07:30 AM, 17-Oct-2026
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने क्या कहा?
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा, ''हर संभव तरीके से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, मानो वे कोई खूंखार अपराधी हों। देश में लंबे समय से ऐसा होता आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ तौर पर उजागर कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है। चाहे दिन हो या शाम, उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात थाने में रखा जाता है और अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत ऐसा किया जा रहा है? किस कानून या आदेश के तहत किसी व्यक्ति को पूरी रात हिरासत में रखना जायज है? कानूनी तौर पर सूर्यास्त के बाद लोगों, खासकर महिलाओं को रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।''
उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, अब अराजकता और अव्यवस्था का एक नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? क्या वह, जो आपने मध्य दिल्ली में पैदा की है? दिल्ली के लोग राहत की सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। वे काम पर जाने के लिए जिस भी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया भारत के लोगों को बख्श दीजिए। ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कीजिए और एसआईआर पर रोक लगाइए, ताकि देश के आम नागरिक राहत की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहें।''
उन्होंने आगे कहा, ''पुलिस ने मुझसे मेरा नाम, पता और अन्य जानकारियां मांगीं। काफी देर तक उन्होंने मुझे बोलने या किसी कानूनी सलाहकार यानी वकील से परामर्श करने तक की अनुमति नहीं दी। हमारे वकील मुझ तक पहुंचने के लिए पांच से छह घंटे तक प्रयास करते रहे। जब हम उनसे फोन पर संपर्क करने में सफल हुए, तभी उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति दी गई। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।''