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Parliament LIVE: 'आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची', नक्सलवाद की बहस पर संसद में बोले अमित शाह

Mon, 30 Mar 2026 07:29 PM IST
Jyoti Bhaskar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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अमित शाह, लोकसभा में बोलते हुए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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लाइव अपडेट

07:44 PM, 30-Mar-2026

'राहुल गांधी लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए', संसद में बोले शाह

राहुल गांधी अपने लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट जुड़े थे, इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं। 2018 में हैदराबाद में घुमांडी विट्ठल राव, राहुल ने उस गद्दार से मुलाकात की। 2025 कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। हिडमा जब मारा गया, तब इंडिया गेट पर कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा के नारे लगे। इन नारों के वीडियो को राहुल गांधी ने खुद पोस्ट किया है। नक्सलों का समर्थन करते-करते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।

07:43 PM, 30-Mar-2026

20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 की तारीख जान लीजिए- अमित शाह

2014 में मोदी जी ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर हो या झारखंड-छत्तीसगढ़ कहीं भी आतंकवाद और चरमपंथ नहीं चलेगा। इसके बाद ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया। सुरक्षाबलों के बीच समन्वय बनाया। हम सरेंडर नीति लेकर आए। विकास और शासन में कोई खाली जगह नहीं छोड़ी। पहले जहां शासन नहीं था, अब वहां राज्य सरकार की उपस्थिति है। नक्सलवाद की हार का कारण यह है कि सरकार अब हर जगह पहुंच चुकी है। विकास के लिए व्होल ऑफ गवर्मेंट परिदृश्य लिया। 

20 अगस्त को मोदीजी ने मीटिंग ली। सुरक्षाबलों के अधिकारियों के साथ। इनके समन्वय पर बात हुई। पूरी योजना पर चर्चा हुई। लेकिन इसमें देर क्यों लगी। क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार थी। बिहार 2024, ओडिशा 2024, झारखंड एक जिला छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था। लेकिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा था। भूपेश बघेल से पूछिए। 

24 अगस्त 2024: शुरुआत में जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली। उसके दूसरे महीने मैं वहां गया। भाजपा सरकार ने पूरे समर्थन का भरोसा दिया। साझा रणनीति बनी। 24 अगस्त 2024 को मैंने घोषित किया था कि हम पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त कर देंगे। उसके बाद जो हुआ, हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। नक्सल प्रभावित जिले आज सिर्फ 2 बचे हैं। अति प्रभावित आज शून्य हैं। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज सिर्फ सात हैं। 406 नए सीएपीएफ कैंप बनाए गए हैं। 400 बुलेटप्रूफ-ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां दी गई हैं। पांच अस्पताल जवानों के लिए बनाए गए। संचार की सारी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त की गईं। परिणाम क्या है। 

यहां सांसद कह रहे हैं कि मारना नहीं चाहिए। मैं संयुक्त आंकड़ा रखता हूं।  मारे गए नक्सली 2024 से अब तक 706 रहे। 2218 गिरफ्तार हुए, जेल में गए। आत्मसमर्पण 4449 नक्सलियों ने किया। मैं कहता हूं शासन का यही अप्रोच यही होना चाहिए, जो वार्ता करना चाहता है उससे बात होनी चाहिए और जो जवानों, किसानों, बच्चों, लोगों पर गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से ही देना चाहिए।

07:42 PM, 30-Mar-2026

बल प्रयोग कर के आम निर्दोष लोगों को बचाना पड़ता है- अमित शाह

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चर्चा से मानते ही नहीं है, वहां बल प्रयोग कर के आम निर्दोष लोगों को बचाना पड़ता है। इन लोगों ने बम लगाए, स्कूल-कॉलेजों में घुसकर बच्चों को किडनैप किया। जो भी अन्याय करेगा नागरिकों के साथ, समझा तो ठीक है, वर्ना फोर्स इसीलिए बनाई गई है। मैं अर्बन नक्सल कहे जाने वाले बुद्धजीवी भाइयों से सवाल करना चाहता हूं। मैं कुछ लेख भी पढ़े हैं। ये कहते हैं माओवादियों के साथ चर्चा करो, इन्हें मारना नहीं चाहिए। इनके साथ संवेदना होनी चाहिए। ऐसे लोग जो स्कूल के बच्चों को हथियार पकड़ा दें, वह उनकी मां के लिए तो नहीं करते होंगे। अपने खेत में जाने वाले किसानों का पैर बम पर पड़ जाए और वो पूरा जीवन दिव्यांग हो गए, उनके लिए कोई आर्टिकल नहीं है। आपके आर्टिकल सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए ही है। इन समस्याओं को झेलने वालों के लिए नहीं है। ये मानवता वादी होते तो अबोध बच्चों से लेकर बम से पैर गंवाने वाले किसानों के बारे में भी कहते।

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07:27 PM, 30-Mar-2026

वामपंथ की टाइमलाइन पर क्या बोले अमित शाह?

माकपा कैसे बना इसकी भी एक कहानी है। 1964 में माकपा बना। भाकपा थी तो माकपा क्यों बनी। 1964 में सोवियत संघ और चीन में झगड़ हुआ। दोनों साम्यवादी राष्ट्रों में अलग विचारधारा की सरकार आई। इनमें चीन की समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सवादी खोल दी। एक रूस में जब क्रांति आई तब बनी और दूसरी रूस चीन के मतभेद के दौरान बनी। 

भारत में 1969 में भाकपा-माले की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र करना। यह रूस चीन में हो चुका था। अंग्रेज यहां था नहीं, राजशाही थी नहीं। यहां लोकतांत्रिक सरकार थी। फिर क्यों संसदीय व्यवस्था का विरोध, चुनाव जीतकर आते। लेकिन तब तो जीत आती नहीं। इसलिए उन्होंने सशस्त्र क्रांति शुरू की। अन्याय के लिए नहीं बनी मार्क्सवादी पार्टी। 

1975 में कांग्रेस का समर्थन मिलते ही एमसीसी माओवादी बनी। बिहार झारखंड केंद्रित पार्टी बनी। 1998 में पीपुल्स वॉर ग्रुप बना और इसमें माओवादी गुट एक साथ आए। इन लोगों ने 2001 में गुरिल्ला फोर्स बनाई। 2004 में थ्योरी और हथियार उठाने वालों का विलय हुआ। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सबकी समाप्ति हो गई।

06:39 PM, 30-Mar-2026

वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को बढ़ाने के लिए आदिवासियों को चुना- अमित शाह

वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को बढ़ाने के लिए भोले आदिवासियों को चुना। उन्होंने सोचा कि अगर ये पढ़ लिख जाएंगे तो ये हमारे साथ नहीं रहेंगे। स्कूल जला दिए। बैंक जला दिए। विकास को तो वामपंथी उग्रवादियों ने वर्षों तक नहीं पहुंचने दिया। वह विकास अब नरेंद्र मोदी सरकार में घर घर पहुंच रहा है। गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से इस क्षेत्र में वर्षों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जडें गरीबी से नहीं जुड़ी हैं।

1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत हुई। 1971 के पहले ही साल में वहां 1920 हिंसा की घटनाएं हुईं। तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, ओडिशा...में यह उग्रवाद फैला। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए। ये सीपीआई-माओवादी बने। 1970 से 2004 तक चार साल छोड़कर कांग्रेस पार्टी का शासन रहा। कब माओवादी विचारधारा फैली, एकत्रित हुई, ये आपको याद रखना चाहिए।

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06:37 PM, 30-Mar-2026

भोले भाले आदिवाासियों को बरगला कर उनके हाथ में हथियार पकड़ाए- अमित शाह

हम सब जानते हैं कि 1947 में जब हम आजाद हुए, तब संसाधन कम थे। देश के अंदर विकास का निशान नहीं था। दशकों तक, लगभग दो सदी तक इस देश को गुलामी में लूटा गया। राजनीति कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित थी। कीमती संसाधन, रेवेन्यू कम था, तो विकास भी एक साथ नहीं पहुंचता है। सड़क बनानी थी तो पूरे देश की एक साथ नहीं पहुंची। हर जगह विकास नहीं पहुंचा था। राज्य का इकबाल वहां बुलंद नहीं हुआ था। अगर स्टेट पहुंचा ही नहीं था, सुनियोजित भेदभाव का वातावरण ही नहीं था, तो भेदभाव का वातावरण कैसे पैदा हो गया। सच्चाई ये है कि इन्होंने रेड कॉरिडोर को इसलिए चुना क्योंकि वहां स्टेट की पहुंच कम थी। इन्होंने भोले भाले आदिवाासियों को बरगला कर उनके हाथ में हथियार पकड़ाए।

06:35 PM, 30-Mar-2026

बिरसा मुंडा, सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श नहीं चुना- अमित शाह

इनके कितने युवा हुए, इन्होंने तिलका मांझी को अपना आइडियल नहीं समझा, बिरसा मुंडा, सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श नहीं चुना। इन्होंने माओ (माओ जिदॉन्ग) को अपना आदर्श चुना। ये अपना आदर्श भी विदेश से इंपोर्ट करते हैं।

06:34 PM, 30-Mar-2026

'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है', संसद में बोले अमित शाह

जब हम आजाद हुए, हमने कहा सत्यमेव जयते। इनका वाक्य क्या है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। वहां सत्ता का बहुत अहम स्थान है। यह विकास के लिए नहीं है, अपनी विचारधारा की विजय के लिए है। इस विचार धारा को आदिवासियों में फैलाकर उन्हें बहकाने की है। मैं नाम नहीं लेना चाहता लेकिन यहां लोग उनकी तुलना भगवान बिरसा मुंडा और भगत सिंह से कर रहे हैं। आप अंग्रेजों से लड़ने वाले भगवान की तुलना नक्सलियों से कर रहे हैं। यह विचार धारा कहती है दीर्घकालिक युद्ध ही हमारी विचारधारा को बढ़ा सकता है। उन्हें अपनों का खून बहाने में कोई दिक्कत नहीं।

06:23 PM, 30-Mar-2026

कई सारे बड़े काम पीएम मोदी के शासन में ही हुए - अमित शाह

प्रधानमंत्री मनमोहन ने स्वीकारा था। देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या हथियारी माओवादी है। मगर कुछ नहीं किया गया। 2014 में परिवर्तन हुआ। मोदी जी के शासन के अंदर कई समस्याओं का समाधान हुआ। धारा 370 हट गई, 35ए हट गई, राम जन्मभूमि का मंदिर बन गया। जीएसटी इस देश में वास्तविकता बन गई। विधाई मंडल में मातृ शक्ति को 33 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। कई सारे बड़े काम जो आजादी से इस देश की जनता चाहती थी। वो सारे बड़े काम पीएम मोदी के शासन में हुए।

06:09 PM, 30-Mar-2026

आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची- अमित शाह

लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस बहस के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्षों से चाहते थे कि उनकी स्थिति संसद में उठे और दुनिया जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह मौका नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच पर पहुंची है। आदिवासी विधायकों और सांसदों से पूछना चाहता हूं। आपने तो अपना विकास कर लिया। लेकिन आदिवासी जनता का आपने कितना विकास किया।

05:29 PM, 30-Mar-2026

'नक्सलवाद की जड़ें उखाड़ने का संकल्प पूरा हो रहा', संसद में बोलीं कंगना रनौत

लोकसभा में नक्सलवाद और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद कंगना रनौत ने केंद्र सरकार की नीतियों की जोरदार तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक साल पहले गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संकल्प लिया था कि 31 मार्च 2026 तक देश से माओवाद को जड़ से खत्म किया जाएगा और अब यह लक्ष्य पूरा होता दिख रहा है। कंगना रनौत ने कहा कि 1967 में नक्सलवाद की शुरुआत एक छोटी चिंगारी के रूप में हुई थी, जिसे उस समय की सरकार चाहती तो रोक सकती थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने आदिवासी समाज के साथ भेदभाव किया और इस समस्या को बढ़ने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में वैचारिक दूरी को खत्म करने के बजाय उसे और बढ़ाया गया, जिससे वामपंथी उग्रवादियों को पनपने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि इन उग्रवादियों ने हजारों हमले किए, 2000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की जान ली और बच्चों को भी हिंसा की राह पर धकेल दिया। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के हाथ में किताब और लैपटॉप होना चाहिए था, उनके हाथ में बंदूक थमा दी गई और पूरे क्षेत्र को रेड कॉरिडोर और नो गो जोन बनाकर छोड़ दिया गया।

कंगना रनौत ने कहा कि 2014 के बाद हालात बदलने शुरू हुए और सरकार ने विकास और विश्वास की नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए कई कदम उठाए, जिसमें एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुरक्षा बलों को मजबूत किया और उन इलाकों में फिर से संविधान की व्यवस्था स्थापित की, जहां पहले नक्सलियों का प्रभाव था। उन्होंने विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां घर, पानी, आर्थिक सहायता और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं पहुंचाई गईं, जिससे नक्सलियों का आर्थिक नेटवर्क कमजोर हुआ। कंगना ने बताया कि सरकार की सरेंडर नीति के तहत 8000 से ज्यादा युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है और उन्हें आर्थिक मदद व रोजगार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह असम समेत अन्य इलाकों में भी हजारों लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि देश बंदूक की ताकत से नहीं, बल्कि संविधान और जनता के विश्वास से चलेगा। उन्होंने इस दिशा में सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
 

05:16 PM, 30-Mar-2026

'आदिवासियों को हिस्सेदारी दो, तभी खत्म होगा नक्सलवाद', संसद में बोले पप्पू यादव

लोकसभा में नक्सलवाद और आदिवासी मुद्दों पर चर्चा के दौरान सांसद पप्पू यादव ने जोरदार तरीके से आदिवासी समाज के हक और हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भारत की मूल संस्कृति और सभ्यता का आधार रहा है, लेकिन आज सबसे ज्यादा हमला उसी पर हो रहा है। उन्होंने राम और शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें आदिवासी जीवन से जुड़ी हैं। पप्पू यादव ने कहा कि अंग्रेजों के समय से लेकर अब तक आदिवासियों की जमीन, जंगल और संसाधनों पर लगातार दबाव बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कई इलाकों में जमींदारी मानसिकता कायम है और आदिवासी अपने ही संसाधनों से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें इसी अन्याय और असमानता में हैं, इसलिए केवल सुरक्षा कार्रवाई से इसका समाधान नहीं निकलेगा। पप्पू यादव ने साफ कहा कि वह किसी का विरोध करने नहीं, बल्कि समाधान बताने के लिए खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासियों को उनका अधिकार और सम्मान नहीं मिला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

पप्पू यादव ने सरकार के सामने कई ठोस सुझाव रखे और कहा कि असली समाधान विकास और हिस्सेदारी में है। उन्होंने मांग की कि कार्बन क्रेडिट से मिलने वाली कमाई सीधे आदिवासी ग्राम सभाओं को दी जाए, ताकि जंगल बचाने वालों को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी युवाओं को उनकी मातृभाषा में आधुनिक शिक्षा जैसे ड्रोन, कोडिंग और एआई की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने ट्राइबल मेडिसिन, कला और उत्पादों को जीआई टैग और बौद्धिक संपदा अधिकार दिलाने की बात कही, जिससे आदिवासी अपने उत्पाद सीधे बाजार में बेच सकें। पप्पू यादव ने इको-टूरिज्म, खनन और उद्योगों में आदिवासियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया और कहा कि उन्हें विस्थापित नहीं, बल्कि शेयरधारक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने वन अधिकार कानून के तहत जमीन की सुरक्षा, टेलीमेडिसिन और ड्रोन से स्वास्थ्य सेवाएं, और ग्राम सभा को ज्यादा अधिकार देने की भी बात रखी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए। अंत में उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन और उच्च पदों पर आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक हिस्सेदारी का न्याय नहीं होगा, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
 

05:13 PM, 30-Mar-2026

'हथियार डालना हार नहीं, विचारधारा अभी जिंदा', नक्सलवाद पर बोले ओवैसी

लोकसभा में नक्सलवाद और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ हथियार डालने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि विचारधारा अभी भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरेंडर कर रहे हैं, उन्होंने कहीं भी अपनी विचारधारा को त्यागने की बात नहीं कही है। ओवैसी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 1977 में भी सीपीआई (एमएल) ने कुछ समय के लिए अपने सशस्त्र संघर्ष को रोका था, लेकिन बाद में फिर हथियार उठा लिए। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह स्थायी समाधान नहीं बल्कि एक टैक्टिकल रिट्रीट हो सकता है। उन्होंने चारू मजूमदार का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सल आंदोलन की जड़ें गहरी हैं और इसे केवल सैन्य कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता। ओवैसी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जेल में नक्सल नेताओं से बातचीत की है और उनकी सोच आज भी वैसी ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सिर्फ यह मान ले कि नक्सलवाद खत्म हो गया है, तो यह एक बड़ी भूल होगी।

ओवैसी ने आगे कहा कि देश के कई इलाकों में जहां नक्सलवाद कम हुआ है, वहां अब न तो नक्सल हैं और न ही सही गवर्नेंस पहुंची है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन और विकास वहां नहीं पहुंचे, तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़ी है। आदिवासी इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से भरे इलाकों में रहने वाले लोगों को उसका फायदा नहीं मिलता, जिससे असंतोष बढ़ता है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर गवर्नेंस, राहत और पुनर्वास पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में फिर से हिंसा बढ़ सकती है। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं ने सरकार नहीं, बल्कि गवर्नेंस बदलने के लिए आंदोलन किया। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़, घरों को तोड़ना और समाज में डर का माहौल बनाना कट्टरता को बढ़ावा देता है। ओवैसी ने कहा कि किसी भी तरह का उग्रवाद, चाहे वह वामपंथी हो या दक्षिणपंथी, देश के लिए खतरा है और इसे रोकने के लिए संतुलित और संवेदनशील नीति जरूरी है।

05:11 PM, 30-Mar-2026

धर्मेंद्र यादव बोले- मुलायम के रास्ते से ही होगा समाधान

लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान मुलायम सिंह यादव के बताए रास्ते पर चलकर ही संभव है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का शोषण इस समस्या की जड़ है और अगर इसे नहीं रोका गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। यादव ने जोर देकर कहा कि समाजवादी विचारधारा हमेशा कमजोर और वंचित वर्ग के साथ खड़ी रही है। उन्होंने सरकार से आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने और न्यायपूर्ण नीतियां लागू करने की मांग की।
 

03:15 PM, 30-Mar-2026

असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को EPFO-ESIC में लाने पर विचार

सरकार असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी।

मंत्री ने कहा वर्तमान में श्रम विभाग में यह विचार किया जा रहा है कि असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भविष्य में पेंशन जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री की इच्छा है कि जो लोग मेहनत करते हैं, उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए और वे EPFO और ESIC के अंतर्गत आएं। उन्होंने यह भी बताया कि पेंशन योजना में काफी सुधार हो रहा है, जिसमें फ्री डोरस्टेप सेवा का शुभारंभ शामिल है। मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ऑनलाइन उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन योजना का लाभ मिल सकता है। इससे असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा में बड़ा सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

01:53 PM, 30-Mar-2026

ईरान में एयर स्ट्राइक से फैल रहा जहरीला धुआं- संजय राउत

ईरान-इस्राइल युद्ध के गंभीर प्रभावों पर बात करते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे एक एक गंभीर वैश्विक और पर्यावरणीय मुद्दा भी बताया।  उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब एक महीने से अधिक समय से जारी है और इसके परिणाम केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। इस युद्ध के कारण विश्व में कई संकट उत्पन्न हुए हैं। 

संजय राउत ने कहा कि इस युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ईंधन और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं का संकट गहराता जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इससे भी बड़ा खतरा पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, जो धीरे-धीरे भारत की ओर बढ़ सकता है। 

उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण ईरान में उपजे काले बादल बम के बराबर ही खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि भले ही भारत पर मिसाइल या बम नहीं गिर रहे हों, लेकिन ईरान के ऊपर छाए ‘काले बादल’ भारत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में एयर स्ट्राइक (हवाई हमलों) के कारण ऑयल रिफाइनरी और गैस भंडारों में भीषण आग लगी है, जिससे भारी मात्रा में जहरीला धुआं वातावरण में फैल गया है। 

शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने कहा कि ईरान के कुछ हिस्सों में ‘ब्लैक रेन’ यानी काली बारिश की घटनाए सामने आई हैं, जो विषैले तत्वों से भरी हुई है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हो सकती है। उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से आशंका जताई कि यह प्रदूषण देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। 

12:34 PM, 30-Mar-2026

कंगना रनौत का सीएम ममता पर तीखा प्रहार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर सांसद के बाहर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद कंगना रणौत ने कहा कि यह सभी को पता है कि उन्हें किससे खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार राज्य में हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आई थीं, जहां हालात बेहद खराब हो गए थे।

कंगना रणौत ने कहा कि देशभर ने पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की स्थिति देखी है। उनके अनुसार, वहां आम नागरिक, मतदाता और भाजपा से जुड़े लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

12:18 PM, 30-Mar-2026

नक्सलवाद समाप्त होने से बस्तर को मिलेगी नई पहचान- सांसद महेश कश्यप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलमुक्त भारत की समयसीमा पर संसद में संबोधन देने की संभावना के बीच, बस्तर से भाजपा सांसद महेश कश्यप ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद का समाप्तिकरण किया जा रहा है। देश में नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा 31 मार्च 2026 थी।
 

उन्होंने कहा कि आज संसद में नक्सलवाद पर बहस होगी। बस्तर के लोगों को अब तक नक्सलवाद का सामना करना पड़ा है। आने वाले दिनों में बस्तर एक नई पहचान हासिल करेगा। मैं हमारे बहादुर सैनिकों को सलाम करता हूं।
 

11:19 AM, 30-Mar-2026

बीजद सांसदों का राज्यसभा से वॉकआउट

बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया और अपने विरोध का प्रदर्शन किया। सांसद सास्मित पात्रा ने बताया कि यह कदम लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा बीजू पटनायक के खिलाफ किए गए विवादित बयान के विरोध में उठाया गया।

सास्मित पात्रा ने आरोप लगाया कि दुबे ने बीजू पटनायक को 'CIA एजेंट' बताया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का स्तर इतना गिर गया है कि इस तरह के बयान देने को आम समझा जा रहा है।  इस विरोध में बीजद के सभी सांसद शामिल हुए और उन्होंने राज्यसभा से बाहर निकलकर अपनी नाराजगी जताई।

11:05 AM, 30-Mar-2026

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू

लोकसभा और राज्यसभा में बजट सत्र की कार्यवाही सोमवार को शुरू हो गई है। लोकसभा में दिवालियापन और बैंकक्रप्सी कोड (संशोधन) बिल पर चर्चा होने की संभावना है, वहीं सरकार की नक्सलवाद समाप्त करने की कोशिशों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सामान्य प्रशासन) बिल पर चर्चा जारी रहेगी, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री बिल पास कराने के लिए सदन में पेश करेंगे। सत्र के दौरान वित्तीय और सुरक्षा से जुड़े अहम मसलों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।

09:25 AM, 30-Mar-2026

राज्यसभा में CAPF बिल पर होगी चर्चा

राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 पर आगे की चर्चा होगी। इस बिल को पास कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में इसे पेश करेंगे। 25 मार्च को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे राज्यसभा में पेश किया था। इस बिल के तहत CAPF में 50% पद इंस्पेक्टर जनरल रैंक में डिप्युटेशन से और कम से कम 67% पद एडिशनल डायरेक्टर जनरल रैंक में डिप्युटेशन से भरे जाएंगे।

विशेष निदेशक जनरल और डायरेक्टर जनरल रैंक के सभी पद केवल डिप्युटेशन के माध्यम से भरे जाएंगे। विपक्ष ने बिल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के 2025 के निर्णय के खिलाफ है, जिसमें CAPF के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) तक डिप्युटेशन पदों को दो साल के भीतर घटाने का निर्देश था।

09:14 AM, 30-Mar-2026

लोकसभा में दिवालियापन संशोधन बिल पर होगी चर्चा

संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में इंसॉल्वेंसी और दिवालियापन कोड (संशोधन) बिल, 2025 पर चर्चा होने वाली है। यह बिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया गया था और 27 मार्च को पहली बार चर्चा के लिए उठाया गया। बिल को शुरू में सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया था। इसका उद्देश्य कंपनियों और व्यक्तियों के दिवालियापन मामलों में देरी को कम करना और प्रक्रियागत सुधार लाना है।

08:50 AM, 30-Mar-2026

Parliament LIVE: 'आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची', नक्सलवाद की बहस पर संसद में बोले अमित शाह

लोकसभा में आज देश को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होगी।  नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार ने 31 मार्च की समयसीमा तय की है। ये डेडलाइन समाप्त होने से एक दिन पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर अहम चर्चा होगी। लोकसभा सचिवालय ने देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर नियम 193 के तहत सोमवार को चर्चा सूचीबद्ध की है, जिसके अंतर्गत मतविभाजन नहीं होता है। इस नियम के तहत अल्पकालिक चर्चा के लिए सरकार को जवाब देना आवश्यक है।

डेडलाइन का एलान गृह मंत्री अमित शाह ने किया है
आज चर्चा की शुरुआत तेदेपा सांसद बायरेड्डी शबरी और शिवसेना सदस्य श्रीकांत शिंदे करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खतरा 31 मार्च, 2026 तक पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।  नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों की एक नई समीक्षा के बाद देश में नक्सली उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात हो गई है।

किन राज्यों में है नक्सलवाद की समस्या?
हाल में केंद्र सरकार ने नौ राज्यों (जिनमें 38 जिले शामिल) के साथ मिलकर एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना की व्यापक समीक्षा की थी। ये राज्य झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल हैं।

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