के लिए क्या 10 पैसा भी दिया।’
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि अगर बजट में कोई भेदभाव नहीं है तो एक बार फिर से शब्दकोष में जाकर 'भेदभाव' शब्द का अर्थ जांचना होगा। उन्होंने कहा, ‘बजट में स्पष्ट रूप से भेदभाव नजर आ रहा है। यह एक ऐसा बजट है जो मौजूदा एनडीए सरकार की मजबूरियों का संकेत है।’
किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के तत्वावधान में देशभर से 12 किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिला। बैठक में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला, धर्मवीर गांधी, डॉ. अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जय प्रकाश भी मौजूद थे। किसान नेताओं से मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, 'हमने अपने घोषणापत्र में कानूनी गारंटी के साथ MSP का जिक्र किया है। हमने आकलन किया है और इसे लागू किया जा सकता है। हमने अभी एक बैठक की, जिसमें तय किया गया कि हम INDIA गठबंधन के दूसरे नेताओं से बात करेंगे और सरकार पर दबाव डालेंगे कि देश के किसानों को MSP की कानूनी गारंटी दी जाए।'
गुजरात में चांदीपुरा वायरस से अब तक 37 बच्चों की मौत होने का दावा करते हुए कांग्रेस की सांसद गनीबेन नगाजी ठाकोर ने केंद्र सरकार से इस विषाणु के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की मांग की और कहा कि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो दोबारा कोरोना महामारी जैसी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है।
ठाकोर ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘मेरे संसदीय क्षेत्र बनासकांठा समेत पूरे गुजरात में इस समय चांदीपुरा वायरस का संक्रमण खतरनाक रूप लेता जा रहा है। गुजरात के अलग-अलग जिलों में अब तक 84 मामले इस वायरस के संक्रमण के आ चुके हैं। इससे अब तक 37 बच्चों की जान जा चुकी है।’ उन्होंने कहा कि आंकड़ों को देखें तो ऐसा लगता है कि इस वायरस से संक्रमित 100 में से केवल 15 प्रतिशत मरीजों को ही बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत और बनासकांठा समेत अधिकतर जिलों में इस वायरस का प्रकोप देखने को मिल रहा है जो दिन प्रतिदिन घातक हो
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा 'भाजपा सरकार का बजट किसानों, गरीबों और खासकर मध्यम वर्ग के खिलाफ है। केंद्र सरकार राज्यों के बीच भेदभाव कर रही है, जो कि संघीय ढांचे के भी खिलाफ है। I.N.D.I.A गठबंधन हर अन्याय के खिलाफ संघर्ष करेगा और लोगों की आवाज उठाता रहेगा। आज विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने संसद परिसर में अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन किया।'
लोकसभा में तमिलनाडु के सलेम से डीएमके सांसद टी.एम. सेल्वागणपति ने सलेम के पास रेलवे पटरियों पर बाड़ लगाने पर चिंता जताई है। इससे पटरियों के किनारे रहने वाले हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा, 'संपत्ति की बाड़ लगाने के नाम पर, वे रेलवे पटरियों के किनारे रहने वाले लोगों की आजीविका को बाड़ लगा रहे हैं।' रेलवे पटरियों पर बाड़ लगाने का काम मुख्य रूप से रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है और इससे जानवरों और वाहनों के प्रवेश को भी रोका जाता है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, 'इस बजट से दिखाई दे रहा है कि सरकार कितनी कमजोर है। हम सब लोग किसान के लिए उसका समर्थन मूल्य मांग रहे थे। हमलोग किसान के लिए पैकेज मांगते हैं, गरीब के लिए पैकेज मांगते हैं लेकिन इस सरकार ने किसको पैकेज दिया, जो सरकार चलवा रहे हैं। सरकार चलाने के लिए पैकेज मिल रहा है। बिहार और आंध्र प्रदेश को पैकेज मिला हम ये नहीं कहते कि पैकेज नहीं मिलना चाहिए। विकास के लिए पैसा मिले लेकिन दूसरे प्रदेशों के साथ भी भेदभाव ना हो, जो एक्सप्रेसवे आप बिहार को दे रेह हैं उसे अगर यूपी से जोड़ देंगे तो देश का ज्यादा भला होगा। उत्तर प्रदेश के साथ भेदभाव हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं। पैकेज INDIA गठबंधन वाले भी तैयार रखे हैं अगर पैकेज से ही सरकार बननी है तो।'
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में कहा, 'हमने उन्हें (किसान नेताओं को) यहां मिलने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन वे उन्हें यहां (संसद में) नहीं आने दे रहे हैं। क्योंकि वे किसान हैं, शायद यही कारण है कि वे उन्हें अंदर नहीं आने दे रहे हैं।' हालांकि बाद में किसान नेताओं का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलने संसद भवन स्थित उनके कार्यालय पहुंचा।
RJD सांसद मीसा भारती ने कहा, 'बिहार को मिला क्या है? कहीं न कहीं उन्हें एक झुनझुना और लॉलीपॉप देकर पीएम के सर पर लटक रही तलवार को टाला गया है। इसमें मध्यम वर्ग के लिए कुछ नहीं है। युवाओं के लिए कुछ नहीं है रोजगार पर कोई बात नहीं हुई है। बहुत सी योजनाएं जिसकी इन्होंने घोषणा की है वो पहले से चल रही है, बस उसे नए तरीके से पैक कर प्रस्तुत किया गया है। बिहार में चुनाव है इसलिए हमें और जनता को लगता है कि ये चुनावी घोषणाएं साबित होंगी।'
AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा, 'ये कमाल का बजट इजात किया गया है जिसमें लगभग इस देश का हर वर्ग निराश हुआ है मात्र 2 व्यक्तियों को छोड़ कर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू। मैं पूछना चाहता हूं कि वो राज्य जिन्होंने अभूतपूर्व समर्थन भाजपा को दिया और अपने राज्य की लगभग सारी सीट दे दी उन राज्यों को इस बजट में क्या मिला? जिन राज्यों ने भाजपा को इतना समर्थन नहीं दिया, या जिन राज्यों के समर्थन से सरकार मुश्किल से चल पा रही है उन पर सब कुछ लुटा दिया गया। इससे सार मिलता है कि जो राज्य भाजपा को कम वोट देता है उसे ज्यादा दिया जाएगा तो आगे के लिए सीख ले लीजिए।'
विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। वहीं लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय बजट के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'यह अन्याय है। हम इसका विरोध करेंगे।' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'यह अन्याय है। हम इसका विरोध करेंगे।' वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'यह बजट भारत सरकार के बजट जैसा नहीं लगता। इस बजट में संघीय ढांचे को तोड़ा गया है। विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य बजट से गायब हैं। यह सरकारी बजट नहीं बल्कि 'सरकार बचाओ बजट' है। यह सिर्फ सबको खुश करने के लिए है।'
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, 'समर्थन मूल्य किसान को ना देकर गठबंधन के साथियों को दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश को बड़े सपने दिखाए थे, क्या मिला उत्तर प्रदेश को? डबल इंजन की सरकार है तो डबल लाभ मिलना चाहिए था, दिल्ली का लाभ लखनऊ का लाभ लेकिन लगता है कि दिल्ली अब लखनऊ की ओर नहीं देख रही है या लखनऊ वालों ने दिल्ली वालों को नाराज कर दिया और इसका परिणाम बजट में दिखाई दे रहा है। विकास बिहार जा रहा है तो उत्तर प्रदेश को क्यों छोड़ रहे हैं? बाढ़ अगर बिहार की रोकनी है तो नेपाल और उत्तर प्रदेश की बाढ़ रोके बिना आप बिहार की बाढ़ कैसे रोकेंगे? आप पहले उत्तर प्रदेश और नेपाल की बाढ़ रोके तो बिहार की बाढ़ अपने आप रुक जाएगी।'
कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा, 'कल बैठक में सभी भारतीय ब्लॉक के नेता मौजूद थे। सभी की एक राय है कि केंद्रीय बजट 2024 में भेदभाव का विरोध किया जाए, इसलिए आज सुबह 10:30 बजे हम संसद के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। हम सदन के अंदर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे। हम विपक्षी दल द्वारा शासित राज्यों के साथ भेदभाव को उजागर करेंगे। हम बजट प्रस्तावों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।'
केंद्रीय बजट पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'बजट वाकई अच्छा है और सभी ने इसका स्वागत किया है। विपक्ष यह कहकर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ दो राज्यों का बजट है। बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 11 लाख 11 हजार 111 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का आवंटन 1-2 राज्यों के लिए नहीं है, यह पूरे देश के लिए है। बुनियादी ढांचे से लेकर चिकित्सा, मध्यम वर्ग के लोगों को छूट देना, किसानों को दी जाने वाली सुविधाएं या आदिवासियों को अलग पैकेज देना, यह सब देश के लिए किया गया है। यह कहना गलत है कि पूरा केंद्रीय बजट एक या दो राज्यों के लिए है, अगर बजट में बिहार को कुछ लाभ मिल रहा है, तो इसमें क्या समस्या है? यह पूरे देश का बजट है, जो सभी के लिए सामूहिक रूप से पेश किया जाता है।'
मानसून सत्र के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद पहुंचे।
विपक्षी सांसदों ने आज संसद भवन परिसर में बजट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने हाथों में सरकार के खिलाफ तख्तियां ली हुईं थी। इस दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह बहुत अनुचित बजट है। भारत के अधिकांश राज्यों को नज़रअंदाज़ किया गया है। उनकी ज़रूरी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया गया है...सिर्फ़ अपनी सरकार बचाने के लिए उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि विभिन्न राज्यों की स्थानीय ज़रूरतें क्या हैं और इसीलिए INDIA गठबंधन इसका विरोध कर रहा है।'
विपक्षी गठबंधन की पार्टियां आज संसद परिसर में बजट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगी। विपक्ष का आरोप है कि बजट में विपक्ष शासित प्रदेशों के साथ भेदभाव किया गया है। विपक्ष ने बजट के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने के लिए एक बैठक बुलाई, जिसमें लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रमोद तिवारी, गौरव गोगोई, एनसीपी एसपी चीफ शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी, डीएमके के टीआर बालू, झामुमो की सांसद महुआ माझी, आप सांसद राघव चड्ढा और संजय सिंह, सीपीआईएम के जॉन ब्रिटास, कांग्रेस के जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।