भाजपा मुख्यालय में बीजेपी के मुख्यमंत्रियों की बैठक आयोजित हो रही है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंच गए हैं। पीएम मोदी भी पार्टी मुख्लायल पहुंचे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन किए जाने का स्वागत किया और कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व तथा अपार हर्ष की बात है। राष्ट्रपति ने उद्घाटन के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन देश के इतिहास में सुनहरे शब्दों में लिखा जाएगा। उन्होंने अपने संदेश में कहा, 'नए संसद भवन का उद्घाटन भारत के सभी लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है।' राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति का संदेश पढ़कर सुनाया। राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद को देश के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश करार देते हुए कहा कि नया संसद भवन 'हमारी लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।'
'एक राष्ट्र के रूप में हम सभी 140 करोड़ का संकल्प ही इस संसद की प्राण प्रतिष्ठा है। यहां होने वाला हर निर्णय ही, आने वाले समय को संवारने वाला है। यहां होने वाला निर्णय आने वाली पीढ़ियों को सशक्त करने वाला है। यहां होने वाला निर्णय समाज के हर वर्ग को सशक्त करेगा। संसद की हर दीवार, इसका कण-कण गरीब के कल्याण के लिए समर्पित है।'
'हमें नेशन फर्स्ट की भावना से बढ़ना होगा। हमें कर्तव्य पथ को सर्वोपरि रखना होगा। हमें अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करना पड़ेगा। हमें निरंतर खुद में सुधार करते रहना होगा। हमें अपने नए रास्ते खुद बनाने होंगे। हमें खुद को खपाना होगा, तपाना होगा। हमें लोककल्याणको ही अपना जीवन मंत्र बनाना होगा। जब संसद के इस नए भवन में अपने दायित्वों का इमानदारी से निर्वहण करेंगे तब देशवासियों को भी इसकी प्रेरणा मिलेगी।'
'गांधीजी ने स्वराज के संकल्प से हर भारतीय को जोड़ दिया था। यह वह दौर था, जब हर भारतीय आजादी के लिए जी-जान से जुट गया था। इसका नतीजा हमने 1947 में भारत की आजादी के तौर पर देखा। आजादी का यह अमृतकाल भी भारत के इतिहास का ऐसा ही पड़ाव है। आज से 25 साल बाद भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। हमारे पास भी 25 वर्ष का कालखंड है। इन 25 वर्षों में हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 'आपको याद होगा 15 अगस्त को मैंने लाल किले से कहा था कि यही समय है, सही समय है। हर देश के इतिहास में ऐसा समय आता है, जब देश की चेतना नए सिरे से जागृत होती है। भारत में आजादी के 25 साल पहले (1947 से पहले) भी ऐसा ही समय आया था। गांधीजी के असहयोग आंदोलन ने पूरे देश को एक विश्वास से भर दिया था।'
'कोई भी एक्सपर्ट अगर पिछले नौ वर्षों का आकलन करे तो पाएगा कि यह नौ वर्ष गरीबों के कल्याण के लिए रहे हैं। मुझे पिछले नौ साल में गरीबों के लिए चार करोड़ घर बनने का संतोष है। हम जब इस भव्य इमारत को देखकर अपना सिर ऊंचा कर रहे हैं, तो हम नौ साल में बने 11 करोड़ शौचालय को देखकर गर्व कर रहे हैं। आज जब हम इस संसद भवन में सुविधाओं की बात कर रहे हैं, तो मुझे गर्व है कि हमने गांवों को जोड़ने के लिए चार लाख किमी से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया। आज जब हम इस ईको फ्रेंडली इमारत को देखकर संतोष कर रहे हैं, तो मुझे गर्व है कि हमने चार साल में अमृत सरोवरों का निर्माण किया। हमने 30000 से ज्यादा पंचायत भवन भी बनाए हैं। यानी पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक हमारी निष्ठा एक ही है। हमारी प्रेरणा एक रही है। देश का विकास, देश के लोगों का विकास।'
'नया संसद भवन नए सुविधाओं से लैस है। आप देख सकते हैं कि इस वक्त भी सूर्य का प्रकाश सीधे आ रहा है। इसमें तकनीक का पूरा ध्यान रखा गया है। आज सुबह ही मैं इस संसद को बनाने वाले श्रमिकों से मिला। इस संसद में करीब 60 हजार श्रमिकों को रोजगार देने का काम किया है। उन्होंने इस नई इमारत के लिए अपना पसीना बहाया है। मुझे खुशी है कि इनके श्रम को समर्पित एक डिजिटल गैलरी भी संसद में बनाई गई है। विश्व में शायद यह पहली बार हुआ होगा। संसद के निर्माण में उनका यह योगदान भी अमर हो गया है।'
'साथियों संसद के पुराने भवन में सभी के लिए अपने कार्यों को पूरा करना इतना मुश्किल हो रहा था, यह हम सभी जानते हैं। तकनीक, बैठने की जगह से जुड़ी चुनौतियां थीं। डेढ़-दो दशकों से चर्चा थी कि हमें नए संसद भवन की जरूरत है। हमें यह भी देखना था कि आने वाले समय में सीटों की संख्या बढ़ेगी, सांसदों की संख्या बढ़ेगी तो वे कहां बैठेंगे। इसलिए यह समय की जरूरत थी कि संसद के नए भवन का निर्माण किया जाए।'
'एक ऐसा समय भी आया, जब हम दूसरे देशों को देखकर मुग्ध होने लगे। लेकिन 21वीं सदी का भारत अब गुलामी की उस सोच को पीछे छोड़ रहा है। आज भारत प्राचीन काल की उस कला के गौरवशाली गाथा को, अपनी ओर मोड़ रहा है और संसद की यह नई इमारत इस जीवंत प्रयास का प्रतीक बनी है। आज नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है। इस भवन में विरासत भी है, वास्तु भी है। इसमें कला भी है, कौशल भी है। इसमें संस्कृति भी है और संविधान के स्वर भी हैं। आप देख रहे हैं कि लोकसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आधारित है। राज्यसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय फूल कमल पर आधारित है। और संसद के प्रांगण में हमारा राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी है। हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों की जो विविधता है, इस नए भवन ने उन सबको समाहित किया है। इसमें राजस्थान से लाए बलवा पत्थर लगाए गए हैं। ये जो लकड़ी का काम है, वह महाराष्ट्र से आई है। यूपी में भदोही के कारीगरों ने अपने हाथ से कालीनों को बुना है। एक तरह से इस भवन के कण-कण में हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के दर्शन हुए हैं।'
प्रधानमंत्री ने कहा 'भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाने वाली इस कार्यस्थली को भी उतना ही नवीन होना चाहिए। आधुनिक होना चाहिए। साथियों एक समय था, जब भारत दुनिया के सबसे समृद्ध और वैभवशाली राज्यों में गिना जाता था। भारत के नगरों, मंदिर वास्तु में भारत की समृद्धि का जिक्र करता था। चोल शासकों द्वारा बनाए मंदिरों से लेकर जलाशयों तक, बाहर से आने वालों को यह मंत्रमुग्ध कर देता था। लेकिन सैकड़ों साल की गुलामी ने हमसे हमारे यह गौरव छीन लिया।'
'जो रुक जाता है, उसका भाग्य भी रुक जाता है, लेकिन जो चलता रहता है, उसका भाग्य भी चलता रहता है। इसलिए चलते रहो, चलते रहो। गुलामी के बाद हमारे देश ने कई उतार-चढ़ाव देखते हुए आजादी के अमृतकाल में प्रवेश किया है। आजादी का यह अमृतकाल असंख्य सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने का अमृतकाल है। इस अमृतकाल का आह्वान है- मुक्त मातृभूमि को नवीन पान चाहिए। नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए।'
'जब भी इस संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी। यह सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र नहीं। बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी भी है। भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक व्यवस्था ही नहीं, एक संस्कार है, एक विचार है, एक परंपरा है। हमारे वेद हमें सभाओं और समितियों के लोकतांत्रिक आदर्श सिखाते हैं। महाभारत जैसे ग्रंथों में गणों जैसे शब्दों का जिक्र मिलता है। तमिलनाडु में मिला 900 ईस्वीं का शिलालेख भी यही सिखाता है। हमारा संविधान ही हमारा संकल्प है। इस संकल्प की सबसे श्रेष्ठ प्रतिनिधि अगर कोई है, तो यह हमारी संसद है और यह संसद देश की जिस समृद्ध संस्कृति का संकल्प करती है, उसका उद्घोष करती है- चरैवेति, चरैवेति।'
प्रधानमंत्री बोले 'आज इस ऐतिहासिक अवसर पर कुछ देर पहले संसद कीइस नई इमारत में पवित्र सेंगोल की भी स्थापना हुई है। महान चोल साम्राज्य में सेंगोल को कर्तव्य पथ का, सेवा पथ का, राष्ट्रपथ का प्रतीक माना जाता था। राजाजी और आदिनम के संतों के मार्गदर्शन में यही सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था। तमिलनाडु से विशेष तौर पर आए हुए आदिनम के संत आज सुबह संसद भवन में हमें आशीर्वाद देने उपस्थित हुए। मैं उन्हें पुनः नमन करता हूं। उनके ही मार्गदर्शन में लोकसभा में यह पवित्र सेंगोल स्थापित हुआ है। बीते दिनों में मीडिया में इससे जुड़ी काफी जानकारी प्रकाशित हुई है। मैं मानता हूं कि यह हमारा सौभाग्य है कि इस पवित्र सेंगोल की गरिमा हम लौटा सकें।'
पीएम ने कहा कि 'यह नया भवन नूतन और पुरातन के सह-अस्तित्व का भी आदर्श है। साथियों नए रास्तों पर चलकर ही नए प्रतिमान गढ़े जाते हैं। आज नया भारत, नए लक्ष्य तय कर रहा है। नए रास्ते गढ़ रहा है। नया जोश है, नई उमंग है। नया सफर है, नई सोच है। दिशा नई है, संकल्प नया है। और आज फिर एक बार पूरा विश्व भारत को भारत के संकल्प की दृढ़ता को, भारतवासियों की प्रखरता को, भारत की जनशक्ति की जीजीविषा को आदर और उम्मीद के भाव से देख रहा है। जब भारत आगे बढ़ता है, तो विश्व आगे बढ़ता है। संसद का नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का भी आह्वान करेगा।'
'नया संसद भवन, 140 करोड़ लोगों की महत्वकांक्षाओं का प्रतीक है'
पीएम मोदी ने कहा कि 'साथियों ये सिर्फ एक भवन नहीं है। यह 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। यह विश्व को भारत के दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। हमारे लोकतंत्र का यह मंदिर है। यह नया संसद भवन योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से, इच्छाशक्ति को क्रियाशक्ति से, संकल्प को सिद्धी से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होगा। यह नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा। यह नया भवन नए भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा। यह भवन विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धी होते हुए देखेगा।'
संसद में अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि 'हर देश की विकास यात्रा में कुछ पल ऐसे आते हैं, जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कुछ तारीखें समय के ललाट पर इतिहास का अमिट हस्ताक्षर बन जाती हैं। आज 28 मई 2023 का यह दिन ऐसा ही शुभ अवसर है। देश आजादी के 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। इस महोत्सव में भारत के लोगों ने अपने लोकतंत्र को संसद के इस नए भवन का उपहार दिया है। आज सुबह ही संसदग भवन परिसर में सर्वपंथ प्रार्थना हुई है। मैं सभी भारतवासियों को भारतीय लोकतंत्र के स्वर्णिम क्षण की बहुत बधाई देता हूं।'
नए संसद भवन के उद्घाटन पर पीएम मोदी ने जारी किया 75 रुपये का स्मारक सिक्का। इस सिक्के का निर्माण कोलकाता की टकसाल में किया गया। यह सिक्का चांदी, तांबे और निकेल से बनकर तैयार हुआ है। पीएम मोदी ने डाक टिकट भी जारी किया।
ओम बिरला ने कहा कि पूरा देश इस क्षण का साक्षी बना है। मैं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के प्रति कृतज्ञ हूं। नया संसद भवन ढाई साल के अल्प समय में बनकर तैयार हो गया। नए भवन में वास्तुशिल्प, कला और शिल्प का अद्भुत उदाहरण है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि पिछले वर्षों में पक्ष-विपक्ष के कई सांसदों ने संसद के नए भवन के निर्माण की मांग की थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों की आग्रह को मानते हुए कुछ ही समय में संसद के नए भवन का निर्माण कराया।
राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश ने नई संसद में अपने पहले संबोधन में कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है। यह बेहद खुशी की बात है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में नई और आधुनिक संसद ढाई साल से भी कम समय में बनकर तैयार हुई है। उप-सभापति ने सदन में उपराष्ट्रपति का संदेश भी पढ़कर सुनाया।
नए संसद भवन के उद्घाटन के दूसरे चरण के तहत पीएम मोदी और लोकसभा सदस्य ओम बिरला संसद भवन पहुंचे हैं। पीएम मोदी के पहुंचने पर सभी सांसदों और गणमान्य नेताओं ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। थोड़ी देर में पीएम मोदी संबोधित करेंगे।
पीएम मोदी ने बताया अविस्मरणीय दिन
संसद के नए भवन के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर आज के दिन को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि 'आज का दिन हम सभी देशवासियों के लिए अविस्मरणीय है। संसद का नया भवन हम सभी को गर्व और उम्मीदों से भर देने वाला है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह दिव्य और भव्य इमारत जन-जन के सशक्तिकरण के साथ ही, राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को नई गति और शक्ति प्रदान करेगी।'
अविनाशी मठ के कामाची दसार स्वामी ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी में सभी सदगुण हैं।
नए संसद के तीन द्वार हैं-गज द्वार, मकर द्वार और हंस द्वार।
गज द्वार से लोकसभा में सीधे प्रवेश कर सकते हैं। इसी रास्ते से पीएम सेंगोल लेकर नए लोकसभा भवन में घुसे।
मकर द्वार पुराने संसद भवन के मुख्य द्वार के ठीक सामने है।
हंस द्वार अभी बंद है और उसका फिनिशिंग का काम जारी है।
नई संसद में तीन दीर्घाएं हैं
संगीत दीर्घा में स्वामी हरिदास, त्यागराजा के चित्र व वाद्य यंत्र, नवरस के भाव, शास्त्रीय नृत्य की
स्थापत्य दीर्घा में वृहदेश्वर मंदिर-तंजौर लेकर ओरोविल-पुड्डुचेरी तक की झलक दिखाई गई है।
शिल्प दीर्घा में पत्थर, धातु, लकड़ी से लेकर कपड़ों की शिल्पकारी की झलक देखने को मिल रही है
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति पद पर आसीन होने वाली पहली आदिवासी द्रौपदी मुर्मू को उनके संवैधानिक कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार सुबह नए संसद भवन का उद्घाटन किया।
आत्ममुग्ध तानाशाह प्रधानमंत्री’ ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया : कांग्रेस
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद के नए भवन का उद्घाटन किए जाने के बाद रविवार को उन पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ऐसे ‘‘आत्ममुग्ध तानाशाह प्रधानमंत्री’’ ने यह उद्घाटन किया है, जिन्हें संसदीय परंपराओं से नफरत है। वहीं एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने संसद के नए भवन के उद्घाटन पर कहा कि बिना विपक्ष के यह अधूरा कार्यक्रम है। इसका मतलब है कि देश में लोकतंत्र नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (28 मई) देश के नए संसद भवन का उद्घाटन किया। पिछले गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निमंत्रण दिया था। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, नए संसद भवन का निर्माण अब पूरा हो गया है। इसी के साथ नए संसद भवन ने पुरानी इमारत का स्थान ले लिया, जिसमें अब कई खामियां आ चुकी हैं। पढ़ें पूरी खबर...
नए संसद भवन में एक भव्य संविधान हॉल बनाया गया है, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही नए संसद भवन में सांसदों के लिए लाउंज, विभिन्न कमेटियों के लिए कमरे, डाइनिंग एरिया और पर्याप्त पार्किंग की जगह की व्यवस्था की गई है। नए संसद भवन का निर्माण क्षेत्रफल 64,500 वर्ग मीटर है। इसके तीन गेट हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार के नाम से जाना जाएगा। वीआई, सांसदों और विजिटर्स के प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था की गई है।
नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। अलग-अलग धर्म के धर्मगुरुओं ने प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद भवन के निर्माण में काम करने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया।
पीएम मोदी ने सेंगोल के साथ संसद के नए भवन में प्रवेश किया। अधीनम मठ के पुजारियों ने संसद के नए भवन में पीएम मोदी को सेंगोल सौंपा। इसके बाद पीएम मोदी ने इसे लोकसभा में स्थापित किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे।
पीएम मोदी पूजन हवन के बाद सेंगोल के सामने दंडवत हुए।
संसद के नए भवन के उद्घाटन के लिए फिलहाल पूजन हवन का कार्यक्रम चल रहा है। मंत्रोच्चार के बीच पीएम मोदी पूरे विधि-विधान से पूजन कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। उनके साथ लोकसभा के सभापति ओम बिरला भी मौजूद हैं।
संसद भवन भारतीयों के लिए स्वाभिमान का प्रतीक
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल बोले आज का दिन देशवासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आज के दिन प्रधानमंत्री मोदी देश को नया संसद भवन सौंपने जा रहे हैं...यह संसद भवन 142 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का प्रतीक है।
कांग्रेस ने की सेंगोल की उपेक्षा
पीएम मोदी ने अधीनम के पुजारी से सेंगोल ग्रहण करने के बाद कांग्रेस पर इसकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, आजादी के बाद इसे उचित सम्मान मिलता तो अच्छा था, पर उसे प्रयागराज के संग्रहालय में टहलने वाली छड़ी के रूप में प्रदर्शित किया गया। आपका सेवक व हमारी सरकार इसे आनंद भवन से बाहर लाई।
अधीनम के पुजारी ने पीएम को सौंपा राजदंड
उद्घाटन से एक दिन पहले मदुरै अधीनम से आए प्रधान पुजारी हरिहर देसिगा स्वामीगल ने प्रधानमंत्री मोदी को राजदंड सेंगोल सौंपा। पीएम ने शनिवार को ट्वीट किया, नया संसद भवन भारत के विकास पथ को लगातार मजबूत करे और लाखों लोगों को सशक्त बनाए। उन्होंने नए भवन को लोकतंत्र का मंदिर बताया।