शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने के लिए जनगणना या परिसीमन का इंतजार करना केवल देरी करने की रणनीति है। उन्होंने मांग की है कि इसे आगामी चुनावों से ही प्रभावी बनाया जाए, जिससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का सपना कागजों से निकलकर हकीकत बन सके।
ठाकरे ने कहा है कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह एक अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व का विषय है, जिस पर बिना व्यापक चर्चा और आम सहमति के आगे बढ़ना जल्दबाजी होगी। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान स्वरूप में परिसीमन लागू करने से राज्यों के बीच क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो सकता है, जिससे कई राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होने का खतरा है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि परिसीमन किसी एक पार्टी के राजनीतिक भविष्य का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसे केवल सीटों की संख्या बढ़ाने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले प्रगतिशील राज्यों के अधिकारों का हनन न हो और संघीय ढांचा सुरक्षित रहे।
पीएम मोदी के बाद वक्तव्य के बाद शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने भी चर्चा में भाग लिया।
संसद के विशेष सत्र के दौरान आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'महिला आरक्षण विधेयक' यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संविधान के अन्य संशोधनों पर चर्चा में भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि हम इस पल के साक्षी बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इस मंथन से अमृत निकलेगा और यह मंथन देश की दिशा और दशा तय करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के लिए महत्वपूर्ण दिन है। यह 20-25 वर्ष पहले हो जाना चाहिए था, समय-समय पर इसमें सुधार होते रहते। सदन के सभी साथियों को यह अवसर मिला है।
पीएम मोदी के भाषण की अन्य खबरें भी पढ़ें
संसद में परिसीमन विधेयक को लेकर जारी बहस के बीच समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पूरी तरह समर्थन में है और डॉ. राम मनोहर लोहिया हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के पक्षधर रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी भी उसी विचारधारा के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के मुद्दे को सिर्फ नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती, वह महिलाओं के सम्मान की बात कैसे कर सकती है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से भाजपा सत्ता में है, लेकिन इसके बावजूद भारत जेंडर इक्वालिटी के मामलों में पीछे है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि भाजपा शासित कई राज्यों में महिला मुख्यमंत्री क्यों नहीं हैं।
यहां पढ़ें पूरी खबर-- UP: 'हम महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन भाजपाई चालबाजी के खिलाफ हैं'; सदन में बोले अखिलेश यादव
राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए आज सदन के वरिष्ठ सदस्य हरिवंश ने नामांकन दाखिल किया। बता दें कि हरिवंश जदयू की तरफ से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। इस वर्ष वे मनोनीत होने के बाद राज्यसभा सदस्य बने हैं।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी चर्चा में भाग लिया। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में हो रहे बदलावों को अभूतपूर्व बताते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को आड़े हाथ लिया। सूर्या ने संविधान में संसोधन को समय की मांग बताते हुए कहा कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 40 साल से देश आज जैसे अवसर का इंतजार कर रहा था।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव होगा और इससे किसी राज्य का नुकसान नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 तक हो सकती हैं।
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि दक्षिण भारत में इस मुद्दे को लेकर गलत जानकारी और भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस विषय पर अराजक माहौल बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन कोई “बैकडोर प्रक्रिया” नहीं है, बल्कि यह संविधान के नियमों के अनुसार ही किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा सीटों को स्थिर (फ्रीज) रखा गया और उसी आधार पर महिला आरक्षण लागू किया गया, तो इससे वोटों के वास्तविक महत्व पर असर पड़ेगा और प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है।
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार महिला आरक्षण के रास्ते में रुकावटें पैदा कर रही है। अगर 2023 में विपक्ष की बात मानी जाती, तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसे अलग रखा जाए, तभी उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि “पीछे के रास्ते से परिसीमन लागू करने का तरीका है। संसद में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है।
राज्यसभा के नामित सांसद हरिवंश ने उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। उन्होंने राज्यसभा सचिवालय में जाकर यह नामांकन जमा किया। अब इस पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
लोकसभा में तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पास हो चुका है और इसे 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा। मेघवाल ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल सीटें करीब 815 तक पहुंच सकती हैं। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी राज्यों की वर्तमान ताकत (सीटों की संख्या) बरकरार रहेगी।
लोकसभा में तीन अहम विधेयकों पर चर्चा और मतदान का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन विधेयकों पर करीब 12 घंटे चर्चा होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर स्पीकर चर्चा का समय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन पर मतदान कल किया जाएगा। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि इन तीनों विधेयकों पर 15 से 18 घंटे तक चर्चा होगी और मतदान कल शाम 4 बजे कराया जाएगा। अब इन विधेयकों पर लंबी बहस के बाद संसद में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने की चर्चा की शुरुआत
संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग, लोकसभा में विधेयक के पक्ष में 251 वोट; विपक्ष में पड़े 185 वोट
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को पेश करने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ, जिसमें अधिकतर सांसदों ने सरकार के पक्ष में वोट दिया। विपक्षी सांसदों ने इस विधेयक को पेश करने के फैसले के खिलाफ मतविभाजन (वोटिंग) की मांग की थी, लेकिन वोटिंग में सरकार का पलड़ा भारी रहा। इस तरह लोकसभा ने विधेयक को पेश करने की अनुमति दे दी है और अब इस पर आगे चर्चा की जाएगी।
महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही साफ कर चुकी है और अब इस पर उनके पास कुछ और जोड़ने के लिए नहीं है। संसद में इन दोनों अहम विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा और राजनीतिक बहस जारी है।
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के नेताओं के बयानों पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर सवाल उठाया था, लेकिन सरकार पहले ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। अमित शाह ने बताया कि सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला लिया है और इसमें जाति से जुड़ा डेटा भी एकत्र किया जा रहा है।
उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर फैसला उनके हाथ में होता तो वे घर-घर में जाति तय करने की प्रक्रिया तक ले जाते। इसके साथ ही उन्होंने सांसद धर्मेंद्र यादव के मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने वाले बयान पर आपत्ति जताई। अमित शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और यह पूरी तरह असंवैधानिक है।
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने तीन अहम विधेयकों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 का विरोध करती है। धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संसद में इन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। अमित शाह ने कहा कि केसी वेणुगोपाल विधेयकों के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं कर सकते और वे केवल तकनीकी आपत्तियां ही उठा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बहस के दौरान विपक्ष को मजबूत जवाब देगी।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन तीनों विधेयकों के पेश किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में लाने के खिलाफ आपत्ति जताई। इसको लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।
संसद के विशेष सत्र में आज सरकार ने तीन अहम विधेयक लोकसभा में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में पेश करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को पेश करने का प्रस्ताव दिया। इन विधेयकों को लेकर सदन में चर्चा और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि ये देश की चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अहम बदलावों से संबंधित हैं।
राज्यसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई सांसदों को शपथ दिलाई गई।
सूत्रों के अनुसार इंडिया गठबंधन के दल राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि विपक्षी दल इस चुनावी प्रक्रिया से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि इससे संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो गया है। इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने और उन पर चर्चा कराने की तैयारी में है। महिला आरक्षण विधेयक के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। वहीं परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर भी राजनीतिक बहस तेज है, जिसमें लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का मुद्दा शामिल है। इस विशेष सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक चर्चा की संभावना है, क्योंकि दोनों ही मुद्दे देश की चुनावी और राजनीतिक संरचना पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
संसद की कार्यवाही शुरू
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर करीब 3 बजे सदन को संबोधित कर सकते हैं।
संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में आज सरकार की तरफ से चर्चा की शुरुआत कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल करेंगे। इस बहस में भाजपा की ओर से कई सांसद हिस्सा लेंगे, जिनमें बांसुरी स्वराज, रक्षा खडसे, अपराजिता सारंगी, कंगना रनौत और धर्मशिला गुप्ता शामिल हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन संसद भवन पहुंचे। उनके आगमन पर भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने उनका स्वागत किया। संसद में उनके पहुंचने के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा गया।
संसद के विशेष सत्र से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद परिसर में बैठक की। इस बैठक में महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। विपक्षी नेताओं ने तय किया कि इन दोनों अहम विधेयकों पर सरकार की नीतियों और प्रावधानों को लेकर संयुक्त रूप से रुख अपनाया जाएगा। बैठक का मकसद संसद में एकजुट होकर अपनी बात रखना और सरकार के प्रस्तावों पर रणनीति बनाना था।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सभी दल मिलकर इस बिल को पास करेंगे और जो इसका विरोध करेंगे, वे खुद अलग-थलग पड़ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस बिल को पास नहीं करेंगे, उनके घर में भी समर्थन नहीं मिलेगा। उनके इस बयान को विपक्ष पर दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है। इसी दौरान उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर भी बात की। गिरिराज सिंह ने कहा कि किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार होगा।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस समय संसद का विशेष सत्र बुलाना गलत मंशा से किया गया फैसला है, क्योंकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार चल रहा है। कार्ति चिदंबरम के अनुसार, सरकार जानबूझकर विपक्षी दलों के प्रचार को प्रभावित करने के लिए संसद सत्र बुला रही है। उन्होंने इसे सरकार की छिपी हुई रणनीति बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उनका कहना है कि विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ना सरकार की “चाल” है। कार्ति चिदंबरम ने साफ कहा कि विपक्ष, खासकर INDIA गठबंधन, परिसीमन विधेयक का विरोध करेगा और सरकार के पास इसे पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है।
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को पेश करने का विरोध किया है। उन्होंने इसके खिलाफ नोटिस देकर कहा है कि इस बिल को सदन में लाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह बिल लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस तेज है। सरकार इस विशेष सत्र में कई अहम विधेयक लाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष का कहना है कि परिसीमन जैसे बदलावों से देश की राजनीतिक और संघीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
संसद के विशेष सत्र में आज सरकार द्वारा लाए जा रहे कई अहम विधेयकों को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। डीएमके की सांसद और संसदीय दल नेता कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा में तीन सरकारी विधेयकों के पेश होने का विरोध करते हुए प्रस्ताव रखा। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 शामिल हैं।
इसी मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाकर विरोध जताया और राज्यभर में आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने इसे तमिलों के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कड़े विरोध की बात कही।
संसद में आज से 33% महिला आरक्षण और लोकसभा में सीटों को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले परिसीमन पर चर्चा की शुरुआत होगी। संसद सत्र की शुरुआत से पहले पीएम मोदी ने कहा कि देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। एक्स हैंडल पर एक संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा, 'आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।' उन्होंने अपने इस कथन के साथ संस्कृत भाषा के सुभाषित का भी उल्लेख किया। पीएम मोदी ने लिखा;
व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।
ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥
विपक्ष कर रहा विरोध, CM स्टालिन ने विधेयक की प्रति जलाई
तमिलनाडु के नामक्कल में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध किया। इस दौरान उन्होंने काले कपड़े पहनकर काला झंडा फहराया और प्रस्तावित परिसीमन बिल की प्रति जलाकर अपना विरोध जताया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस कदम को तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया और कहा कि यह फैसला राज्य के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। विरोध के दौरान राज्य में सरकार के खिलाफ नाराजगी का माहौल भी देखने को मिला।