10:28 AM, 29-Apr-2025
एक पर्यटक जिपलाइनिंग कर रहा था, तभी आतंकवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। गुजरात के अहमदाबाद से आए पर्यटक ऋषि भट्ट घटना को याद करते हुए कहते हैं कि जब मैं जिपलाइनिंग कर रहा था, तभी गोलीबारी शुरू हो गई। मुझे करीब 20 सेकंड तक इसका अहसास नहीं हुआ। मुझे अचानक लगा कि गोलीबारी शुरू हो गई है और जमीन पर मौजूद लोग मारे जा रहे हैं। मैंने देखा कि 5-6 लोगों को गोली लग गई है। करीब 20 सेकंड बाद मुझे एहसास हुआ कि यह एक आतंकवादी हमला था। उसने (जिपलाइन ऑपरेटर ने) तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहा, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई।
उन्होंने कहा, 'मुझे पता चला कि हमसे आगे दो परिवारों के लोगों से उनका धर्म पूछा गया और मेरी पत्नी और बेटे के सामने उन्हें गोली मार दी गई। मेरी पत्नी और बेटा चिल्ला रहे थे। मैंने अपनी बेल्ट खोली और नीचे कूद गया, अपनी पत्नी और बेटे को लेकर भागने लगा। हमने देखा कि लोग एक जगह छिपे हुए हैं, जो एक गड्ढे की तरह थी, इसलिए आप आसानी से किसी को नहीं देख सकते थे। हम भी वहीं छिप गए। जब 8-10 मिनट बाद गोलीबारी रुकी, तो हम मुख्य द्वार की ओर भागने लगे। फिर से गोलीबारी शुरू हो गई और 4-5 लोगों को गोली लग गई। हमारे सामने 15-16 पर्यटकों को गोली लगी।'
आगे उन्होंने बताया कि हम गेट पर पहुंचे, हमने देखा कि स्थानीय लोग पहले ही जा चुके थे। एक टट्टू गाइड हमें वहां से ले गया, हमने जल्द ही भारतीय सेना के जवानों को हमारे आगे पाया। उन्होंने सभी पर्यटकों को कवर दिया। सेना ने 20-25 मिनट के भीतर पहलगाम को कवर किया। उन्होंने सभी पर्यटकों को 18-20 मिनट के भीतर कवर किया। सेना द्वारा कवर दिए जाने के बाद हम सुरक्षित महसूस कर रहे थे। मैं भारतीय सेना का आभारी हूं। मेरे सामने 9 लोग जिपलाइन कर रहे थे, लेकिन ऑपरेटर ने कुछ नहीं कहा।
उन्होंने कहा कि जब मैं स्लाइड कर रहा था, तो उसने बात की और फिर गोलीबारी शुरू हो गई। इसलिए मुझे उस आदमी पर शक है। उसने तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहा और फिर गोलीबारी शुरू हो गई। वह एक आम कश्मीरी जैसा लग रहा था। जंगल में भी निचले इलाकों में हर जगह सेना की मौजूदगी थी। लेकिन मुख्य स्थान पर कोई भी सेना का अधिकारी नहीं था। मुख्य द्वार पर जम्मू और कश्मीर पुलिस के साथ-साथ तीन सुरक्षा गार्ड भी थे।