नागपुर की घटना पर समाजवादी पार्टी विधायक अबू आजमी ने कहा, 'मुझे बहुत दुख है कि नागपुर, जहां सभी लोग सद्भावना के साथ रह रहे थे, जहां पहले कभी सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए, वहां इस बार इतनी बड़ी घटना हुई। कई लोग घायल हुए। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि किसी के भड़कावे में न आएं। मैं सभी से शांति बनाए रखने और देश की तरक्की के लिए काम करने की अपील करता हूं'।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नागपुर हिंसा पर कहा, 'मैं मुख्यमंत्री नहीं हूं, न ही मैं गृह मंत्री हूं, मुख्यमंत्री को पूछिए कि इसके पीछे कौन है? क्योंकि RSS का मुख्यालय वहां है। यहां डबल इंजन सरकार है, अगर डबल इंजन सरकार विफल है तो इन्हें इस्तीफा देना चाहिए।'
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर कहा, 'पूरा देश जानता है कि ओवैसी जैसे लोग खुद को नेता साबित करने के लिए ऐसी हरकतें करते हैं। वे इस तरह के दंगे कराकर अपना नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश करते हैं। इस दंगे के पीछे कौन है, इसकी जांच होनी चाहिए'।
नागपुर हिंसा पर NCP नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, 'नागपुर में जो घटना हुई वो दुखद है, ये सिर्फ अफवाहों की वजह से हुई। नागपुर में ऐसी चीजें कभी नहीं होती हैं, ये बहुत ही शांतिपूर्ण शहर है। कोई इतनी बड़ी घटना नहीं हुई कि विपक्ष इतना शोर मचाए, उन्हें लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करके सरकार का समर्थन करना चाहिए... देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री के तौर पर जो कहा है वह सही बात है और यही हमारी भूमिका है।'
नागपुर घटना पर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा, 'अबू आजमी इसके लिए जिम्मेदार हैं...उन्होंने ही इस मुद्दे को शुरू किया...सरकार को बदनाम करने के लिए यह एक पूर्वनियोजित हिंसा थी...हमारे पुलिसकर्मियों पर हाथ उठाने वालों को हम नहीं छोड़ेंगे...इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी'।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने नागपुर हिंसा पर कहा, 'अगर राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री इस घटना को पूर्व नियोजित कहते हैं, तो यह स्पष्ट है कि यह सरकार और पुलिस की विफलता है। वह खुद नागपुर से हैं, अगर यह घटना वहां हो रही है, तो यह सरकार की विफलता है... वे न तो छत्रपति शिवाजी महाराज को मानते हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य महाराष्ट्र को नष्ट करना है। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री का जवाब हर सवाल का जवाब है...अगर इस सरकार का भ्रष्ट तंत्र लोगों के सामने आ गया तो लोग इन्हें सबक सिखा देंगे... नागपुर में जो घटना हुई उसमें सरकार शामिल है'।
नागपुर हिंसा पर छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर दिलीप स्वामी ने कहा, 'जिले में स्थिति शांतिपूर्ण है। कल बजरंग दल के सदस्यों ने हमें एक याचिका दी। जिले में पुलिस बल अलर्ट पर है। CP और मैं जिले के संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहे हैं। दौलताबाद और खुल्दाबाद के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात है। हमने लोगों से अफवाह न फैलाने का अनुरोध किया है। पुलिस सोशल मीडिया पर नजर रख रही है।'
नागपुर हिंसा पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, 'कल की घटना प्री-प्लान थी, जो दंगाईयां थे वे पूरे शस्त्र के साथ आए हुए थे, हमारे पुलिस को भी जख्मी किया गया। उन्होंने कुछ वाहनों को भी जलाया...ये निश्चित रूप से सब कुछ प्री-प्लान था'।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक दिन पहले नागपुर में हुई हिंसा में घायल हुए पुलिस उपायुक्त निकेतन कदम से बात की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने नागपुर हिंसा पर कहा, 'महाराष्ट्र में काम अच्छा चल रहा है, योजनाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। कुछ लोगों को अच्छा काम पसंद नहीं आ रहा है, वे हिंसा चाहते हैं, कुछ लोग हर दिन धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं। यह एक पूर्व नियोजित साजिश है, सरकार इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है'।
शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि 'मुझे लगता है कि भाजपा महाराष्ट्र को अगला मणिपुर बनाना चाहती है। जब नागपुर में हिंसा भड़की तो सीएमओ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई।'
नागपुर हिंसा पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा 'बीते कुछ हफ्तों में, महाराष्ट्र के सीएम और अन्य मंत्रियों ने जो भी बयान दिए हैं, उन्हें शायद ये भी नहीं पता है कि सीएम और बतौर मंत्री क्या जिम्मेदारी है। एक मुगल बादशाह के पुतले फूंके जा रहे हैं, लेकिन उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो उन्होंने एक कपड़े पर कुरान की आयतें लिखीं और उसे जला दिया। पुलिस को इस बारे में बताया गया, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। इसके बाद हिंसा हुई। यह सरकार और खुफिया विभाग की असफलता है।'
पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंघल ने मंगलवार को बताया कि नागपुर शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और पांच एफआईआर दर्ज की गई हैं। सोमवार शाम को मध्य नागपुर में हिंसा भड़क उठी, जिसमें पुलिस पर पथराव किया गया। यह अफवाह फैली कि मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र (छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित) को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पवित्र पुस्तक को जलाया गया।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने नागपुर हिंसा पर कहा कि 'महाराष्ट्र में औरंगजेब का समर्थन करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि 'नागपुर में जो घटना घटी, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या यह सुनियोजित साजिश थी या नहीं। डीसीपी स्तर के चार अधिकारी हिंसा में घायल हुए। सीएम घटना की समीक्षा कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कई लोग बाहर से आए। पेट्रोल बम फेंके गए। पुलिस पर हमले की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मैं लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।'
महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने नागपुर हिंसा पर कहा कि 'मैं लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करती हूं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने सभी को एकजुट रखा। कुछ लोग हमारे सामाजिक तानेबाने को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।'
नागपुर हिंसा पर राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि 'पुलिस पर हमले को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद अफवाह फैली कि धार्मिक कंटेंट को जलाया गया। ऐसा लगता है कि यह सुनियोजित हिंसा थी, लेकिन किसी को भी कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।'
महाराष्ट्र के नेता विपक्ष अंबादास दानवे ने नागपुर हिंसा का आरोप सीएम देवेंद्र फडणवीस और उनकी सरकार पर लगाया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल राज्य में सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। नागपुर सीएम फडणवीस का गृहनगर भी है और वे नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट से विधायक हैं। दानवे ने एक बयान जारी कर कहा कि मैं साफ तौर पर कह रहा हूं कि नागपुर हिंसा के पीछे महाराष्ट्र सरकार, राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस का हाथ है।
नागपुर में फैली हिंसा के बाद प्रशासन ने कई इलाकों में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। पुलिस के मुताबिक, नागपुर में फिलहाल शांति है, लेकिन तनाव की स्थिति बनी हुई है। कर्फ्यू कोतवाली, गणेशपेठ, तहसील, लकड़गंज, पचपावली, शांतिनगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामवाड़ा, यशोधरानगर और कपिलनगर में लागू है। पुलिस ने आगे की घटनाओं को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए धारा 163 के तहत प्रभावित क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया है।
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने नागपुर हिंसा को लेकर कहा कि 'हिंसा के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चला है। 47 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिंसा में 12-14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हिंसा के पीछे की वजह का पता लगाया जा रहा है और जिसने भी कानून को अपने हाथ में लिया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
भाजपा विधायक (नागपुर मध्य) प्रवीण दटके ने कहा, 'मैं आज सुबह-सुबह यहां पहुंचा हूं। यह पूरी घटना सुनियोजित थी। कल सुबह आंदोलन के बाद गणेश पेठ पुलिस स्टेशन में घटना हुई, फिर सब कुछ सामान्य था। बाद में भीड़ ने केवल हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमले किए। पहले सभी कैमरे तोड़े गए और फिर हिंसा को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। मैंने पुलिस आयुक्त से बात की, यह एक संवेदनशील क्षेत्र है। हमने पुलिस इंस्पेक्टर संजय सिंह को दो घंटे तक फोन किया, लेकिन उनका फोन बंद था। जब पुलिस यहां पहुंची, तो यहां सब कुछ हो चुका था। मैं सीएम से भी बात करूंगा। अपराधियों की तस्वीरें डीवीआर में हैं। हम इसे पुलिस को मुहैया कराएंगे। यह अफसोस की बात है कि कल पुलिस हिंदू नागरिकों के साथ खड़ी नहीं हुई। संजय सिंह जैसे पुलिस अधिकारी नागरिकों की बात नहीं सुनते। भीड़ का एक बड़ा हिस्सा बाहर से आया था।'
हिंसा को लेकर स्थानीय लोगों ने कहा कि सुबह से ही तनाव की स्थिति थी। शाम में पथराव शुरू हो गया। नागपुर के शाही परिवार के सदस्य राजे मुधोजी भोसले ने कहा कि 'नागपुर में ऐसी घटना कभी नहीं हुई। हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना फिर न हो। सुबह जो भी हुआ, उसे गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके चलते हिंसा भड़की। कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं, घरों पर हमले किए गए। मुझे नहीं लगता कि इसमें स्थानीय लोग शामिल थे। इसमें कुछ बाहरी आसामाजिक तत्व शामिल हो सकते हैं।'
नागपुर में फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। जगह जगह पुलिस बल तैनात है। हिंसा में कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं और जगह जगह जले हुए और क्षतिग्रस्त वाहन दिख रहे हैं।
नागपुर के पुलिस आयुक्त ने कई थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया
औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर तनाव के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत नागपुर शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। नागपुर के पुलिस आयुक्त रविंदर कुमार सिंघल के आधिकारिक आदेश के मुताबिक प्रतिबंध अगले आदेश तक लागू रहेंगे। कर्फ्यू कोतवाली, गणेशपेठ, तहसील, लकड़गंज, पचपावली, शांतिनगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामवाड़ा, यशोधरानगर और कपिलनगर में पुलिस स्टेशन की सीमा में लागू रहेंगे।
निषेधाज्ञा संबंधित धाराओं का इस्तेमाल, लोगों के जमा होने पर रोक
पुलिस ने दंगाइयों को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। दंगा प्रभावित क्षेत्रों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी), दंगा नियंत्रण पुलिस व एसआरपीएफ की तैनाती की गई है। दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिंसा की खबरें कोतवाली और गणेशपेठ से भी आईं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की निषेधाज्ञा संबंधित धारा 163 (पहले 144) लागू कर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनात
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। गणेशपेठ थाने में पवित्र पुस्तक जलाने का दावा करते हुए शिकायत दी गई है। सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी। शांति बहाली के लिए धार्मिक नेताओं से अपील की है।
उपद्रवियों का पुलिस पर हमला, डीसीपी गंभीर रूप से घायल
औरंगजेब की कब्र को लेकर महाराष्ट्र में चल रहा विवाद सोमवार को हिंसक हो गया। मध्य नागपुर में एक समुदाय की पवित्र पुस्तक जलाने की अफवाह फैलने के बाद लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। चिटनवीस पार्क से शुक्रवारी तालाब रोड पर दंगाइयों ने चार गाड़ियों में आग लगा दी और दो दर्जन से अधिक गाड़ियों में तोड़फोड़ की। दो पोकलेन मशीनों में भी आग लगा दी गई। स्थानीय निवासियों के घरों पर पथराव किया गया। जवाब में दूसरे समूह की ओर से भी पत्थर फेंके गए। उपद्रवियों की ओर से कुल्हाड़ी से किए हमले में डीसीपी निकेतन कदम भी घायल हुए हैं।
पुलिस ने बल प्रयोग किया और आंसू गैस का भी इस्तेमाल
नागपुर पुलिस के डीसीपी (ट्रैफिक) अर्चित चांडक ने बताया कि घटना गलतफहमी के कारण हुई। स्थिति अब नियंत्रण में है। पत्थरबाजी हो रही थी, इसलिए हमने बल प्रयोग किया और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मेरे पैर में भी चोट आई है।
नागपुर में हिंदू-मुस्लिम झड़प कभी नहीं हुई, कांग्रेस सांसद बोले शांति बनाए रखें
कांग्रेस सांसद श्यामकुमार बर्वे ने हिंसा की निंदा की। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा, नागपुर में हिंदू-मुस्लिम झड़प कभी नहीं हुई। दोनों समुदायों को शांति बनाए रखनी चाहिए। ऐसी घटनाओं के जरिए मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
महाराष्ट्र के नागपुर में हुई हिंसा के मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सोमवार देर रात उपद्रव और आगजनी की घटना का संज्ञान लिया और कहा कि पुलिस हालात पर काबू पाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। बता दें कि महाल इलाके में दो समूहों के बीच पहले से ही हुई झड़प के बाद शहर में तनाव बढ़ गया था।
महाल के बाद हंसपुरी इलाके में हिंसा भड़कने की खबर आई। अज्ञात व्यक्तियों ने पथराव, दुकानों में तोड़फोड़ के अलावा वाहनों में आगजनी भी की। शहर की पुलिस ने उपद्रव की साजिश और अशांति फैलाने के आरोपियों को हिरासत में लिया है। नागपुर पुलिस ने बताया कि 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
धारदार हथियार लेकर आए उपद्रवी
हंसपुरी के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नकाबपोश समूह ने चेहरे स्कार्फ से छिपा रखे थे। उनके हाथों में धारदार हथियार, स्टिकर और बोतलें थीं। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया, दुकानों में तोड़फोड़ की और पथराव किया। उन्होंने 8-10 वाहनों में भी आग लगा दी।
दोषियों को सजा के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
अपराधियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर सिंघल ने आश्वस्त किया है कि हालात नियंत्रण में हैं। पुलिस आयुक्त के मुताबिक एक तस्वीर जलाने के बाद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। हमने उनसे तितर-बितर होने का अनुरोध किया। वे मेरे कार्यालय भी आए। उनकी तरफ से बताए गए नामों के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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1,000 लोगों की भीड़ ने बड़े पैमाने पर पथराव किया, कई पुलिसकर्मी घायल
इससे पहले आई खबरों के मुताबिक नागपुर के महाल क्षेत्र में लगभग 1,000 लोगों की भीड़ ने बड़े पैमाने पर पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की। इस उपद्रव में कई पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, पुलिसकर्मियों पर पथराव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी।
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नागपुर के पीड़ितों ने बयां की आंखों-देखी
उपद्रव और आगजनी को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों में शामिल सुनील पेशने ने बताया कि उनकी कार हिंसा-आगजनी के दौरान आग के हवाले कर दी गई। घटना रात करीब 8.30 बजे हुई। 500-1000 लोगों की भीड़ ने पथराव किया। उपद्रवियों ने हमारी कार के अलावा करीब 25-30 वाहनों में तोड़फोड़ की। एक अन्य स्थानीय निवासी माधुरी पेशने ने कहा, उपद्रवी पत्थर लेकर इधर-उधर भाग रहे थे। उन्होंने हमारे घर पर पत्थर फेंके, यहां तक कि ऊपरी मंजिल पर रहने वाले बच्चों पर भी। उन्होंने हमारे दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं।